मुर्गी पर निबंध (पूरी जानकारी) Essay on Hen in Hindi

इस लेख में हमने मुर्गी पर निबंध Essay on Hen in Hindi लिखा है जिसमे आप इसके विषय मे पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही मुर्गी पालन के विषय में भी लघु रूप में हमने जानकारी दी है।

नीचे पढ़ें मुर्गी पर निबंध…

मुर्गी पर निबंध Essay on Hen in Hindi

दोस्तों हमें अपने आसपास कई प्रकार के पालतू पशु-पक्षी देखने को मिलते है, जिनमें से अधिकतर पशु पक्षी को हम अपने घरों में पालतू जानवर के रूप में पालते है। इन पशुओं से हमें कई लाभ होते है जैसे कुत्ते को हम अपने घर की रखवाली करने के लिए पालते है, तो वहीं गाय को दूध के लिए आदि। 

इसी प्रकार मुर्गी पालन भी अंडे और मांस के लिए किया जाता है। आज हम बात करने वाले है मुर्गी के बारे में और मुर्गी पालन का व्यवसाय क्या है और इससे आपको क्या लाभ हो सकते हैं?

पढ़ें: ब्रॉइलर मुर्गी पालन व्यवसाय कैसे शुरू करें?

मुर्गी के बारे में जानकारी Information About Hen in Hindi

मुर्गी का रंग लाल, सफ़ेद और भूरा होता है। इसके सिर पर एक लाल रंग की कलगी होती है जिसके कारण यह इसे अन्य पक्षियों से अलग करता हैं। मुर्गी को पंख होते हैं जिसके कारण वो कम ऊंचाई पर कुछ समय के लिए उड़ पाती है। मुर्गी को अपने पैरों पर चलना पसंद हैं। 

मुर्गियों का आकार अन्य पक्षियों की तुलना में बड़ा होता है, मुर्गी के दो पंख होते हैं लेकिन वो लम्बी उड़ान नहीं भर सकती। इसके दो पैर होते है जिसमे से एक से वह चलती है और दूसरे पैर का उपयोग वो दौड़ने में करती है।

मुर्गियां को अक्सर गांव में देखा जा सकता है, अधिकतर ग्रामीण लोग मुर्गी पालन का व्यवसाय करते है। लोग अंडे और मांस के लिए मुर्गियां रखते हैं। अंडे लोगो के द्वारा प्रोटीन की मात्रा प्राप्त करने के लिए भारी मात्रा में खाए जाते है। 

मुर्गा सुबह बांग देकर सभी को जगाने का कार्य करता है। एक दिन में मुर्गी करीब एक या दो अंडे देती है और मुर्गी साल भर में कम से कम 300 अंडे देती है। मुर्गी अंडो पर बैठकर अपने शरीर की गर्माहट से चूजों को अंडों से फूट कर निकालने में मदद करती है। मुर्गी पालन यह एक अच्छा व्यवसाय है क्योंकि इसमें निवेश बहुत कम है।

मुर्गी अंडा देने के लिए एक जगह चुनती हैं और उसी जगह पर हर दिन अंडा देती है और अंडो के ऊपर बैठकर उनको सेती है जिससे अंडे के अन्दर से उसके बच्चे निकलते है जिन्हें चूजे कहते हैं। कई स्थानों पर मुर्गी की कुश्ती कराई जाती है जिन्हें लोगों द्वारा आज भी पसंद किया जाता है।

मुख्य रूप से मुर्गी का भोजन मुर्गी दाना ओर कीड़े-मकोड़े है। मुर्गा अपनी आवाज (बांग) से सभी को जगा देता है पर मुर्गियां बहुत कम आवाज निकालती है जो सिर्फ बच्चों को चेतावनी देने के लिए। एक मुर्गी का जीवनकाल 5 से 10 साल तक होता हैं। जो अलग-अलग ब्रीड के अनुसार अलग-अलग होता है।

मुर्गी हल्की आवाज होने से डर जाती है। नर को मुर्गा और मादा को मुर्गी कहा जाता हैं। नर पक्षी एक मुर्गा है। मुर्गा और मुर्गी की पहचान मुर्गे और मुर्गी के सर पर पाई जाने वाली कलगी से हो सकती है क्योकि मुर्गी की कलगी छोटी और मुर्गे की बड़ी होती है। मुर्गे का शरीर ऊपर की ओर अकड़ वाला होता है जबकि मुर्गी का थोडा दबा हुआ होता है।

पढ़ें: देसी मुर्गी पालन के फायदे

मुर्गी पालन एवं इसके फायदे Benefits of Chicken Farming in Hindi

मुर्गियों के पालन के व्यवसाय को मुर्गी पालन या कुक्कुट पालन कहा जाता है। यह व्यवसाय बहुत ही कम कीमत में शुरू किया जा सकता है।

यह व्यापार मुख्य रूप से अंडो, चूजों और मांस के उद्देश्य से किया जाता है। मुर्गी के मांस को सफेद मांस भी कहते है। यह व्यवसाय अन्य पशुपालन से आसान है। 

2012 की गणना के अनुसार भारत में करीब 730 मिलियन मुर्गियां थे जिनसे करीब 74 बिलियन अंडो की प्राप्ति हुई। इस प्रकार देखा जाए तो भारत में दुनिया की कुल मुर्गियों का लगभग 3 प्रतिशत हैं।

अंडे व मांस के उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से मुर्गी पालन किया जाता है इस कारण इसमें उन्नत मुर्गी की नस्लें विकसित की जाती है जैसे अंडों के लिए लेअर प्रकार की मुर्गी का पालन किया जाता है जबकि मांस के लिए ब्रालर प्रकार की मुर्गियों को पाला जाता है।

मुर्गी पालन के कई फायदे भी है जैसे मुर्गी पालन का व्यवसाय करीब 30 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है।

मुर्गी के अंडो और मांस से हमारे शरीर में वसा, विटामिन एवं खनिज पदार्थों की भी पूर्ति होती है। इससे हमें बीट भी प्राप्त होती है, जिसका उपयोग हम कृषि एवं बागवानी में खाद के रूप में कर सकते है।

दून भर में मुर्गियों के विभिन्न नसलें Different Breeds of Hen in Hindi

भारत देश में मुर्गी की दो प्रकार की नस्लों का मुर्गी पालन किया जाता है –

मुर्गियों की देसी नसलें– लाल जंगली मुर्गा, असील, चटगाँव, कड़कनाथ एवं घोघस प्रकार की नस्लें जिनका पालन मुख्य रूप से मांस के लिए किया जाता हैं। पढ़ें: देसी मुर्गी पालन के विषय में जानकारी

मुर्गियों की विदेशी नसलें- रोड आइलैंड रेड, प्लाईमाउथ रॉक, ब्रह्मा, लेग हॉर्न, व्हाईट लेग हॉर्न, कार्निश, सिल्की आदि नस्ले शामिल है। अधिक उत्पादकता के कारण देशी नस्लों से ज्यादा विदेशी नस्ल को अच्छा माना जाता है। इसमें से व्हाईट लेग हॉर्न प्रकार की नस्ल की सबसे अधिक अंडे देने वाली नसल हैं। 

इसी प्रकार कार्निस, न्यू हैम्पशायर एवं प्लाई माउथ रॉक मांस के लिए उत्तम मानी जाती है। इनके नर का वजन 4.5 किलोग्राम और मादा का 3.5 किलोग्राम होता है।

मुर्गी के चूजों को पालना-पोषण Caring of Baby Chicks of Hen

मुर्गी के बच्चे को भी खाने में उपयोग किया जाता है। मुर्गी के छोटे छोटे बच्चों को चूजे कहते हैं, चूजे दो प्रकार से पैदा किए जाते हैं-

1. प्राकृतिक विधि Natural Brooding Process

मुर्गी अपने चूजों को प्राकृतिक तरीके से पालने का कार्य करती है। मुर्गी जब अंडे देती है तो इन अंडों को वह अपने पंख फैलाकर ढक कर इन पर बैठ जाती है। मुर्गी के शरीर की गर्मी मिलने के कारण इन अंडों में से चुजें तैयार होने लगते है इस प्रक्रिया को अंडे सेना (ब्रूडिंग) कहते हैं। करीब 20 दिनों के बाद अंडों से छोटे छोटे चूजे बाहर निकल आते हैं।  

2. कृत्रिम विधि Artificial Brooding

बिना मुर्गी की सहायता के अंडों से चूजे तैयार करने की कृत्रिम प्रक्रिया को आर्टिफिशियल ब्रूडिंग कहते है। इसके लिए पोषक गृह बनाए जाते हैं। पोषक गृहों (ब्रूडिंग हाउस) में चूजों को गर्माहट दी जाती है जिससे उनका विकास होता है। चूजों के ब्रूडिंग हाउस में उन्हें गर्म रखना, आराम देना तथा अच्छा दाना देना आवश्यक होता है।

पढ़ें- मुर्गी पालन में ब्रूडिंग की पूरी जानकारी

मुर्गी की नस्ल के गुण Characteristics of the Hen Breed

मुर्गी पालन के उद्देश्य से मुर्गी की नस्ल में निम्न गुणों का होना अति आवश्यक है –

  • चूजों की संख्या व गुणवत्ता का अधिक होना अति आवश्यक है।
  • मुर्गियों में मौसम के अनुसार गर्मी या उच्च तापमान को सहने की क्षमता होना चाहिए।
  • र्गियों की देखभाल में कम खर्चा हो।
  • अंडे देने वाली मुर्गियों में ऐसी क्षमता होना चाहिए जो कृषि के उपोत्पाद से प्राप्त सस्ते रेशेदार को आहार के रूप में इसका उपभोग कर सकें।

मुर्गी पालन व्यवसाय के लिए कुछ विशेष बातें Some Special Things for the Poultry Business

मुर्गी पालन के व्यवसाय को व्यावसायिक स्तर से शुरू करने के लिए सभी चीजों का ध्यान रखना अति आवश्यक है जिससे इस व्यवसाय में किसी प्रकार की समस्या न आयें। यह तत्व निम्न है –

  • घर से दूर तथा खुले स्थान पर बनाएं।
  • स्थान को ढलान वाला होना चाहिए जिससे मुर्गी घर के आस पास पानी जमा न हो।
  • हवा एवं धूप की उचित व्यवस्था हो।
  • आरामदायक एवं सुरक्षित आवास हो।
  • मुर्गे मर्गियों के रहने के स्थान पर्याप्त स्थान हो जिसमें मुर्गियां घूम फिर सकें।

निष्कर्ष Conclusion

दोस्तों तो हम ने जाना कि किस प्रकार मुर्गियां हमारे लिए आवश्यक है और इसका व्यवसाय किस प्रकार हम कर सकते है। आशा करते हैं आपको यह जानकारी से भरा मुर्गी पर निबंध (Essay on Hen in Hindi) पसंद आया होगा।

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.