रोकथाम इलाज से बेहतर है Prevention is Better than Cure in Hindi

रोकथाम इलाज से बेहतर है Prevention is Better than Cure in Hindi

रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर है। अगर हम जानते हैं कि समय बीतने के साथ कोई चीज खतरनाक हो सकती है तो खतरे से निपटने के लिए एहतियाती कदम उठाना बेहतर होगा।

अपनी सेहत को बनाए रखना एक ऐसी आदत है जो व्यक्ति को अपने बचपन से ही ले लेनी चाहिए । “रोकथाम इलाज से बेहतर है” वाली कहावत को हमें अपने जीवन के प्रत्येक चरण में याद रखनी चाहिए।

“रोकथाम” का अर्थ होता है, निवारण और “इलाज” का अर्थ उन चीज़ों को सही करने के लिए होता है जो परेशानी या हानिकारक हो जैसे सही भोजन, नियमित व्यायाम, बुरी आदतों से दूर रहना यह ऐसे नियम है जिसका पालन मनुष्य को अपने पूरे जीवन काल में करना चाहिए । इसके अलावा इन दिनों के प्रदूषण भरे वातावरण में व्यक्ति को अपना डॉक्टरी जांच कराना भी एक अच्छी आदत हैं।

रोकथाम इलाज से बेहतर है Prevention is Better than Cure in Hindi

यदि आप एक विद्यार्थी हैं तो आपको प्रतिदिन अध्ययन करना चाहिए अगर आप सिर्फ परीक्षा के दौरान ही अध्ययन करेंगे तो आमतौर पर आपको बहुत सारे भ्रम पैदा होंगे और ये गलत आदत भी है।  

आपने अगर प्रारंभिक दिनों में अध्ययन की उपेक्षा की हैं तो आपको परीक्षा के दौरान अधिक परिश्रम करना पड़ेगा और आपकी सफलता खतरे में पड़ सकती हैं। यदि आप उचित तरीके से अध्ययन करते हैं। तो आपको अपने सफलता के साथ जुआ खेलने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी और आप सफल अवश्य होंगे।

उसी प्रकार यदि आपको किसी बीमारी के निश्चित लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और जाँच कराकर उचित उपचार शुरू कराना चाहिए। कैंसर जैसी बीमारियों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां रोगियों ने अपने स्वास्थ्य को गंभीरता से नहीं लिया हैं

बाद में उन्हें पता चला है कि वह किसी खतरनाक बीमारी के शिकार हो गए हैं और उनके बचने की उम्मीद बहुत कम है । यदि समय रहते वे डॉक्टर के पास गए होते तो उन्हें अपनी बीमारी से निदान मिल गया सकता था।

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कई बीमारियों में शीघ्र पता चलने से उसको ठीक करने के निकालने में सहायता मिलती है। यह सोचते हुए कि बीमारी स्वतः ही ठीक हो जाएगी या डाक्टर से परहेज करने से समस्या की उत्तेजना हो सकती है और व्यय बढ़ सकता है या आपके जीवन को खतरे में डाल सकता है जो हमें मृत्यु के नजदीक लेकर जा सकती है।

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हम स्वस्थ आहार का चयन करके एहतियाती उपाय कर सकते हैं और नियमित रूप से व्यायाम करने के लिए एक बिंदु बना सकते हैं। नियमित व्यायाम और अच्छे पौष्टिक भोजन से हमें रोग होने की संभावना कम हो जाएगी और हमारे हृदय, मन और शरीर पर भी बेहतर परिणाम होगा और हम स्वस्थ रहेंगे ।

पोलियो एक वायरल संक्रमण है जिसका निशाना होता है हमारा तंत्रिका तंत्र का वह हिस्सा, जो हमारी विभिन्न मांसपेशियों को नियंत्रित करता है , जिससे हमारे लगभग कई कार्य होते हैं यानी मोटर न्यूरान्स, एंटीरियर हॉर्न सेल और मस्तिष्क में स्थित दिमाग के मोटर एरिया।

इसकी वजह से बच्चे या बड़े भी आजीवन लकवे के शिकार हो सकते हैं। इसी को आम भाषा में पोलियो कहा जाता है। पोलियो वायरस किसी भी व्यक्ति पर किसी भी उम्र में हमला कर सकता है परंतु बच्चों में इसकी आशंका अधिक होती है।

पिछले दस वर्षों से स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत ने नई उन्नति हासिल की है हमारे देश के हर कोने में ऐसी व्यवस्था तैयार की गई है जिससे आज हर पांच साल से छोटे उम्र के बच्चे को पोलियो की हर खुराक समय पर मिलती है। इस प्रकार हमने देश से पोलियो जैसी खतरनाक बीमारी को समाप्त कर दिखाया।

हमने अच्छी क्वॉलिटी की ऐसी दवाएं बनाने में महारत हासिल की है, जो पूरी दुनिया में निर्यात होती हैं। दुनिया भर में सप्लाई होने वाली जेनरिक दवाओं में से लगभग 20 फीसदी अभी भारत में ही बनती हैं। लेकिन हम और भी बेहतर कर सकते हैं स्वास्थ्य पर आम लोगों के द्वारा होने खर्च को कम कर सकते हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों से विचार विमर्श करके एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति तैयार की गई इसका मकसद है “स्वास्थ्य ढांचे को समग्र रूप से बेहतर बनाना”।इस नीति में स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न संगठनों को सुदृढ़ करने, रोगों से बचाव और बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने जैसे पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया हैं।

इसके लिए तकनीक की उपलब्धता सुनिश्चित करने, मानव संसाधन का विकास करने, विभिन्न चिकित्सा व्यवस्थाओं का विकल्प उपलब्ध करवाने और बेहतर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मुहैया कराने के साथ ही वित्तीय सुरक्षा और कानून का भी सहारा लिया गया है।

इस लिहाज से पिछड़े और वंचित तबके पर खास तौर से ध्यान दिया गया है। हमारी पहली प्राथमिकता में रोगों की रोकथाम, बेहतर स्वास्थ्य को प्रोत्साहन और सभी को गुणवत्तापूर्ण व्यापक प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है। इस लिहाज से बीमारी के इलाज की बजाय अब बीमारी की रोकथाम पर जोर दिया जा रहा है इसीलिए कहा गया है “इलाज से बेहतर रोकथाम है”।

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