हर चमकती वस्तु सोना नहीं होती All that Glitters is not Gold in Hindi

निबंध – “हर चमकती वस्तु सोना नहीं होती” Essay on All that Glitters is not Gold in Hindi

आज के समय में खूबसूरती को खूबसीरती से ज्यादा तवज्जो दी जाने लगी है। यह एक बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। हिंदी की एक कहावत है “हर चमकती वस्तु सोना नहीं होती”। इस कहावत का अर्थ सीधे शब्दों में यह है कि हर वह वस्तु जो चमकदार है वह सोना नहीं हो सकती। 

निबंध – हर चमकती वस्तु सोना नहीं होती Essay on All that glitters is not gold 

अगर असल ज़िन्दगी में उतार कर इसे देखा जाए तो यह कहावत शत प्रतिशत सत्य नज़र आती है। हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां पर लोगों को उनकी कद काठी और सूरत के आधार पर आंका जाता है, लेकिन ऐसा करना सरासर गलत तो है ही और यह धोखा खाने की संभावना को कई गुना बढ़ा भी देता है। 

इस बात को इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि मान लीजिए यदि आप किसी कार्य को करवाने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति का चुनाव करते हैं जो शक्ल, सूरत, कद और काठी से कुशल नज़र आ रहा हो। लेकिन कार्य करवाने के उपरांत आप यह पाते हैं कि यह व्यक्ति इस कार्य को करने के काबिल है ही नहीं। 

चलिए एक और उदाहरण को देखा जाए। मान लीजिए कि मैं किसी बस में चढ़ता हूँ। वहां यदि मैं यह चाहूंगा कि बस का चालक बहुत अधिक खूबसूरत हो और दिखने में अच्छा हो तो ऐसा चालक ढूंढने में मुझे कितनी परेशानी होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि बस के चालक के सुंदर होने या न होने, खूबसूरत होने या न होने और कद काठी में दुरुस्त होने या न होने से बस की चाल पर रत्ती भर भी प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। 

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अन्य उदारहण 

यदि आप इस कहावत को और अधिक बारीकी से समझना चाहते हैं तो निम्न उदाहरणों से समझ सकते हैं। 

  • सबसे पहले उदाहरण के तौर पर एक इंटरव्यू के कमरे को लीजिए। वहां आप पाएंगे कि कई सारे उम्मीदवार अच्छे कपड़ों में प्रभाव छोड़ने के लिए तैयार रहते हैं. लेकिन वहां किसी को भी केवल इस आधार पर कि वह खूबसूरत नजर आ रहा है या उसने अच्छे कपड़े पहने हैं, केवल इस आधार पर कार्य पर नहीं रखा जाता। सभी उम्मीद वारों के अच्छे कपड़े पहनने के बावजूद चुनाव केवल उस एक उम्मीदवार का होता है जो नौकरी के लिए मांगी गई योग्यता को पार कर पाता है। 
  • दूसरा उदाहरण फिल्म इंडस्ट्री से ले लीजिए। वहां आप देख सकते हैं कि हर साल कितने ही खूबसूरत नायक और नायिकाएँ अपना करियर बनाने आते हैं लेकिन जनता द्वारा सराहा केवल उन्ही को जाता है जो अपने अभिनय में दम खम रखते हैं। नवाजउद्दीन सिद्दकी इसका नवीनतम उदाहरण हैं। 
  • तीसरा उदारहण आपके करीब से लिया जाए। चलिए यह मान लेते हैं कि आप एक जन्मदिवस की पार्टी में हैं। वहां आपको तमाम तरह के तोहफे अनेकों लोगों द्वारा दिए गए हैं लेकिन क्या आप यह देख सकते हैं कि उन तोहफों में सबसे अधिक कीमती कौन सा है। बिना उन तोहफों को खोले यह अंदाजा लगा पाना नामुमकिन है। ऐसा इसलिए क्यूंकि हर तोहफे पर अनेकों प्रकार के चमकती हुई पन्नी चिपकाई गई होती है, जिससे कि वह सभी एक प्रकार के लगें। यह उदाहरण सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती। 
  • चौथे उदाहरण में बाजार की ओर रुख किजिए। वहां यह पाया जाएगा कि लगभग हर दूसरे उत्पाद को पहले उत्पाद के मुकाबले ज्यादा से ज्यादा सजाने की भरपूर कोशिश की जाती है। लेकिन क्या यह मुमकिन है कि लोग उस उत्पाद के गुणों को देखने के बजाय यह देखें कि यह उत्पाद किस तरह पैक किया गया है। नहीं, ऐसा बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है। इसी तरह यह दर्शाता है कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती। 
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नहीं चमकते महापुरुष

कई बार लोगों में यह धारणा भी रहती है कि यदि हम चमकने लगेंगे या हम अपने रूप को सुधार लेंगे तो शायद हमारा प्रभाव दूसरों पर काफी ज्यादा पड़ेगा। इस धारणा को तोड़ने के लिए महापुरुषों का उदारहण दिया जा सकता है। 

  1. सर्व प्रथम गांधी जी के बारे में यदि बात की जाए तो यह नज़र आता है कि गांधी जी सामान्य से दिखने वाले एक व्यक्ति थे, जो वस्त्र में केवल एक सफेद धोती पहना करते थे।गांधी  जी के जीवन का मूल मंत्र सादा जीवन उच्च विचार था। गौरतलब है कि उन्होने आजीवन खादी पहनने के लिए प्रचार भी किया था। लेकिन आजादी की लड़ाई में महानतम योगदान देने वाले महात्मा गांधी शुद्ध स्वर्ण थे हालांकि वे चमकते नहीं थे। यह दर्शाता है कि सोने को चमकने की आवश्यकता नहीं होती। 
  2. दूसरा उदाहरण मदर टेरेसा का है। मदर टेरेसा ने आजीवन सम्पूर्ण संसार में अपने नैतिक मूल्यों का प्रचार प्रसार किया, जिससे प्रभावित व्यक्ति असल मायनों में एक जिम्मेदार इंसान बना। लेकिन मदर टेरेसा हमेशा सादे लिबास में ही रहती थीं। मदर टेरेसा का व्यक्तित्व यह दर्शाता है कि यदि आप खूब सीरत हैं तो आपको खूब सूरत होने की कोई खास जरूरत तो बिल्कुल भी नहीं है। 
  3. तीसरा उदाहरण मिसाइल मैन कहे जाने वाले डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम का है। डॉक्टर कलाम हमेशा से ही सदा जीवन उच्च विचार का पालन करते थे, लेकिन यह चौंकाने वाला तथ्य है कि उनकी मृत्यु के उपरान्त उनके पास कपड़ों मे केवल 6 कोट थे। उनके बाल हमेशा ही बिखरे रहते थे और वे सूरत के मामले में अनाकर्षक थे, लेकिन उन्हे भारत रत्न उनके ज्ञान के कारण मिला। ऐसा ही होता है। लोगों को उनके व्यक्तित्व के कारण ही याद किया जाता है। 

निष्कर्ष 

“हर चमकती वस्तु सोना नहीं होती” इस कहावत को आज की दुनिया में सभी लोग बिल्कुल भूल ही चुके हैं। वे यह नहीं जानते या नहीं जानना चाहते हैं कि कोई भी इंसान अंदर से कितना अच्छा है या अंदर से कितना बुरा है, अपितु वे केवल इस बात पर जोर देते हैं कि इंसान बाहर से खूबसूरत नजर आना चाहिए। 

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यह काफी ज्यादा चौंकाने वाला है, लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ लोगों ने इस प्रकार के रवैये को अपनी जीवनशैली बना लिया है। वे किसी भी घटना के लिए केवल खूबसूरत लोगों का ही चुनाव करते हैं एवं उन्हे अपने जीवन में प्राथमिकता देते हैं। लेकिन इस प्रकार का चुनाव या प्राथमिकता, अंत में जाकर गलत ही साबित होता है। 

इस घटना का दूसरा पहलू जो नजर आता है कि क्या खूबसूरत लोग गलत होते हैं। नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। खूबसूरत लोग गलत नहीं होते, अपितु वे लोग जो केवल लोगों की खूबसूरती के आधार पर उन्हे सही मानते हैं, वे लोग गलत होते हैं। 

इस कहावत से सीख लेकर लोगों को बाहरी खूबसूरती पर कम ध्यान देकर अंदरूनी खूबसूरती पर ध्यान देना चाहिए, यह दुनिया को और भी अधिक बेहतर बनाने में सहायता करेगा। 

जिस दिन हम किसी के साथ उसकी कद, काठी, सूरत और शक्ल के आधार पर भेदभाव बंद कर देंगे उसके बाद हमें भी अपनी शक्ल, सूरत कद और काठी की परवाह करने की कोई जरूरत नहीं रहेगी। 

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