दादी माँ पर निबंध Essay on Grandmother in Hindi

आज के इस लेख में हमने दादी माँ पर निबंध Essay on Grandmother in Hindi प्रस्तुत किया है।

दादी माँ कौन होती है?

दादी माँ हमारे घर की सबसे बड़ी महिला होती है, जो हम बच्चों के लिये बहुत प्यारी होती है। पिता जी की माँ को हम बच्चे दादी माँ कहते है।

दादी माँ हमारे घर की एक ऐसी सदस्य होती है जिनसे पूछकर कर घर के सारे काम अच्छी तरह से संपन्न कर लेते है। हमारी दादी माँ हम सभी बच्चों और बड़ों के लिये एक आधार होती है, जो हमें अच्छी शिक्षा देती है और हमें समय-समय पर आगे बढ़ने के रास्ते दिखाती है।

“Nobody can do for little children what grandparents do. Grandparents sort of sprinkle stardust over the lives of little children.” – Alex Haley

दादी माँ से बच्चों का रिश्ता और उनका प्यार

दादी माँ अपने बच्चों से सबसे ज्यादा प्यार करती है। घर में दादी माँ का बच्चों से सबसे अलग रिश्ता होता है। मेरी दादी माँ का नाम मथुरा देवी है। वह 85 साल की है। उनके बालों का रंग पूरा सफ़ेद है और चश्मा उनके देखने का एक मात्र जरियां।

मेरी दादी माँ मुझे घर में सबसे ज्यादा प्यार करती है। जब मुझे उनसे कोई काम होता है, तो वो अपने सारे कामों को छोड़कर सबसे पहले मेरा काम करती है, उनकी यही बात मुझे सबसे अच्छी लगती है। और दिल को छू जाती है।

वह मुझे रोज़ शाम को पार्क में घुमाने लेकर जाती है, वहां मुझे आइसक्रीम भी खिलाती है और अगर वहां खेलते हुये हमें कोई चोट लग जाये तो पूरा दुलार हमारे ऊपर ही लुटा देती है। दादी माँ गलती करने पर हमें समझकर जल्दी माफ़ भी कर देती है।

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जब हम सुबह देर से जागते है तो वह हमें डांटती भी है पर फिर प्यार से मना भी लेती है। दादी माँ पिताजी की डांट से भी हमें बचाती है और जब रात को हम सोते है तो वो हमें अच्छी-अच्छी कहानियां सुनाती है जिससे हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

दादी माँ की दिनचर्या

दादी माँ सुबह 5 बजे जाग जाती है, फिर वह सुबह घूमने जाती है। वहां से आकर नहाती है और मंदिर चली जाती है। वहां वह भजन पूजन करती है। वहां से आकर वह घर के काम में माँ का हाँथ बटाती है और फिर सबको नाश्ता कराने के बाद माँ के साथ बैठकर खुद भी खाती है फिर वह कुछ देर के लिये सो जाती है और जागने के बाद वह भगवान की किताबे पढ़ती है।

जिसमें दी  हुई अच्छी-अच्छी कहानियां वह हमें भी सुनाती है। जब हम स्कूल से आ जाते है तो हमारे साथ में वह काफी समय बिताती है। हमें अपने हाँथ से खाना खिलाती है और हमें कुछ देर के लिये सोने को कहती है ताकि हमारी थकावट दूर हो जाये और जागने के बाद हमारा मन पढ़ाई में पूरी तरह से लगे।

जब जागते है तो वह हमें दूध भी देती है और पढ़ाई कराने के लिये बैठा देती है और वह कुछ देर के लिये सत्संग में चली जाती है और वहां से आने के बाद, मैं और दादी माँ शाम में पार्क घूमने जाते है वहां से जब हम आते है तो वो हमें अपने साथ सुला लेती है और रात भर मेरा पूरा ख्याल रखती है।

दादी माँ के नुश्खे

दादी माँ के पास तो जैसे कई सारी दवाईयों के अलग-अलग नुस्खे है जैसे खासी होने पर वह हमें लोंग खिलाती है। बुखार आने पर वह पहले नीम की गोलियां खिलाती और अगर सही न होने पर बाद में डाक्टर के यहाँ भेजती है पर उनका नुस्खा काम कर जाता है जिससे हमें डाक्टर के यहाँ जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती है।

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पैर या कही भी दर्द होने पर वह उस भाग में तेल से धीरे-धीरे मालिश करने को कहती है। दांत में दर्द होने पर वह गर्म पानी में नमक डालकर कुल्ला करने को कहती है। ऐसे कई छोटे-छोटे लाभदयक नुस्खे उनके पास है जो हमारे दैनिक जीवन में काम आते है।

इसके अलावा दादी माँ खाने में मिठाइयाँ बनाकर हमें खिलाती है। उनके पास पुराने समय में बनाई जाने वाली मिठाइयों के खज़ाने है। ये मिठाइयाँ हम बच्चों को खाने में बहुत अच्छी लगती है।  

दादी माँ को मनाने का तरीका 

जब हमारी दादी हमसे कभी नाराज़ हो जाती है, तो हम उन्हें गाना गाकर मना भी लेते है। और उनको थोड़ा परेशान करते हुये उन्हें मनाना उनके सामने कान पकड़कर माफ़ी मांगना हमें बहुत अच्छा लगता है इसतरह दादी माँ का गुस्सा एकदम ठंडा हो जाता है और हम पहले की तरह खुश हो जाते है।

दादी माँ की प्रेरणादायक कहानियों का असर

दादी माँ हमें जो कहानियां सुनाती है, उसमें कई कहानियों में भगवान की कथाये होती है। जिससे हमें भगवान के बारे में जानकारी तो मिलती है और उसके साथ नयी नयी प्रेरणा भी मिलती है कि किस काम को किस प्रकार करना चाहिए और समय पर करना चाहिये, काम को कल पर नहीं टालना चाहिये।

उनके द्वारा सुनाई गयी कहानियों में हर बार कुछ नया सीखने को मिलता है इसीलिये हमें दादी माँ की कहानियां सुनने में बड़ा मज़ा आता है और जब कभी स्कूल में कहानी सुनाने को कहा जाता है तो मैं इन कहानियों को सुनाकर अपने आप में ख़ुशी महसूस करता हूं क्यों कि जब भी मैं दादी माँ के द्वारा सुनाई हुई कहानी को सुनाता हूँ तो सभी अध्यापक मेरी बहुत बढ़ाई करते है।

हमें हमारी दादी माँ और माँ दोनों की हमेशा इज्जत करना चाहिये क्यों कि वह हमारे बचपन से लेकर हमें बड़े तक संभालती है अपनी इक्षाओं  को मारते हुये हमारी इक्छओं को पूरा करती है और उसी में अपनी ख़ुशी को पा लेती है। अगर कभी हमें किसी भी चीज़ की ज़रूरत होती है तो उसको प्राप्त कराने के लिये हमारे लिये वे दिन रात एक कर देती है।

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आपने अक्सर देखा होगा जब हमारी परीक्षायें होती है और हम रात-रात भर जाग के पढ़ते है या सुबह जागकर पढ़ते है, तो हमारी माँ या दादी माँ हमारे साथ क्यों जागती है? पता है ऐसा क्यों होता है क्योंकि वह हमें प्यार करती है वो इसलिये जागती है वो सोचती है कि अगर हमारे बच्चे को कोई ज़रूरत होगी और हम सो रहे होंगे तो उस ज़रूरत को कौन पूरा करेगा। 

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