मलाला युसुफ़ज़ई की जीवनी Biography of Malala Yousafzai in Hindi

मलाला युसुफ़ज़ई की जीवनी Biography of Malala Yousafzai in Hindi

युसूफ मलाला को आप सभी जरुर जानते होंगे। वह विश्व की कम उम्र की सबसे प्रसिद्ध महिला है। इनको 2014 में शांति का नोबेल पुरस्कार कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से दिया गया था। पाकिस्तान में तालिबानी आतंकवादियों ने इनकी हत्या का प्रयास किया क्यूंकि मलाला लड़कियों को पढ़ाने का काम कर रही थी जबकि तालिबान ने पढ़ाई पर रोक लगाई हुई थी।

अक्टूबर 2012 में स्कूल से लौटते वक्त उन पर गोली बारी की गयी जिसमे वो गम्भीर रूप से घायल हो गयी थी। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ऐ-तालिबान पाकिस्तान (TPP) आतंकवादी संगठन ने ली थी। बाद में पाकिस्तानी सरकार ने मलाला का इलाज ब्रिटेन में ले जाकर करवाया था जिसमे उनको जिन्दा बचा लिया गया था। 2013, 2014 और 2015 में टाइम्स मैगजीन ने उनको विश्व की 100 सबसे अधिक प्रभावशाली महिला की सूची में शामिल किया है।

आज वो करोड़ो लोगो की प्रेरणा बन चुकी है। उनके सम्मान में संयुक्त राष्ट्र ने प्रत्येक वर्ष 12 जुलाई को “मलाला दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की है। संयुक्तराष्ट्र के मुख्यालय में “वैश्विक शिक्षा का स्तर” विषय पर भाषण भी दे चुकी है। उनके सम्मान में सभी लोगो ने खड़े होकर तालियाँ बजाई। कनाडा सरकार ने उनको अपने देश की नागरिकता देने का प्रस्ताव दिया है।

मलाला युसुफ़ज़ई की जीवनी Biography of Malala Yousafzai in Hindi

परिचय संक्षेप में INTRODUCTION IN SHORT

पूरा नाममलाला युसुफ़ज़ई
जन्म दिनांक12 जुलाई 1997
जन्मस्थानमिंगोरा, पाकिस्तान
पिता का नामजियाउद्दीन युसुफ़ज़ई
माता का नामटूर पकाई युसुफ़ज़ई
भाइयों का नामखुशहाल और अटल
उम्र21 वर्ष
धर्ममुस्लिम (पठान)
पुरस्कारशांति का नोबेल पुरस्कार (2014), अंतर्राष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार (2013), पाकिस्तान का राष्ट्रीय शांति पुरस्कार
पेशामहिला अधिकार कार्यकर्ता, शिक्षाविद
राष्ट्रीयतापाकिस्तानी
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जन्म BIRTH

मलाला युसुफ़ज़ई का जन्म 12 जुलाई 1997 को पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रान्त के स्वात जिले में हुआ था। वो बच्चो के अधिकारों की कार्यकर्ता है। उन्होंने तहरीक-ऐ-तालिबान पाकिस्तान आतंकवादी संगठन के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई थी। 13 साल की उम्र में उन्होंने ब्लॉगिंग करके अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई। उन पर हमला होने के बाद वो मीडिया द्वारा सुर्ख़ियों में आ गयी। मलाला के पिता जियाउद्दीन युसुफ़ज़ई शिक्षाविद है और “खुशहाल पब्लिक स्कूल” स्कूल की श्रंखला चलाते है। मलाला शुरू से पढ़ना लिखना पसंद करती थी। उन्होंने विरोध जताते हुए बोला की “आतंकवादियों की हिम्मत कैसे हुई मेरी शिक्षा छिनने की”

आतंकवादियों द्वारा हत्या का प्रयास TRIED TO BE KILLED BY TERRORISTS

तालिबान नही चाहता था की लड़कियाँ पढ़ाई करे। मलाला इसका विरोध शुरू से कर रही थी। उन्होंने 11 वर्ष की छोटी उम्र में डायरी लिखना शुरू कर दी थी। 2009 में उन्होंने बीबीसी उर्दू के लिए “गुल मकई” उपनाम से डायरी लिखना शुरू किया। उन्होंने तालिबान के अत्याचारों का बेबाकी से वर्णन किया। उनको इस आतंकवादी संगठन की तरफ से बराबर धमकियां मिलने लगी।

स्वात घाटी में 2007 में लड़कियों के स्कूल जाने पर रोक लगा दी गयी थी जिस वजह से मलाला कई साल तक स्कूल पढ़ने नही जा सकी। लड़कियों के खेलने, टीवी देखने पर पाबंदी लगा दी गयी थी। 9 अक्टूबर 2012 के दिन उन पर हमला हुआ। जब मलाला बस से घर लौट रही थी तभी एक तालिबानी आतंकवादी बस में नकाब लगाकर घुस गया।

“बताओ तुम में से मलाला कौन है वरना मैं सबको गोली मार दूंगा” वो चिल्लाया

मलाला की पहचान करके आंतकवादी ने गोली चला दी जो मलाला के सर और गले में लगी। इस हमले में कायनात और शाजिया नाम की 2 लड़कियाँ भी घायल हो गयी। गोलीबारी के फौरन बाद उनको हवाई जहाज से पेशावर के मिलिट्री होस्पिटल ले जाया गया। उनके ओपरेशन में 5 घंटा का लम्बा समय लगा। इस हमले के बाद तालिबान की सब तरफ निंदा होने लगी।

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15 अक्टूबर 2012 को मलाला को “Queen Elizabeth Hospital, London” में भर्ती किया गया। 2 दिन बाद वो कोमा से बाहर निकली। उनकी जान बचा ली गयी। 3 जनवरी 2013 को वह पूरी तरह स्वस्थ्य होकर अस्पताल से बाहर निकली। मलाला पर हमला हुआ क्यूंकि उन्होंने आतंकवादियों का फतवा नही माना। इलाज के बाद उन्होंने बचा लिया गया।

पुरस्कार AWARDS

19 दिसम्बर 2011 में मलाला युसुफ़ज़ई को शांति को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान सरकार द्वारा “राष्ट्रीय शांति पुरस्कार” दिया गया। मीडिया ने उनको हाथो हाथ लिया। उनको सम्मान देने के लिए सरकारी गर्ल्स सेकेंडरी स्कूल, मिशन रोड, का नाम बदलकर “मलाला युसुफजई सरकारी गर्ल्स सेकेंडरी स्कूल” कर दिया गया।

2013 में इनको किड्स राइट्स संगठन ने अंतर्राष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह संस्था बच्चों के अधिकारों के लिए काम करती है। 2013 में यूरोसंसद द्वारा मलाला को वैचारिक स्वतन्त्रता के लिए साख़ारोव पुरस्कार प्रदान किया गया है।

बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष में महती भूमिका निभाने के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया है। मैक्सिको सरकार ने 2013 में ही इनको समानता पुरस्कार दिया। यह पुरस्कार जाति, उम्र, लिंग में भेदभाव के कारण शिक्षा के अधिकार के हनन से संघर्ष करने के लिए दिया जाता है।

2013 में ही संयुक्त राष्ट्र ने मलाला यूसुफजई को 2013 का मानवाधिकार सम्मान (ह्यूमन राइट अवॉर्ड) दिया। यह पुरस्कार मानवाधिकारो की रक्षा करने के लिए हर 5 साल में दिया जाता है। नेल्सन मंडेला और अमेरिकी राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर यह पुरस्कार पा चुके है। 10 दिसम्बर 2014 को मलाला को समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी द्वारा संयुक्त रूप से शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया। उन्होंने यह पुरस्कार मात्र 17 वर्ष की कम उम्र में प्राप्त किया। मलाला यूसुफजई यह पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की विजेता बन गयी है।

खुद के जीवन पर लिखी किताब WRITTEN A BOOK BASED ON HER LIFE

मलाला ने खुद के जीवन पर किताब “I am Malala : the girl who stood up for education and was shot by the Taliban” नाम से लिखी है।

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मलाला युसुफ़ज़ई के अनमोल विचार  MALALA YOUSAFZAI QUOTES

  •        “एक किताब, एक कलम, एक बच्चा और एक शिक्षक दुनिया बदल सकते है”
  •        “मैं उस लड़की के रूप में याद किया जाना नहीं चाहती जिसे गोली मार दी गयी थी। मैं उस लड़की के रूप में याद किया जाना चाहती हूँ जिसने खड़े हो कर सामना किया”
  •        “अगर आप किसी व्यक्ति को मारते हैं तो ये दिखता है कि आप उससे डरे हुए हैं”
  •        “बहुत सारी समस्याएं हैं, लेकिन मुझे लगता है इन सभी समस्याओं का समाधान है; वो बस एक है, और वो शिक्षा है”
  •        “शिक्षा न ईस्टर्न है न वेस्टर्न। शिक्षा शिक्षा है और ये हर एक मानव का अधिकार है”
  •        “मेरी कहानी दुनिया भर के हज़ारों बच्चों की कहानी है। मुझे आशा है ये औरों को अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा देगी”
  •        “इस्लाम हमसे कहता है हर एक लड़की और लड़का शिक्षित किया जाना चाहिए। मुझे नहीं पता तालिबान ये क्यों भूल गया है”
  •        “मैं उस तालिबानी से भी नफरत नहीं करती जिसने मुझे गोली मारी। अगर मेरे हाथ में गन भी हो और वो मेरे सामने खड़ा हो जाए, मैं उसे नहीं मरूंगी”

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