शब्द विचार की परिभाषा, भेद Etymology – Shabd Vichar in Hindi VYAKARAN

आज के इस आर्टिकल में हम आपको शब्द विचार की परिभाषा, भेद के विषय में बताएँगे Etymology – Shabd Vichar in Hindi VYAKARAN

शब्द की परिभाषा Definition Of word

अक्षरों के मेल से बना वह जोड़ जिसका कोई ना अर्थ जरूर हो, वह शब्द कहलाता है| जैसे :- कब, तुम, आए, थे, यहां, पर इत्यादि| 

दूसरों शब्दों में कहा जाए तो शब्दों को दो या दो से अधिक वर्णों के मेल से बनाया जाता है| जैसे अगर मैं बात करूं शब्द “आम” की|

  • आम = आ+म 

यहां आप देख सकते हैं आ और म, ने मिलकर आम का निर्माण किया| आम का अर्थ होता है एक फल, जिसे खाया जाता है| उसी प्रकार वर्णों के निरर्थक मेल को शब्द नहीं कहा जा सकता है| मेल का अर्थ होना आवश्यक है| 

शब्द विचार की परिभाषा, भेद Etymology – Shabd Vichar in Hindi VYAKARAN

शब्द के भेद Types of words

शब्दों को निम्न चार आधारों पर बांटा गया है| 

  • अर्थ के आधार पर| 
  • प्रयोग के आधार पर| 
  • उत्पति के आधार पर| 
  • व्युत्पत्ति के आधार पर| 

अर्थ के आधार पर शब्दों के भेद 

शब्दों के जो अर्थ निकलते हैं उनके आधार पर शब्दों को वर्गीकृत किया जाता है| मूलतः ऐसे अर्थ के आधार पर शब्दों के दो भेद हैं|

  1. सार्थक शब्द :- वे शब्द या वर्णों के वे मेल जिनका कोई अर्थ होता है, वे सार्थक शब्द कहलाते हैं| गौरतलब है कि ऐसे शब्दों को पद भी कहा जाता है| उदाहरण के तौर पर :- गंगा, कानपुर, ट्रेन, तारीख, मुलाकात, जाना इत्यादि| 
  2. निरर्थक शब्द :- वे शब्द या वर्णों के वह मेल जिसका कोई भी अर्थ न निकले वह निरर्थक शब्द कहलाते हैं| गौरतलब है कि ऐसे मेल शब्द नहीं माने जाते| उदाहरण के तौर पर :- हेओ, मेसा, फिमो, फूक्का, लेको, डाम्मा इत्यादि| 
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प्रयोग के आधार पर शब्दों के भेद 

किसी भी भाषा की सबसे छोटी इकाई शब्द ही होते हैं| इसलिए शब्दों के प्रयोग को सबसे ज्यादा तरजीह दी जाती है| प्रयोग के आधार पर शब्दों के कुल 2 भेद हैं| 

1)विकारी शब्द :- वे शब्द जिनके प्रयोग से, लिंग, वचन, कारक का परिवर्तन आता है वे शब्द विकारी शब्द कहलाते हैं| जैसे :- लड़का, सुंदर, घोड़ा, दिल्ली, नेता इत्यादि| 

विकारी शब्दों के चार उपभेद होते हैं :- 

  1. संज्ञा (Noun) 
  2. सर्वनाम (Pronoun) 
  3. विशेषण (Adjective)
  4. क्रिया (Verb) 

2)अविकारी शब्द :वे शब्द जिनके रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता, ऐसे शब्द अविकारी शब्द कहलाते हैं| जैसे :- तेज, धीरे, वहां, कब इत्यादि| 

अविकारी शब्दों के चार उपभेद होते हैं :- 

  1. क्रिया विशेषण (Adverb) 
  2. संबंध बोधक (Preposition) 
  3. समूचच्य बोधक (Conjunction) 
  4. विस्मयादि बोधक (Interjection)

उत्पति के आधार पर शब्दों के भेद 

शब्दों की उत्पति हमेशा ही अलग अलग स्थानों से होती हैं एवं अलग अलग भाषाओं के शब्द एक भाषा से दूसरी भाषा में पलायन करते रहते हैं| जैसे कि आम हिंदी का शब्द लेकिन यह शब्द संस्कृति के शब्द “आम्र” से लिया गया है| शब्दों की उत्पति के आधार पर शब्दों के चार भेद हैं| 

  1. तत्सम शब्द 
  2. तद्भव शब्द 
  3. देशज शब्द 
  4. विदेशी शब्द 

1)तत्सम शब्द :- तत्सम शब्द उन शब्दों को कहा जाता है जो कि अपने असल रूप में प्रयोग किए जाते हैं| दूसरे शब्दों में कहा जाए तो वे हिंदी भाषा में बिना किसी बदलाव के लिए जाते हैं, या उनमें तनिक बदलाव होते हैं| मूलतः ये शब्द संस्कृत भाषा के होते हैं | जैसे :- मृत्यु, रात्रि, सत्य, ज्येष्ठ, दिवस, अग्नि, अंधकार, तृण, उच्च, धैर्य, कर्ण इत्यादि| 

2)तद्भव शब्द :- तद्भव शब्द संस्कृत से आकर हिंदी में बदल दिए जाते हैं| ये अपने वास्तविक स्वरूप को भी खो देते हैं, जैसे, पुष्प से फूल| जैसे :- 

  • मयूर = मोर 
  • नव = नया 
  • चतुर्थ = चार 
  • वत्स = बच्चा 
  • चत्वारि = चार 
  • मध्य = में 
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तद्भव शब्दों के दो प्रकार होते हैं :- 

  1. संस्कृत से आने वाले :- ये शब्द सीधा संस्कृत से लिए जाते हैं| जैसे :- अग्नि, मयूर इत्यादि| 
  2. प्राकृत :- ये शब्द सीधे प्राकृत तौर पर भाषा में प्रवेश करते हैं| जैसे :- चतारी, वच्छ इत्यादि| 

3)देशज शब्द :- वे शब्द जो देश के अलग अलग हिस्सों में से आए हैं उन शब्दों को देशज शब्द कहा जाता है| ऐसे शब्द स्थानीय बोलियों से उत्पन्न होते हैं और उसके बाद हिंदी में जुड़ जाते हैं| उदाहरण के तौर पर :- अंटा, ठुमकी, फूंगी, ड़ोंगा, ठेठ, खीरकी इत्यादि| 

4)विदेशज शब्द :- वे शब्द जो विदेशी भाषाओं से आकर हिंदी में जुड़ जाते हैं, उन शब्दों को विदेशज शब्द कहते हैं| उदाहरणतः डॉक्टर, गिरफ्तार, गरीब, बेगम, चाय, अलमारी इत्यादि| 

व्युत्पत्ति के आधार पर शब्दों के भेद 

रचना या बनावट के आधार पर शब्दों को व्युत्पत्ति के आधार पर बांटा जाता है| ऐसे शब्दों के तीन भेद होते हैं| 

  1. रूढ़ शब्द 
  2. यौगिक शब्द 
  3. योगरूढ़ शब्द 

1)रूढ़ शब्द :– ये शब्द हमेशा सार्थक होते हैं और केवल एक ही अर्थ को दर्शाते हैं| उदाहरणतः कान, सुन इत्यादि| 

2)यौगिक शब्द :- ये शब्द हमेशा ही किन्ही दो शब्दों के मेल से बने होते हैं| कहने का अर्थ यह है कि ये सार्थक तो होते हैं लेकिन ये सार्थक शब्दों का मेल होते हैं| उदाहरणतः कर्जदार| 

कर्जदार = कर्ज़ + दार 

यहां यह देखा जा सकता है कि कर्ज़ और दार का निजी तौर पर भी अपना एक अर्थ है लेकिन उन्हे मेल करने पर भी एक अर्थ निकलता है| 

ऐसे ही अनेक शब्द हैं :- विद्यालय, दिल्लीवासी, आग बबूला इत्यादि| 

3)योगरूढ़ शब्द :- ये शब्द मेल के बाद पारम्परिक हो जाते हैं| आसान शब्दों में समझा जाए तो ऐसे शब्दों को पारम्परिक तौर पर प्रयोग किया जाता है| जैसे नीरज| नीरज का निर्माण नीर+ज़ के साथ हुआ है| ये शब्द दो शब्दों के मेल से बना है| लेकिन इसमें से एक कोई अर्थ नहीं है| उसी प्रकार अलग अलग शब्द जो इस प्रकार बनाए जाते हैं, उन्हे योगरूढ़ शब्द कहा जाता है| 

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उदाहरण के तौर पर :- 

  • गजानन = गज + आनन 
  • दशानन = दस + आनन 
  • पंकज = पंक + ज़ 
  • जलज = जल + ज़ 
  • नीरज = नीर + ज़ 

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