धीरूभाई अंबानी की जीवनी Biography of Dhirubai Ambani in Hindi

इस लेख में आप धीरूभाई अंबानी की जीवनी Dhirubhai Ambani Biography in Hindi पढ़ेंगे। इसमें आप उनका जन्म व प्रारंभिक जीवन, शिक्षा, शुरुवाती करियर, सफलता की कहानी, पुरस्कार, मृत्यु जैसी कई जानकारियाँ पढ़ सकते हैं।

धीरूभाई अंबानी की जीवनी Dhirubhai Ambani Biography in Hindi

सपने उन्हीं के पूरे होते हैं, जो सपने देखने की हिम्मत करते हैं। यह कथन एक ऐसे महान शख्सियत की है, जिन्होंने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय की दुनिया में अपना नाम एक सुनहरे अक्षर से दर्ज करवाया है। 

करोड़ों लोगों की प्रेरणा और आदर्श धीरूभाई अंबानी ने यह साबित कर दिया है, कि सपने देखने की कोई सीमा नहीं होती। वे एक सफल बिजनेसमैन थे, जिन्होंने अपने जीवन की शुरुआत शून्य से की थी।

गरीबी से उठ कर पकोड़े बेचने और पेट्रोल पंप पर काम करने से लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना करने तक का सफर कठिनाइयों से भरा था। 

लेकिन असफलता और कठिनाइयां ही सफलता की वास्तविक सीढ़ियां होती है। भारत के सबसे अमीर व्यक्ति की लिस्ट में रह चुके धीरूभाई अंबानी ने करोड़ों युवाओं को सफलता के लिए जोखिम उठाने की हिम्मत दी है।

एक मध्यमवर्गीय गुजराती परिवार में जन्मे धीरुभाई ने समाज की सबसे पुरानी धारणा को चुनौती देकर यह साबित किया है, कि अमीर बनने के लिए किसी शैक्षणिक संस्थान के डिग्री की आवश्यकता नहीं होती। 

धीरूभाई अंबानी खुद 10वीं फेल थे, लेकिन जब उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत की और उसे ऊंचाई तक पहुंचाया, तब तक उनके कंपनी में एक से एक पढ़े लिखे और टैलेंटेड लोग काम करते थे। 

बिना किसी पुश्तैनी विरासत के धीरूभाई अंबानी ने अपने जीवन के पहले व्यवसाय की शुरुआत की और इसे आसमान की बुलंदियों तक पहुंचाया। 

जिस व्यक्ति ने अपने पूरे जीवन में केवल ठेले लगा कर, पकौड़े तलना और पेट्रोल पंप पर छोटी मोटी नौकरी की थी, उनके संघर्ष व संकल्प के कारण जब उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, तब धीरुभाई के पास 62000 करोड़ रुपए से भी अधिक की धनराशि थी। 

यह वास्तव में किसी परीकथा से कम नहीं, क्योंकि ऐसे बड़े सपने देखने के लिए भी जोखिम उठाना पड़ता है और जिसने जीवन में जोखिम उठाना सीख लिया उसे सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता। 

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धीरूभाई अंबानी का जन्म व प्रारम्भिक जीवन Birth and early life of Dhirubhai Ambani 

गुजरात के जूनागढ़ में स्थित एक छोटे से गांव चोरवाड़ में 28 दिसंबर 1932 में धीरजलाल हीराचंद अंबानी का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम हीराचंद गोर्धनभाई अंबानी तथा माता का नाम जमुनाबेन अंबानी था। 

पिता पेशे से एक शिक्षक थे और मां एक सामान्य गृहणी थीं। घर में उन्हें प्यार से धीरू कहकर पुकारा जाता था। धीरूभाई अंबानी के साथ ही कुल मिलाकर 4 बच्चे और थे, जिनके पालन पोषण के लिए घर की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। 

एक अध्यापक होने के कारण पिता को इतने पैसे नहीं मिलते थे, जिससे कि वे अपने परिवार की सारी जरूरतें पूरा कर सकें। इस तरह विपत्तियों में उनका बचपन बीता।

धीरूभाई अंबानी की शिक्षा Education of Dhirubhai Ambani in Hindi

बचपन से ही धीरूभाई ने बहुत गरीबी देखी थी, इसलिए वे अपनी पूरी जिंदगी को एक ही परिस्थिति में गुजारना नहीं चाहते थे। शुरुआत में तो उनकी प्रारंभिक शिक्षा जूनागढ़ के ही एक स्थानीय स्कूल में हुई। 

जैसे वे बड़े हुए उन्होंने परिवार चलाने के लिए पिता की सहायता करने का निर्णय लिया और बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। जब वे दसवीं कक्षा में थे, तभी स्कूल छोड़ दिया। प्रारंभ में उन्होंने नाश्ता और फल बेच कर अपने जीवन के व्यवसाय की पहली शुरुआत की। 

धीरूभाई अंबानी का शुरुवाती करिअर व इतिहास Early career and history of Dhirubhai Ambani 

मंजिल तक पहुंचने के लिए सबसे पहले पहली सीढ़ी चढ़नी पड़ती है। धीरूभाई अंबानी ने अपने जीवन के पहले व्यवसाय की शुरुआत एक सामान्य काम से किया। उन्होंने जैसे ही अपनी पढ़ाई लिखाई छोड़ी, तत्पश्चात फल और नाश्ते की लारी पर वे काम करने लगे। 

जैसे-तैसे करके वे थोड़ी बहुत कमाई कर लेते थे, लेकिन वह पर्याप्त मात्रा में नहीं होता था। अपनी परिस्थिति को अस्वीकार करके उन्होंने खूब संघर्ष किया और एक अवसर खोज निकाला, जहां उनके घर से थोड़ी दूरी पर धार्मिक पर्यटन गिरनार पड़ता था। 

उन्होंने अपने मस्तिष्क का उपयोग करके पकोड़े और खाने पीने की छोटी मोटी चीजें वहां बेचना शुरू किया। पर्यटन स्थल होने के कारण वहां दिन में कई लोग आया करते थे, जिससे धीरूभाई अंबानी को अच्छा मुनाफा मिल जाता था।

लेकिन ऐसे मौसमी व्यवसाय में कभी-कभार ही उन्हें लाभ होता था। यह व्यवसाय भी लंबे समय तक नहीं चल सका और धीरूभाई को कई असफलताओं के बाद उनके पिता ने उन्हें व्यवसाय छोड़कर नौकरी करने की सलाह दी। 

महज 17 वर्ष की उम्र में वे 1949 में अपने बड़े भाई रमणीक लाल, जोकि यमन में नौकरी करते थे वहां उनके पास चले गए। यमन में उन्हें पेट्रोल पंप पर नौकरी मिली, जहां उनकी तनख्वाह प्रतिमाह ₹300 थी।

‘ए. बेस्सी एंड कंपनी’ नामक उस कंपनी में धीरूभाई ने कुछ समय तक काम किया। कंपनी ने धीरूभाई अंबानी के काबिलियत को देखते हुए उन्हें फिलिंग स्टेशन में एक मैनेजर बना दिया। कुछ सालों तक वे यमन में ही नौकरी करते रहें। 

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तत्पश्चात 1954 में भारत वापस चले गए। छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने यमन में रहकर अपनी पहली नौकरी की, तब उन्हें खुद पर यह विश्वास हो गया था कि वह भी बड़े आदमी बन सकते हैं। 

घर वापस आने के बाद ही धीरूभाई अंबानी ₹500 लेकर मुंबई चले गए। जमीनी स्तर पर काम करते करते वे बाजार को अच्छी तरह समझने लगे थे। उस समय भारत में पॉलिस्टर की बहुत मांग थी और विदेशों में भारतीय मसालों की। 

उन्होंने इस अवसर को  स्वीकार किया, जिसके बाद ‘रिलायंस कॉमर्स कॉरपोरेशन’ नामक अपनी पहली कंपनी की स्थापना धीरूभाई अंबानी ने की। 

कंपनी ने भारत में पॉलिएस्टर तथा विदेशों में मसाले बेचने की पहली शुरुआत की। रिलायंस कॉमर्स कॉरपोरेशन को खड़ा करने में धीरूभाई अंबानी ने अपनी लगभग सारी जमा पूंजी लगा दी थी। 

जोखिम उठाकर जिस तरह उन्होंने यह पहल की वह अपने लक्ष्य में पूरी तरह से कामयाब रहे।  वर्ष 2000 के दौरान भारत के सबसे रईस व्यक्ति की सूची में धीरूभाई अंबानी सबसे पहले नंबर पर आए। 

धीरूभाई अंबानी की सफलता की कहानी Success Story of Dhirubhai Ambani in Hindi

रिलायंस कॉमर्स कॉरपोरेशन की नींव रखने वाले धीरूभाई अंबानी ने अपनी कंपनी को बहुत ऊंचाइयों तक पहुंचाया। भारत सहित विदेशी बाजारों में भी मसालों और पॉलिएस्टर के व्यवसाय से कंपनी को भारी मुनाफा मिला। 

इसके बाद उन्होंने सूत कारोबार के व्यवसाय में प्रवेश किया। जल्द ही इस क्षेत्र में भी धीरुभाई को सफलता मिली और वे देखते ही देखते सबसे बड़े बॉम्बे सूत व्यापारी संघ के सर्वे सर्वा बन गए। 

1966 में रिलायंस टेक्सटाइल भी स्थापित किया गया। उसी वर्ष में अहमदाबाद के नरोदा में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने टेक्सटाइल मिल को स्थापित किया।

1966 में धीरुभाई ने अपने बड़े भाई रमणिकलाल अंबानी के बेटे विमल अंबानी के नाम पर ‘विमल’ ब्रांड की शुरुआत की। बहुत कम समय में विमल ब्रांड को देश में पहचाना जाने लगा। विमल ब्रांड के कपड़े बहुत मशहूर हुए। 

कुछ समय बाद टेक्सटाइल मार्केट, दूरसंचार और पेट्रोलियम जैसे सेवाओं को अस्तित्व में लाकर धीरूभाई अंबानी भारत के जाने-माने व्यापारी बन गए। 

अंबानी का ओहदा अब इतना बढ़ चुका था, कि उन पर सरकार की नीतियों को गुप्त रूप से प्रभावित कर उनसे लाभ लेने के आरोप लगाए जाने लगे। इसके अलावा धीरूभाई अंबानी की सफलता के पीछे लोग तरह-तरह के आरोप लगाते थे। 

धीरूभाई अंबानी के सम्मान व पुरस्कार Honours and Awards of Dhirubhai Ambani in Hindi

  • 29 मई 1998 में द एक्‍सरर्प्‍ट फ्रॉम एशिया वीक 1998
  • 16 अक्‍टूबर 1998 में एशिया वीक हॉल ऑफ फेम    
  • 15 जून 1998 में व्‍हार्टन डीन मॉडल फोर धीरूभाई अंबानी    
  • 29 जून 1998 में बिजनेस वीक स्‍टार ऑफ द एशिया    
  • 26 जुलाई 1999 में टीएनएस-मोड सर्वे- इंडियाज मोस्‍ट एडमायर्ड सीईओ
  • 6 दिसम्‍बर 1999 में बिजनेस बॉरो- इंडियन बिजनेसमैन ऑफ द ईयर    
  • 31 अक्‍टूबर 1999 में बिजनेस इंडिया-बिजनेस मैन ऑफ द ईयर    
  • 8 नवम्‍बर 2000 में कैमटेक फाउंडेशन- मैन ऑफ द सेंचूरी अवार्ड
  • 24 मार्च 2000 में फिक्‍की- इंडियन आंत्रप्रेन्‍याेर ऑफ द 20 सेंचुरी
  • 26 मई 2000 में द एक्‍सरर्प्‍ट फ्रॉम एशिया वीक 2000
  • 8 जनवरी 2000 में द टाइम्‍स ऑफ इंडिया- क्रियेटर ऑफ द वेल्‍थ ऑफ द सेंचूरी
  • 10 अगस्‍त 2001 में द इकोनॉमिक टाइम्‍स लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्‍कार    
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धीरूभाई अंबानी का निजी जीवन Personal life of Dhirubhai Ambani

धीरू भाई अंबानी ने भले ही अपनी स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़कर शिक्षा से अलगाव कर लिया। लेकिन उन्होंने कभी भी नई चीजें सीखना नही छोड़ा। कहा जाता है कि वह ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ने के शौकीन थे। 

धीरूभाई अंबानी का मानना था कि ज्ञान केवल स्कूल और कॉलेज द्वारा दिए गए डिग्री तक ही सीमित नहीं रहता। उनका विवाह कोकिलाबेन से हुआ, जिसके बाद उनके 4 बच्चे हुए हैं- मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, नीता कोठारी और दीप्ति सालोंकर। 

एक साक्षात्कार में धीरूभाई अंबानी से यह प्रश्न किया गया कि वे अपनी पूरी दिनचर्या में कितने घंटे काम करते हैं, इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि वह कभी भी 10 घंटे से ज्यादा काम नहीं करते। उनके निजी जीवन के बारे में पूछे जाने के पश्चात उन्होंने यह बताया था, कि उन्हें पार्टी करना बिल्कुल भी पसंद नहीं। 

इसके बजाय वे अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करना ज्यादा पसंद करते हैं। धीरूभाई अंबानी अक्सर ट्रैवल करने का काम अपने कर्मियों पर छोड़ देते थे, क्योंकि उन्हें घूमने फिरने में दिलचस्पी नहीं थी। 

धीरूभाई अंबानी की मृत्यु Dhirubhai Ambani’s Death

धीरूभाई अंबानी को हृदय रोग की समस्या थी। 1986 में उन्हें दो बार दिल का दौरा पड़ चुका था। 24 जून 2002 के दिन एक बार फिर से धीरुभाई को दिल का दौरा पड़ने के कारण उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 

ह्रदय रोग के कारण उनका दायां हाथ लकवा ग्रस्त हो चुका था। 6 जुलाई 2002 में धीरूभाई अंबानी का देहांत हो गया। 

धीरूभाई अंबानी के विचार Thoughts of Dhirubhai Ambani in Hindi

  • बड़ा सोचो, जल्दी सोचो, आगे सोचो क्योंकि विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है। 
  • समय सीमा पर काम ख़तम कर लेना काफी नहीं है, मैं समय सीमा से पहले काम ख़तम होने की अपेक्षा करता हूँ।
  • जो सपने देखने की हिम्मत करते हैं, वो पूरी दुनिया को जीत सकते हैं ।
  • अगर आप स्वंय अपने सपनों का निर्माण नहीं करोगे तो कोई दूसरा आपका उपयोग अपने सपनों का निर्माण करने में करेगा।
  • एक लक्ष्य हमारी पहुँच के अन्दर ही होता है, हवा में नहीं होता। इसे प्राप्त किया जा सकता है।

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