भारत में बाल अधिकार पर निबंध Essay on Child Rights in India (Hindi)

इस लेख में भारत में बाल अधिकार पर निबंध Essay on Child Rights in India (Hindi) को दिया गया है जिसमें इसकी परिभाषा, लिस्ट भी दिया गाय है।

भारत में बाल अधिकार पर निबंध Essay on Child Rights in India (Hindi)

चाइल्ड राइट्स यह बच्चों के शोषण को रोकने के लिए बनाया गया एक कानून है इसमें बच्चों को कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं।

इस लेख में बच्चों के कानूनी अधिकारों  के बारे में विस्तार से बताया गया है तथा बाल अधिकारों की सूची भी दी गई है। चाइल्ड राइट्स के बारे में यह लेख बेहद ही सरल है तथा जानकारी से भरपूर है।

बाल अधिकारों के बारे में परीक्षा में अवश्य पूछा जाता है। यहां पर बाल अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें।

बाल अधिकार क्या है? What is Child Rights in Hindi?

भारतीय संविधान के अनुसार 18 साल से कम उम्र के बच्चों को नाबालिग कहा जाता है जिन्हें भारतीय संविधान कुछ विशेष अधिकार प्रदान करता है जिन्हें भारत में बाल अधिकार या चाइल्ड राइट्स इंडिया कहते हैं।

बचपन को जीवन की एक विशेष प्रक्रिया कहा गया है जहां पूरे जीवन का ताना-बाना बुना जाता है और इस प्रक्रिया में उन्हें प्यार तथा सहकार की आवश्यकता होती है न की दुत्कार और तिरस्कार की।

आज कुछ लोगों की स्वार्थपरता के कारण बच्चों का शोषण चरम पर है और बच्चों का एक बड़ा वर्ग इस समस्या से जूझ रहा है और शिक्षा, पोषण तथा अपने अधिकारों से वंचित हैं। बाल अधिकारों के रक्षण के लिए पूरी दुनिया में लगभग एक से नियम है। जिसे अन्तराष्ट्रीय बाल अधिकार कानून कहा जाता है।

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बाल अधिकार की आवश्यकता क्यों पड़ी? Why was there a need for child rights?

अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चाइल्ड राइट की परिभाषा एक सी है। 1992 के यूएनसीआरसी अनुसमर्थन के बाद भारत सरकार ने अपने बाल न्याय कानूनों में बहुत से बदलाव किए हैं जिसमें नाबालिक बच्चों के हकों की रक्षा के लिए कड़े कानून का प्रावधान है लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है की चाइल्ड राइट्स कानून की आवश्यकता क्यों पड़ी।

भारत में गरीबी और अशिक्षा के कारण कुछ बच्चे मजबूरी वश कम आयु में परिवार के भरण-पोषण के लिए मजदूरी का मार्ग अपनाते हैं। कुछ नाबालिग बच्चों को जबरदस्ती काम पर रखा जाता है और उनसे अधिक काम लिया जाता है तथा बदले में बहुत ही मामूली से रकम दी जाती है। इसे बाल मजदूरी कहा जाता है।

बच्चे नासमझ होते हैं इसलिए वे मज़बूरी वश कम रकम पर काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं या बच्चे शारीरिक रूप से प्रतिकार करने में असमर्थ होते हैं जिसके कारण उन्हें जबरन काम पर रखा जाता है। जहाँ अशिक्षा होगी वह बाल मजदूरी ही नहीं तमाम और भी सामजिक कुरीतियाँ जन्म लेंगी। इसलिए अशिक्षा ही एक मात्र कारण है जिसके कारण बाल अधिकार की आवश्यकता पड़ी।

भारत में बाल अधिकार के लिस्ट List of Child Rights in India (Hindi)

बच्चों को भगवान का स्वरूप कहा गया है और किसी भी देश की असली संपत्ति वहां के बच्चे तथा युवा होते हैं इसलिए उनके शोषण के विरोध में तथा विकास को ध्यान में रखकर कुछ कड़े कानून बनाए गए हैं। भारत सरकार ने बच्चों के शोषण तथा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कुछ विशेष कानून बनाए हैं जिनमें 2006 में संशोधित भारतीय बाल अधिकारों के लिस्ट भी शामिल है जो निम्न है।

  • भारतीय संविधान के अनुसार 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निशुल्क प्रारंभिक शिक्षा को अनिवार्य बताया गया है जिसका उल्लेख भारतीय संविधान के धारा  21 में किया गया है।
  • भारत के हर बच्चे को स्वास्थ्य का अधिकार है।
  • भारतीय संविधान के अंतर्गत बच्चों को नौकरी पर रखने तथा उनका शोषण करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
  • बच्चों को समानता का अधिकार है इसलिए उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव करना कानूनन अपराध है।
  • बच्चों को अपने शोषण के विरोध का अधिकार दिया गया है जिससे उच्च वर्गों द्वारा किसी भी बच्चे का शोषण न किया जा सके।
  • बाल अधिकारों में जरूरी पोषण प्राप्त करना यह बच्चों के अधिकारों में सर्वोपरि है।
  • भारतीय संविधान में लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष के पहले विवाह पर रोक है। बाल विवाह को गैरकानूनी बताया गया है।
  • बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का दुराचार या अपमानजनक बर्ताव करना कानूनी अपराध माना गया है।
  • मां बाप द्वारा बच्चों में किए भेदभाव विशेषकर लिंग के अनुसार किया भेदभाव कानूनन अपराध है तथा भ्रूण हत्या या मानसिक प्रताड़ना के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
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चाइल्ड राइट्स कानून के लाभ Benefits of Child Rights Law

बाल अधिकार कानून से आज बाल मजदूरी में बेहद ही कमी देखने को मिली है और लोगों में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता भी आई हैं बच्चों का तन और मन कोमल होने से उन्हें अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। बाल अधिकार कानून के अंतर्गत 65 तरह के विशेष काम बताए गए हैं जिन्हें 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से नहीं कराया जा सकता उदाहरण के तौर पर होटलों तथा दुकानों पर काम इत्यादि।

चाइल्ड राइट्स कानून के सबसे बड़े लाभ के रूप में लोगों में एक जागरूकता का आना है चाहे विद्यालय हो या अन्य कोई स्थल, कम या ज्यादा मात्रा में लोगों को बाल अधिकारों के बारे में जागरूकता है इसी कारण एक रिपोर्ट के अनुसार बाल मजदूरी तथा बाल हिंसा में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है।

भारत में बाल अधिकार कानून के तहत विद्यालय भी बच्चों पर अतिरिक्त प्रताड़ना या मानसिक दबाव का उपयोग कम कर रहे हैं। बच्चों से मारपीट जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 23 के तहत गंभीर मारपीट के अंदर आता है जिससे दोषी को कड़ी सजा का प्रावधान है।

चाइल्ड राइट एक्ट के तहत अनाथ बच्चों को सुरक्षा देने के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमिटी बनाई गई है। भारतीय बाल अधिकार के तहत 18 साल से कम उम्र के लड़के-लड़कीयों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होती है तथा दोषी को उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है।

भारत में बाल अधिकार कानून से बच्चों के प्रति अपराध कम जरूर हुए हैं लेकिन खत्म नहीं हुए बाल उत्पीड़न को पूरी तरह से खत्म करने के लिए भारत के नागरिकों को इसकी गंभीरता को समझना होगा तथा इनके प्रति उपयुक्त कदम उठाना होगा।

 निष्कर्ष Conclusion

एक कहावत के रूप में कहा गया है कि “बच्चे होते हैं मन के सच्चे” या  “बच्चे भगवान का रूप होते हैं” लेकिन भारत जैसा देश जहां आदर्शों की कमी नहीं है वहां बच्चों के लिए कानून लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?  जवाब है और अशिक्षा और हमारी समाज के प्रति विमुखता।

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चाइल्ड राइट्स कानून से बाल अपराध पूरी तरह से समाप्त होने वाला नहीं है। अगर बाल अपराध को समाप्त करना है तो शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी करना होगा तथा गरीब तथा पिछड़े वर्ग के बच्चों के निर्वहन का बोझ सरकार को उठाना पड़ेगा और समाज के बुद्धिजीवी वर्गों को अपनी हैसियत के अनुसार गरीब बच्चों को शिक्षा देने का कर्तव्य निभाना पड़ेगा।

इस लेख में आपने भारत के चाइल्ड राइट्स कानून के बारे में पढ़ा जिसमें बच्चों के अधिकारों से लेकर समाज का उनके प्रति कर्तव्य सभी को सरल रूप से लिखा गया है। आशा है आपको भारत में बाल अधिकार पर निबंध Essay on Child Rights in India (Hindi) लेख जानकारी से भरपूर लगा होगा। अगर यह लेख आपको पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें।

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