अमृता शेरगिल का जीवन परिचय – चित्रकार Amrita Sher Gil Biography in Hindi

अमृता शेरगिल का जीवन परिचय – चित्रकार Amrita Sher Gil Biography in Hindi

भारत में नई चित्रकला को जन्म देने का श्रेय अमृता शेरगिल को जाता है। इन्होंने अपने छोटे से जीवन काल में  चित्रकला को एक नई दिशा देने के साथ-साथ कई ऐसे कार्य किए हैं जिससे इनको भारत के इतिहास से पृथक करना अत्यंत कठिन है।

अमृता शेरगिल ने  कैनवास पर भारत की एक नई तस्वीर उकेरी। उन्होंने अपने प्रारंभिक काल की चित्रकला में भारतीय ग्रामीण महिलाओं तथा भारत की नारी के वास्तविक स्थिति को चित्रित करने का प्रयत्न किया था जो अत्यंत सराहनीय था।

अमृता शेरगिल का अपने चित्रकला के बारे में कहना था कि-” मैंने भारत की आत्मा को एक नया रूप दिया है, यह परिवर्तन सिर्फ विषय नहीं तकनीकी भी है।” इन्होंने कई ऐसे यथार्थवादी चित्रों की रचना की जो पूरे संसार में  चर्चा के केंद्र हैं।

अमृता शेरगिल का जीवन परिचय – चित्रकार Amrita Sher Gil Biography in Hindi

जन्म तथा शिक्षा Birth and Education

अमृता शेरगिल का जन्म हंगरी के बुडापेस्ट में  30 जनवरी 1913 को हुआ था। इनके पिता का नाम उमराव सिंह शेरगिल मजीठिया तथा माता का नाम  एंटोनी गोट्समन था। अमृता के पिता संस्कृत एवं फारसी के विद्वान तथा एक नौकरशाह थे जबकी इनकी माता यहूदी मूल की ओपेरा गायिका थी। अमृता अपने माता-पिता की दो संतानों में सबसे बड़ी थी।

इनकी छोटी बहन का नाम इंदिरा था। हंगरी के मशहूर इन्दोलोजिस्ट एर्विन बकते, अमृता के मामा थे। बकते ने अमृता की चित्रकारी में रुचि देखकर उसे आगे बढ़ने में मदद की। उन्होंने ही अमृता को  छवि के रूप में अपने नौकरों को लेने के लिए प्रोत्साहित किया। जब उनके पिता उमराव सिंह शेरगिल फ्रांस गए तो वह अपनी पुत्री की पढ़ाई के लिए पेरिस में प्रबंध किया।

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जब वे पेरिस के एक प्रसिद्ध आर्ट स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रही थी तो उन्हें अपने भारत के कुछ सम्बन्धी से मिलने की इच्छा हुई और 1921 में वह अपने परिवार के साथ शिमला में आ गए।  मात्र 9 वर्ष की आयु में अमृता अपनी बहन के साथ शिमला के गैएटी थिएटर में संगीत कार्यक्रम तथा नाटकों में भाग लेना प्रारंभ कर दिया था। कुछ समय बाद अपनी माता एंटोनी तथा बहन इंदिरा को साथ लेकर इटली चली गई। जहां उनका दाखिला फ्लोरेंस के एक आर्ट स्कूल में करा दिया।

जहां उन्होंने एक नग्न महिला का चित्रण किया जिससे उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। वह अब तक अनुभव कर चुकी थी कि उनके जीवन का वास्तविक एक ध्येय चित्रकार बनना ही है। इसलिए वह 16 वर्ष की आयु में अपनी माता के साथ पुनः पेरिस  चली गई। जहां उन्होंने कई प्रसिद्ध चित्रकारों जैसे पिएरे वैलंट और लुसिएँ साइमन और कई संस्थानों से चित्रकारी सीखी।

अपने शिक्षक लुसिएँ साइमन और चित्रकार मित्रों के प्रभाव में आकर उन्हें यूरोपीय चित्रकारी की प्रेरणा मिली। सन 1932 में उन्होंने अपनी पहली सबसे महत्वपूर्ण कृति ‘यंग गर्ल्स’ प्रस्तुत की जिसके परिणामस्वरूप उन्हें सन 1933 में पेरिस के ग्रैंड सालों का एसोसिएट चुन लिया गया। यह सम्मान पाने वाली वे पहली एशियाई और सबसे कम उम्र की कलाकार थीं।

करियर Career

सन 1934 में अमृता शेरगिल भारत वापस आकर शिमला में एक स्टूडियो आरंभ किया। 21 साल की उम्र में यह एक सकुशल और प्रतिभाशाली चित्रकार बन चुकी थी। पूरी तरह भारतीय ना होने के बावजूद भारतीय संस्कृति और भारतीय परंपराओं को जानने की बड़ी उत्सुक थी। इसीलिए जल्दी वह भारत की परंपरागत कलाओं के खोज में निकल पड़ी।

इसी दौरान उन्हें ब्रिटिश पत्रकार और लेखक मैल्कम मग्गरिज से प्रेम हो गया। वे कुछ समय तक शिमला के अपने पुश्तैनी घर पर रहीं। इसी बीच अमृता शेरगिल मुगल की चित्रकारी तथा अजंता की गुफाओं की चित्रकारी को देखकर बहुत प्रभावित हुई। फिर उनके चित्र में बदलाव आया और उन्होंने लंबे चौड़े चित्रों के स्थान पर छोटे प्राकृतिक और वास्तविक चित्रण का निर्माण प्रारंभ किया।

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सन 1937 में इन्होंने दक्षिण भारत की यात्रा की।  इस यात्रा के दौरान कई चित्रकलाएं प्रस्तुत की जैसे- ‘ब्राइड्स टॉयलेट’, ‘ब्रह्मचारीज’ और ‘साउथ इंडियन विल्लेजर्स गोइंग टू मार्केट’। इन रचनाओं में उनकी भारतीय संस्कृति साफ झलकती थी। उन्होंने जो कार्य किया उसका प्रभाव भारतीय कला पर उतना ही पड़ा जितना कि रविंद्रनाथ टैगोर और जामिनी रॉय के कार्यों का।

व्यक्तिगत जीवन Personal Life

अमृता शेरगिल ने सन 1937 में अपनी माता के एक संबंधी से विवाह किया जिसका नाम विक्टर इगान था और पेशे से डॉक्टर था। विवाह के कुछ समय पश्चात अमृता गोरखपुर अपने पैतृक स्थान चली  गई। गोरखपुर में रहकर अमृता ने अपने जीवन की कई महत्वपूर्ण पेंटिंग्स पर कार्य किया।

इस दौरान उनकी सबसे प्रसिद्ध चित्रकारी ‘टू वीमेन’ थी। ऐसा माना जाता है कि अमृता शेरगिल की बहुत से पुरुष और महिलाओं के साथ प्रेम संबंध थे। इन्होंने कई महिलाओं की चित्रकारी भी की है। इन्होंने अपनी ‘टू वूमेन’ चित्रकारी में अपनी प्रेमिका मारी लौइसे का चित्रण किया है ।

मृत्यु Death

सन 1941 में अमृता शेरगिल अपने पति के साथ लाहौर चली गई। वहां उनकी एक बहुत बड़ी चित्रकारी  प्रदर्शनी थी। परंतु एकाएक वह गंभीर बीमार पड़ गई और मात्र 28 वर्ष की आयु में ही 5 दिसम्बर 1941 को उनकी मृत्यु हो गई। इतनी छोटी सी आयु में ही उन्होंने इतने विविधतापूर्ण कार्य कर दिए थे। जिसके कारण उन्हें बीसवीं शताब्दी के महत्वपूर्ण कलाकारों में गिना जाता हैं।

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