अंतर जातिय विवाह के फायदे व नुकसान Inter Caste Marriage in Hindi

इस लेख में हिंदी में अंतरजातीय विवाह के फायदे और नुकसान (Advantages and Disadvantages of Inter Caste Marriage in Hindi पर जानकारी दी गई है। 

इसमें अंतरजातीय विवाह का अर्थ, फायदे और नुकसान, अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि, अंतरजातीय विवाह योजना व अधिनियम और अंतरजातीय विवाह सही या गलत इत्यादि पर गहराई से चर्चा किया गया है। 

अंतरजातीय विवाह का अर्थ Meaning Inter Caste Marriage in Hindi

इसमें कोई दो राय नहीं है कि विवाह किसी के भी जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ख़ासकर भारतीय संस्कृति में शादी विवाह का अलग ही महत्व बताया जाता है। 

केवल सामाजिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि धर्म के दृष्टिकोण से भी विवाह वगैरह काफी अहम मुद्दा होता है। प्राचीन काल से ही दुनिया में विवाह करने की प्रथा चलती आ रही है।

लोगों की मानसिकता के अनुसार सजातीय विवाह ही सर्वश्रेष्ठ होता है। सजातीय विवाह अर्थात जिसमें दोनों ही पक्ष एक ही जाति से ताल्लुक रखते हैं। 

यदि दो अलग-अलग जातियों के लोग आपस में विवाह करते हैं, तो यह अंतरजातीय विवाह कहलाता है। अंतरजातीय विवाह के अंतर्गत एक पक्ष उच्च जाति और दूसरा अधिकतर निम्न जाति से ताल्लुक रखता है।

विदेशों में अंतरजातीय विवाह इतना अधिक प्रभाव नहीं डालता है, जितना कि हमारे भारत में देखा जाता है। यदि अंतरजातीय विवाह की बात आती है, तो झगड़े फसाद और परिवारों में कलह होना शुरू हो जाता है। 

यह एक बड़ी चुनौती है कि आधुनिक युग में भी अंतरजातीय विवाह का मुद्दा सामान्य नहीं हो पाया है। यह हमारे समाज के पिछड़ेपन को प्रदर्शित करता है।

अंतरजातीय विवाह के फायदे 7 Advantages of Inter Caste Marriage in Hindi

दुसरी संस्कृतियों को समझने का अवसर

सजातीय विवाह में नवविवाहितों की संस्कृति एक ही होती हैं, जिससे उन्हें केवल अपनी संस्कृतियों को समझने का ही अवसर प्राप्त हो पाता है। 

लेकिन अंतरजातीय विवाह में जब दो अलग-अलग संस्कृतियों से ताल्लुक रखने वाले लोग एक विवाह के बंधन में बंधते हैं, तो दोनों की मानसिकता और व्यवहार दोनों में ही बदलाव आते हैं और उन्हें एक दूसरे की संस्कृतियों को समझने का सौभाग्य मिलता है।

सरकारी सहायता

आधिकारिक तौर पर यदि युवा युवती बालिक हैं और वह अपनी इच्छा अनुसार दूसरी जाति में विवाह करना चाहते हैं, तो इसमें खुद सरकार उनकी सहायता करती है। 

संविधान के अनुसार हर किसी को अपनी इच्छा अनुसार जीवन जीने का हक है। यही कारण है कि सरकारी हस्तक्षेप के परिणाम स्वरूप हमारे समाज में अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा मिल रहा है।

जातिवाद का नाश

इस प्रकार से रूढ़िवादी जातिगत ढांचा लोगों के मन में घर कर गई है, उसे बदलने के लिए अंतरजातीय विवाह सबसे श्रेष्ठ मार्ग है। दूसरी निम्न जातियों को तुच्छ नजर से देखने वाले लोगों के मुंह पर यह एक करारा तमाचा है। 

हम मानसिक तौर पर स्वयं में सुधार तो कर ही रहे हैं, साथ ही परंपरागत चली आ रही जातिगत व्यवस्था का भी नाश धीरे-धीरे स्वयं हो रहा है।

अनुवांशिक रोगों से छुटकारा

विज्ञान के अनुसार पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों के गुणधर्म, बनावट और व्यवहार एक दूसरे में जीन के जरिए आते जाते हैं। कई बार यह देखा जाता है कि गुणधर्मों के साथ ही पीढ़ियों में कई प्रकार की बीमारियां भी एक दूसरे में आ जाती हैं। 

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार अनुवांशिक रोगों के कारण लोगों की आयु भी घट जाती है। अंतरजातीय विवाह जिसमें दोनों ही पक्ष विभिन्न होते हैं, इसीलिए उनमें अनुवांशिक रोगों के प्रचलन होने का कोई संभावना नहीं रहता है।

ऐच्छिक विवाह से जीवन में शांति

यदि कोई भी काम इच्छा के विपरीत होता है, उसका कोई भी मतलब नहीं रहता है। बिना इच्छा के यदि विवाह जबरदस्ती करवा दिया जाता है, तो उनके जीवन में खुशियां नहीं देखी जाती। 

अंतरजातीय विवाह यदि अपनी इच्छा के अनुसार खुशी-खुशी किया जाता है, तो इससे कम से कम उन नवविवाहित जोड़ों में खुशहाल जीवन व्यतीत करने की संभावना रहती है।

रूणीवादी परंपरा का खण्डन

इतिहास ने जातिवाद व्यवस्था और पुराने रूढ़ीवादी परंपराओं के सापेक्ष में बहुत कुछ देखा है। यह हमारी सबसे बड़ी कामयाबी होगी यदि अंतरजातीय विवाह के जरिए रूढ़ीवादी परंपराओं जो कि किसी भी ढंग से लोगो का अहित करते हैं, उनका खंडन हो सके। अंतरजातीय विवाह ऐसे रूढ़िवादी रीति-रिवाजों को सही दिशा में मोड़ कर उसमें परिवर्तन करता है।

समाज के समक्ष नया नज़रिया 

समाज क्या कहेगा यह बात अक्सर लोगों को बहुत परेशान करती है। असलियत तो यह है कि अब तक जो भी होता आया है, समाज ने उसे अपना नियम कानून बना रखा है। 

हमें बहुत ही ज्यादा आवश्यकता है कि समाज के पुराने नजरिए को बदलकर उसमें समय के साथ परिवर्तन करके एक उनके समक्ष एक नया नजरिया प्रस्तुत किया जाए। जिसके लिए अंतरजातीय विवाह जैसे उदाहरण सबसे सटीक बैठता है।

अंतरजातीय विवाह के नुकसान 7 Disdvantages of Inter Caste Marriage in Hindi

परिवारिक खिन्नता

यह एक गंभीर समस्या है कि अंतरजातीय विवाह में प्रसंता केवल उन नवविवाहित जोड़ों में ही देखने को मिलती है। लेकिन उनके परिवार में कोई भी खुशी और उत्साह अधिकतर नहीं देखा जाता है। 

परिवार में कलह और अलगाव होना शुरू हो जाता है, जिससे पारिवारिक सुख शांति और अखंडता पर भी आंच आती है। यह इसका एक नकारात्मक पहलू माना जा सकता है।

समाज से अलगाव

केवल कुछ लोगों के प्रयास करने से पूरे समाज में एक साथ बड़ा बदलाव तो कभी नहीं आएगा। लोगों की बुद्धि इतनी गिर चुकी है कि अंतरजातीय विवाह के मायने को न समझ कर समाज से ही नव दंपतियों को निष्कासित कर दिया जाता है।

लोगो के अनुसार धर्म का नाश

कई लोग तो अंतरजातीय विवाह ना करने के पीछे धार्मिक तर्कों का भी सहारा लेने से नहीं कतराते हैं। ऐसे लोगों के अनुसार गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अंतरजातीय विवाह के दोष को संदर्भित किया है। 

यह वैचारिक त्रुटि है कि लोग भगवान के वास्तविक संदेश को अच्छी तरह से समझने के बजाय केवल अलगाव और जातिवाद को ही समझ पाए हैं।

विवाह की आड़ में छल 

समाज और माता-पिता के खिलाफ जाकर अंतरजातीय विवाह करना यह लोगों के अनुसार उचित और अनुचित हो सकता है। लेकिन कई बार ऐसे भी उदाहरण देखे जाते हैं, जिनमें विवाह के नाम पर छल कपट को अंजाम दिया जाता है। 

कई बार लोग संपत्ति या किसी और चीज के प्रलोभन में विवाह तो कर लेते हैं, लेकिन उसे निभा नहीं पाते हैं। इसके अलावा लव जिहाद भी विवाह के नाम पर छलावे का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां अंतरजातीय विवाह के नाम पर लोगों को बुद्धू बनाया जाता है।

संस्कृतियों को अपनाने में मतभेद

विचारों में समानता होने के बावजूद भी कई बार विवाह कर लेने के पश्चात लोग एक दूसरे की संस्कृतियों के लिए बहुत श्रेष्ठ रवैया नहीं अपना पाते हैं। बचपन से ही उन्हें अपने संस्कृतियों को सर्वोच्च बताया और सुनाया जाता है, जिसके कारण वे किसी और संस्कृति को अपनाने में झिझकते हैं। 

संस्कृति तो हर किसी के लिए सबसे बड़ी होती है, यदि एक दूसरों की संस्कृतियों के लिए ही लोग मतभेद करेंगे तो अंतरजातीय विवाह भी दुखी और असफल विवाह में परिवर्तित हो जाता है।

कठिन समय में सहायता की अनुपलब्धि

ऐसे विवाहों का यह सबसे बड़ा नकारात्मक परिणाम होता है कि एक बार घरवालों और समाज के विरुद्ध होकर विवाह करने के बाद लोग कठिन परिस्थितियों में ताकने भी नहीं आते हैं। 

लोगों के लिए यह एक अहम की बात बन जाती है। क्योंकि उनके विचारों की कदर किए बिना ही जब अंतरजातीय विवाह किया जाता है, तो वह किसी भी तरह की सहायता दूसरों को नहीं प्रदान करना चाहते हैं।

विचारों में विभिन्नता के कारण समस्याएं

आमतौर पर कई बार देखा गया है कि अपनी इच्छा से विवाह करने वाले लोगों के विचार भी अलग अलग दिखाई देते हैं। 

वे केवल एक दूसरे से प्रेम करने के कारण विवाह के बंधन में बंध जाते हैं, किंतु एक दूसरे के विचारों को अपना नहीं पाते। इसी वजह से कई बार घर में अशांति और मतभेद जैसे समस्याएं उठने लगती हैं।

अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि Inter Caste Marriage Incentive Fund in Hindi

अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें नवविवाहित जोड़ों को आर्थिक सहायता भी प्रदान करते हैं। 

हमारे समाज में स्थित इस रूढ़िवादी बुराई को जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा ऐसी स्कीम चलाई जा रही हैं, जिसमें अंतरजातीय विवाह के अंतर्गत नव दंपतियों को स्कीम के अंतर्गत सरकारी सहायता भी प्राप्त होगा।

साल 2013 में कांग्रेस सरकार के अंतर्गत लाई गई डॉक्टर अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटर कास्ट मैरिज जैसे योजना के तहत नवविवाहित के लिए कुछ राशि निर्धारित की गई थी, जो बीजेपी की सरकार आने के पश्चात भी जारी है।

इसके अंतर्गत केंद्र सरकार ढाई लाख रुपए की जमा राशि ऐसे नवविवाहित जोड़ों को प्रदान करने का भरोसा देते हैं, जिनमें एक पक्ष दलित और दूसरा पक्ष दूसरी ऊंची जाति का होना चाहिए। 

यदि भारत सरकार द्वारा किसी भी तरह का आर्थिक लाभ विवाह को लेकर पहले से ही प्राप्त हो चुका है, तो वह राशि ढाई लाख रुपए में से घटाकर प्रदान की जाएगी।

अंतरजातीय विवाह योजना Inter Caste Marriage Yojana

केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारें भी अपने अपने स्तर पर अंतरजातीय विवाह को समर्थन करने के लिए अलग-अलग प्रयास कर रहे हैं। 

संसद से जिस तरह पूरे देश के लिए ही कई योजनाएं अथवा अधिनियम पारित किए जाते हैं, उसी तरह विधानसभाओं में भी तमाम राज्य सरकारों द्वारा अंतरजातीय विवाह योजना बनाए जा रहे हैं। 

अब तक बहुत से राज्यों में ऐसी योजनाएं बनाए गए हैं, जिनमें अंतरजातीय विवाह करने वाले लोगों को सीधे सरकारी लाभ मिल रहा है। 

महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान इत्यादि बहुत से राज्य में अंतरजातीय विवाह योजना के तहत अलग-अलग धनराशि का भी निर्धारण किया गया है। आर्थिक सहायता पहुंचाने के अलावा भारत सरकार खुद लोगो की सुरक्षा का भी जिम्मा उठाती है।

अंतरजातीय विवाह सही या गलत Inter Caste Marriage Good or Bad in Hindi

किसी भी मुद्दे के परिणाम तक पहुंचने से पहले यदि उससे होने वाली हानियां और लाभ को समझा जाए, तो तर्क वितर्क करने में काफी सहायता मिलती है। जिस प्रकार अंतरजातीय विवाह के कई सकारात्मक फायदे  हैं, वहीं दूसरी तरफ इसके असफल होने के लिए कई उदाहरण भी मौजूद है।

भविष्य किसी ने नहीं देखा कि आने वाले समय में जो विवाह किया गया है, वह सफल होगा या असफल। यह लोगों के ऊपर निर्भर करता है कि वह इसे किस तरह निभाते हैं। अंतरजातीय विवाह आपकी परिस्थिति में सही है या गलत यह हम आप पर छोड़ते हैं।

अंतरजातीय विवाह अधिनियम Inter Caste Marriage Act in Hindi

भारत में अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देने के लिए कई कानूनों को बनाया गया है। सभी धर्म को ध्यान में रखते हुए ऐसे अधिनियम प्रत्येक राज्य में अनिवार्य रूप से लागू किए गए हैं। 

हिंदू धर्म के लिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955 तथा पारसी विवाह 1936, मुस्लिम पर्सनल लॉ 1937, भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम और अन्य विशेष विवाह अधिनियम 1954 अंतरजातीय विवाह अधिनियम में कुछ प्रमुख है।

हमारे देश में तमाम धर्मों के भी अपने-अपने नियम और कानून बने हैं, जिसे लोग बड़े ही आस्था से मानते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में समान आधार पर सभी को समान कानूनी संरक्षण प्रदान करने की बात कही गई है, लेकिन ऐसे धार्मिक नियमों के लिए कुछ अपवाद भी रखे गए हैं। 

उदाहरण स्वरूप शादी, विरासत, तलाक और अन्य कोई मसले सीधे धार्मिक नियमों के अंतर्गत आ जाते हैं। लेकिन कई बार इन्हीं समस्याओं को लेकर देश में अराजकता जैसे माहौल उत्पन्न हो जाते हैं। 

भारत सरकार ने इसी कारण से धर्मों के लिए अलग नियमों को पारित करके उन्हें कानून के दायरे में लाया है। अंतरजातीय विवाह अधिनियम जो कि धार्मिक नियमों के दायरे में आते थे, वह अब संविधान की दृष्टि से ही देखे जाते हैं।

39 thoughts on “अंतर जातिय विवाह के फायदे व नुकसान Inter Caste Marriage in Hindi”

  1. meri girlfriend or mai alag alag jati ke hai ham dono shadi karna chahte hai pr ghar wale mante nahi hai ‘samaj ke niyamo se darte hai.

    Reply
  2. anter jatiy vivah karne keliye yeg kitani honi chahiye kya ladka or ladki ki yeg 18.18 ho to kort myareg kar saktehe kya

    Reply
  3. इनटरकासट मैरिड कमयुटी (रजि) यानी अँतरजातीय विवाहित समाज सँसथा एक सामाजिक संसथा है जिनहोने अँतरजातीय विवाह किया है उनहे समाज अलग थलग कर देता है यह सँसथा उनहे सगँठित करने का प़यास कर रही है आप सब का समथॅन व सहयोग अपेक्षित है। यह संस्था अंतरजातीय विवाह कराती नही है लेकिन जो अँतरजातीय विवाहित है उनहे संगठित करने का प़यास कर रही है। सम्पर्क 8765888903 अनिल तिवारी

    Reply
  4. Hamari shadi 25november 2015 ko inter cast marriage ki hai….government ki taraf se koi benefit nhi mila h..but avi v finical help mil sakti h but proses ki jankari nhi h…please help me……

    Reply
  5. Hlo sir hmne intercaste sadi ki hai 25-4-2017 ko or benefit nhi mila to kya krna cahiyee sir pls reply

    Reply
  6. sir m intercaste marrige karna chahta hu per ladki k ghar wale samaaj wad ki wajah se sadi k lie ni maan rhe hn , aisa koi rule to hoga jisse samaaj walo ko chup Kara sake aur ladki ka uske ghar aane Jane me v problem na ho

    Reply
  7. Sir Maine love marriage ki hai mere papa ne mujhe bedakhal karwa diya toh kya aage chalkar mai apna hissa le sakti hoon

    Reply
  8. Sir maine intercast marrage kya h mai hindu hu or mere husband muslim to kya hme koi benifit meligi muje intercast marrage sheme ka

    Reply
  9. Inter cast marriage tabhi success hai jab parent bhi iske liye ready Hon. Inter cast marriage ki age 25 Honi hi chahiye 18 age ka decision 90% wrong hi hoga.

    Reply
  10. Yah Post theek hai lekin ydi sadi dusri caste me krni hai to gaon ke log kabhi nhi manage..

    Mere to nhi maan rhe paresan ho gya hu

    Lg rha hai love aur jaat paat ke chakkr me life barbad hogi meri

    Reply
  11. Mujhe bhi intercast marriage karni h
    Ladki k ghar wale taiyar h
    Mere ghar wale jati(samaj) wala pachada liye baithe h
    Me kya karu

    Reply
  12. अंतर्जातीय विवाहित समाज संस्था से जुड़े और जाति विहीन समाज की स्थापना में सहयोग करें । हमें उस समाज जो हमें स्वीकार नहीं करता उससे स्वीकारने की भीख नहीं मांगना है बल्कि अंतर्जातीय विवाहित समाज को संगठित कर उस समाज को अपने समाज के आगे झुकने के लिए मजबूर कर देना है । इन्टरकास्ट मैरिड कम्युनिटी (रजि) संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष अनिल तिवारी से सम्परक करें -8765888903 मुख्य कार्यालय – लखनऊ उत्तर प्रदेश

    Reply
  13. Agr intercaste marriage hoti h e.g. girl obc caste ki h or boy sc to kya girl ki caste change hogi ya Jo by birth hai vhi rhegi please give me the answer

    Reply
  14. Muje to bhayo n bdnam ky toucher ky . Maine to kbhi baat bhi nhi rakhi shadi ki . But bhayo n apne fayda k ly muje bdnam ky . Mumy Papa ko bhadkate. Or ek din talwar utha lii bhayo n . Muje ghar s bhagnaaa pda . Or fir bhi complain ki but himmat nhi the ki bhayo ko hi under krva du .. ..
    Or fir bhi mumy Papa muje koste or muje bdkhal kr dy or muje shadi krni pdi . Fir mujpe iljaam lgate h ki mane unko khi k nhi choda .
    Muje bdkhal bhi kr dy . Tb uske baad mane marriage k fasla ly

    Reply
  15. लड़की-लड़का अपनी तथा अपने माता-पिता की इच्छा से अंतर्जातीय विवाह करते है, तो समाज, परिवार सहित बहिष्कृत कर देते है। और कहते है की समाज से बहिष्कृत हमने नहीं किया है, बल्कि आप अंतर्जातीय विवाह करके स्वयं बहिष्कृत हो गए हो।

    यदि मिलाने की बात करे तो, सामाजिक बैठक होती है। उसमे लड़की-लड़का को पूछा जाता है की क्या तुम्हे अपने-अपने जाती में लड़का या लड़की नहीं मिला ? अंतर्जातीय विवाह करके आपने सामाजिक नियमों का उलंघन किया है।

    अब यदि समाज में मिलना है तो हजारों से लाखों रूपये का जुरमाना मांगते है। उन रुपयों का पावती या रशीद मांगने पर भी नहीं देते है।
    ऐसे स्थिति में हमें क्या करना चाहिए ? क्या आप हमारी मदद कर सकते है ?

    Reply
  16. आप लोग एक बात जान लो काम वो करो जिसमे आप खुश रहो।माता पिता को अपने खुशी की पड़ी है, जबकि वो ये नही सोचते कि अगर हमारे बच्चे ही नही खुश तो उनकी खुशी किस काम की।वो समाज को देखते हैं जबकि समाज देता क्या है कुछ नही।जो समाज देखा वो कभी खुश नही रहा।लोगो का तो काम है कहना।कहने वाले अपने घर मे देखते कि उनके घर मे क्या हो रहा है।लोग 2 से 4 दिन बोलेंगे फिर चुप।तो आप अपनी देखो दुनिया का नही वरना कभी खुश नही रहोगे।आप अपने जीवन का फैसला लेने का अधिकार खुद हैं।ये आपकी अपनी life है किसी इसका फैसला करने का अधिकार नही है।

    Reply
    • Bat to sahi hai Bhai but aage problem nahi hogi Kya, jaise bache honge to in log ka jati praman patr aur wansawali me naam chadhana vagerah vagerh

      Reply
  17. sir main shaadi karna chahta hu… SC ladki say but mere ghar wale karne nahi denge… aap bta dijiye kya karu….main OBC hu…

    Reply

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.