बच्चों पर निबंध Essay on Children’s in Hindi

बच्चों पर निबंध Essay on Children’s in Hindi

बच्चे किसे पसंद नही होते। बच्चे न सिर्फ हमारा बल्कि देश का भविष्य भी होते है। वो ही देश की अगली पीढ़ी होते है। बच्चे युवा बनते है, युवा प्रौढ़ और प्रौढ़ विवाह करके फिर से बच्चों को जन्म देते हैं। इस तरह जीवन चक्र चलता रहता है। हम सभी के जीवन में बच्चों का बहुत महत्व है। बच्चों के बिना घर आंगन सूना होता है।

हर शादीशुदा जोड़े की यही इच्छा होती है कि उनके बच्चे हों। उनको संतान का सुख मिले। विश्व के अनेक देश जैसे जापान में जन्म दर बेहद कम होने के कारण बच्चों का अनुपात सिर्फ 13 फीसद रह गया है।

परंतु यह खुशहाली का विषय है कि भारत में जन्म दर अधिक है। इसलिए यहां हर शादीशुदा जोड़े को संतान सुख मिल जाता है। यहां की जलवायु भी इसमें मदद करती है। बच्चों को ईश्वर का रूप भी कहा जाता है। जिन शादी शुदा जोड़ो को बच्चे नही होते है वो प्रायः उदास और दुखी रहते है।

बच्चों पर निबंध Essay on Children’s in Hindi

जैसे-जैसे लोग वृद्ध होते जाते है उनको किसी के सहारे की जरूरत होती है। माँ बाप के बूढ़े होने पर बच्चे ही उनका सहारा बनते है। इसलिए सन्तान सुख मिलना बेहद जरूरी हो जाता है।

हमारे बच्चे हमारा भविष्य

बच्चे ही किसी देश की असली संपत्ति होते हैं। लोग जब वृद्ध अवस्था को प्राप्त होते हैं तो बच्चे ही सभी कामों में हाथ बंटाते हैं। आज के बच्चे कल के युवा बनेंगे। वह कल को वैज्ञानिक, नेता, दार्शनिक, प्रशासनिक अधिकारी, इंजीनियर, डॉक्टर और दूसरे महत्वपूर्ण पर पदों की शोभा बढ़ाएंगे।

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उनकी कुशलता और बौद्धिकता पर ही कल को देश निर्भर करेगा। इसलिए बच्चों की परवरिश अच्छी होनी चाहिए। उन्हें हर तरह की योग्य शिक्षा मिलनी चाहिए जिससे वह अपना बहुमुखी विकास कर सके। यदि ऐसा करने में हम सफल होते हैं तो कल को वही बच्चे देश का बहुमुखी विकास करेंगे। हम सभी की जिम्मेदारी है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जाए। साथ ही उनको अच्छे संस्कार भी दिए जाएं।

बच्चों से उनका बचपन न छिने

जनसंख्या के मामले में भारत देश की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है। इसके साथ ही यहां की आबादी 125 करोड़ से भी अधिक है। आज देश में बाल मजदूरी एक प्रमुख समस्या बनकर उभरी है। देश में बहुत से बच्चे गरीबी, भुखमरी और कुपोषण से जूझ रहे हैं। बहुत से बच्चे बचपन में ही काम करने को, पैसा कमाने को मजबूर हैं। यदि वे पैसा नहीं कमाएंगे तो खाएंगे क्या।

इस तरह किसी भी बच्चे का सही विकास नहीं हो सकता है। बचपन में उनकी उम्र स्कूल जाने की होती है ना की काम करने की। ऐसे में हम सभी का धर्म बनता है कि बच्चों से उनका बचपन न छिने। उन्हें स्कूल भेजा जाये। उन्हें कम से कम 12th तक की शिक्षा दी जाए जिससे वह लिखना पढ़ना और हिसाब लगाना जान जाये।

बच्चों की शिक्षा के लिए भारत सरकार ने 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्राइमरी शिक्षा मुफ्त कर दी है। इसके अलावा उन्हें किताबें, ड्रेस, जूते मोजे, मिड डे मील मुफ्त दिया जाता है। बच्चों को स्कूल में ही भोजन, दूध, फल दिलाए जाते हैं जिससे उनका पोषण हो सके और वे अधिक से अधिक मात्रा में स्कूल में पढ़ने आए। यह शिक्षा पूरी तरह से निशुल्क है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत ऐसा किया गया है।

बच्चे कुपोषण का शिकार ना हो

भारत एक विकासशील देश है इसलिए गरीबों की संख्या भी यहां पर अधिक है। देश के 39% बच्चे कुपोषण का शिकार है। उन्हें भरपूर मात्रा में हरी सब्जियां, दालें, प्रोटीन, दूध, बींस, फल, अंडे, मांस, कैल्शियम और आयरन से युक्त पोषक पदार्थ खाने को नहीं मिलता है। इसका कारण उनके मां बाप की गरीबी ही है।

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कुपोषित बच्चे देश का विकास नहीं कर सकते हैं। इसलिए हम सभी का दायित्व है कि बच्चों का अच्छे से पोषण करें। जब तक उनके शरीर और मस्तिष्क का भरपूर विकास नहीं होगा वह बच्चे बड़े होकर देश का विकास नहीं कर पाएंगे।

बच्चों को अच्छे संस्कार देना जरूरी है

बड़ों का यह दायित्व है कि बच्चों को अच्छे संस्कार दें। शुरू में जो आदते पड़ जाती हैं वह जीवनपर्यंत बनी रहती हैं। बच्चे कच्चे घड़े के समान होते हैं। जो बातें उन्हें सिखाई जाती हैं वह किशोर होने पर स्थिर हो जाती हैं और जीवन पर्यंत चलती रहती हैं। हमें बच्चों को सिखाना चाहिए कि बड़ों का आदर करें, छोटों को प्यार दे। अ

पने मां बाप से बहस ना करें। उनका अपमान ना करें। उनके साथ गाली-गलौच ना करें। आज की युवा पीढ़ी बड़ों का सम्मान करना भूल गई है। बात बात पर मां बाप से झगड़ना, गाली गलौज करना, मारपीट करना आम बात हो गई है। बहुत से बच्चे छोटे में ही नशे का शिकार हो जाते हैं। वे घर से पैसा चुराते हैं और उसे नशे में खर्च करते हैं।

बड़ों को याद रखना चाहिए कि बच्चों को कोई भी गलत आदत ना लगे। सोशल मीडिया के आ जाने से ज्यादातर बच्चे अब बचपन में ही स्मार्टफोन की मांग करते हैं जो कि गलत है। बचपन में बच्चों का ध्यान पढ़ाई की तरफ होना चाहिए। अपना भविष्य बनाने की तरफ उनका ध्यान होना चाहिए।

माता पिता बच्चों पर अपनी इच्छाएं न थोपे

अक्सर मां बाप अपनी इच्छाएं बच्चों पर थोपते दिखाई देते हैं। जो पिता इंजीनियर होते हैं वह अपने बच्चों को इंजीनियर ही बनाना चाहते हैं। जो डॉक्टर होते हैं वे अपने बच्चों को जबरन डॉक्टर की पढ़ाई ही करवाना चाहते हैं। ऐसा करना बिल्कुल गलत है। हो सकता है कि आपका बच्चा डॉक्टर ना बनके किसी और पेशे में जाना चाहता हो।

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वो डॉक्टरी, इंजीनियरिंग को छोड़कर किसी और कोर्स को करना चाहता हो। बच्चों को वही कोर्स करने दें जिसमें उनकी रुचि है। उनपर अपनी इच्छा जबरन ना थोपे और उन्हें अपने सपनों के उड़ान उड़ने दें।

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