अखिल भारतीय मुस्लिम लीग All India Muslim League in Hindi

अखिल भारतीय मुस्लिम लीग All India Muslim League in Hindi

जब भारत में हिंदू राष्ट्रवाद का जन्म हुआ तो मुस्लिम समाज भयभीत हो गया। उन्हें लगा कि वे भारत में सुरक्षित नहीं है और उन्हें यहां की राजनीति में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए जिससे मुसलमानों को न्याय और राजनितिक आजादी  मिल सके।

इसके लिए मुस्लिम नेता प्रयास करने लगे। सर सैयद अहमद ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई। वो सरकारी नौकरियों में मुसलमानों का स्थान सुनिश्चित करना चाहते थे। बंगाल विभाजन को देखकर मुसलमानों में उत्सुकता बढ़ गयी। वो मांग करने लगे कि भारत में भी उनके लिए एक अलग राज्य बनाया जाये। इस तरह धीरे-धीरे ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की नीव पड़ी।

अखिल भारतीय मुस्लिम लीग All India Muslim League in Hindi

लॉर्ड मिंटो की बंटवारे की राजनीति

लॉर्ड कर्जन के बाद लॉर्ड मिंटो भारत का वायसराय बना। वह भारतीय राष्ट्रीय जागरण को कम करना चाहता था। इसलिए उसने हिंदू मुस्लिम के बीच मतभेद करने की कोशिशें शुरू कर दी। सर आगा खान ने मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

1 अक्टूबर 1906 ई० को लॉर्ड मिंटो से शिमला में मुलाकात की। उनके द्वारा 4000 मुसलमानों से हस्ताक्षर करा कर निम्न मांगे प्रस्तुत की गई-

  • सरकारी नौकरियों में मुसलमानों को उचित अनुपात में स्थान मिले
  • मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए
  • नौकरी में प्रतिस्पर्धा को समाप्त किया जाए
  • नगर पालिका में हिंदू मुस्लिम दोनों समुदाय के प्रतिनिधि को भेजा जाए
  • विधान परिषद के लिए मुस्लिम वकीलों, जमीदारों, नगर पालिका के मुस्लिम सदस्य, जिला पार्षदों और 5 साल का अनुभव रखने वाले मुस्लिम स्नातकों का एक अलग निर्वाचक मंडल बनाया जाए
  • देश के मुख्य न्यायालय और उच्च न्यायालय में मुस्लिम जज बनाए जाएं
  • वायसराय की काउंसिल में भारतीयों की नियुक्ति के समय मुसलमानों का हित देखा जाए
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लॉर्ड मिंटो मन ही मन हिंदू मुस्लिम की खाई को बढ़ाना चाहता था। उसने मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल से मिलकर हर्ष व्यक्त किया और कहा कि “मुस्लिम संप्रदाय को इस बात से पूर्णता निश्चिंत रहना चाहिए कि मेरे द्वारा प्रशासनिक पुनर्सगठन का जो कार्य होगा उसमें उनके अधिकार और हित सुरक्षित रहेंगे”

ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना

बंगाल विभाजन के बाद ढाका के नवाब सलीम उल्ला खान ने “मुस्लिम ऑल इंडिया कान्फ्रेड्रेसी” नाम से एक संस्था बनाई। उसके उपरांत अंग्रेजों का संरक्षण पाकर सभी मुस्लिम नेताओं ने 30 दिसंबर 1960 को “ऑल इंडिया मुस्लिम लीग” की स्थापना की।

लीग में आगा खां, ख्वाज़ा सलीमुल्लाह और मोहम्मद अली जिन्ना समेत कई नेता शामिल थे। नवाब बकार उल मुल्क ने अलीगढ़ के विद्यार्थियों से कहा कि सभी मुसलमानों को अंग्रेजों के प्रति वफादार रहना चाहिए।

ब्रिटिश राज्य के लिए अपना खून बहाने और बलिदान करने के लिए तैयार रहें। ब्रिटिश शासन के लिए मुसलमानों को निष्ठा रखनी चाहिए। ऑल इंडिया मुस्लिम लीग का दूसरा अधिवेशन 1907 को कराची में बुलाया गया जहां इसे संविधान बनाया गया।

ऑल इंडिया मुस्लिम लीग का संविधान

  • सभी मुसलमानों के मन में ब्रिटिश राज्य के प्रति निष्ठा उत्पन्न करना
  • भारतीय मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा करना
  • मुसलमानों और दूसरे संप्रदाय के लोगों से मित्रता पूर्ण संबंध बनाना और शांति बनाए रखना

ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के कराची सम्मेलन में सर आगा खान को स्थाई अध्यक्ष बनाया गया। सर आगा खान अंग्रेजों के खास समझे जाते थे। 1908 ई० में सर अली इमाम को मुस्लिम लीग का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया।

कांग्रेस पार्टी से धीरे-धीरे मुस्लिम अलग होने लगे और ऑल इंडिया मुस्लिम लीग में शामिल होने लगे। लॉर्ड मिंटो के आग्रह पर लॉर्ड मार्ले ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के लिए सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की बात स्वीकार की। उसके बाद 1909 ई० में मार्ले मिंटो सुधार लागू किया गया।

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1909 के अधिनियम के बाद मुसलमानों ने अपने लिए पृथक निर्वाचन की मांग की। इससे हिंदुओं में चारों तरफ नाराजगी बढ़ गई। दोनों संप्रदाय के बीच द्वेष की भावना बढ़ने लगी। मुसलमानों को प्रत्यक्ष रूप से मतदान करने का अधिकार मिल गया।

डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि “पाकिस्तान के सच्चे जनक मोहम्मद अली जिन्ना या रहीमतुल्ला नहीं थे बल्कि लॉर्ड मिंटो थे” उनके संरक्षण में ही ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना हुई और पाकिस्तान का जन्म हुआ। पाकिस्तान नाम से एक नया देश बना कर भारत का बंटवारा किया गया

पाकिस्तान का गठन

14 अगस्त 1947 ई० में भारत का बंटवारा कर दिया गया और पाकिस्तान नाम का नया देश बनाया गया। मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग पाकिस्तान की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी। इसका नाम बदलकर “ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग” कर दिया गया।

धीरे धीरे इसकी लोकप्रियता कम होती गई। 1954 के चुनाव में मुस्लिम लीग ने सत्ता खो दी। 1960 में मुस्लिम लीग विभिन्न पार्टियों में टूट गई और 1970 तक पूरी तरह समाप्त हो गई।

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