अहिंसा और युवा पर निबंध Essay on Non-Violence and Youth in Hindi

इस लिंक में आप अहिंसा और युवा पर निबंध Essay on Non-Violence and Youth in Hindi पढ़ सकते हैं। इसमें आप अहिंसा परमो धर्म अहिंसा का महत्व युवाओं में इसकी जरूरत अहिंसा को बढ़ावा देने वाले तत्व के विषय में पूरी जानकारी ले सकते हैं।

अहिंसा और युवा पर निबंध Essay on Non- Violence and Youth in Hindi

भारत देश 1947 में अंग्रेजों की गुलामी से स्वतंत्र होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बना था जिसमें अहिंसा का मुख्य योगदान रहा। इतिहास के महान नायकों ने इसी धर्म का पालन करते हुए अपना प्रभुत्व कायम रखा। 

अहिंसा का ही सन्देश दिया एवं इसी मार्ग पर खुद भी चले। इसके लिए उन्होंने बहुत ही संघर्ष किये। आज हम बात करने वाले है अहिंसा और युवा को लेकर तो चलिए शुरू करते है –

श्लोक – ‘अहिंसा परमो धर्मं’ Ahinsa Parmo Dharma

“अहिंसा परमो धर्मं” यह नारा तो हम सभी ने लगभग सुना ही है। जिसका अर्थ अहिंसा ही परम धर्म है यह शब्द जितना सुनने में सरल लगता है असल में पालन करने में उतना ही कठिन है। 

लेकिन भारत के महान नायक जैसे महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस, राजा राममोहन राय, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानंद आदि महान नेताओं ने अहिंसा के बल पर ही अंग्रेजो को भारत से जाने के लिए मजबूर कर दिया।

महात्मा गांधी की इस विचारधारा के कारण ही उन्हें अहिंसावादी विचारधारा का जनक कहा जाता है। अहिंसा की इस विचारधारा से उन्होंने न केवल अपने देश को आज़ादी दिलाई बल्कि अन्य देशो के सामने यह मिसाल कायम की कि अहिंसा एक ऐसा शांतिपूर्ण हथियार है जिसके मध्यम से हिंसा पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है।

अहिंसा का महत्व Importance of Non-Violence in Hindi

प्राचीन समय में महात्मा बुद्ध ने अहिंसा के बल पर ही अंगुलिमार जैसे क्रूर डाकू को बौद्ध भिक्षुक बना दिया। इन्ही के मार्गदर्शन के बल पर मगध का सम्राट अशोक, कलिंग के युद्ध में हुए बीभत्स हिंसा को देखकर उसने उसी वक़्त सौगंध ली कि वो अहिंसा का मार्ग अपनाएगा और उसने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। 

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हिंसा मनुष्य के अन्दर पशुतत्व का संचार करती है जिससे हिंसा के वशीभूत होकर मनुष्य कई बार ऐसे कार्य कर बैठता है जिसका पछतावा उसे समय गुज़र जाने के बाद होता है। 

यदि इसके विपरीत अहिंसा के बारे में बात करें तो यह मनुष्य के भीतर उपस्थित ईश्वर से उसका साक्षात्कार कराती है और उसे सही और गलत का फर्क महसूस कराती है।

युवाओं में अहिंसा की भावना जरूरी क्यों है? Spirit of Non-Violence

युवाओं के लिए अहिंसा की भावना होना बहुत ही जरूरी है। क्योंकि जब देश का युवा अहिंसा की भावना से देश के लिए काम करेगा तो देश और युवा बहुत ही तरक्की करेगा। 

क्योंकि अहिंसा के रास्ते पर चल कर सभी का भला किया जा सकता है। युवावस्था में युवा गर्म खून से भरा होता है उसमें इतनी ताकत होती है कि वो पत्थर से भी पानी निकाल सके।

समाज के हर व्यक्ति की अपनी एक सोच और एक विचार होते है जो समाज के विकास में योगदान दे सकते है। यदि थोडा विचार किया जाये तो हम पाएंगे कि समय गुजरने के साथ साथ मानवीय मन और बुद्धि का काफी विकास हो गया है परन्तु वहीँ लोग काफी बेसब्र हो गए हैं। 

वर्तमान समय का युवा वर्ग प्रतिभा और क्षमता से संपन्न है और सीखने और नई चीजों को तलाशने के लिए उत्सुक भी हैं। परन्तु विभिन्न चीजों को पूरा करने की जल्दबाजी में भी है इस बात से इनकार नही किया जा सकता कि मनुष्य ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, गणित, वास्तुकला, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों में बहुत प्रगति की है परन्तु इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि हिंसा और अपराध की दर में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है। 

यदि आज आंकड़ो को देखें तो पाएंगे कि दुनिया में पहले से ज्यादा हिंसा हो रही है। जिसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से युवा वर्ग ही जिम्मेदार हैं।

युवाओं में बढ़ते हिंसा और अपराध को बढ़ावा देने वाले तत्व Causes of Increased Violence in Youth

आज के समय में ऐसे कई कारण है जो युवाओ में हिंसा और अपराध को बढ़ावा देने का कार्य करते है –

शिक्षा की कमी

शिक्षा की कमी के कारण युवा वर्ग सोचने समझने का विवेक खो देता है जिसके कारण वो हिंसा या अपराध कर बैठता है। अगर शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत किया जाए तो युवाओं में अहिंसा को बढ़ावा दिया जा सकता है।

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बेरोज़गारी

हिंसा या अपराध का मुख्य कारण देश में बढती बेरोजगारी है, जिसके कारण पर्याप्त रोज़गार न होने के कारण युवा वर्ग हिंसा के ओर अग्रसर हो जाता है।   

जीवन की ओर पनपता असंतोष

पहले के समय में जो संतोष लोगों में देखने को मिलता था। जो अब के लोगो में देखने को नही मिलता ज्यादा पाने की चाहत वर्तमान की ख़ुशी को खत्म करती है जिसके कारण असंतोष की भावना पैदा होती है और युवा संतोष पाने की चाहत में हिंसा या अपराध कर बैठता है।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा

वर्तमान समय में हर व्यक्ति एक दुसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहा है, जिसके कारण वो दूसरे को नीचा दिखाने, उसे धोखा देने, उसके साथ दगा करने जैसे कार्य करने से नही डरता और प्रतिस्पर्धा के तहत हिंसा कर बैठता है। (source)

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अहिंसा की भावना और युवा Spirit of Non-Violence in Youth

वर्तमान समय में लोग छोटी-छोटी बात को लेकर एक दूसरे की जान लेने पर आतुर हो जाते हैं। लोगों के अंदर अब संवेदना पूर्ण रूप से समाप्त होती जा रही है। लोगों में पहले जैसे मानवता नहीं रही जिसका मुख्य कारण हिंसा ही है। 

हमें जरुरत है तो स्वयं को समझाने की क्योंकि हिंसा के रास्ते पर चल कर समाज, देश और मनुष्य का किसी भी कीमत पर भला नहीं हो सकता। हिंसा के कारण ही बड़े-बड़े देश तबाह हो गए और हो रहे हैं। 

यदि हम अपने जीवन में अहिंसावाद को अपनाते हैं और उसका अनुसरण करते है तो हम स्वयं को जीव-जंतुओं से भिन्न मानते हुए मानवता की रक्षा कर सकते हैं। वर्तमान में भारत के युवाओं के सामने ऐसे आदर्श व्यक्तित्वों की कमी है जिसे वो अपना रोल मॉडल बना सकें और उनका एक प्रतिरूप बन सकें। 

देखा जाये तो गांधी जी हर पीढ़ी के युवाओं के रोल मॉडल रहे हैं। आज हमारा समाज सांस्कृतिक एवं राजनीतिक परिवर्तनों के दौर से गुजर रहा है। इन सामाजिक परिवर्तनों को सही दिशा देने में गांधी जी के सिद्धांत एवं उनका दर्शन हमारे युवाओं के मार्गदर्शक होने चाहिए।

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गांधी जी के अनुसार देश के युवा सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा औजार है। वे हमेशा चाहते थे कि सामाजिक परिवर्तनों, सामाजिक कुरीतियों, सती प्रथा, बाल विवाह, अस्पृश्यता, जाति व्यवस्था के उन्मूलन के विरुद्ध युवा आवाज उठाएं। 

उनका मानना था कि शोषण मुक्त, स्वावलंबी एवं परस्पर पोषक समाज के निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका है एवं भविष्य में भी होगा। वर्तमान युवा प्रजातांत्रिक मूल्यों एवं तथ्यपरक सिद्धांतों को मानता है। 

भारतीय युवा हमेशा से गांधी जी के चिंतन का केंद्रबिंदु रहा है। वर्तमान युवा पाश्चात्य प्रभावों से संचालित है। उसकी सोच निरकुंश है। वह अपने ऊपर किसी का हस्तक्षेप नहीं चाहता है। ऐसी परिस्थितियों में गांध जी के विचारों की सर्वाधिक जरूरत आज के युवाओं को है। 

गांधी जी हमेशा युवाओं से रचनात्मक सहयोग की अपेक्षा रखते थे। हमें जरुरत है कि देश के युवाओ को इस बात से अवगत कराने की कि हिंसा का मार्ग को अपनाया जाये जिससे एक आदर्श समाज और देश की स्थापना हो सके।

निष्कर्ष Conclusion

हमारा यह कर्तव्य है कि हम आने वाली पीढ़ी का पोषण करें और उन्हें अच्छा इंसान बनने में मदद करें। देश के युवाओं के निर्माण में शिक्षक भी प्रमुख भूमिका निभाते हैं। 

उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी गंभीरता से निभानी चाहिए। ईमानदार और प्रतिबद्ध व्यक्तियों को पोषित करके वे एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। 

जिससे युवाओ में यह सही गलत का फर्क आ सके और जो हिंसा के मार्ग पर न चलकर अहिंसा के मार्ग पर चलें। आशा करते हैं आपको अहिंसा और युवा पर निबंध Essay on Non-Violence and Youth in Hindi आपको पसंद आया होगा।

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