सिकंदर महान का इतिहास Alexander the Great History in Hindi

इस लेख में आप दुनिया के एक बहुत महान शासक सिकंदर महान का इतिहास (जीवनी) (Alexander The Great History in Hindi) के बारे में बताने वाले है। जिसमे हम आपको इनके जीवन की पूरी कहानी (Great Story) देंगे और साथ ही इनकी द्वारा लड़े गए कुछ महत्वपूर्ण युद्धों के बारे में बात करेंगे।

दुनिया के इतिहास में बहुत से राजा हुए है लेकिन उनमें बहुत ही कम ऐसे राजा हुए है जिसके बारे में जानकर दुनिया कहती है ये बहुत ही महान राजा था। उन्ही महान राजाओं में सिकंदर महान का भी नाम लिया है।  

सिकंदर महान कौन था? Who Was Alexander the Great in Hindi?

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सिकंदर महान (Alexander The Great) यूनान राज्य के  मकदूनिया का शासक था।  इनके फिलिप द्वितीय जो मकदूनिया के शासक थे।

पिता की निधन के बाद सिकंदर 336 ईसा पूर्व गद्दी पर बैठा। सिकंदर महान को इतिहास में एक प्रतिभाशाली और कीर्तिवान राजा होने के साथ निपुण, शक्तिशाली और विख्यात सेनापति भी था।

अपने जीवन के अंत तक उसने लगभग ज़मीन के आधे हिस्से पर अधिकार कर लिया था जितने भूमि के बारे में प्राचीन यूनानी या ग्रीक को जानकारी थी। इसलिए इतिहास में इसे विश्व विजेता के नाम से भी जाना जाता है।

इसके अलावा सिकंदर महान को एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन (Alexander Macedonia) तथा एलेक्ज़ेंडर तृतीय (Alexander-III ) के नाम से भी प्रसिद्ध है। 

सिकंदर का असली नाम क्या था? Real Name of Sikander the Great in Hindi

दोस्तों, सिकंदर का वास्तविक नाम मेसेडोन के एलेक्ज़ेंडर तृतीय (Alexander III of Macedon ) था।  इसके द्वारा किये गए कार्यों के कारण लोग इसे अलग-अलग नामों से जानते थे।

पिता के निधन के बाद जब सिकंदर राजा बना, उसके बाद तो इसके द्वारा बहुत युद्ध जीते गए। इसके वजह से लोगों ने सिकंदर को बहुत से नाम भी दिए।

इन नामों में एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन (Alexander Macedonia) तथा एलेक्ज़ेंडर तृतीय (Alexander III), सिकंदर महान और एलेक्ज़ेंडर द ग्रेट (Alexander The Great) आदि है।

सिकंदर को विश्व का सबसे बड़ा सम्राट क्यों माना जाता है? Why Is Alexander the Great Is Called World’s Greatest Emperor?

सिकंदर महान (Alexander The Great) के नाम से आप समझ सकते है कि सिकंदर कितना महान राजा था। सिकंदर को विश्व का सबसे महान या बड़ा सम्राट मानने के पीछे कई कारण है जिनके वजह से सिकंदर को सबसे महान राजा माना जाता है।

महान सिकंदर बचपन से ही विश्व को जितने के सपने देखा करता था, और अरस्तु जैसे महान विचारक और दार्शनिक के शिष्य के रूप में शिक्षा प्राप्त करके सिकंदर मानसिक रूप से मजबूत हुआ।

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पिता के मृत्यु के बाद जब सिकंदर राजा बना, तो अपने नेतृत्व में एक ऐसी सेना का निर्माण किया, जिसने अपने समय में सीरिया, इरान, मेसोपोटामिया, मिस्र, जुदेआ, गाझा, बॅक्ट्रिया और इसके साथ ही भारत के पंजाब पर भी विजय हासिल कर लिया था।

सिकंदर द्वारा जीते गए युद्धों  का कारण वह एक कुशल सेनापति और प्रतिभाशाली राजा के कारण ही विश्व भर में प्रसिद्ध है।

सिकंदर महान का जन्म और प्रारंभिक जीवन Birth and Early Life of Alexander the Great in Hindi

यदि सिकंदर के जीवन के बारे में बता किया जाए, तो सिकंदर का जन्म 356 ईसा पूर्व यूनान के मैसेडोन या मकदूनिया के पेला नामक स्थान पर हुआ था।

इनके पिता फिलिप द्वितीय मकदूनिया और ओलंपिया ले राजा थे। उनकी माता ओलंपिया जो एपिरुस की राजकुमारी थी। ऐसा माना जाता है कि उनकी माता एक जादूगरनी थी, जिनको सापों के बीच रहने का शौक था।

उसकी एक बहन थी, जिसका नाम क्लियोपैट्रा था। सिकंदर और उसकी बहन की परवरिश पेला के ही शाही दरबार में हुआ था, उसे मैसेडोनिया की क्लियोपेट्रा (Cleopatra of Macedon ) भी कहा जाता है, ये सिकंदर की इकलौती सहोदर (Siblings) थी।

सिकंदर महान की शिक्षा Education of King Sikandar in Hindi

सिकंदर, जो बहुत ही बुद्धिमान थे उन्होंने 12 वर्ष की आयु में ही घुड़सवारी जैसे कठिन चीजों को बहुत ही अच्छी तरह से सीख लिया था। सिकंदर की प्रारंभिक शिक्षा इनके एक रिश्तेदार द स्टर्न लियोनिडास से हुई।

अलेक्जेंडर ग्रेट के पिता फिलिप चाहते थे कि ये पढ़ाई के साथ युद्ध विद्या का भी ज्ञान प्राप्त करे और एक महान योद्धा बने इसलिए बचपन से ही इनको युद्ध विद्या जैसे तलवारबाजी, धनुर्विद्या, घुड़सवारी आदि की शिक्षा भी द स्टर्न लियोनिडास से ही प्राप्त की।  

इसके पश्चात इनके पिता इनके आगे के शिक्षा के लिए एक महान दार्शनिक और विचारक अरस्तु को नियुक्त किया गया। उस वक़्त इनकी उम्र 13 वर्ष थी। 

अरस्तु के निर्देशन में ही सिकंदर ने साहित्य, विज्ञान, दर्शन शास्त्र जैसे विषयों का अध्ययन किया।  बहुत से इतिहासकार यह भी मानना है कि सिकंदर को विश्व विजेता बनाने का सपना अरस्तु ने ही दिखाया था और सिकंदर को इसके लिए तैयार किया था।

सिकंदर महान के राज्य बनने की कहानी How Sikander the Great Became King Story in Hindi?

सिकंदर की उम्र जब 20 वर्ष थी, तब इनके पिता की मृत्यु हो गई। पिता के निधन के बाद 336 ईसा पूर्व में सिकंदर मेसेडोनिया या मकदूनिया का सम्राट बनने के लिए सिकंदर ने सेना की मदद से अपने सौतेले और चचेरे भाइयों की हत्या भी करवानी पड़ी।

इसमें सिकंदर की माँ ओलंपिया ने सिकंदर की मदद की। सम्राट बनने के बाद सिकंदर ने अपने पिता की इच्छा को पूरा करने लिए एक विशाल सेना का गठन किया और अपने साम्राज्य को बढाने के लिए सिकंदर ने यूनान के कई भागों पर अधिकार कर अपनी जीत दर्ज की।

इसके पश्चात सिकंदर एशिया माइनर को जितने के लिए निकल पड़ा। इस युद्ध अभियान में सिकंदर ने सीरिया को पराजित करके मिस्र, इरान, मेसोपोटामिया, फिनिशिया जुदेआ, गाझा, और बॅक्ट्रिया प्रदेश को भी पराजित करके अपने कब्ज़े में लिए लिया।

उस समय सभी राज्य फ़ारसी साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था जो सिकंदर के साम्राज्य का लगभग 40 गुना था। इसी दौरान सिकंदर ने 327 ईसा पूर्व में मिस्र में एक नए शहर की स्थापना की। जिसका नाम अपने नाम पर अलेक्ज़ेंड्रिया रखा और यहाँ एक विश्व विद्यालय का भी निर्माण करवाया।

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सिकंदर ने अपनी विशाल सेना और कुशल सेना नेतृत्व फ़ारस के राजा डेरियस तृतीय को अरबेला के युद्ध में हराकर स्वयं वहां का राजा बन गया। फ़ारस की राजकुमारी रुकसाना से विवाह करके सिकंदर ने जनता को भी अपनी ओर कर लिया।

इसके अलावा सिकंदर ने कई अन्य जगहों पर अपनी जीत हासिल की। इसमें भारत का भी कुछ हिस्सा शामिल था।

सिकंदर महान कहाँ का राजा था? Alexander the Great Was the King of Which Place?

सिकंदर या अलेक्जेंडर द ग्रेट मकदूनिया या मेसेडोनिया  का राजा था। पिता की मृत्यु के बाद सिकंदर ने अपने ही सौतेले और चचेरे भाइयों की हत्या करवा कर स्वयं को मकदूनिया का सम्राट घोषित कर लिया। इसमें सिकंदर की माँ ओलंपिया ने उसकी मदद की।

सिकंदर महान का धर्म क्या था? What Was the Religion of Alexander?

अगर हम सिकंदर के धर्म के बारे बात करें, तो सिकंदर एक यूनानी या ग्रीक था। यूनानी लोग के अपनी ग्रीक ओलंपियन मान्यताओं के साथ वो कुछ देवताओं में भी विश्वास करते थे, लेकिन ये प्राचीन ग्रीक ओलंपियन मान्यताएं हमें ज्यादा कुछ नही बताती है क्योंकि ये धर्म बहुत ज्यादा व्यवस्थित या केंद्रीकृत नहीं था। इन मान्यताओं को हम सिकंदर का धर्म कह सकते है।

सिकंदर इन मान्यताओं को मानने के बजाय खुद को ईश्वर का रूप मानता था और वो चाहता था कि लोग उसकी पूजा करे। मिस्र को जितने के बाद उनसे वहां के पवित्र तीर्थ स्थल ओरेकल ऑफ़ सिवा (Oracle of Siwa) के दर्शन बे बाद सिकंदर ने स्वयं को Zeus-Ammon का पुत्र घोषित कर दिया।

सिकंदर स्वयं को ईश्वर का रूप मानता था इस बात का पता इससे लगता है, उसके शासन काल में उसने कई ऐसे सिक्के चलवाए जिसमे उसके कानों के ऊपर सींग थे जिस तरह Zeus-Ammon के तस्वीर में होते थे, और उसने Zeus के सामान हाथों में बज्र लिए हुए खड़ा होने वाला चित्र भी सिक्कों पर बनाये थे।  

इसके अलावा सिकंदर ने ग्रीक के कई मंदिरों में अपनी मूर्ति स्थापित करने के भी आदेश दिए थे, क्योंकि वो चाहता था कि लोग उसकी पूजा जीवित देवता के रूप में करें।

सिकंदर महान का पुत्र कौन था? Who Was the Son of Alexander the Great in Hindi?

सिकंदर महान और रुकसाना का पुत्र अलेक्जेंडर चतुर्थ (Alexander IV) था। इसके जन्म से पहले ही सिकंदर की मृत्यु हो गई। इस कारण जनता के मन उत्तराधिकार को लेकर असंतोष था। इस बात का फायदा उठाते हुए फिलिप III ने पैदल सेना को अपनी ओर कर लिया।

रुकसाना ने बाकियों को राजी किया कि यदि पुत्र होगा तो वो राजा बनेगा अथवा रीजेंट पर फिलिप का राज होगा। 323 ईसा पूर्व या 322 ईसा पूर्व के शुरू में अलेक्जेंडर चतुर्थ (Alexander IV) का जन्म हुआ। 

सिकंदर का भारत पर आक्रमण Alexander Invaded India

यूनानी शासक सिकंदर महान ने भारत पर 326 ईसा पूर्व आक्रमण किया। भारत पर आक्रमण करने का मूल कारण धन की प्राप्ति थी। इस समय भारत छोटे-छोटे गणराज्यों में बंटा हुआ था।

सिकंदर खैबर दर्रे से होकर भारत पहुंचा और उसने पहला आक्रमण तक्षशिला के राजा अम्भी पर किया। अम्भी ने कुछ समय के बाद सिकंदर के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और सिकंदर को सहायता देने का वादा किया। 

इस समय तक्षशिला में चाणक्य एक आचार्य के रूप में कर कर रहे थे। इसने ये विदेशी हमले देखे ना गए इसलिए चाणक्य ने इसके विरुद्ध में लड़ने के लिए बहुत से राजाओं के पास गए लेकिन आपसी मतभेद के कारण कोई भी सिकंदर के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार नही हुआ।

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इस समय भारत में मगध का नन्द वश जिसका राजा घनानंद था। जोकि बहुत ही शक्तिशाली था। चाणक्य घनानंद के पास भी गया लेकिन घनानंद ने चाणक्य का अपमान करके उसे महल से निकाल दिया। जिसका परिणाम आगे चलकर घनानंद को उठाना पढ़ा।

सिकंदर और पोरस का युद्ध War of Alexander and Porus

तक्षशिला के राजा अम्भी को हराकर सिकंदर झेलम और चिनाब नही को ओर बढ़ा और झेलम नही के किनारे ही सिकंदर और पोरस या पेरू के बीच एक बहुत ही प्रसिद्ध युद्ध लड़ा गया। जिसे हाइडेस्पीज का युद्ध या वितस्ता का युद्ध कहा जाता है। इस युद्ध में पोरस की हार हुई। 

झेलम नही के किनारे सिकंदर और पोरस के बीच भयानक युद्ध की शुरुआत हुई। पहले दिन पोरस ने सिकंदर का डटकर सामना किया। लेकिन मौसम के ख़राब होने के कारण पोरस के सेना कमजोर पड़ने लगी।

ये देखकर सिकंदर ने पोरस से आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन पोरस ने हार नही मानी और युद्ध करते रहे। पोरस जानते थे कि उनकी हर निश्चित है लेकिन उन्हें किसी अधीनता स्वीकार नही थी।

सिकंदर ने पोरस को पराजित तो कर दिया, लेकिन इसमें सिकंदर का भी बहुत नुकसान हुआ। पोरस के वीरता से प्रभावित होकर सिकंदर ने पोरस के साथ मित्रता कर लिया और पोरस से जीता हुआ राज्य वापस कर दिया और अपनी सेना के साथ वापस लौटने का फैसला किया।

सिकंदर के भारत पर आक्रमण का क्या प्रभाव पड़ा? What Was the Impact of Alexander’s Invasion on India?

सिकंदर के भारत पर आक्रमण के प्रभाव इस प्रकार है-

  1. अलेक्जेंडर दी ग्रेट के इस अभियान से भारत और यूनान देश के बीच विभिन्न क्षेत्रों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित हुए और साथ भिन्न-भिन्न स्थल और जल मार्गों के रास्ते सामने आया। 
  2. सिकंदर के आक्रमण के फलस्वरूप भारत में छोटे-छोटे राज्यों का पतन हुआ और चाणक्य और चन्द्रगुप्त जैसे राष्ट्रप्रेमी सामने आये और छोटे राज्यों को मिला कर बड़े एक बड़े साम्राज्य का निर्माण किया।
  3. भारत में कला के रूप में गंधार शैली का विकास हुआ जो यूनानियों से ही प्रभावित है।
  4. सिकंदर के इतिहासकार मूल्यवान भौगोलिक विवरण छोड़ गए है, जिसके सहायता से इन घटनाओं के समय का पता चलता है, साथ इसकी सहायता कुछ और घटनाओं के समय के बारे में भी जानने को मिलता है।

सिकंदर महान की मृत्यु कैसे हुई? Death of Alexander The Great in Hindi

पोरस को हारने के बाद सिकंदर के सामने एक मगध की विशाल सेना थी, लेकिन सिकंदर के सैनिकों ने व्यास नही पार करने और घनानंद की सेना से युद्ध करने से मना कर दिया।

तभी सिकंदर को फ़ारस में विद्रोह के बारे में पता चला और उसे विद्रोह को दबाने के लिए सिकंदर ने वापस लौटने का फैसला किया। 323 ईसा पूर्व में वापस लौटे हुए सिकंदर बेबीलोन पहुँगा।

बेबीलोन में सिकंदर को भीषण बुखार हुआ और 33 वर्ष की आयु में 10 जून को सिकंदर की मृत्यु बेबीलोन में हुआ। मात्र 10  वर्षों में ही सिकंदर ने बहुत से राज्यों को अपने साम्राज्य में मिला लिया।

ये बात अलग है कि उसके मृत्यु के बाद उसका साम्राज्य बिखर गया और शक्ति के लिए इसमें शामिल देश आपस में लड़ने लगे।

आशा करते हैं आपको सिकंदर महान का इतिहास व कहानी (Alexander The Great History in Hindi) आपको अच्छा लगा होगा।

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