नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 बिल क्या है? Citizenship Amendment Bill (CAB) in Hindi

नागरिकता संशोधन विधेयक (बिल) Citizenship Amendment Bill (CAB) in Hindi

दोस्तों आज कल नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर संसद में माहौल बड़ी तनाव पूर्ण स्थिति में चल रहा है, जिसके कारण हमे समाचार पत्रों एवं टीवी मीडिया द्वारा इस के बारे में चर्चा सुनने को मिल रही है।

हालाँकि इसका असर पूरे भारत में देखने को मिल रहा है, क्योंकि जन साधारण एवं पार्टी के नेताओं द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है, आज हम इसी के बारे में चर्चा करेंगे कि आखिर यह विधेयक क्या है? और किस कारण इसका विरोध किया जा रहा है। तो दोस्तों शुरू करते है-

नागरिकता संशोधन विधेयक या बिल क्या है? Citizenship Amendment Bill (CAB)

नागरिकता संशोधन विधेयक या बिल 2019 को केंद्रीय कैबिनेट ने दिनांक 11 दिसम्बर 2019 (बुधवार) को मंजूरी दी है। यह विधेयक, अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया गया है, जिससे भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से संबंधित नियमों में बदलाव लाना है।

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत से पास हो गया है और अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक कानून बनकर लागू हो जाएगा और इसके बाद बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफग़ानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाईयों के लिए बगैर वैध दस्तावेज़ों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा।

इस नागरिकता संशोधन बिल या कानून के नियम क्या हैं? What includes in this amendment bill?

  1. इस विधेयक में पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफग़ानिस्तान में धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम शरणार्थियों (हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों) को भारत की नागरिकता दिए जाने का प्रावधान शामिल है।
  2. इस नागरिक संशोधन विधेयक 2019 के तहत नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव का प्रस्ताव है। इसी नियम में बदलाव करके नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से छह साल तक किया जाना है और इसके माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफग़ानिस्तान के हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को 11 साल के बजाए एक से छह वर्षों में ही भारत की नागरिकता मिल सकेगी।
  3. अभी नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती है। इसमें उन लोगों को अवैध प्रवासी माना गया है जो भारत में बिना वैध यात्रा दस्तावेज़ जैसे पासपोर्ट और वीज़ा के घुस आए हैं या उल्‍लेखित अवधि से ज्यादा समय तक यहां रुक गए हैं।
  4. अभी के नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार अवैध प्रवासियों को जेल हो सकती है या उन्‍हें उनके देश वापस भेजा जा सकता है। लेकिन, नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के अनुसार केंद्र सरकार ने पुराने क़ानूनों में बदलाव करके अफग़ानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई को इससे छूट दे दी है। इसका मतलब है इस संशोधन के अनुसार गैर मुस्लिम शरणार्थी यदि भारत में वैध दस्तावेज़ों के बिना भी पाए जाते हैं तो उन्‍हें जेल नहीं भेजा जाएगा ना ही उन्‍हें निर्वासित किया जाएगा।
  5. ऐसे अवैध प्रवासियों को जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया है, वे भारतीय नागरिकता के लिए सरकार के पास आवेदन कर सकेंगे।
  6. अभी भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है। नए विधेयक में प्रावधान है कि पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक अगर पांच साल भी भारत में रहे हों तो उन्हें नागरिकता दी जा सकती है
  7. साथ ही उनके विस्थापन या देश में अवैध निवास को लेकर उन पर पहले से चल रही कोई भी कानूनी कार्रवाई स्थायी नागरिकता के लिए उनकी पात्रता को प्रभावित नहीं करेगी।
  8. ओसीआई कार्डधारक यदि शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो उनका कार्ड रद्द करने का अधिकार केंद्र को मिलेगा। 
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नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के विरोध का कारण Reason of objection

वैसे तो नागरिकता संशोधन विधेयक पूरे देश में लागू किया जाना है। इस संशोधन का विरोध पूरी शक्ति के साथ देश के कई हिस्सों में किया जा रहा है, लेकिन इसका विरोध पूर्वोत्तर राज्यों, असम, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में हो रहा है क्योंकि ये राज्य बांग्लादेश की सीमा के बेहद क़रीब हैं।

इन राज्यों में इसका विरोध इस बात को लेकर हो रहा है कि यहां कथित तौर पर पड़ोसी राज्य बांग्लादेश से मुसलमान और हिंदू दोनों ही बड़ी संख्या में अवैध तरीक़े से आ कर बस जा रहे हैं। साथ ही पूर्वोत्तर के लोग इस अधिनियम को राज्यों की सांस्कृतिक, सामाजिक और पारंपरिक विरासत से खिलवाड़ सिद्ध कर रहे हैं।

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एन आर सी) का अंतिम प्रस्ताव आने के बाद असम में विरोध-प्रदर्शन की भी स्थिति बनी हुई है। विरोध के बावजूद सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक लाने जा रही है, तो यह तय है कि संसद के दोनों सदनों में इसके खिलाफ विवाद ज़रुर होंगे।

विपक्ष का आरोप है कि इस विधेयक के माध्यम से मुस्लिमों को निशाना बनाया गया है। इसके चलते जो विरोध की आवाज़ उठी है  उसकी वजह यह है कि इस बिल के प्रावधान के अनुसार पाकिस्तान, अफग़ानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी।

कई पार्टियाँ इसी आधार पर बिल का विरोध कर रही हैं, क्योंकि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 “समानता के अधिकार” का पूर्ण रूप से उल्लंघन करता है। इस विधेयक में गैर कानूनी प्रवासियों के लिए नागरिकता पाने का आधार उनके धर्म को बनाया गया है। इसी प्रस्ताव पर विवाद छिड़ा है। क्योंकि अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा, जिसमें समानता के अधिकार की बात कही गई है।

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साथ ही विपक्ष के अनुसार यह संशोधन पड़ोसी देशों से आने वाले मुस्लिम लोगों को ही ‘अवैध प्रवासी’ मानता है, जबकि लगभग अन्य सभी लोगों को इस परिभाषा के दायरे से बाहर कर देता है। इस प्रकार यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

विरोधियों के अनुसार यह विधेयक असंवैधानिक है, क्योंकि इसमें भारत के मूलभूत विचारों का उल्लंघन किया गया है। दूसरी ओर पूर्वोत्तर क्षेत्र के संगठनों का कहना है कि यदि नागरिकता संशोधन विधेयक को लागू किया गया तो इससे मूल निवासियों की पहचान को खतरा पैदा हो सकता है और उनकी रोजी रोटी पर भी बात आ सकती है।

नागरिकता संशोधन बिल के लिए पहले भी की गयी कोशिशें Also tried earlier

इस विधेयक को पहले भी लागू करने की कोशिश की जा चुकी है, इसको 19 जुलाई 2016 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद 12 अगस्त 2016 में इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था।

समिति की रिपोर्ट आने के बाद 08 जनवरी, 2019 को विधेयक को लोकसभा में पास किया गया। इसके बाद नौ दिसंबर 2019 को यह विधेयक दोबारा लोकसभा में पेश किया गया, जहां देर रात यह पर्याप्त मतों से पारित हो गया।

11 दिसंबर 2019 को यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया और वहां भी पारित हो गया। क्योंकि यह विधेयक संसद से पारित हो गया है तो अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और राज पत्र में प्रकाशित होने के बाद अफग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैर कानूनी प्रवासी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता के योग्य हो जाएंगे।

नागरिकता संशोधन अधिनियम पर प्रस्तावित संशोधन Proposed amendments in CAB

यदि विरोधियों की माने तो उनके अनुसार विधेयक में कुछ ऐसे कारण है, जिसके कारण देश में इसका विरोध किया जा रहा है। विधेयक में प्रस्तावित संशोधन करके इस विधेयक को स्वीकार किया जा सकता है।

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धर्म को आधार न माना जाए Not based on religion

केवल धर्म के आधार पर आप्रवासियों को निवास में 12 के स्थान पर 6 साल की छूट देने को हटाया जाये, क्योंकि यह धर्मनिरपेक्षता के विचार के खिलाफ है।

शरणार्थी और नागरिकता संशोधन बिल Refugees and CAB

शरणार्थियों की अंतर्राष्ट्रीय समस्या को ध्यान में रखते हुए शरणार्थियों की स्थिति और वे किस स्थिति में भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं, को देखना ज़रूरी है। शरणार्थी और एक आप्रवासी के बीच स्पष्ट सीमा तय करना आवश्यक है। उम्मीद की जा रही है जल्द ही सरकार इसमें कुछ बदलाव ज़रूर करेगी।

सरकार के अनुसार इस विधेयक को लागू करने का कारण आप्रवासियों को सम्मान देना है। साथी ही उन्हें नागरिकता प्रदान करना है, न कि किसी विशेष समुदाय को हानि पहुँचना या उनके प्रति हीन भावना है।

2 thoughts on “नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 बिल क्या है? Citizenship Amendment Bill (CAB) in Hindi”

  1. I think this bill should not be allowed in India because we r the second largest population country in this world we have already a huse no. Of population is there and our government is not able to satisfy the need of our current population than how we can afford the burden of such migreded people from Nabour country.
    We are already lacking behind in matter of resources like education, cleaning water, shelter, employment hospital, food, etc.
    Than what is the final of having such bill.
    According to me it is just waist of time. Instead of this parliament should focus on how to make law and order, control of crime, corruption improvement of our human resources .

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  2. नागरिकता संशोधन बिल पर निबंध में उपसंहार बताए । प्लीज़

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