जमात-उल-विदा पर निबंध Essay on Jamat-Ul-Vida in Hindi

इस लेख में जमात-उल-विदा पर निबंध Essay on Jamat-Ul-Vida in Hindi दिया गया है। इसमे आप पढ़ेंगे इस पर्व का वजह, महत्व, उत्सव, के विषय में पूरी जानकारी।

अगर आप जमात-उल-विदा के विषय में जानकारी खोज रहें हैं तो इस लेख को पूरा पढ़ें। यहाँ पर आप जमात-उल-विदा पर्व के विषय में पूरी जानकारी पायेंगे।

जमात-उल-विदा पर निबंध Essay on Jamat-Ul-Vida in Hindi

दुनियाँ में विभिन्न धर्मों तथा मान्यता वाले लोग रहते है जैसे की हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी आदि और सभी धर्म के लोगों के अलग-अलग त्यौहार तथा उनकी धार्मिक मान्यताएँ हैं। मुस्लिम धर्म में भी विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाए जाते है जिसमे जमात-उल-विदा का बहुत महत्व है। इसे Jumu’atul-Wida (जुमातुल विदा) भी कहा जाता है।

इस्लाम धर्म में शुक्रवार के दिन को बहुत खास बताया गया है। रमज़ान के पूरे महीने के अंत में यह आखिरी जुमे की रात आती है जिसमें कुरान का पाठ किया जाता है साथ ही नमाज़ पढ़ी जाती है। जमात-उल-विदा पूरे दुनियाँ के मुस्लिम लोगों द्वारा मनाया जाने वाला एक पवित्र त्यौहार है। जमात उल विदा एक अरेबिक शब्द है जिसका अर्थ होता है जुमे की नमाज़ अदा करना।

मुसलमान रमज़ान के आखिरी शुक्रवार के दिन को बहुत ही शुभ मानते हैं। इस दिन ज़रूरतमंदों की सहायता करना बहुत शुभ माना जाता है ऐसा माना जाता है की इस दिन जो कोई भी अल्लाह की तहे दिल से इबादत करता है उस पर अल्लाह मेहरबान होते हैं ऐसे ही पवित्र मान्यता है जिसका उल्लेख कुरान शरीफ़ में भी किया गया है।

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जुमातुल विदा मनाये जाने की वजह Reason of Celebration of Jamat-ul-vida

अरबी में इसे अल-जूमुह-अल-यदिम भी कहा जाता है। वही उर्दू में इसे अलविदा जुमा के नाम से भी जाना जाता है।

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ऐसा माना जाता है कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने इस दिन अल्लाह की विशेष इबादत की थी। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन खुदा अपने दूत को बंदगी करने वाले लोगों की फरियाद सुनने तथा उनकी सारी तकलीफ़ दूर करने के लिए धरती पर भेजते हैं।

मुस्लिम समुदाय में जमात-उल-विदा एक खास दिन होता है। वैसे तो पूरा रमज़ान का महीना ही पवित्र और  खास माना जाता है परंतु रमज़ान के आख़िरी शुक्रवार का अधिक महत्व होता है। इस दिन मस्जिदों में रोजेदारों की भीड़ इकट्ठी हो जाती है।

इस दिन का लोग बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस खास दिन पर मुस्लिम समुदाय के द्वारा एक साथ नमाज अदा करने की मान्यता है। इस दिन को लोग सफलता और बरकत प्राप्त करने के उद्देश्य से मस्जिदों में सच्चे हृदय से नमाज़ अदा करते हैं।

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जमात-उल-विदा उत्सव कैसे मनाया जाता है? How to Celebrate Jamat-ul-vida?

मुस्लिम धर्म के सभी त्योहारों में से सबसे अधिक मान्यता और उत्साह लोगों को रमज़ान के महीने के लिए होती है। रमज़ान के पवित्र महीने का लोग कई महीने पहले से बड़ी उत्सुकता के साथ इंतजार करते हैं।

रमज़ान के सबसे पवित्र और आखिरी दिन के लिए मुस्लिम लोग कई दिन पहले से ही तैयारी शुरू कर देते हैं। जमात-उल-विदा के पवित्र पर्व पर लोग बहुत सारी ख़रीददारी करते हैं।

इस त्यौहार के आने के समय मुस्लिम समुदाय अपने घर को सजाते हैं। इस दिन मस्जिदों और ईदगाह को भी बड़े हैं भव्य तरीके से सजाया जाता है, लोग अपने घरों में नए-नए पकवान बनाते हैं जिसमें सेवई भी शामिल होती है।

जमात-उल-विदा  के दिन लोग साफ-सुथरे कपड़े पहन कर मस्जिदों में नमाज अदा करने जाते हैं। इस दिन मस्जिदों में नमाज़ अदा करने के लिए पुरुषों का जाना अनिवार्य होता है तथा महिलाएं घर पर भी नमाज़ अदा कर सकती हैं।

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जुमातुल विदा का महत्व Importance of Jamat-Ul-Vida

जमात-उल-विदा का पवित्र पर्व इस्लाम में काफी पुराना बताया गया है क्योंकि खुद कुरान शरीफ में इसका जिक्र किया गया है। इसलिए यह मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए बहुत अनमोल दिन रहता है।

ऐसा माना जाता है कि खुद मोहम्मद पैगंबर साहब जी ने इस दिन अल्लाह की विशेष इबादत की थी जिससे उन्हें जन्नत की प्राप्ति हुई थी। जमात-उल-विदा का वर्णन खुद शरीफ कुरान मैं भी साफ शब्दों में किया गया है। 

इस दिन जो कोई भी अपने सच्चे दिल से खुदा की इबादत करता है उसकी दुआएँ ज़रूर कबूल होती हैं और उसके सारे गुनाह मिट जाते हैं। र

मज़ान के दौरान लोग दिन में पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं, लेकिन आखिरी जुमे को खास तौर पर सामूहिक नमाज अदा की जाती है। इस दिन सभी नमाजी अल्लाह को याद करते हुए अपने बुरे काम को माफ करने की फ़रियाद करते हैं और अपने दोनों हाथ को उठा कर अल्लाह हू अकबर बोलते हैं।

कहा जाता है कि रमज़ान के इस खास शुक्रवार को नमाज़ अदा करने और ज़रूरतमंदों की मदद करने पर कोई न कोई रहमत ज़रूर मिलती है। रमज़ान के पाक महीने में रोजेदारों के दिल को पाक रखकर नमाज़ अदा करने को कहा गया है इसलिए वे पूरे दिन में कई बार कुरान को पढ़ते हैं जिससे वे खुदा के रास्तों से जुड़ते हैं।

इस दिन लोग अपने प्रियजनों के सुख शांति के लिए खुदा से दुआ करते हैं। इस दिन हर मुसलमान अपना सारा दिन अल्लाह की इबादत में बिताता हैं। रमज़ान का यह आखिरी शुक्रवार लोगों को आत्ममंथन के लिए भी प्रोत्साहित करता है।

जिससे वह अपने अच्छे बुरे कर्मों के बारे में सोच सके और उन सभी कामों से तौबा कर सकें। इसी प्रकार के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण जमात-उल-विदा के इस पर्व को इस्लाम धर्म के अनुयायियों द्वारा बहुत महत्वपूर्ण माना जाता  है।

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निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने जमात-उल-विदा पर निबंध Essay on Jamat-Ul-Vida in Hindi पढ़ा जिसमें इसके इतिहास से लेकर आधुनिक मान्यता के बारे में बताया गया है। आशा है यह आपको सरल और उपयोगी लगा हो, अगर यह लेख आपको पसंद आया हो तो इसे जरुर शेयर करें।

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