बोल्शेविक क्रांति का इतिहास Russian Revolution History in Hindi

इस लेख में हम आपको बोल्शेविक क्रांति का इतिहास (Russian Revolution History in Hindi) के बारे में बताया है। इसमें आप बोल्शेविक क्रांति का क्या अर्थ है, कब और कहाँ हुई, इसके मुख्य कारण क्या थे, इसका नेतृत्व किसने किया और इसके प्रभाव क्या थे के विषय में जान सकते हैं।

Image credit – rosaluxemburg flickr (CC BY-ND 2.0)

बोल्शेविक क्रांति का इतिहास Russian Revolution History in Hindi

अगर हम बोल्शेविक क्रांति की बात करें, तो 1917 में हुई रूस की क्रांति को ही बोल्शेविक क्रांति के नाम से भी जाना जाता है। ये घटना विश्व के दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है।

रूसी क्रांति को ही विश्व की पहली समाजवादी क्रांति के रूप में मान्यता दी जाती है, क्योंकि यही वो समय था जब मार्क्स ने समाजवाद की विचारधारा के बारे  में दुनिया को बताया था।  

फ़्रांस की क्रांति की वजह से पूरे यूरोप में स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे की भावना के प्रचार से लोगों के जीवन पर एक गहरा प्रभाव पड़ा। इसका असर रूस की क्रांति पर पूरी तरह से दिखाई दे रही थी क्योंकि ये क्रांति अब तक की सारे राजनैतिक क्रांतियों की तुलना में बहुत बड़ी थी। 

इस क्रांति ने न केवल जार निकोलस के तानाशाही और स्वेच्छाकारी, एकतंत्री शासन की समाप्ति किया इसके अलावा इस क्रांति के कारण जमींदारों, पूँजीपतियों और सामंतो का भी अंत हुआ। वहीँ दूसरी तरफ निचले वर्ग के लोगों जैसे किसानों और मज़दूरों को सत्ता स्थापित हुई।

बोल्शेविक क्रांति का अर्थ? Bolshevik Revolution Meaning in Hindi

दोस्तों अगर हम बोल्शेविक शाब्दिक के अर्थ की बात करें तो इसे रूसी भाषा में इसका अर्थ होता है बहुसंख्यक या बहुमत। 

बोल्शेविक, रूसी सामाजिक डेमोक्रेटिक मजदूर पार्टी (Russian Social Democratic Labour Party)  का टूटा हुआ भाग था, ये पार्टी बहुसंख्यक थी। अर्थात जिसमे लोगों की संख्या अधिक थी।

और पढ़ें -  लोक अदालत पर निबंध Essay on Lok Adalat in Hindi (1000 Words)

रूस में 1856-1859 क्रीमिया युद्ध और किसानों के गुलामी के विरुद्ध युद्ध में मिली हार के पश्चात रूस में पूँजीवाद  और औद्योगिक की शुरुआत हुई। कुछ ही वर्षो में रूस दूसरी साम्राज्यवादी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करने लगा और इस सदी के अंत तक रूस एक ताक़तवर साम्राज्यवाद देश के रूप में सामने आया। 

उस समय रूस में पूर्ण रूप से सामाजिक असमानता फैली हुई थी, समाज तीन भागों में बंटा हुआ था। पहले वर्ग में कुलीन वर्ग या उच्च वर्ग आता था। इस वर्ग को राज्यों के अधिकार प्राप्त थे। दूसरे वर्ग में मध्यम वर्ग के लोग जिनमे जमींदार, पूँजीपति और व्यापारी आते थे। तीसरे वर्ग में किसान, मज़दूर और अन्य निचले वर्ग के लोग आते थे।

रूस में जार निकोलस की स्वेच्छाचारी और निरंकुश शासन के कारण न तो जनता के लिए कोई अधिकार थे और न ही राजनैतिक स्वतंत्रता थी। इस समय उदारवादी हुआ करते थे वो कमजोर थे, लेकिन मार्क्सवाद धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा था।

इस समय मार्क्स के विचारधारा को मानने वालों को लोकतंत्रवादी  के रूप में जाना जाता था। वैसे तो इनके अलग अलग समूह थे लेकिन इनकी विचार धारा एक जैसी थी। 

1898 में बनाई गई रूसी डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी का 1903 में विभाजन हुआ जिसके परिणामस्वरूप पार्टी दो भागों में बंट गई पहली बोल्शेविक(बहुसंख्यक) और दूसरी मेन्शेविक(अल्पसंख्यक)

ये दोनों समाजवादी क्रांति में अपना योगदान दे रहे थे, लेकिन इनके विचारों में कुछ फर्क थे। बोल्शेविक चाहते थे कि श्रमिकों और किसान इस नेतृत्व करे जबकि मेन्शेविक चाहते थे कि पूँजीवादी इसका नेतृत्व करें। 

लेकिन अंत में लेनिन ने इसका नेतृत्व किया और 1917 के समय तक लेनिन इस क्रांति के  नेतृत्व कर्ता बन चुके थे। जार निकोलस की शासन का तख्तापलट करके 1917 में पूँजीवादी के समर्थन से मेन्शेविक सरकार का हिस्सा बन गई। 

रूस के पुराने कैलेण्डर के अनुसार 25 अक्टूबर या 7 नवम्बर (नये कैलेण्डर के अनुसार) को लगातार तीन दिनों के कड़ी संघर्ष के बाद बोल्शेविक को विजय मिली और 1917 के फ़रवरी महीने में बनी अस्थायी सरकार को अंत में समर्पण कर दिया। चूँकि ये क्रांति अक्तूबर के महीने में हुई सफल हुई इसलिए इसे अक्टूबर क्रांति के नाम से भी जाना जाता है।

और पढ़ें -  एक किसान की आत्मकथा Autobiography of a Farmer in Hindi

बोल्शेविक क्रांति कब और कहाँ हुई थी? Russian Revolution Date and Place in Hindi

दोस्तों अगर हम बोल्शेविक क्रांति कब और कहाँ हुई इसके बारे में बताएं, तो इस क्रांति की शुरुआत रूस में हुई थी। फ्रांस की क्रांति से प्रभावित रूस के लोगों ने बोल्शेविक क्रांति की शुरुआत की थी। 

ये क्रांति दो भागों में हुई थी पहली मार्च 1917 में और दूसरी अक्टूबर 1917 में हुई थी। अक्टूबर के अंत तक लेनिन के नेतृत्व में इस इस क्रांति को विजय प्राप्त हुआ।

बोल्शेविक क्रांति के मुख्य कारण क्या थे? Reasons of Russian Revolution in Hindi

बोल्शेविक क्रांति होने के कारणों के कई कारण थे जिनमे मुख्य इस प्रकार है-

  • इस समय रूस में जार निकोलस की निरंकुश और स्वेच्छाचारी शासन था। ये अपनी जनता को किसी भी प्रकार के अधिकार देने के लिए तैयार नही था। इसीलिए ये इस क्रांति के सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक है।
  • रूस में सामाजिक और आर्थिक रूप से विषमता थी, जहाँ उच्च वर्ग के लोगो को सारे अधिकार प्राप्त थे और निचले वर्ग के लिए कोई अधिकार नही थे। जिसके कारण निचले वर्ग के किसानों और मज़दूरों की स्थिति बहुत ही दयनीय थी।
  • 1905 में रूस और जापान के बीच हुआ युद्ध भी इस क्रांति का एक मुख्य कारण है, क्योंकि इस युद्ध में रूस की बुरी तरह से हार हुई और जापान ने रूस के कुछ हिस्सों पर अधिकार कर लिया।
  • प्रथम विश्व युद्ध(First World War) ने भी इसमें एक अहम भूमिका निभाई। रूस के साम्राज्यवाद नीति के चलते इसका प्रथम विश्व युद्ध में शामिल होना। ये लोगो के अंसतोष का मुख्य कारण था।
  • प्रथम विश्व युद्ध (First World War) में बड़ी संख्या में लोगों को सेना में भर्ती, सैनिकों के वेतन नही दिया और इस युद्ध के कारण 1916 और 1917 में भोजन की कमी भी इस क्रांति का एक कारण है।
  • रूस में किसानों और मज़दूरों की संख्या अधिक थी, लेकिन उनकी स्थिति बहुत ही दयनीय थी। 
  • रूस में समाजवादी विचारधारा के प्रचार से लोगों के बीच एक समाजवादी की लहर आ गई इसमें रूसी और गैर-रूसी दोनों जनता शामिल थे।  
और पढ़ें -  पेड़ों का महत्व निबंध Essay on The Importance of Tree in Hindi

पढ़ें: प्रथम, द्वितीय, त्रितया विश्व युद्ध की पूरी जानकारी

बोल्शेविक क्रांति का नेता कौन था? (जिसने नेतृत्व किया) Who Was the Leader of Russian Revolution?

अगर इस रूसी क्रांति के नेता की बात की जाये, तो इसका नेतृत्व व्‍लादिमीर लेनिन ने किया। लेनिन के ही नेतृत्व में रूस को जार निकोलस की निरंकुश और स्वेच्छाचारी शासन से मुक्त कराने में मुख्य भूमिका निभाई। 

लेनिन के भाई को जार के हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने के आरोप में फाँसी के के बाद लेनिन समाजवादी क्रांतिकारियों में पास आ गए। आगे चलकर 1893 में ये मार्क्सवाद के वरिष्ठ कार्यकर्ता बन गए। इसके बाद लेनिन को 1897 में देशद्रोह के आरोप में तीन साल के लिए जेल भी जाना पड़ा। 

समय के साथ लेनिन समाजवादी नेताओं में प्रिय हो गए, और 1917 में लेनिन के द्वारा बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व किया और रूस को पूँजीवाद के शासन की समाप्ति की और समाजवाद की स्थापना की।

बोल्शेविक क्रांति का प्रभाव Effects of Russian Revolution in Hindi

बोल्शेविक क्रांति के कई प्रभाव सामने आये, जो इस प्रकार है-

  • इस क्रांति के परिणामस्वरूप रूस में राजतंत्र और चर्च की शक्तियों की समाप्ति और सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ की स्थापना।
  • ब्रेस्ट लिटोवस्क की संधि (Treaty of Brest Litovsk) के तहत रूस प्रथम विश्व युद्ध से अलग हो गया। 
  • उत्पादन और वितरण के साधनों पर राज्यों का नियंत्रण हुआ।
  • वैज्ञानिक तकनीकी से आर्थिक विकास की ओर अग्रसर।
  • रूस में कुलीन और सामंत वर्गों की समाप्ति हुई।
  • रूस मे लैंगिक और वर्ग भेदभाव की समाप्ति। 
  • यह शिक्षा का प्रचार प्रसार किया गया, 16 वर्ष की उम्र तक बच्चो को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का नियम बनाया गया।

निष्कर्ष Conclusion

रूस में बोल्शेविक क्रांति के कारण ही ये एक विश्व शक्ति के रूप में दुनिया के सामने आया। इस क्रांति के बाद समाजवादी विचारधारा दुनिया के सामने आई और विभिन्न देशों ने इसे अपनाई भी।

जिससे विश्व के विभिन्न देशों में ऐसे समाज की स्थापना हुई जहाँ वर्गों को महत्व नही दिया गया तथा सबको समान अधिकार प्रदान किये गए। आशा करते हैं बोल्शेविक क्रांति का इतिहास Russian Revolution History in Hindi पर यह लेख आपको पसंद आया होगा।

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.