मानव अंग तस्करी पर निबंध Essay on Human Organ Trafficking in Hindi

मानव अंग तस्करी पर निबंध Essay on Human Organ Trafficking in Hindi

आज के आधुनिक समय में मानव अंगो की तस्करी सब्जी, भाजी की तरह हो रही है। यह एक गम्भीर मुद्दा बन गया है। यह व्यापार वैध एवं अवैध दो प्रकार से होता है। अनेक अपराधी और माफिया इसमें सक्रिय हो गये है।

इस अवैध व्यापार में सफ़ेद पोश डॉक्टर, नर्स, अस्पताल कर्मी भी शामिल हो चुके है जो गरीब मरीजो का कोई न कोई बहाना बनाकर ऑपरेशन कर देते है और मानव अंगो को चुरा लेते है। ऐसी बेईमान डॉक्टर और अस्पताल कर्मी आपसी सांठ गाँठ से बाद में मानव अंगो को ऊंचे दामो पर बेच लेते हैं। आजकल मानव अंगो की खरीद फरोक्त ऑनलाइन भी होने लगी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2007 में एक बुलेटिन जारी किया था। इसके मुताबिक, भारत में हर साल करीब 2,000 लोग पैसे कमाने के लिए अपनी किडनी बेचते हैं। भारत को ‘मानव अंगों का निर्यात करने वाले जाने-माने देश’ की संज्ञा दी गई।

2002 में अमेरिकन मेडिकल जर्नल में प्रकशित रिपोर्ट के अनुसार ‘भारत में किडनी खरीदने वाले ज्यादातर मरीज अमीर होते हैं। जबकि बेचने वाले 96 फीसदी तक लोग गरीब तबके से ताल्लुक रखते हैं।

ये लोग ज्यादातर अपना कर्ज चुकाने के लिए किडनी बेचते हैं। उन्हें एक किडनी के एवज में 50 से 70 हजार रुपए तक मिल जाते हैं। इन पैसों का अधिकांश हिस्सा कर्ज चुकाने में खर्च होता है। फिर जो बच जाता है, वह खाने और कपड़े पर खर्च होता है। WHO के अनुसार 91 देशो में किडनी का प्रत्यारोपण किया जाता है। 2005 में विश्व भर में 66000 किडनी, 21000 लीवर, और 6000 हृदय प्रत्यारोपण किया गया।

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मानव अंग तस्करी पर निबंध Essay on Human Organ Trafficking in Hindi

किन अंगो की है सबसे ज्यादा मांग  HUMAN ORGANS IN DEMAND

अंगो की तस्करी के लिए अनेक गिरोह सक्रीय हैं। गुर्दा, यकृत, आंत, रक्तवाहिनी, नशे, त्वचा, हड्डियाँ, स्नायुबंधन (अस्थिबंधन) ह्रदय, अग्न्याशय, ह्रदय के वाल्व (नर्म हड्डी), रक्त, प्लेटलेट्स, ऊतक, कोर्निया (नेत्रपटल), टेंडन समेत कुल 37 अंगो की राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय बाजार में खरीद फरोक्त होती है। इस व्यापार में अच्छा पैसा मिलता है।

मानव अंगो का मूल्य HUMAN ORGAN COST

वैसे तो मानव अंगो अनमोल होते है पर ब्लैक मार्केट में मोटी कीमत देकर इनको ख़रीदा जा सकता है। ब्लैक मार्केट में मानव अंगो का मूल्य इस प्रकार है- इंसानी खोपड़ी- 7 से 10 करोड़, एक गिलास खून- 20 से 25 हजार, आईवीएफ के साइकल के लिए फर्टाइल एग- 10 लाख तक, किडनी- 50 से 70 हजार, बोन मैरो- 25 लाख, लीवर- 5 से 10 लाख, ह्रदय- 20 लाख से उपर, कोर्निया- 15 लाख, एक इंच खाल- 42 हजार रुपये के हिसाब से।

मानव अंग तस्करी के कारण CAUSES OF HUMAN ORGAN TRAFFICKING

मानव अंग बेहद दुर्लभ होते है। अंग दान या बेचने वाले बहुत कम है जबकि लेने वाले बहुत अधिक है। मानव अंगो को किसी फैक्ट्री में तो बना नही सकते है। इसलिए इनकी मांग बहुत अधिक है। यही वजह है की मानव अंग बेहद ऊंचे दाम पर बिकते हैं। एक मेडिकल अध्ययन के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 2.1 लाख लोगों को गुर्दा (किडनी) प्रत्यारोपण की जरूरत होती है लेकिन इनमें से मात्र 3000 से 4000 गुर्दा प्रत्यारोपण ही हो पाते हैं।

हृदय प्रत्यारोपण में तो हालात बहुत खराब हैं। प्रति वर्ष देश में 4000 से 5000 लोगों को हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है लेकिन सिर्फ 100 लोगों की यह जरूरत पूरी हो पाती है। नेशनल प्रोग्राम ऑफ कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस- एनपीसीबी की 2012-13 की रिपोर्ट के मुताबिक 2012-13 के दौरान देश में 4,417 कॉर्निया उपलब्ध थे, जबकि हर साल 80,000 से 1,00,000 कॉर्निया की जरूरत होती है। अंग प्रत्यारोपण में बड़ी दिक्कत अंग दान दाताओं का अभाव है।

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अंग तस्करी को रोकने के लिए कानून  LAWS TO STOP HUMAN ORGAN TRAFFICKING

1994 में मानव अंग प्रत्यारोपण (Transplantation of Human Organs Act) अध्यादेश पारित किया था जिसके तहत असंबद्ध प्रत्यारोपण को गैरकानूनी बना दिया। ब्रेन डेथ के बाद अंगदान को कानूनी माना गया था।

अंगो की तस्करी को रोकने के लिए “मानव अंग प्रतिरोपण संशोधन विधेयक 2009” बनाया गया है। अब मानव अंगो की तस्करी करने पर 10 साल तक की कैद और 1 करोड़ रूपये तक जुर्माना लगाया जायेगा।

इस कानून से अंगों के रखरखाव, प्रतिरोपण, अवैध व्यापार पर लगाम लगाने के लिए भी मदद मिलेगी। अधिसूचित मानव अंग प्रत्यारोपण नियम (Transplantation of Human Organs and Tissue Act), 2014 के  तहत कानून आया पर इसमें सख्ती गायब थी।

इसमें वर्ष 2011 में संशोधन किया गया और वर्ष 2014 में नए नियम बनाए गए। वर्ष 2011 में हुए संशोधन का उद्देश्य दादा-दादी और पोते-पोती को नजदीकी रिश्तेदारों के दायरे में लाकर नजदीकी रिश्तेदार की परिभाषा व्यापक बनाने और मानव अंगों की खरीद-फरोख्त रोकने के अन्य उपाय लागू करना था।

मानव अंग तस्करी के बढ़ते मामले GROWING INCIDENTS OF HUMAN ORGAN TRAFFICKING IN INDIA

  • वर्ष 2016 से 31 मार्च 2018 तक की बात करें तो दिल्ली में 208 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, वर्ष 2016 में क्राइम ब्रांच ने 66 केस दर्ज किए थे, जिनमें 76 पुरुष व 30 महिला तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
  • 2017 में नेपाल में पुलिस ने 22 प्रतिबंधित मानव खोपड़ियों के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। खोपड़ियां भारत के पंश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के रास्ते काकड़भिट्टा बॉर्डर होते हुए नेपाल ले जायी जा रही थीं। गिरफ्तार तस्कर की पहचान नेपाल के झापा जिले के काभ्रे मण्डन की देउपुर नगरपालिका-आठ निवासी सोमतमाड़ (52) के रूप में की गयी है।
  • 2017 में बाबा राम रहीम पर मानव अंगो की तस्करी करने का आरोप लगा है। उसके आश्रम में बने अस्पताल में गैर कानूनी स्किन ट्रांसप्लांट युनिट मिली। बाबा के इस अस्पताल में मरे हुए मरीजो को उनके परिजनों को वापिस नही किया जाता था और रिसर्च के नाम पर अंगो को निकालकर महंगे दामो पर बेच दिया जाता था।
  • 2016 में कोलकाता में पुलिस ने गुर्दे की तस्करी के लिए संदिग्ध सरगना को गिरफ्तार किया।
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निष्कर्ष CONCLUSION

मानव अंगो की डिमांड दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। आज अनेक तरह की बीमारियों के कारण लोगो के अंग खराब हो रहे है। अनेक लोग शराब पीकर अपनी किडनी को खराब कर लेते हैं। डॉक्टरो के अनुसार तब तक मानव अंगो की तस्करी को नही रोका जा सकता है जबतक अंगो की मांग और उपलब्धता का अंतर कम नही होता है।

अंगो की खरीद फरोक्त के काला बाजार को रोकना आसान नही है। अनेक देशो की सरकारे मानव अंगो के व्यापार को वैध करने की सिफारिश कर रही है।

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