समाज सुधारक बाबा आमटे का जीवन परिचय Baba Amte Biography in Hindi

समाज सुधारक बाबा आमटे का जीवन परिचय Baba Amte Biography in Hindi

मुरलिधर देवीदास आमटे, जिन्हें हम बाबा आमटे के नाम से जानते है, उनका जन्म 26 दिसंबर 1914 को हुआ था। वे एक सामाजिक कार्यकर्ता थे। उन्हें  विशेष रूप से कुष्ठ रोग से पीड़ित और गरीब लोगों के पुनर्वास और उनके अधिकार के लिए उन्हें जाना जाता था। बाबा आमटे और उनकी पत्नी साधना आमटे ने 1950 में कुष्ठ रोगियों के लिये आनंदवन नाम के एक संगठन की शुरूआत की।

यह अग्रणी काम उन्होंने एक आरोग्य के रूप में शुरू किया, उन्होंने पद्म विभूषण, गांधी शांति पुरस्कार, रामन मैगसेसे पुरस्कार, टेम्पलटन पुरस्कार और जमनालाल बजाज पुरस्कार सहित कई और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

समाज सुधारक बाबा आमटे का जीवन परिचय Baba Amte Biography in Hindi

प्रारंभिक जीवन Early Life

बाबा आमटे का जन्म 26 दिसंबर 1914 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले के हिंगणघाट शहर में श्री देवदास आमटे और श्रीमती लक्ष्मीबाई आमटे के यहाँ हुआ था। उनका जन्म एक अमीर परिवार में हुआ था। उनके पिता जिला प्रशासन और राजस्व संग्रह की जिम्मेदारियों के साथ एक ब्रिटिश सरकारी अधिकारी थे।  मुरलीधर ने अपने बचपन में बाबा का उपनाम हासिल किया था।

वह बाबा के रूप में जाना जाने थे। वह कोई “संत नहीं थे, बल्कि उनके माता-पिता उन्हें इस नाम से संबोधित किया करते थे। उनके पिता के आठ बच्चे थे। बाबा आमटे सबसे बड़े थे, उनके पिता एक बहुत बड़ी भूमि के मालिक थे।  बाबा आमटे का बचपन बहुत ही अच्छा बीता था। जब वह चौदह वर्ष के थे, तब उनके पास अपनी खुद की बंदूक थी।

जब वह गाड़ी चलाने लायक हो गये तब उनको एक स्पोर्ट्स कार दी गई थी। जो पंखों की त्वचा से ढकी हुई थी, उन्होंने कभी उन प्रतिबंधों की सराहना नहीं की जिन्होंने उन्हें ‘निम्न जाति’ के बच्चों के साथ खेलने से रोका। उनका परिवार जाति भेदभाव को नहीं मानता था। 

बाबा आमटे द्वारा अनोखे कार्य Social Reforming Works by Baba Amte

वह कानून में अच्छी तरह प्रशिक्षित थे, उन्होंने वर्धा में एक सफल कानूनी अभ्यास विकसित किया। वह जल्द ही ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता के लिए भारतीय संघर्ष में शामिल हो गए  और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं के लिए एक रक्षा वकील के रूप में कार्य करने लगे।

1942 के भारत आंदोलन में जिन नेताओं को कैद किया था। उन सभी को बाबा आमटे ने रिहा कराया, उन्होंने महात्मा गांधी के सेवाग्राम आश्रम में कुछ समय बिताया और अपने जीवन का बाकी समय गांधीवाद का अनुयायी बनकर निकाल दिया। उन्होंने गांधीवाद का पालन किया, जिसमें चरखा और खादी वस्त्र तथा कताई शामिल थी। जब गांधीजी को यह पता चला कि उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों से एक लड़की को बचाया है, जो उसको तंग कर रहे थे, इस बात पर गांधीजी ने उनका नाम – अभय साधक (सत्य के निडर साधक) रख दिया।

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उन दिनों, कुष्ठ रोग एक सामाजिक कलंक बना हुआ था। बाबा आमटे ने इस अविश्वास को दूर करने की कोशिश की और जनता को जागृत किया कि कुष्ठ रोग एक संक्रामक रोग नहीं है। उनका कहना था कि किसी भी बीमार व्यक्ति के संपर्क में अगर स्वस्थ्य व्यक्ति आता है, तो वह बीमार नहीं होगा  उन्होंने साथ ही साथ उन रोगियों का इलाज किया और उनकी सेवा भी की।

आमटे ने महाराष्ट्र, भारत में समाज के कुष्ठ रोगियों, विकलांग लोगों के उपचार के लिए तीन आश्रम की स्थापना की। 15 अगस्त 1949 को उन्होंने एक पेड़ के नीचे आनंदवन में एक अस्पताल की शुरूआत की। 1973 में, आमटे ने गडचिरोली जिले के मडिया गोंड जनजातीय लोगों के लिए काम किया और लोक बिरादरी प्रकल्प की स्थापना की।

आमटे ने अपना जीवन लोगों के लिये समर्पित किया, सबसे महत्वपूर्ण रूप से उन्होंने भारत आंदोलन पारिस्थितिक संतुलन, वन्यजीव संरक्षण, और नर्मदा बचाओ आंदोलन के महत्व के बारे में जन जागरूकता फैलाई। वर्ष 1971 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री के साथ सम्मानित किया गया था।

मेधा पाटकर के साथ नर्मदा बचाओ आंदोलन Baba Amte Narmada Bachao Andolan

1990 में, बाबा आमटे ने आनंदवन छोड़ दिया और मेधा पाटकर के नर्मदा बचाओ आंदोलन (“नर्मदा बचाओ”) आंदोलन में शामिल हो गए। वहां उन्होंने सरदार सरोवर बाँध बनाने के लिए संघर्ष किया और तट पर गन्दगी के फैलाव को रोकने की काफी कोशिशें की।

बाबा आमटे के सम्मानित पुरुष्कार Awards

  • 1971 में पद्मश्री बिभूषण।
  • 1978 में राष्ट्रिय भूषण।
  • 1999 में गाँधी शांती पुरुष्कार।
  • 1979 में जनमालाल बजाज पुरुष्कार।
  • 1986 में राजा राम मोहन राय पुरुष्कार।
  • 1991 में आदिवासी सेवक पुरुष्कार।
  • 1985 में रमण मेगसेसे पुरुष्कार।
  • 1980 में एन.डी. दीवान पुरुष्कार।
  • मानवता विकास में योगदान के लिए 1987 में जी.डी. बिरला इंटरनेशनल पुरुष्कार ।
  • नागपुर, महाराष्ट्र  द्वारा 1997 में महात्मा गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट पुरुष्कार।
  • 1998 में अपंगो के सहायता के लिये अपंग मित्र पुरस्कार।

बाबा आमटे के कुछ सुविचार  Some Inspirational Quotes by Baba Amte

  1. मैं एक महान नेता नहीं बल्कि एक आदमी बनना चाहता हूँ मैं ज़रूरतमंदों की सहायता करना चाहता हूँ।
  2. मैं अपने लिये नहीं बल्कि दूसरों के लिये जीना चाहता हूँ।
  3. मेरे जीवन में नर ही नारायण है।
  4. इन सभी सुविचारों को बाबा आमटे ने अपने जीवन में उतारा।

निधन Death

9 फरवरी 2008 को उनकी मृत्यु हो गई।

Featured Image Source – https://en.wikipedia.org/wiki/Baba_Amte

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