जनरेशन गैप – पीढ़ी अंतराल पर निबंध Essay on Generation Gap in Hindi

जनरेशन गैप – पीढ़ी अंतराल पर निबंध Essay on Generation Gap in Hindi

जनरेशन गैप (पीढ़ी अंतराल) एक सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है। युवा माता पिता संतान उत्पत्ति करके वृद्ध हो जाते हैं और उनके बच्चे युवा हो जाते हैं। कई बार देखा गया है कि वृद्ध माता-पिता और युवा बच्चों की सोच में बहुत फर्क होता है। इसे ही पीढ़ी अंतराल (जनरेशन गैप) कहते हैं।

बहुत बार माता पिता और बच्चों में विभिन्न सोच के चलते आपसी टकराव और मतभेद हो जाता है। धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक, नैतिक मूल्य जैसे अनेक विषयों में अंतर हो जाता है।

जनरेशन गैप – पीढ़ी अंतराल पर निबंध Essay on Generation Gap in Hindi

बहुत बार बच्चों को लगता है कि उनके माता-पिता बहुत सुस्त, दकियानूसी और धीमी सोच का अनुसरण कर रहे हैं। पीढ़ी अंतराल के अनेक उदाहरण हमें रोजमर्रा की जिंदगी में देखने को मिलते हैं। बच्चे जहां तेज रफ्तार पॉप संगीत सुनना चाहते हैं वही माता पिता धार्मिक भजन और गीत सुनना चाहते हैं।

जहां माता पिता पैसों को बचाने की सलाह देते हैं तो युवा पीढ़ी इसे खर्च करने पर जोर देती है। माता पिता धार्मिक और पूजा पाठ में मन लगाने की सलाह देते हैं तो युवा पीढ़ी अपना अधिकतर समय मौज मस्ती और मनोरंजन में व्यतीत करती है। दोनों पीढ़ियों में जमीन आसमान का फर्क दिखने लग जाता है। धीरे-धीरे यह टकराव पर पहुंच जाता है।

आजकल की नई नवेली बहु अपनी सास का सम्मान नहीं करती है क्योंकि वो 56 तरह का देसी, विदेशी, कॉन्टिनेंटल, थाई और तरह तरह का खाना पकाना जानती हैं। वहीं सास पुराने तरीके से खाना बनाती है। माता पिता की रोक टोक को बच्चे एक भयंकर जाल की तरह देखते हैं।

वह आजादी पाना चाहते हैं। वह किसी भी तरह की रोक टोक भरा जीवन नहीं जीना चाहते हैं। इसलिए हमारे देश में धीरे धीरे एकल परिवार की परंपरा बढ़ रही है। संयुक्त परिवार टूट रहे हैं जो कि बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है। सच्चाई है कि माता-पिता सदैव अपने बच्चों का भला चाहते हैं। इस बात को युवा पीढ़ी नहीं समझ पाती है।  

जनरेशन गैप (पीढ़ी अंतराल) के प्रभाव

एकल परिवार को बढ़ावा देता है

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पीढ़ी अंतराल के कारण युवा और वृद्ध पीढ़ियों की सोच में अंतर है, इसलिए संयुक्त परिवार टूट जाता है। युवा पति पत्नी कहीं और जाकर रहने लग जाते हैं। वे स्वच्छंद और आजादी भरा जीवन जीना चाहते हैं। वे किसी भी प्रकार की रोक टोक नहीं चाहते हैं।

युवा पीढ़ी बड़ों का सम्मान नहीं करती है

पीढ़ी अंतराल की सबसे बुरी बात यह है की आज की युवा पीढ़ी अपने आप को श्रेष्ठ समझती है। यह संभव भी हो सकता है परंतु हमें हर हालत में बड़ों का सम्मान करना चाहिए।

आजकल की ज्यादातर नवविवाहिता बहुये अपने सास ससुर का सम्मान नहीं करती। छोटे भाई अपने बड़े भाइयों का सम्मान नहीं करते है। पुत्र अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करता। इस तरह से समाज पतन की ओर जा रहा है।

युवाओं में संस्कार और नैतिक मूल्य समाप्त हो रहे है

भले ही बूढ़े माता-पिता की बातें युवाओं को जंजाल जैसी लगती हो परंतु इसके अनेक फायदे भी हैं। घर में बड़े लोगों के होने से हर व्यक्ति आत्मसंयम और अनुशासन में रहता है। नैतिक मूल्य बचे रहते हैं। परंतु जब घर में वृद्ध और बड़े नहीं होते तो युवा भी भटक जाते हैं।

अक्सर वो शराब, नशा जैसी बुरी लतें पाल लेते है। आजकल लिव इन रिलेशनशिप का चलन धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है। बिना शादी किए ही युवा लड़का- लड़की साथ में पति-पत्नी की तरह जीवन बिता रहे हैं जो कि देश को नैतिक पतन की ओर ले जा रहा है। इस तरह से धीरे धीरे मूल्य समाप्त हो जाएंगे।

पशुओं की तरह सिर्फ अपनी कामवासना को शांत करना शुरू कर देगा। हम सभी मनुष्य हैं। हम पशुओं की तरह कामांध होकर व्यवहार नहीं कर सकते है। हमें मनुष्य की श्रेष्ठता को बचाए रखना होगा।

वृद्ध लोगों को ओल्ड एज होम (वृद्धाश्रम) में भेजा जा रहा है

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आये दिन हमें यह सुनने में मिलता है कि युवा बच्चे विवाह कर मौज मस्ती मे जिंदगी जीते हैं, पर बूढ़े माता पिता की तरफ उनका कोई ध्यान नहीं होता है। छोटी छोटी चीजों के लिए भी बूढ़े मां बाप को विनती करनी पड़ती है।

बहुत बार तो यह सीमा को पार कर जाता है। युवा पुत्र-पुत्र वधू तो खुद का खाने पीने का बहुत ध्यान रखते हैं परंतु मां बाप भूखे ही रह जाते हैं। वृद्ध होने के कारण वे शरीर से कमजोर हो जाते हैं। ना ही उनके पास धन होता है और ना ही इतनी शक्ति की वृद्धावस्था में जीविकोपार्जन कर सके।

उन्हें पूरी तरह से अपने बच्चों पर आश्रित होना पड़ता है। बहुत से बच्चे अपने बूढ़े मां बाप को ओल्ड एज होम (वृद्धाश्रम) में भर्ती करवा देते हैं, जिससे उन्हें मां बाप की परवरिश और देखभाल से छुटकारा मिल जाये।

यह चलन अमेरिका जैसे पाश्चात्य देशों में सबसे अधिक देखने को मिलता है परंतु यह कुरीति धीरे-धीरे भारत में भी अपने पैर पसार रही है, जो कि बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है। इस तरह हमारा देश निश्चित रूप से पतन की ओर जाएगा।

युवा पीढ़ी भी वृद्ध होकर जनरेशन गैप का शिकार होती है – जो युवा अपने मां बाप की इज्जत नहीं करते, आगे चलकर उनके साथ भी वैसा ही होता है। उनके बच्चे भी आगे चलकर उनको बेसहारा छोड़ देते हैं। उनके बच्चे भी बड़े होकर उनकी इज्जत नहीं करते और उनसे कन्नी काट जाते हैं।

जनरेशन गैप पीढ़ी अंतराल की समस्या कैसे दूर करें

यह समस्या केवल संयम और धैर्य से दूर की जा सकती है। युवाओं को यह बात समझनी चाहिए कि माता पिता उन पर कोई रोक टोक नहीं लगाना चाहते। वह बस उनकी भलाई चाहते हैं। वहीं प्रौढ़ और वृद्ध लोगों को यह समझना चाहिए कि युवाओं पर कोई भी इच्छा न थोपे। उन्हें वही काम करने दे जिसमें उन्हें अच्छा लगता है। जब युवा कोई गलत काम करें तो ही उन्हें टोकना चाहिए।

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