अनंत चतुर्दशी 2020 Anant Chaturdashi Date, Puja Vidhi, Vrat Katha in Hindi

अनंत चतुर्दशी 2020 तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा करने की विधि Anant Chaturdashi 2019 Date, puja vidhi, vrat kaise kare, Chaturdashi vrat katha

हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी पूजा का बहुत महत्व है। इसकी पूजा करने से संकट दूर होते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राज्य जुए में हार गए थे और वनवास में कष्ट भोग रहे थे तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनको अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने की सलाह दी थी।

धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ पूरी निष्ठा से इस व्रत को किया था। उसके बाद उनके सभी संकट दूर हो गए थे।

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अनंत चतुर्दशी का महत्व Importance of Anant Chaturdashi

इस पर्व को जैन धर्म के लोग भी खुशी और उल्लास से मनाते हैं। यह पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इसे ही अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन विष्णु भगवान की पूजा की जाती है।

विष्णु भगवान को ही “अनंत” कहा जाता है। भक्त इनकी पूजा कर अपनी कलाई पर अनंत सूत्र बांधते हैं। इसमें 14 गांठे लगाई जाती हैं। ये 14 गांठें हरि द्वारा उत्पन्न 14 लोकों – तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना का प्रतीक हैं।

अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन किया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व का महत्व बहुत अधिक है। इसे सभी भक्त हर्षोल्लास से मनाते हैं। भगवान गणेश की प्रतिमा को अपने घर पर स्थापित करते हैं और अगले 10 दिनों तक उनकी पूजा और सेवा की जाती है।

गणपति बप्पा के गाने हर तरफ बजते रहते हैं। सभी भक्त भावुक होकर रोने लगते हैं। सुंदर झांकियां निकाली जाती हैं। लोग अबीर गुलाल लगाते है। प्रसाद बाँटते है। ऐसा मानना है कि जो भक्त लगातार 14 वर्षों तक अनंत चतुर्दशी का व्रत रखते हैं उनको विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।

उनको मोक्ष प्राप्त होता है। भगवान सत्य नारायण की तरह अनंत देव भी भगवान विष्णु को ही कहते हैं। इस पूजा में भगवान विष्णु का पाठ किया जाता है। जो भक्त यह पूजा करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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अनंत चतुर्दशी की कथा Anant Chaturdashi Vrat Katha

पौराणिक कथा के अनुसार कौण्डिन्य मुनि की पत्नी शीला अपने हाथ में अनंत सूत्र बांधती थी। वो अनंत देव(भगवान विष्णु) की पूजा करती थी। एक दिन कौण्डिन्य मुनि ने अपनी पत्नी के हाथ में आनंत सूत्र बंधा हुआ देखा। आशंकित होकर उसके बारे में पूछने लगे।

उनकी पत्नी ने बताया कि वह अनंत भगवान का पवित्र सूत्र है परंतु कौण्डिन्य मुनि ने उनका विश्वास नही किया और जादू टोने और वशीकरण का काम समझकर उस सूत्र को तोड़ दिया और आग में डालकर भस्म कर दिया।

इसके बाद जल्द ही उन पर अनेक विपत्तियां टूट पड़ी। उनकी सारी संपत्ति, धन, संपदा सब नष्ट हो गया। वह बहुत ही निर्धन हो गए और उन्होंने अपने पापों का प्रायश्चित करने का निर्णय किया। अनंत भगवान से क्षमा मांगने लगे और वन में जाकर तपस्या करने लगे।

जिस रास्ते वो जाते अनंत देवता का पता पूछते। बहुत खोजने पर भी कौण्डिन्य मुनि को अनंत भगवान का दर्शन नहीं हुआ। फिर उन्होंने अपने प्राण त्यागने का निर्णय कर लिया।

एक ब्राह्मण ने उनको आत्महत्या करने से रोका और चतुर्दशी अनंत देवता का पता बताया। स्वयं अनंत भगवान ने उनको दर्शन दिया और कहा कि तुम ने मेरे अनंत सूत्र का अपमान किया है। यही कारण है कि तुम बहुत ही निर्धन हो गए हो।

तुम 14 वर्षों तक अनंत व्रत का पालन करो। उसके बाद तुम्हारी नष्ट सारी संपत्ति तुमको वापस मिल जाएगी। कौण्डिन्य मुनि ने भगवान का प्रस्ताव खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। उन्होंने 14 वर्षों तक अनंत व्रत का पालन किया और समृद्धि बन गए।

अनंत चतुर्दशी व्रत की पूजा विधि Anant Chaturdashi Puja Vidhi

हम आपको इस पूजा की विधि बता रहे हैं। इसे करके आप भी पुण्य कमा सकते हैं और अपनी मनोकामना पूरी कर सकते हैं।

  •        भक्तों को यह पूजा करने के लिए सुबह सबसे पहले नित्य कर्म करने के बाद स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र धारण करना चाहिए
  •        भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए
  •        उसके बाद पूजा स्थल पर कलश की स्थापना करें
  •        कलश पर अष्टदल कमल की तरह बने बर्तन में अनंत भगवान की स्थापना करें। भगवान विष्णु की कोई फोटो आप सामने ही लगा लें
  •        पूजा स्थल पर बैठकर ही डोरी को केसर, हल्दी, कुमकुम से रंग कर अनंत सूत्र बनाएं
  •        उसके बाद उसमें 14 गांठे लगाएं
  •        भगवान विष्णु की फोटो पर अनंत सूत्र चढ़ा दें
  •        उसके पश्चात भगवान विष्णु और अनंत सूत्र का विधि विधान से पूजा करें
  •        इस मंत्र का आप सभी उच्चारण करें-

अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।

  •       पूजा करने के बाद बनाए हुए अनंत सूत्र को अपनी कलाई पर बांध लें। याद रहे कि पुरुष इस सूत्र को अपने दाएं हाथ पर बांधेंगे और महिलाएं अपने बाएं हाथ पर अनंत सूत्र को बांधेगी।
  •        इस पूजा के बाद आप ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें फल, कपड़े, दक्षिणा दान करें। उसके पश्चात अपने परिवार के साथ भोजन ग्रहण करे।
  •        इस पूजा में एक सेर आटे का मालपुआ या पूड़ी बनानी चाहिए और भगवान विष्णु को चढ़ाना चाहिए। इस पूजा में यमुना नदी, शेषनाग और अनंत भगवान (श्री हरि) की पूजा की जाती है। जो लोग यह पूजा करते हैं उनके संकट दूर हो जाते हैं। उनके घर लक्ष्मी आती है। घर में संपति धन ऐश्वर्य बढ़ती है और निर्धनता दूर होती है। गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन 10 दिनों बाद किया जाता है। कच्चे केले का हलवा पूजा में चढ़ाया जाता है

अनंत चतुर्दशी तिथि 2020

1 सितंबर 2010

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