जलवायु परिवर्तन पर निबंध, कारण, प्रभाव, नियंत्रण Essay on Climate Change in Hindi

जलवायु परिवर्तन पर निबंध, कारण, प्रभाव, नियंत्रण Essay on Climate Change in Hindi

दोस्तों आज हम बात करेंगे, ऐसे टॉपिक के बारे में जो आज विश्व की एक भीषण समस्या बनती जा रहा है – वो है जलवायु परिवर्तन हम बात करेंगे कि कैसे ये परिवर्तन होता है और इसके कारण और इससे बचने के बारे में भी। साथ ही हम आपको बताएँगे की कैसे सही समय पर इसके बारे में समझकर इसकी रोकधाम की जा सकती है। 

चलिए जलवायु परिवर्तन और इसके तथ्यों को समझने की कोशिश करते हैं –

जलवायु परिवर्तन क्या है? What is Climate Change?

अधिकतर हम ‘जलवायु’ एवं ‘मौसम’ शब्द में भेद नहीं कर पाते हैं। इसको समझना जरूरी है। असल में मौसम वह है, जो विभिन्न स्थानों पर अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान, बादलों एवं वायु की स्थिति, वर्षा का पूर्वानुमान, आर्द्रता आदि दर्शाता है। निर्धारित समय पर किसी स्थान पर बाहरी परिस्थितियों में होने वाला परिवर्तन ही, मौसम कहलाता है।

असल में जलवायु शब्द किसी स्थान पर पिछले कई वर्षों के अन्तराल में वहाँ की मौसम की स्थिति को बताता है। किसी स्थान विशेष की जलवायु का पता लगाने के लिये जलवायु वैज्ञानिक कम-से-कम 30 वर्षों के मौसम की जानकारी को आवश्यक मानते हैं। जलवायु से हमें कोई स्थान कैसा है यह पता चलता है। उदाहरण के लिये, अहमदाबाद एवं दिल्ली की जलवायु सामान्यतः शुष्क है; इसके विपरीत मुम्बई एवं विशाखापत्तनम में जलवायु आर्द्र है।

पृथ्वी का तापमान औसत रहता है, हालाँकि भूगर्भीय प्रमाण बताते हैं कि पहले यह बहुत अधिक या कम रहा होगा। लेकिन देखा जाये तो पिछले कुछ सालों से जलवायु में अचानक तेज़ी से बदलाव हो रहा है, क्योंकि मौसम परिवर्तन का अपना एक तरीका होता है।

लेकिन यह तरीका लगातार बदल रहा है, जैसे गर्मिया लंबी होती जा रही हैं, और सर्दियां छोटी, जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे प्रचंड समस्या में से एक है जैसे नवंबर दिसंबर मध्य तक ठंड का अहसास ना होना। फरवरी-मार्च तक सर्दी पडना, सितंबर से वर्षा होना, अक्टूबर तक गर्मी पड़ना।

पूरे विश्व में यह परिवर्तन देखने को मिल रहा है, इसी को जलवायु परिवर्तन कहा जाता है। वैज्ञानिको की माने तो ‘ग्रीन हाउस इफेक्ट’ इसका मुख्य कारण है। जलवायु परिवर्तन परिस्थितिक तंत्र को पहले से ही नुकसान पहुंचा रही है, इसकी सच्चाई ग्लेशियरों के पिघलने, मानसून परिवर्तन एवं समुद्र की तरंगों में देखी जा सकती है। 

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पृथ्वी द्वारा सूर्य से ऊर्जा ग्रहण की जाती है। जिसके चलते धरती की सतह गर्म हो जाती है, और इस ऊर्जा का कुछ भाग धरती की सतह तथा समुद्र के जरिए परावर्तित होकर वातावरण में चला जाता है। वातावरण की कुछ गैसों द्वारा पूरी पृथ्वी पर एक परत सी बना दी जाती है, यह गैसें मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड आदि होते है।

इन गैसों को ही ग्रीन हाउस गैस के नाम से जाना जाता है। जिस प्रकार से हरे रंग का कांच प्रकाश को अंदर आने से रोकता है, उसी तरह से यह पृथ्वी के ऊपर एक परत बनाकर अधिक ऊष्मा से इसकी रक्षा करती है। इसी कारण इसे ग्रीन हाउस प्रभाव कहा जाता है।

जैसे कि हम सब जानते हैं कि पृथ्वी ग्रह पर ही है जीवन संभव है। पृथ्वी की सतह पर अनुकूल तापमान का होना ही जीवन की उपस्थिति का एक महत्त्वपूर्ण कारण हैं। पृथ्वी का औसत सतही तापमान 14.4 डिग्री C है। जब की शुक्र ग्रह का औसत सतही तापमान 449 डिग्री C तथा मंगल ग्रह का -55 डिग्री C है। ये हमारे पड़ोसी ग्रह हैं।

वायुमंडल में ग्रीनहाउस वायु  की उपस्थिति के कारण ही पृथ्वी का तापमान जीवन के लिये अनुकूल है। ये वायु सूर्य के प्रकाश से निकली कुछ ऊष्मा को अवशोषित करती हैं एवं इन्हें पृथ्वी की सतह के करीब रोक कर रखती हैं। परन्तु ग्रीनहाउस वायु की बहुत अधिक मात्रा भी समस्या पैदा कर सकती है। वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के एकत्र होने से पृथ्वी के औसत तापमान का बढ़ना ‘ग्लोबल वार्मिंग’ कहलाता है।

जलवायु परिवर्तन के कारण Causes of climate change

इस परिवर्तन के लिए कई घटक जिम्मेदार है। इसको अच्छे से समझने के लिए इन कारणों को दो भागों में बाँटा जा सकता है। पहला प्राकृतिक कारण दूसरा मानवीय कारण। प्राकृतिक कारण में प्रमुख महाद्वीपों का खिसकना, ज्वालामुखी तंरगे और पृथ्वी का मानवीय क्रियाओं द्वारा ग्रीन हाउस प्रभाव प्रभावित होना शामिल है। जैसे

पहले समय में सभी जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक हुआ करते थे। लगभग 220 वर्षों पहले औद्योगिक क्रांति आई। जिसके फलस्वरूप मशीनों द्वारा भारी मात्रा में वस्तुओं का उत्पादन किया जाने लगा। मशीनों को चलाने के लिये ऊर्जा की आवश्यकता होती थी और ऊर्जा उत्पादन के लिए कोयले एवं तेल जैसे ईंधनों का इस्तेमाल किया जाता था। जिन्हें ‘जीवाश्म ईंधन’ कहते थे।

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जीवाश्म ईंधनों को जलाने के कारण कार्बन डाइऑक्साइड वायु उत्सर्जित होती है। औद्योगिकीकरण के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन, ओजोन, क्लोरोफ्लोरो कार्बन, नाइट्रस ऑक्साइड जैसी वायुओं का उत्सर्जन भी बढ़ा है।

इन वायुओं को ‘ग्रीनहाउस वायु’ (गैस) कहते हैं। पिछले 200 वर्षों के दौरान हमारी गतिविधियों के कारण वायुमण्डल में ग्रीनहाउस वायुओं की विशाल मात्रा उत्सर्जित हुई है। अब यह सुस्पष्ट है कि आज के समय में मानव ही जलवायु परिवर्तन के लिये उत्तरदायी है।

विद्युत संयंत्रों का अधिक मात्रा में उपयोग होने के कारण

  • वीडियो गेम खेलने से
  • लाइट जलाने से
  • म्यूजिक सिस्टम चलाने से
  • वॉशिंग मशीन का प्रयोग करने से
  • माइक्रोवेव अवन का प्रयोग करने से
  • एयरकंडीशनर का उपयोग करने से
  • टी.वी. देखने से

क्योंकि यह सारे यंत्र ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन करते है।  जो ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने का काम करती है और इसी के कारण वातावरण में गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।

गर्मी बढ़ने के प्रभाव Effect of increased temperature and heat

तापमान में एक छोटे से परिवर्तन से भी बड़ा प्रभाव देखने को मिलता है। पृथ्वी पर जीवन के प्रत्येक पहलू पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसका प्रभाव पड़ेगा। जैसे –

प्रतिकूल मौसम Adverse and Unstable climate

प्रतिकूल मौसम देखने को मिलेगा कुछ स्थान बहुत गर्म; कुछ स्थान सूखा ग्रस्त; जबकि अन्य अत्यधिक वर्षा से प्रभावित हो जाएँगे। लू, सूखा, बाढ़ (अधिक वर्षा एवं हिमनदों के पिघलने के कारण) एवं तीव्र तूफ़ानी हवाएँ इत्यादि देखने को मिलेंगे।

पिघलते हिम खंड Melting glaciers

जलवायु परिवर्तन के कारण वर्फीली चोटिया पिघलने लगी है, बर्फ के पहाड़ पहले की अपेक्षा सुकुड रहे है। आर्कटिक की समुद्री बर्फ, विशेष रूप से पिछली कुछ गर्मियों से, काफी पतली होती जा रही है। अगस्त 2000 में उत्तरी ध्रुव पर बिलकुल बर्फ नहीं थी बल्कि वहां सिर्फ पानी-ही-पानी ही देखने को मिला।

जल स्तर में वृद्धि Increased water levels of sea

हिमनदों एवं ध्रुवीय बर्फीली चोटियों के पिघलने से समुद्र में जल की मात्रा बढ़ेगी। इन सबके परिणामस्वरूप छोटे द्वीप एवं समुद्र तटीय क्षेत्र जलमग्न हो जाएँगे। बाढ़ की आशंका से इन उपजाऊ कृषि क्षेत्रों पर निर्भर रहने वाले हजारों लोग भी प्रभावित होंगे। समुद्र स्तर में एक मीटर की वृद्धि भी विभिन्न तटीय शहरों एवं अत्यधिक जनसंख्या वाले डेल्टा क्षेत्रों, जैसे- मिश्र, बांग्लादेश, भारत एवं चीन, में बाढ़ ला सकती है जहाँ विश्व की सबसे अधिक चावल की खेती होती है।

जैवविविधता का ह्रास Loss of biodiversity

पेड़-पौधों एवं जीव-जंतुओं को जलवायु परिवर्तन के साथ तालमेल नहीं बना पाएंगे एवं प्रवासन करने के लिये बाध्य होना होगा। जो प्रवासन नहीं कर सकते हैं वे निकट भविष्य में गायब हो जाएँगे। जो ठंडी जलवायु के अनुकूल हैं, वे लुप्त हो जाएंगे ।

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मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव Negative effect of health

अधिक गर्मी होने के कारण मनुष्य के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।  उष्णकटिबन्धीय रोग जैसे मलेरिया, मस्तिष्क ज्वर, पीत ज्वर व डेंगू जैसी बीमारियाँ वर्तमान के शीतोष्ण क्षेत्रों में भी फैलेगी।

जलवायु परिवर्तन के नियंत्रण उपाय How to prevent and control climate change?

जलवायु परिवर्तन से मनुष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्नीसवीं सदी के बाद से पृथ्वी की सतह का तापमान 3 डिग्री से 6 डिग्री तक बढ़ गया है। यह तापमान में वृद्धि के आंकड़े हमें मामूली लग रहे हैं। लेकिन यह आगे चलकर महाविनाश को निमंत्रण देंगे।

वैज्ञानिकों की मानें तो, यदि हम इसी तरह से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करते रहे तो इस वायु का स्तर औद्योगिक क्रांति से पहले की अपेक्षा दोगुना हो जाएगा। इसके फलस्वरूप वर्ष 2050 तक पृथ्वी का औसत तापमान 5.8 डिग्री C तक बढ़ जाएगा।

हालांकि यह वृद्धि सुनने में कम लग सकती है, परन्तु इसके परिणाम विश्वव्यापी होंगे। इसलिए हमे इसको नियंत्रित करने के लिए आज से उपाय करने की आवश्यकता है, क्योंकि इसके परिणाम हमें भारी समस्या में ला सकते है।

इसको कम करने के लिए हमें ग्रीन हाउस गैसों को कम  करने की जरूरत है। ऐसा करने के लिए ऐसी गतिविधियाँ अपनानी पड़ें गी जो कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में सहायक होती हैं। जैसे –

  • साइकिल चलाना और वाहन का कम उपयोग।
  • वृक्षों की कटाई पर रोक।
  • इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाने वाली वस्तुओं का अत्यधिक प्रयोग।
  • कम दूरी के लिये व्यक्तिगत वाहनों का प्रयोग।
  • भारी मात्रा में पेड़ लगाना
  • जहाँ भी संभव हो बिजली के उपयोग में कमी लाना।
  • सार्वजनिक यातायात साधनों का प्रयोग।
  • दिन के समय प्राकृतिक रोशनी का प्रयोग।
  • जब भी संभव हो पैदल चलना।
  • वर्षा जल का संचयन
  • रोशनी के लिये सीएफएल बल्बों का प्रयोग करना।
  • आवश्यकता न होने पर विद्युत उपकरणों जैसे कम्प्यूटर एवं म्यूजिकल उपकरणों को ‘ऑफ’ अथवा ‘स्टैंड बाय मोड’ पर रखना।
  • मौसमी एवं स्थानीय खाद्य पदार्थों का प्रयोग।
  • कूड़े को जलाना।
  • हमेशा कपड़े के थैले का प्रयोग करना।
  • जलवायु परिवर्तन के बारे में सीखें!

निष्कर्ष Conclusion

दोस्तों यह थे, कुछ ऐसे उपाय जिसको करके हम अपनी पृथ्वी और अपने भविष्य को जलवायु परिवर्तन जैसे भयानक संकट से बचा सकते है। हो सके तो इसे कम जिससे हमारी पृथ्वी बच सके और आने वाली पीढ़ी, प्रकृति द्वारा दी गई सुंदरता को देख सके इसका आनंद ले सके।

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