डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के 25 रोचक तथ्य Dr. Rajendra Prasad Facts in Hindi

डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के 25 रोचक तथ्य Dr. Rajendra Prasad Facts in Hindi

डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। उनके कई रूप देखने को मिलते हैं। वे एक बुद्धिमान छात्र, आदर्श शिक्षक, सफल वकील, प्रभावशाली लेखक, गांधीवादी समर्थक और देश प्रेमी व्यक्ति थे। वह सादा जीवन उच्च विचार की नीति में विश्वास रखते थे। उन्होंने सारा जीवन देश की सेवा की। स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

वे कांग्रेस पार्टी के नेता थे। महात्मा गांधी के विचारों से बहुत प्रभावित थे। उनकी वजह से ही डॉ० राजेन्द्र प्रसाद ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया था। देश के लिए की गई सेवा के लिए उन को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। भारतवासी प्यार से उन्हें राजेंद्र बाबू कहकर पुकारते थे। बिहार राज्य के मुख्य नेता थे।

वे कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी चुने गए थे। एक नेता होने के साथ-साथ वे साहित्य प्रेमी भी थे। भारत मित्र, भारतोदय, कमला जैसी पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख छपते रहते थे। उनके निबंध बहुत ही प्रभावशाली होते थे।

डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के 25 रोचक तथ्य Dr. Rajendra Prasad Facts in Hindi

इस लेख में हम आपको डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताएंगे-

  1. उनका जन्म 3 दिसंबर 1884 को जीरादेई, बंगाल प्रेसीडेंसी में हुआ था।
  2. डॉ राजेंद्र प्रसाद के पिता का नाम “महादेव सहाय” था। वे संस्कृत और फारसी के विद्वान थे। उनकी माता का नाम कमलेश्वरी देवा था। वो एक धर्म परायण स्त्री थी।
  3. डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। 26 जनवरी 1950 को वे भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने थे।
  4. डॉ राजेंद्र प्रसाद 12 वर्षों तक राष्ट्रपति के पद पर कार्य करते रहे। 1962 में उनको अवकाश मिला।
  5. स्कूल के दिनों में डॉ राजेंद्र प्रसाद एक बुद्धिमान छात्र थे। उन्हें हर महीना 30 रूपये  की स्कॉलरशिप मिलती थी। उनकी एग्जाम शीट को देखकर एक परीक्षक ने कहा था एग्जामिनी इस बेटर दैन एग्जामिनर (Examinee is better than the Examiner)
  6. डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 1915 में विधि में स्नातक की परीक्षा स्वर्ण पदक के साथ प्राप्त की थी। बाद में वकालत के क्षेत्र में उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी।  
  7. डॉ राजेंद्र प्रसाद को 1931 में “सत्याग्रह आंदोलन” के लिए और 1942 में “भारत छोड़ो आंदोलन” के लिए महात्मा गांधी के साथ जेल जाना पड़ा था।
  8. डॉ राजेंद्र प्रसाद देश से बहुत प्यार करते थे। उनकी सेवाओं के लिए उनको 1962 में देश के सर्वोच्च सम्मान “भारत रत्न” सम्मान से सम्मानित किया गया था।
  9. डॉ राजेंद्र प्रसाद की शादी सिर्फ 12 वर्ष की उम्र में कर दी गई थी। उनकी पत्नी का नाम राजवंशी देवी था।
  10. जब डॉ राजेंद्र प्रसाद का विवाह हुआ था उन दिनों बारात घोड़े और बैलगाड़ियों में जाया करती थी। डॉ राजेंद्र प्रसाद की बारात वधु के घर तक जाने में 2 दिन लगे। बारात मध्यरात्रि को वधू के घर पहुंची। उस समय डॉ राजेंद्र प्रसाद पालकी में सो रहे थे। बड़ी कठिनाई से उनको जगाया गया और विवाह की रस्म पूरी की गई।
  11. डॉ राजेंद्र प्रसाद जाति से कायस्थ थे। उनके पूर्वज जीरादेई गांव (बिहार) में जाकर बस गए। पढ़े लिखे होने के कारण डॉ राजेंद्र प्रसाद के दादा को हथुआ 25-30  साल के लिए दीवान बना दिया गया था।
  12. राजेंद्र प्रसाद के जन्मदिवस (3 दिसंबर) को सभी अधिवक्ता समुदाय “अधिवक्ता दिवस” (एडवोकेट डे) के रूप में मनाते हैं।
  13. डॉ राजेंद्र प्रसाद एक लोकप्रिय नेता थे। उन्हें प्यार से लोग “राजेंद्र बाबू” और “भारत रत्न” कहकर पुकारते थे।
  14. डॉ राजेंद्र प्रसाद दो मैगजीन निकालते थे। हिंदी में मैगजीन का नाम ‘देश’ था और अंग्रेजी की मैगजीन का नाम “सर्चलाइट” था।
  15. चंपारण आंदोलन के दौरान डॉ राजेंद्र प्रसाद ने देखा कि महात्मा गांधी तन मन धन से लोगों की सेवा करते हैं। इससे प्रभावित होकर वह भी चंपारण आंदोलन में शामिल हो गए। जब महात्मा गांधी को ठहरने के लिए कहीं जगह नहीं मिली तो वे डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के घर पर ठहरे थे।   
  16. डॉ राजेंद्र प्रसाद ने सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी के मतभेदों को दूर करने का पूरा प्रयास किया था, जिससे स्वतंत्रता आंदोलन सुचारू रूप से चलता रहे।
  17. 1934 में बिहार में भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा आई थी। वहां पर रिलीफ फंड जमा करने के लिए राजेंद्र प्रसाद ने बहुत मेहनत की। उन्होंने कुल 38 लाख रूपये जुटाए थे जो वायसराय के फंड से 3 गुना अधिक था। उन्होंने खुद पीढ़ित लोगो को दवाइयाँ और कपड़े बांटे थे।
  18. डॉ राजेंद्र प्रसाद की मृत्यु के बाद भी उनके सम्मान में उनका पटना में “पंजाब नेशनल बैंक” में खोला गया अकाउंट आज भी चालू है। वह बैंक अकाउंट 24 अक्टूबर 1962 को खोला गया था। इस समय उनके खाते में सिर्फ 1213 रुपए हैं।  
  19. डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कई पुस्तकें लिखी हैं। उसमें इंडिया डिवाइडेड, सत्याग्रह ऐट चंपारण, भारतीय संस्कृति, खादी का अर्थशास्त्र, गांधी जी की देन, बापू के कदमों में जैसी पुस्तकें चर्चित हैं।
  20. डॉ राजेंद्र प्रसाद 1946 में देश की केंद्र सरकार में खाद्य एवं कृषि मंत्री भी बने थे।
  21. 1906  में डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने बिहार में छात्र सम्मेलन का आयोजन किया था। इस सम्मेलन में बहुत से छात्र नेता आए थे। इस सम्मेलन से दो प्रमुख नेता “श्री कृष्ण सिन्हा” और “डॉ अनुग्रह नारायण” का जन्म हुआ। डॉ राजेंद्र प्रसाद सभी जाति और धर्म के लोगों से प्यार करते थे वह किसी से भी भेदभाव नहीं करते थे।
  22. डॉ राजेंद्र प्रसाद की देश सेवा से प्रभावित होकर रविन्द्र नाथ टैगोर ने उन्हें एक पत्र लिखा था। उसमें लिखा था कि “मुझे तुम पर पूरा भरोसा है कि तुम लोगों की मदद करोगे और खराब वक्त में भी लोगों को प्यार करते रहोगे। उनकी मदद करते रहोगे।
  23. स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के बाद राजेंद्र प्रसाद अपनी पत्नी को बहुत ही कम वक्त दे पाते थे। वे अपने विवाह के प्रथम 50 वर्षों में कुल 50 महीने का समय ही अपनी पत्नी को दे पाये।
  24. डॉ राजेंद्र प्रसाद अपने छात्र जीवन में इंग्लैंड जाकर आईसीएस ICS की परीक्षा देना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने गुप्त रूप से जहाज की सीट का आरक्षण भी करवा लिया था और पहनने के लिए 2 गर्म सूट भी सिलवा लिए थे, परंतु अंत में उनको पिता से इंग्लैंड जाने की अनुमति नहीं मिली।
  25. डॉ राजेंद्र प्रसाद की मृत्यु 28 फरवरी 1963 को हुई थी। 

Photo Credit – Flickr (Archives New Zealand)

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