गुरु पूर्णिमा पर निबंध Essay on Guru Purnima in Hindi

गुरु पूर्णिमा पर निबंध Essay on Guru Purnima in Hindi

गुरु पूर्णिमा का पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ (जून- जुलाई) के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को  मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 16 जुलाई 2019 को मनाया गया था। यह नेपाल में मुख्य रूप से हिन्दू, बुद्ध और जैन धर्म के लोग मनाते है।

इस दिन गुरुओ, शिक्षको की पूजा और सम्मान किया जाता है। यह पर्व वर्षा ऋतु की शुरुवात में मनाया जाता है। मौसम बहुत ही सुखद होता है, न बहुत गर्मी होती है न बहुत सर्दी। ऐसे सुहावने दिनों में गुरु और शिष्य एक साथ एकत्र होकर ज्ञान बढ़ाते है। शिष्यों को नई दीक्षा और पाठ पढ़ाया जाता है।

यह दिन महाभारत ग्रंथ के रचयिता महर्षि वेद व्यास के जन्मदिवस के रूप में भी मनाते है। इन्होने चारो वेदों की रचना भी की थी इसलिए आपको “वेद व्यास” के नाम से पुकारा जाता है। इनको सम्पूर्ण मानव जाति का गुरु माना जाता था। गुरु पूर्णिमा के दिन ही संत कबीर के शिष्य संत घीसादास का जन्मदिवस भी मनाया जाता है।

इस दिन ही भगवान गौतम बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था। इस दिन ही भगवान शिव ने सप्तऋषियो को योग का ज्ञान दिया था और प्रथम गुरु बने थे। गुरु का हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।

“गुरु” शब्द गु और रु शब्दों से मिलकर बना है। गु का अर्थ है अन्धकार और रु का अर्थ है मिटाने वाला। इस प्रकार गुरु को अन्धकार मिटाने वाला या अंधकार से प्रकाश में ले जाने वाला कहा जाता है।

गुरु पूर्णिमा पर निबंध Essay on Guru Purnima in Hindi

अज्ञान तिमिरांधश्च ज्ञानांजन शलाकया, चक्षुन्मीलितम तस्मै श्री गुरुवै नमः”

अर्थात जिस तरह देवताओ की पूजा की जाती है उसी तरह से गुरु की पूजा भी करनी चाहिये क्यूंकि उसने ही ईश्वर से मिलवाया है। सही गुरु के न होने पर व्यक्ति जीवन में भटक जाता है। स्कूलों में हमारे गुरु (शिक्षक) ही पढ़ना, लिखना, सही आचरण करना सिखाते है।

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गुरु के महत्व पर कबीरदास के दोहे KABIRDAS POEMS ON IMPORTANCE OF GURU (TEACHER) IN OUR LIFE

महान संत कबीरदास ने गुरु के महत्व को इस तरह बताया है-

गुरू गोविन्द दोऊ खङे का के लागु पाँव,
बलिहारी गुरू आपने गोविन्द दियो बताय।

अर्थात यदि भगवान और गुरु दोनों सामने खड़े हो तो मुझे गुरु के चरण पहले छूना चाहिये क्यूंकि उसने ही ईश्वर का बोध करवाया है। गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा है। प्रसिद्ध सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य को अपना गुरु बनाकर ही राजा का पद पाया था। इतिहास में हर महान राजा का कोई न कोई गुरु जरुर था। गुरु और शिष्य का रिश्ता बहुत मधुर होता है।

सब धरती कागज करू, लेखनी सब वनराज।
सात समुंद्र की मसि करु, गुरु गुंण लिखा न जाए।।

अर्थात यदि पूरी धरती को लपेट कर कागज बना लूँ, सभी वनों के पेड़ो से कलम बना लूँ, सारे समुद्रो को मथकर स्याही बना लूँ, फिर भी गुरु की महिमा को नही लिख पाऊंगा।

मनु (ब्रह्मा के मानस पुत्रो में से एक) ने विद्या को माता और गुरु को पिता बताया है। माता पिता सिर्फ हमे जन्म देने का काम करते है पर गुरु ही हमे ज्ञान दिलाता है, बिना ज्ञान के कोई भी व्यक्ति विकास नही करता है।

गुरु ही अपनी शिक्षा देकर हमारा स्वयं से आत्मसाक्षात्कार करवाता है। इसलिए गुरु की महत्वता आजीवन बनी रहती है। देवताओं के गुरु देवगुरु बृहस्पति थे तो अशुरो के गुरु शुक्राचार्य थे। इस तरह समाज के सभी वर्गो को गुरु की आवश्यकता पड़ी। सिख धर्म में गुरु का विशेष महत्व होता है। सिख धर्म के लोग अपने 10 गुरुओ की पूजा करते है और उनके बताये मार्ग पर चलते है।

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प्राचीन भारत में आज की तरह स्कूल, कॉलेज न थे। उस समय गुरुकुल प्रणाली द्वारा शिक्षा दी जाती थी। समाज के सभी वर्गों के बालक गुरुकुल जाकर शिक्षा प्राप्त करते थे। वो गुरुकुल (आश्रम) में ही रहते थे, वही रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे।

ये व्यवस्था आज के ज़माने की आवासीय स्कूल योजना के समान थी। शिष्य ही भिक्षा मांगने का काम करते थे। भिक्षा में जो भी प्राप्त होता था उसे सबसे पहले गुरु को लाकर देते थे। शिक्षा की ऐसी प्रणाली बहुत श्रेष्ठ मानी जाती थी। अनेक राजा महाराजा की संताने भी गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करते थे। गुरु की महत्वता पर एक और श्लोक है-

गुरुब्रह्मा गुरुविर्ष्णुः, गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः।।

अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है, गुरु ही भगवान शिव है। गुरु ही साक्षात परम ब्रहम है। ऐसे गुरु के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ।

भारत में गुरु पूर्णिमा का आयोजन CELEBRATION OF GURU PURNIMA IN INDIA

इस दिन स्कूल, कॉलेजों में गुरुओ, शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। उनके सम्मान में सभी लोग भाषण देते है, गायन, नाटक, चित्र, व अन्य प्रतियोगितायें आयोजित की जाती है। पुराने विदार्थी स्कूल, कॉलेज में आकर अपने गुरुजन को उपहार भेंट करते है और उनका आशीर्वाद लेते है।

नेपाल में गुरु पूर्णिमा का विशेष आयोजन   SPECIAL CELEBRATION OF GURU PURNIMA IN NEPAL

नेपाल में इसे गुहा पूर्णिमा के रूप में मनाते है। छात्र अपने गुरु को स्वादिस्ट व्यंजन, फूल मालाएं, विशेष रूप से बनाई गयी टोपी पहनाकर गुरु का स्वागत करते है। स्कूल में गुरु की मेहनत को प्रदर्शित करने के लिए मेलो का आयोजन किया जाता है। इस दिवस को मनाकर गुरु-शिष्य का रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है।

हमारे जीवन में गुरु का महत्व  IMPORTANCE OF GURU (TEACHER) IN OUR LIFE

आज के भागदौड़ भरे भौतिकतावादी समाज में हमे गुरु ही जरूरत बहुत अधिक है। गुरु का महत्व सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में ही नही, बल्कि व्यापक अर्थ में देखने को मिलता है। अब तो आध्यात्मिक शांति के लिए अनेक लोग किसी न किसी गुरु की शरण में चले जाते है। श्री श्री रविशंकर, ओशो, जयगुरुदेव, मोरारजी बापू, बाबा रामदेव ऐसे अनेक गुरु है जो अपने व्याख्यानों, भाषणों के द्वारा लोगो को तनाव मुक्त कर रहे है।

घर, मकान, धन, सम्पत्ति और भौतिक साधन जुटाने में आज का व्यक्ति अँधा हो गया है। यही वजह है की भारत में आत्महत्या के मामले हर दिन देखने को मिल रहे है। लोगो की जिन्दगी में तनाव भर गया है। छोटी छोटी बातो पर लोग एक दूसरे को जान से मारने को तैयार हो जाते है, लोगो के जीवन में आध्यात्मिक शांति नही है।

निष्कर्ष: हमारे समाज में हर दिन अनेक प्रकार के अपराध हो रहे है। इसका क्या कारण है?? इसकी वजह है की लोग कहीं न कहीं अपने जीवन में भटक गये है। उनके पास मानसिक शांति नही रह गयी है। लोग अपना दिमागी संतुलन खो रहे है। तनाव, अवसाद में जीवन जीने की वजह से वो अपराध कर बैठते है।

इसलिए हर भटके हुए व्यक्ति को सही मार्ग दिखाने का काम “गुरु” की करता है। बाबा रामदेव जैसे गुरु आज अपने योग द्वारा सभी को निरोगी बना रहे है। बीमारियों को निशुल्क दूर भगा रहे है। इसलिए गुरु का अर्थ बहुत व्यापक और बड़ा है। हम सभी को अपने गुरु जनों को कोटि कोटि प्रणाम करना चाहिये। उन्होंने जो ज्ञान हमे दिया उनका मूल्य कभी भी नही चुकाया जा सकता है।

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