बाल तस्करी पर निबंध Essay on Child Trafficking in Hindi

बाल तस्करी पर निबंध Essay on Child Trafficking in Hindi

आज बच्चों की तस्करी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। यह समस्या हमारे देश में ही नही बल्कि पूरे विश्व में फैली हुई है। आये दिन बाल तस्करी की खबरे सुनने को मिलती है। अपराधी बच्चो को अगवा करके उनसे मजदूरी, देह व्यापार (यौन उत्पीड़न), भीख मंगवाने, घरेलू नौकर, खेतो में मजदूरी, फैक्ट्री में काम जैसे काम करवाते है।

कई बार बच्चो के शरीर के अंगो को निकालकर बेच देते है। इतना ही नही बच्चो की खरीद फरोक्त भी बड़े पैमाने पर की जाती है। एक अनुमान के अनुसार विश्व में हर साल 2 लाख से अधिक बच्चे बाल तस्करी का शिकार होते है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 80% बाल तस्करी में लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न और बाल मजदूरी का काम जबरन करवाया जाता है। अपराधियों की सांठ गाँठ – पुलिसवालों, नेताओं, उच्च अधिकारियों से होती है जिसकी वजह से वो छूट जाते हैं। अभी हमारे देश में “बाल तस्करी” को रोकने के लिए सख्त कानून नही है।

अपराधी इसका फायदा उठा लेते है। देश में हर साल 1 लाख बच्चे लापता हो जाते है। 200 बच्चे देश में प्रतिदिन लापता होते है जिसमे अधिकतर बच्चो को तस्कर दूसरे राज्यों, देशो में बेच देते है। कई बच्चो को विदेशो में बेच दिया जाता है।

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बाल तस्करी – बच्चो की तस्करी पर निबंध Essay on Child Trafficking in Hindi

भारत में बाल तस्करी के कारण  CAUSES OF CHILD TRAFFICKING IN INDIA

देश में बाल तस्करी के अनेक कारण है – गरीबी, अशिक्षा, बच्चो की अधिक संख्या, बेरोजगारी। पैसे कमाने के लिए कई लोग बाल तस्करी के व्यापार में लग गये है। वो गरीब  लोगो को बहका कर उनके बच्चो को काम दिलवाने, अच्छी नौकरी दिलवाने का झांसा देकर शहर ले जाते है। अतिनिर्धन माँ-बाप उनके बहकावे में आसानी से आ जाते है। तस्कर उन बच्चों को शहरो में ले जाकर बेच देते है।

कई बार गरीब माँ-बाप खुद ही अपने बच्चो को पैसे के लालच में बेच देते है। इसके अलावा जो बच्चे खो जाते है उनको अपराधी अगवा करके बेच देते है। लड़कियों को वेश्यालयों में देह व्यापार के लिए विवश किया जाता है।

बेरोजगारी के चलते कई लोग इस धंधे में लगे हुए है। इस काम में पुलिस, नेताओ को पैसे खिलाकर अपराधी अपना काम बना लेते है। बच्चो को 15000 से 50000 में बेच दिया जाता है। तस्कर अच्छा पैसा बना लेते है। ऐसे काम के लिए अपराधी गिरोह में काम करते है।

देश में बाल तस्करी की बढ़ती घटनायें  GROWING INCIDENTS OF CHILD TRAFFICKING IN INDIA

  • देश में हर साल बड़ी मात्रा में बाल तस्करी की घटनायें बढ़ रही है।
  • राजस्थान में 2009 से 2017 के बीच 956 बच्चो की तस्करी हो चुकी है।
  • राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2015 में 6500 बच्चो की तस्करी की गयी। इसमें में अधिकांश देह व्यापार, अश्लील चित्रण, फैक्ट्री में मजदूरी जैसे कामो का शिकार बने।
  • 2015 में हैदराबाद में एक चूड़ी बनाने वाली फैक्ट्री से 87 बाल मजदूरों को मुक्त करवाया गया। ये बच्चे बिहार राज्य के रहने वाले थे।
  • 2016 में कुल 9000 से अधिक बच्चो की तस्करी की गयी. लुधियाना की एक कपड़ा फैक्ट्री से 79 बच्चो को बाल मजदूरी से मुक्त करवाया गया।
  • 2016 में ही इंदौर में एक बैग बनाने वाली फैक्ट्री से 50 से अधिक बाल मजदूरों को आजाद करवाया गया। बच्चो से रोज 16 घंटे काम करवाया जाता था। बच्चो की उम्र 6 से 13 साल पायी गयी। उनको 500 से 4000 रूपये प्रतिमाह का न्यूनतम वेतन दिया जाता था।
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कैलाश सत्यार्थी KAILASH SATYARTHI

इन्होने देश में “बाल तस्करी और बाल यौन शोषण” रोकने के लिए उल्लेखनीय काम किया है। इन्होने “बचपन बचाओ आंदोलन” चलाकर 144 देशों में 80000 से अधिक बच्चो को गुलामी से मुक्त करवाया है। आपको 2014 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। आज देश में “बाल तस्करी” को रोकने के लिए समाज और सरकार जागरूक हो रहा है।

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने 11 सितंबर 2017 को “बाल तस्करी और बच्चो के यौन शोषण” के खिलाफ एक महारैली निकाली। इसमें “सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भारत” का नारा दिया गया।

कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि “आज मैं बाल यौन उत्पीड़न और बाल तस्करी के खिलाफ युद्ध की घोषणा करता हूं। आज मैं इतिहास के सबसे बड़े सामाजिक जागरूकता आंदोलन की घोषणा करता हूं।”

बाल तस्करी को रोकने के लिए कानून LAWS TO PREVENT CHILD TRAFFICKING

  • बाल श्रम (प्रतिबंध एवं नियमन) अधिनियम 1986 देश का सबसे पहला बाल श्रम कानून था।
  • देश में प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड फॉर सेक्सुअल एक्ट (प्रॉक्सो एक्ट) Protection of Child for Sexual Act:  इस कानून को नाबालिग बच्चो से यौन अपराध को रोकने के लिए 2012 में बनाया गया है। इस कानून के अनुसार केस की सुनवाई बंद कमरे में की जाती है। बच्चे की पहचान गुप्त रखी जाती है।
  • बाल श्रम (प्रतिबंध एवं नियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 में बाल श्रम पर नया कानून पारित किया गया। इसके अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चो को काम पर रखने वाले को 2 साल तक की जेल होगी और 50000 रुपये तक का जुर्माना लगेगा।
  • 14 से 18 साल तक के बच्चो को ज्वलनशील पदार्थो को बनाने वाली फैक्ट्री, पटाखा फैक्ट्री में काम पर रखने की रोक है।
  • दूसरी बार बाल अपराध में दोषी पायें जाने पर नियोक्ता को 3 साल तक की जेल हो सकती है।

बाल तस्करी को रोकने में समस्याएं  PROBLEMS TO STOP CHILD TRAFFICKING

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार हर साल होने पर बाल अपराध, बाल यौन शोषण, बाल तस्करी जैसे अपराधो में सिर्फ 5 से 6% दोषियों को सजा हो पाती है। बाकी मुकदमे सालों साल चलते रहते है और केस कमजोर होने पर अपराधी छूट जाते है। इसे रोकने में अनेक समस्यायें है।

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कई बार माँ-बाप घटना की रिपोर्ट भी दर्ज नही करवाते है। कुछ लोक-लाज, शर्म, बदनामी की वजह से प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज नही करवाते है। बाल यौन हिंसा में अनेक बार पारिवारिक सदस्य और रिश्तेदार ही दोषी होते है। ऐसे मामले में परिवार चुप्पी साध लेते है और रिपोर्ट दर्ज नही करवाते है।

बाल तस्करी का समाधान HOW TO STOP CHILD TRAFFICKING IN INDIA

इसके लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक होना पड़ेगा तभी ये अपराध रुक सकता है। बच्चा किसी का भी हो, अगर उसका शोषण किया जा रहा है तो उसके खिलाफ आवाज उठाना सभी का कर्तव्य है। देश के सभी नागरिको का कर्तव्य है कि अगर कही पर बाल तस्करी, बाल अपराध से जुडी जानकारी मिलती है तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

निष्कर्ष CONCLUSION

“बाल तस्करी” आज हमारे आधुनिक समाज के चेहरे पर बड़ा कलंक है। इसे जड़ से खत्म करने के लिए सरकार को कठोर कानून बनाना होगा। नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने राष्ट्रपति से मिलकर बाल तस्करी के खिलाफ कठोर कानून बनाने की सिफारिश की है। इसे रोकने के लिए देश के हर नागरिक को आवाज उठानी होगी। देश का हर बच्चा आपके अपने बच्चे जैसा है।

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