तेनालीराम की 3 कहानियां Tenali Raman Short Stories Hindi for Kids PDF

तेनालीराम की कहानियां / तेनाली रमन की चतुराई की कहानियां Tenali Raman Short Stories Hindi Kids PDF

Tenali Raman/ Tenali Ramakrishnan को एक विकट कवी और तेनालीराम के नाम से जाना जाता है। तेनाली को दक्षिण भारतीय लोक नायक के रूप में माना जाता है। तेनाली 16वीं सदी में विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में कवी और विदूषक थे। वो बहुत ही बुद्धिमान थे और अपनी चतुराई से अपने राज्य की कई मुश्किलों को दूर भी करते थे।

लोग तेनालीराम / तेनाली रमन की तुलना राजा अकबर के सलाहकार बीरबल से की जाती है जिनकी चतुराई और बुद्धिमानी की कहानियां हम पढ़ते ही रहते हैं। आप चाहें तो अकबर बीरबल की कहानियाँ भी हमारे वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं।

आज हम आपको तेनाली राम की मशहूर चतुराई से भरे कुछ ज़बरदस्त छोटी कहानियाँ बताएँगे जो आपको ज़रूर पसंद आएंगे।

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तेनालीराम की कहानियां / तेनाली रमन की चतुराई की कहानियां Tenali Raman Short Stories Hindi PDF

कहानी 1 – तेनालीराम ने चोरों को पकड़ा Caught the Thieves (Clever Tenali Raman Short Story in Hindi)

एक बार की बात है विजयनगर राज्य में बहुत चोरी होने लगी। लोगों के घर से दिन दहाड़े कीमती सामान गायब होने लगे। लोग इस बात से बहुत डर गए और परेशान हो कर राजा कृष्णदेव राय के दरबार में पहुंचे।

यह जान कर राजा को बहुत घुस्सा आया और तुरंत अपने सैनिकों को चोरों को पकड़ने का आदेश दिया। जगह-जगह राज्य में सैनिकों को तैनात किया गया पर तब भी चोर चोरी करने में कामियाब होने लगे।

तब राजा ने अपने चतुर विदूषक तेनालीराम को इस मुश्किल का हल निकालने के लिए कहा और साथ ही राजा ने सैनिकों की एक टुकड़ी भी तेनाली के साथ भेजने के लिए आदेश दिया। पर तेनाली ने राजा से कहा की उन्हें किसी भी सेना की आवश्यकता नहीं है और वह स्वयं ही चोरों को एक हफ्ते के अन्दर पकड़ लेगा।

तेनालीराम की बात सुनकर दरबार के अन्य लोग हंसने लगे और सोचने लगे जिन चोरों को राज्य की सेना मिलकर नहीं पकड़ पा रहे हैं उसे तेनाली अकेले कैसे पकड़ेगा।

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अगले दिन सुबह राज्य के कुछ लोग बात कर रहे थे की राज्य के सबसे बड़े सेठ लक्ष्मी चंद को एक नया मंत्र पता चला है जिसके मुताबिक तिज़ोरी खोल कर सोने से भी कोई चोर चोरी नहीं कर सकता। यह बात जब चोरों के कान में लगी तो वो खुश हुए।

उसी रात वो चोर सेठ लक्ष्मी चंद के घर पहुंचे। उन्होंने देखा की तिजोरी खुला हुआ है तो वो बहुत खुश हुए और उन्होंने अँधेरे में चुपके से सभी पैसे और कीमती सामन को चोरी कर लिया।

अगले दिन सुबह दरबार में जब यह बात पहुंची तो राजा सेठ पर क्रोधित हुए और बोले जब तुम जानते ही थे की राज्य में चोरी हो रही है तो तुम्हें तिज़ोरी खुला रखने की आवश्यकता क्या था? तभी सभा में तेनालीराम पहुंचे उनके पीछे दो लोगों को बांध कर रखा गया था। राजा ने पुछा ये कौन हैं? तब तेनाली ने बताया ये वो चोर हैं जो कुछ दिनों से राज्य में चोरी कर रहे हैं।

राजा ने तेनालीराम से पुछा कि तुमने ऐसा कैसे किया? तब तेनाली ने बताया – कल मैंने ही सेठ लक्ष्मी चंद को तिजोरी खुला रखने के लिए कहा था और पुरे राज्य में अपने कुछ लोगों के द्वारा इस बात को फैला दिया। सेठ के कमरे में मैंने सभी जगह जमीन पर काला रंग बिछा दिया था।

रात को जब चोर चोरी करने के लिए गए तो काला रंग उनके पैरों में लग गया। जब पैरों के निशान की मदद से हमने उनका पीछा किया तो पता चला कि उन चोरों से हमारे राज्य के पुराने मंत्री चोरी करवा रहे थे। इस प्रकार हमने चोरों को और उस पुराने मंत्री को पकड़ लिया।

राजा बहुत खुश हुए और उन्होंने तेनालीराम का धन्यवाद किया और इनाम भी दिया।

कहानी 2 – राजा की चिंता – बुढा राजदरबारी ने राज्य छोड़ा Worried King – Old Courtier Left the State (Tenali Raman Educational Story for Kids in Hindi)

एक बार की बार है दरबार में राजा कृष्णदेव राय और मंत्रीगण बैठे हुए थे। तभी एक बूढ़े राज दरबारी देव परियां ने राजा से कहा की अब वह बहुत बुध हो चूका है और वह अब अपने गाँव जाकर अपना आखरी समय अपने परिवार के साथ बिताना चाहता हूँ। राजा ने उस बूढ़े दरबारी को मना करते हुए कहा कि – आप रुक जाईये हमें आपकी सलाह की बहुत आवश्यकता है।

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परन्तु वह दरबारी अत्यंत कमज़ोर और बुढा हो चूका था इसलिए राजा कृष्ण देव राय उसे मना ना कर सके और दरबार के कार्यों से मुक्त कर दिया और उसे सम्मान के साथ उन्हें भेजा।

उस दरबारी के जाने के बाद राजा को बहुत दुख हुआ क्योंकि राजा उनका बहुत आदर करते थे और वह उनके मुख्य सलाहकारों में से एक थे। राजा बहुत दुखी हुए और उन्होंने अपने राज्य के कार्यों पर भी ध्यान देना छोड़ दिया।

तेनालीराम उनके राजा के इस बदलाव को समझ गए और उन्होंने इसका हल निकालने का एक तरकीब सोचा। अगले दिन से तेनाली दरबार में नहीं गए। ऐसा करते करते एक हफ्ता हो गया तेनाली फिर भी दरबार नहीं आये। जब राजा ने अपने सैनिक को तेनाली के घर भेजा तो वहां भी ताला लगा हुआ था।

सैनिक जब दरबार लौटे तो उन्होंने राजा को बताया की उनके घर में तो ताला लगा है और लगता है तेनालीराम हमारा राज्य छोड़ कर चले गए। तभी दरबार में बैठे एक सलाहकार ने राजा से कहा – हे महाराज आप मन को शांत करने के लिए क्यों ना राज्य का दौरा कर आयें? यह बात राजा को पसंद आई और राजा राज्य का सैर करने निकले।

राज्य का सैर करते-करते राजा नदी किनारे पहुंचे वहां वो नदी के सुन्दर नीले रंग के पानी को देखकर मुग्ध हो गए और राजा ने देखा की वहां एक साधू बैठा हुआ है। घूमने के बाद राजा अपने महल में लौट आते हैं।

अगले दिन राजा फिर से नदी किनारे जाते हैं वहां वो दोबारा नदी के पानी को देख कर उसकी सुन्दरता का वर्णन करने लगते हैं। तभी वह साधू राजा की बात सुन कर हसने लगता है।

राजा को समझ नहीं आता की साधू क्यों हंस रहा है और वह साधू से हंसने का कारण पूछते हैं। तब वह साधू राजा को बताते हैं कि कल जो पानी आपने देखा था वह अब बह चूका है और नया पानी बह कर आ चूका है।

इसी प्रकार हमारे जीवन में लोगों का आना और जाना भी लगा रहता है इसलिए उनके जाने से हमें नहीं रूकना चाहिए। आप अपने बूढ़े दरबारी के जाने पर इतने दुखित क्यों हैं?

राजा ने उत्तर दिया – परन्तु तेनालीराम जो जवान है और जिसे मैं बहुत पसंद करता हूँ वो मुझे क्यों छोड़ कर चले गए। क्या आप अपनी शक्ति से बता सकते हैं अभी तेनाली कहाँ हैं?

साधू ने उत्तर दिया – मैं जरूर इसी वक्त आपके सामने तेनालीराम को ला सकता हूँ पर उसके लिए आपको एक वचन देना होगा कि आप इस राज्य को बिना किसी चिंता के चलायें और खुश रहें। ऐसा कह कर उस साधू ने अपना असली रूप दिखाया। वह तेनालीराम था जिसने साधू का रूप धारण किया था।

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राजा कृष्णदेव राय बहुत खुश हुए और उन्होंने तेनाली को गले से लगा लिया।

कहानी 3 – इमानदार तेनालीराम की कहानी Honest Tenali Rama Story for Childrens in Hindi

तेनाली रामन अपने दिमाग के बल पर बार-बार अपने राज्य के लोगों की मदद करते थे। दरबार के ज्यादातर लोग तेनालीराम के शौहरत से जलते थे और हमेशा राजा को तेनाली के खिलाफ भड़काते रहते थे। वैसे तो राजा तेनाली पर पूरा विश्वास करते थे पर बहुत दिन तक बार-बार तेनाली के खिलाफ भड़काने के कारण राजा को भी कुछ शक सा हो गया।

अगले दिन जब सुबह दरबार का कार्य शुरू हुआ तो राजा ने तेनालीराम से कहा – तेनालीराम मैं तुम्हरी बहुत शिकायत सुन रहा हूँ कि तुम राज्य के लोगों को ठग रहे हो और उनसे पैसे लूट रहे हो।

तेनालीराम ने राजा को उत्तर देते हुए पुछा – क्या आपको उनके इस बात पर विश्वास है। राजा ने उत्तर दिया – हाँ, अगर तुम बेगुनाह हो तो साबित करो। तेनाली को यह सुन कर बहुत दुख हुआ और वह बिना कुछ कहे ही वहां से निकल गया।

अगले दिन एक सैनिक राजा के लिए एक पत्र लेकर आया। वह पत्र तेनाली का था जिसमें लिखा हुआ था – प्रणाम महाराज, मैंने कई वर्षों तक इमानदारी से आपके राज्य में काम किया है पर आज मुझ पर झूठा आरोप लगाया गया है और मेरी बेगुनाही साबित करने का एक ही रास्ता था मैं अपनी जान ले लूं।

राजा यह जान कर चिंतित हो गए और चिल्लाने लगे वापस आ जाओ तेनाली यह साबित करने का सही तरिका नहीं है। तभी दरबार में बैठे एक के बाद एक मंत्री और लोग तेनाली की तारीफ करने लगे और उसके कार्यों का गुण गाने लगे। तेनाली वहीँ भेस बदलकर चुप कर सब कुछ देख रहा था। तभी तेनाली अपने असली भेस में आगे आये।

तेनाली को देख कर राजा खुश हुए। तब तेनाली ने राजा से कहा – हे महाराज इस दरबार में बैठे सभी लोगों ने मेरे विषय में अच्छा ही कहा, क्या इससे कोई अच्छा रास्ता है यह बताने के लिए कि मैं इमानदार हूँ। राजा ने तेनाली से क्षमा माँगा और अपना गलती माना।

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