होली पर निबंध Essay on Holi In Hindi

भारत को दुनिया के अन्य देशों से अलग और अनोखी बनाने वाली चीजें यहां मौजूद त्यौहार, भाईचारा और अध्यात्म है। शायद ही अन्य कोई ऐसा देश होगा जहां हर महीने में कोई न कोई त्यौहार आता ही रहता हो।

होली पर निबंध Essay on Holi In Hindi  

भारत दुनिया में इकलौता ऐसा देश है, जहां सभी धर्म के लोग एक साथ भाईचारा बनाकर रहते हैं। सभी धर्म और संप्रदाय के त्यौहारों को पूरे भारत में मनाया जाता है, जो भाईचारे की मिसाल पेश करता है।

होली एक ऐसा प्रसिद्ध त्यौहार है, जिसे केवल हिंदू ही नहीं बल्कि सभी धर्म के लोग बड़े ही प्रेम और उल्लास से मनाते हैं। 

केवल हिंदुस्तान में ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी होली का उत्सव मनाया जाता है। हर किसी को होली का त्यौहार बहुत ही प्रिय लगता है, चाहे वह छोटा बालक हो या फिर वृद्ध। 

होली त्यौहार हिंदुओं के लिए एक मुख्य त्यौहार होता है। हिंदुस्तान में प्रत्येक त्यौहारों के पीछे कोई ना कोई पुरानी घटना अथवा कथा अवश्य जुड़ी होती है, जो समस्त मानव जाति को एक सकारात्मक संदेश देती है। 

इस पवित्र दिन में पूरा भारत रंग बिरंगे रंगों से झूम उठता है। सभी लोग अपने पुराने गिले-शिकवे को छोड़कर एक साथ मिलकर होली मनाते हैं। 

होली त्यौहार क्या है? What is Holi festival in Hindi

होली का त्यौहार वसंत के महीने में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष फागुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। 

होली हर्षोल्लास और भाईचारे का संदेश देने वाला त्यौहार है। यह मुख्य रूप से हिंदुस्तान में मनाया जाता है लेकिन दूसरे देशों में जहां हिंदू जनसंख्या निवास करती है वहां होली का यह पवित्र त्यौहार मनाया जाता है।

कहा जाता है कि इस दिन पुराने दुश्मन भी एक दूसरे की गलतियों को भूलाकर पुनः मित्र बन जाते हैं। रंग-बिरंगे गुलाल तथा रंगो के साथ होली खेली जाती है। होली का त्यौहार अत्यंत प्राचीन है। 

जब दुनिया में ईसाई और अन्य धर्मों की खोज नहीं हुई थी तभी से यह त्यौहार मनाया जाता है, जिसका उल्लेख इतिहास में साफ-साफ देखा जा सकता है। कई इतिहासकार बताते हैं, कि प्राचीन समय में राजा महाराजा होली के पावन पर्व पर बड़े ही भव्य रुप से होली का आनंद उठाते थे।

इस दिन सभी लोग अपना शर्म और झिझक पीछे छोड़कर एक साथ मिलकर होली खेलते है। जब सारा गली मोहल्ला एक साथ मिलकर होली खेलते हैं तो यह नजारा वाकई में देखने लायक होता है। 

आमतौर पर वसंत ऋतु एक बेहद खूबसूरत ऋतु माना जाता है, जिसमें कई प्राकृतिक बदलाव होते हैं। इस महीने में खेतों में फसलें भी काफी अच्छी तादाद में उगती है जिससे किसानों को काफी लाभ होता है। 

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इस प्रकार किसान भाई बहनों को होली के त्यौहार के आनंद के साथ ही फसलों का अच्छा मुनाफा भी प्राप्त हो जाता है।

होली कब है? (2022) When is Holi? (2022) in Hindi

होली का त्यौहार हर वर्ष हिंदू शास्त्र के अनुसार मनाया जाता है। स्नेह और एकता का प्रतीक माना जाने वाला यह त्यौहार पुराणों और शास्त्रों के अनुसार तय किया जाता है। 

पंचांग के अनुसार होली का पर्व हर वर्ष फागुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यदि 2022 में होली पर्व के तिथि की बात करें तो यह तिथि 18 मार्च शुक्रवार के दिन पड़ रहा है।

होली शब्द होलिका से बना हुआ है। इसी कारण होली के मुख्य त्यौहार के एक दिन पहले होलिका दहन मनाया जाता है। होलिका दहन 17 मार्च के दिन पड़ा है। 

हिंदू धर्म के मान्यताओं के अनुसार सभी पौराणिक त्यौहारों को एक निश्चित समय अथवा मुहूर्त पर मनाया जाना अनिवार्य होता है।

होली का महत्व Importance of holi in Hindi

भारत में मनाए जाने वाले प्रत्येक प्राचीन त्यौहारों और उत्सवों के पीछे कोई न कोई गूढ़ रहस्य अवश्य छुपा होता है। होली का उत्सव बुराई पर अच्छा के जीत को दर्शाता है। 

यह त्यौहार समस्त मानव जाति को यह बताता है कि सत्य कभी पराजित नहीं हो सकता। होली से जुड़े हुए प्राचीन कहानियां अथवा कथाओं के माध्यम से लोगों को सत्य के पथ पर चलते रहने का एक उत्कृष्ट संदेश लोगों को प्राप्त होता है।

आज के समय में लोग जिस प्रकार अपने व्यस्त दिनचर्या में लुप्त हैं, इससे तो कभी भी भाईचारा और एकता का विकास नहीं हो सकता। ऐसे में केवल होली जैसे यह त्यौहारों के कारण ही लोग अपने काम से थोड़ा समय निकाल कर इकट्ठे होकर जीवन का वास्तविक आनंद उठाते है। 

होली के कारण लोग अपने परेशानियों को भूल कर त्यौहार का पूरा लाभ लेते हैं। विज्ञान के अनुसार यदि मानसिक तनाव और बीमारियों से जूझ रहा कोई व्यक्ति इकट्ठे होकर मौज मस्ती करता है, तो उसकी बीमारियां तीव्रता से ठीक होती हैं। यह बात तो स्पष्ट है कि होली का त्यौहार व्यस्त लोगों के मानसिक तनाव को भी दूर करता है।

यदि प्राचीन धरोहरों और कलाकृतियों पर नजर डाली जाए, तो कई ऐसे साक्ष्य है जो प्राचीन समय में भी होली का त्यौहार मनाने के सबूत पेश करते हैं। कई प्राचीन मंदिर, तोरण इत्यादि धरोहर के शिलाओं पर ऐसी चित्रकारिता देखी गई है, जो होली के महत्व को दर्शाती है।

वैसे तो होली का त्यौहार हर किसी के लिए बेहद हर्ष तथा उल्लास का पर्व होता है, लेकिन यदि बच्चों की बात की जाए तो वे होली पर कुछ ज्यादा ही उत्साहित रहते हैं। 

होली के कई दिनों पहले ही बच्चे रंगो और पिचकारियों को खरीदना शुरू कर देते हैं। इस प्रकार यह पता चलता है की बड़ों से लेकर बच्चों तक हर कोई होली के इस पवित्र त्यौहार का महत्व भली भांति जानता है।

होली कैसे मनाते हैं? How do Holi celebrated in Hindi?

होली का पवित्र पर्व अपने साथ खुशियां और मनोरंजन साथ लाता है। जब यह त्यौहार आने वाला होता है तो  करीब कई हफ्तों पहले से ही बाजारों में होली खेलने के लिए रंग बिरंगे कलर, सजावट के सामान, गुलाल पिचकारी इत्यादि खिलौने मिलने शुरू हो जाते है। 

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कई दिनों पहले से ही स्थानीय लोग त्यौहार की खुशी में अपने घरों और दुकानों को साफ-सुथरा करने और सजाने में जुट जाते हैं। घरों में तरह-तरह के पकवान तथा मिठाइयां बनाई जाती है। भारत में विशेषकर गुजिया जो एक प्रकार की मिठाई ही होती है जो होली में बहुत प्रसिद्ध है।

होली के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन में सभी लोग इकट्ठा होते हैं और अपने बुराइयों को त्यागने का संकल्प लेते हैं। होलिका दहन के पूजा पाठ के बाद लोगों में प्रसाद भी वितरण किया जाता है।

हर किसी को अगले दिन का इंतजार होता है, जब लोग घरों से बाहर निकलकर होली का मजा उठाते हैं। तेज आवाज में गीत की ताल पर लोग गुलाल उड़ाते हुए नाच गाना करते हैं। 

बच्चे अपने पिचकारीओं से भरे खिलौनों से सभी लोगों पर ‘होली है!’ कहकर रंग उड़ाते है। बड़े लोग भी होली खेलने में पीछे नहीं हटते हैं। बुरा न मानो होली है कह कर एक दूसरे पर पानी की रंग-बिरंगे बौछारें करते हुए होली का मजा उठाते हैं।

आमतौर पर भारत के सभी राज्यों में एक प्रकार की होली नहीं मनाई जाती। सभी जगहों पर विभिन्न तरीकों से होली मनाने का रिवाज पुराने समय से चलता आया है।

व्रज और मथुरा की होली पूरे देश में सभी का आकर्षण बिंदु रहता है। इसके अलावा महाराष्ट्र, गोवा, बंगाल और असम इत्यादि राज्यों में भी बहुत ही अनोखे प्रकार से होली खेली जाती है।

मथुरा और वृन्दावन में होली Holi in Mathura and Vrindavan in Hindi

ऐसे तो होली पूरे हिंदुस्तान में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन वृंदावन तथा मथुरा में होली मनाने का रिवाज बड़ा ही अद्भुत है। यहां एक या दो नहीं बल्कि पूरे 15 दिनों तक होली मनाई जाती है।

पारंपरिक संगीत और तैयारियों के साथ कई दिनो पूर्व ही होली मनाने का कार्यक्रम शुरू हो जाता है। देश विदेश से होली पर मथुरा और वृंदावन में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में होती है। 

भगवान श्री कृष्ण के धाम में हर कोई नई ऊर्जा तथा आशाएं लेकर यहां आते हैं। ढोल नगाड़े के संग सभी भक्त जन अपने सारे दुखों को भुलाकर केवल होली का आनंद लेते हैं।

होली के उत्सव पर केवल भारतीय ही नहीं बल्कि विदेशी भी आते हैं, जिनके स्वागत में सुंदर-सुंदर रंगोलियां बनाई जाती हैं। 

यहां मंदिरों को बहुत भव्य रूप से सजाया जाता है। होली के दिन अक्सर भांग पीने की परंपरा है। गुलाल- अबीर, संगीत, पकवान, हंसी और ठहाकों से पूरे वृंदावन और मथुरा में देखने लायक नजारा होता है।

दूसरे देशों में होली का उत्सव Holi celebration in other countries in Hindi

होली का त्यौहार का उद्गम भले ही भारत में हुआ हो, लेकिन इसे दुनिया के विभिन्न देशों में ठीक उसी प्रकार मनाया जाता है, जिस प्रकार भारतवासी मनाते हैं।

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दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय बसे हुए हैं जिसके कारण अलग-अलग देशों में भी इन त्यौहारों को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। नेपाल, अमेरिका, स्पेन, कैरेबियाई देशों इत्यादि देशों में भी होली एक बड़ा पर्व है।

होली का त्यौहार फागुन मास में मनाए जाने की वजह से यह फगुआ के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा विदेशों में छोटे बड़े शिक्षा संस्थानों में होली के कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

हमारे पड़ोसी मुल्क नेपाल में एक बड़ी हिंदू आबादी निवास करती है, जिसके कारण हिंदुओं के त्यौहार वहां बहुत प्रचलित है। नेपाल की राजधानी काठमांडू में प्राचीन दरबार तथा नारायणहिती दरबार में एक बांस का स्तंभ रूप जमीन में गाड़ दिया जाता है, जिसके पश्चात पारंपरिक रूप से होली मनाने की शुरुआत होती।

होली का इतिहास व कहानी History and story of Holi in Hindi

होली का इतिहास बेहद प्राचीन है। इस त्यौहार को मनाने के पीछे कई प्राचीन धारणाएं और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। वैसे तो होली मनाने के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण इतिहासकार मानते हैं किंतु सबसे प्रख्यात कथा भक्त प्रहलाद से जुड़ी हुई है।

पुराणों के अनुसार प्राचीन समय में हिरण्यकशिपु नामक एक असुर हुआ करता था। जो अपने आप को सर्वश्रेष्ठ बताता था। हिरण्यकशिपु को यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था, कि कोई उसके राज्य में उसे छोड़कर किसी दूसरे ईश्वर की पूजा करें। 

वह राक्षस स्वयं को ही परमेश्वर कहता था तथा सभी को उसकी पूजा करने के लिए बाध्य करता था। यदि कोई उसकी बात नहीं मानता तो वह उसे मौत के घाट उतार देता था। 

दरअसल हिरण्यकशिपु को यह वरदान प्राप्त था, कि कोई भी नर, नारी, किन्नर, पशु इत्यादि जीव नाही पाताल लोक, धरती लोक तथा स्वर्ग लोक में उसे किसी भी हथियार से नही मार सकता है। जिसके कारण उसे और भी अधिक घमंड हो गया था।

लेकिन हिरण्यकशिपु का ही पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु कि हमेशा आराधना करता रहता था। हिरण्यकशिपु को जब यह बात पता लगी कि स्वयं उसका पुत्र ही उसे ईश्वर मानने से इन्कार करता है, तो उसे बहुत क्रोध आया। 

जब वह भक्त प्रहलाद के मन में विष्णु जी के प्रति विष नहीं घोल पाया तो उसने भक्त प्रहलाद को मार डालने का निश्चय किया।

हिरण्यकशिपु ने भक्त प्रहलाद को मारने की सैकड़ों बार कोशिश की लेकिन वह प्रहलाद को एक खरोच भी नहीं पहुंचा पाया। भगवान विष्णु का आशीर्वाद होने के कारण भक्त प्रहलाद हर बार अपने पिता के जाल से निकल जाता था। 

अंत में हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका से मदद मांगी, जिसे अग्नि में ना जलने का वरदान प्राप्त था। जब होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि पर बैठी तो उसका वरदान भी काम नहीं किया और वह जलकर राख हो गई। इस असत्य पर सत्य की जीत के कारण तभी से ही होली का त्यौहार मनाया जाता है।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने होली पर निबंध (Essay on Holi In Hindi) पढ़ा। आशा है कि यह लेख आपको अच्छा लगा होगा। अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया हो और जानकारी से भरपूर लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें।

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