शहीद दिवस पर निबंध Essay on Martyrs Day India in Hindi

इस लेख में आप भारतीय शहीद दिवस पर निबंध Essay on Martyrs Day India in Hindi हिन्दी में पढ़ेंगे। इसमे आप शहीद दीवस का तारीख, इतिहास, महत्व, जैसे महत्वपूर्ण जानकारी जान सकते हैं।

शहीद दिवस पर निबंध Essay on Martyrs Day India in Hindi

भारतीय शहीद दिवस अलग-अलग राष्ट्रों द्वारा मनाया जाने वाला एक वार्षिक दिन है जो सैनिकों की शहीदता को सलाम करता है जिन्होंने देश की संप्रभुता की रक्षा करने के लिए अपनी जान गंवा दी। वास्तविक तिथि एक देश से दूसरे देश में भिन्न हो सकती है।

शहीद दिवस क्या है? What is Martyr’s Day in Hindi

देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा के सामने एक राष्ट्र प्रेमी ढाल बनकर सदैव खड़ा रहता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चाहे सरहद पर तैनात अमर सैनिकों की बात की जाए या फिर देश के अंदर रहकर क्रांतिकारियों के बलिदान की बात करें सभी का बराबर योगदान रहता है। 

जो बलिदान और साहस राष्ट्र प्रेमियों में देखने को मिलता है, उसकी तुलना और किसी भी चीज से नहीं की जा सकती। ऐसे अमर शहीदों के बलिदानों का कर्ज तो नहीं चुकाया जा सकता, लेकिन उनके सम्मान में राष्ट्रीय भक्ति के प्रयासों द्वारा समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रदर्शित जरूर किया जा सकता है।

आज तक भारत के संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए लड़ते आए सभी अमर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शहीद दिवस मनाया जाता है। 

हालांकि हर रोज सरहद पर कोई ना कोई देश प्रेमी भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राण गवा देते हैं, इसीलिए शहीद दिवस किसी एक विशेष दिन पर नहीं आता। वर्ष में इतिहास के सबसे बड़े बलिदानों को याद करते हुए कई बार शहीद दिवस मनाया जाता है।

भारत के लिए शहीद हुए विभिन्न लोगों को याद करते हुए भारत सरकार ने शहीद दिवस अथवा सर्वोदय दिवस मनाने का ऐलान किया। इस दिन उन हजारों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिया है। 

शहीद दिवस अलग अलग तारीखों को मनाया जाता है, जिनमें से कुछ मुख्य दिवस 23 मार्च, 17 नवंबर, 21 अक्टूबर 19 मई, 19 नवंबर और 24 नवंबर का है।

शहीद दिवस के दिन पूरे भारत में देश के लिए अमर हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। यह दिन भारतीयों के लिए बेहद विशेष दिन होता है। क्योंकि भारत जैसे संपन्न संस्कृति वाले देश में समय-समय पर कोई न कोई महापुरुष ने जन्म लेकर देश की रक्षा का जिम्मा उठाया है। 

आज तक कई महा पुरुषों ने अपने राष्ट्र को दुश्मन के बुरी निगाहों से बचा कर रखा है। शहीद दिवस के दिन सभी लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना झलकती है। 

यह दिन हर एक भारतीय के लिए विशेष होता है, जब उन्हे अपने रक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर प्राप्त होता है। यह दिन उन महान लोगों के लिए समर्पित होता है, जिन्होंने स्वयं से पहले राष्ट्र को प्राथमिकता दी है।

शहीद दिवस की तारीख Shaheed Diwas – Martyrs’ Day (in India) Dates

भारत में शहीद दिवस कई अलग-अलग तरीकों में मनाया जाता है। मुख्य रूप से शहीद दिवस 30 जनवरी, 23 मार्च, 27 मई, 21 अक्टूबर, 17 नवम्बर, 19 नवम्बर को मनाया जाता है।

भारत में शहीद दिवस मुख्य रूप से भगत सिंह, राजगुरु, तथा सुखदेव के महान कार्यों की याद करने के लिए मनाया जाता है। यह तीन अमर क्रन्तिकारी वह हैं जिन्होंने भारत माता को आज़ाद करने में अपनी जान तक की परवाह नहीं की।

30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का निधन हुआ था जिसके कारण इस दिन शहीद दिवस मनाया जाता है।

23 मार्च को हमारे देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महान- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को ब्रिटिश शासन द्वारा फांसी लगा दी गयी जिसके कारण इस दिन उनके बलिदान को याद करते हुए शहीद दिवस मनाया जाता है।

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27 मई को महान जवाहरलाल नेहरू जी का निधन हुआ था। जिस कारन उनके शोक में शहीद दिवस मनाया जाता है।

केन्द्रीय पुलिस बल के जवान 1959 में चीनी सेना द्वारा लद्दाख में आक्रमण में अमर हो गए जिसके कारण भारतीय पोलिस द्वारा 21 अक्टूबर को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।

वहीं दूसरी और ओडिशा में लाला लाजपत राय के महान कार्यों को याद करते हुए 17 नवम्बर को शहीद दिवस सम्मान से मनाया जाता है।

19 नवम्बर को झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का जन्म दिवस होता है। उनके ब्रिटिश शासन के खिलाफ 1857 के विद्रोह में योगदान को कोई भुला नहीं सकता है। इस कारण इस दिन को भी शहीद दिवस के रूप में भारत में मनाया जाता है।

शहीद दिवस क्यों मनाया जाता है? – इतिहास Why is Martyr’s Day celebrated? – History in Hindi

शहीद दिवस का इतिहास बहुत पुराना और लंबा है। भारत की पवित्र भूमि पर एक नहीं बल्कि कई बार राष्ट्र प्रेमियों ने आगे आकर भारत माता का कर्ज चुकाया है और देश के लिए शहीद कहलाए हैं। 

इतिहास में कई ऐसी अप्रिय घटनाएं घटी हैं, जब किसी ना किसी कारणवश देश से उनके महान मार्गदर्शक दूर चले गए लेकिन, उन्होंने देश के लोगों को राष्ट्र सुरक्षा का बहुत बड़ा दायित्व सौंपा है।

देश के लिए कुर्बान होने वाले शहीदों की सूची बहुत लंबी है। 23 मार्च का शहीद दिवस बहुत मुख्य दिन है। जब भारत माता के वीर पुत्र भगत सिंह, राजगुरु सुखदेव को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा फांसी दे दी गई थी। 

भारत माता के इन सपूतों की गाथा बेहद गौरवशाली रही है। 23 मार्च 1931 वह समय था, जब अंग्रेजों ने कायरता पूर्वक अमर शहीदों को फांसी की सजा सुनाई थी। 

अपने ही देश में अंग्रेजों का जुल्म सहते हुए भारतीयों की दशा देखकर लाखों क्रांतिकारियों के दिल में बदले की आग जल रही थी। अंग्रेजों के शोषण की नीति से पूरा देश बड़ी दयनीय स्थिति में था। 

उस समय जब अंग्रेजों के सामने किसी की बोलने की हिम्मत नहीं होती थी, तब भारत माता के शेरों ने लाहौर के सेंट्रल असेंबली में धमाका किया। 

यह केवल एक चेतावनी थी, जिसमें किसी को भी चोट नहीं पहुंची थी। इस घटना के बाद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और उनके अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इन क्रांतिकारियों के गिरफ्तारी के कारण देश में कई जगह पर प्रदर्शन किए गए, लेकिन उससे कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। उस समय नरम दल के सबसे बड़े नेता महात्मा गांधी थे, जिन्हें भगत सिंह और उनके साथियों के आजादी प्राप्त करने के इस रास्ते पर बेहद नाराजगी थी। 

मार्ग भले ही अलग-अलग थे, लेकिन सभी का लक्ष्य केवल एक ही था, आजादी। लोगों को यह शक हो गया था, कि अंग्रेज कोई कायरता पूर्वक हरकत जरूर करेंगे, और हुआ भी वही जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 24 मार्च को फांसी दी जाने वाली थी। 

लेकिन उसके 1 दिन पहले ही 23 मार्च 1931 के करीब शाम 7:00  बचकर 33 मिनट पर इन क्रांतिकारियों को फांसी पर चढ़ा दिया गया। इस घटना से पूरा देश आहत था और क्रोधित भी। आज सभी भारतवासी इन तीनों कर्मठ अमर क्रांतिकारियों की याद में शहीद दिवस मनाता है।

दूसरा सबसे मुख्य शहीद दिवस 30 जनवरी के दिन मनाया जाता है। इस दिन इतिहास की सबसे दुखद घटना घटी थी, जब 30 जनवरी 1948 के दिन नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। 

महात्मा गांधी उन हजारों क्रांतिकारियों को मार्गदर्शन देने वाले सबसे बड़े चेहरे थे, जिन्होंने अंग्रेजों को घुटने टेक देने के लिए मजबूर किया था। गांधी जी ने अपने पूरे जीवन में बहुत भेदभाव का सामना किया था, जिसके पश्चात उन्होंने भारत को आजादी दिलाने के लिए पूर्ण रूप से राष्ट्रीय कार्य के पथ पर कूद पड़े। 

लेकिन समाज में कुछ ऐसे भी लोग थे, जिन्हें महात्मा गांधी के कुछ कार्यों से आपत्ति थी। नाथूराम गोडसे भी उन्हीं लोगों में से एक था, जिन्हें महात्मा गांधी के कुछ कार्य बहुत खलते थे, परिणाम  स्वरूप 30 जनवरी को जब गांधी जी सूर्यास्त के समय अकेले टहल रहे थे, तभी नाथूराम गोडसे ने बिरला हाउस में प्रवेश करके गांधीजी पर गोलियों की बौछार कर दी।

जिस इंसान ने अपने पूरे जीवन में केवल संघर्ष ही देखा हो उसे खो देने के बाद पूरा देश उदासी के काले बादलों से घिरा हुआ था। इतने बड़े नेता को खो देना देश की बहुत बड़ी क्षति थी। भारत की आजादी में सहयोग देने वाले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

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आजादी के बाद जब भारत के प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी थे, उस समय हमारे पड़ोसी मुल्क चीन के साथ कई सीमा विवाद चल रहे थे। 21 अक्टूबर 1959 के दिन भारत- तिब्बत के सीमा पर चीन और भारतीय सीमा विवाद में कई केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के सदस्यों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। 

21 अक्टूबर यह पुलिस स्मरणोत्सव दिवस अथवा पुलिस शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। चीनी सैनिकों द्वारा कायरता पूर्वक हमलों में शहीद हुए सैनिकों की याद में इस दिन उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।

इसके अलावा मुगल काल में देश की रक्षा करते हुए शहीद होने वाले निंगथ सिंह गुरु तेग बहादुर की पुण्यतिथि के दिन 24 नवंबर को शहीद दिवस मनाया जाता है।

मुगल आक्रमणकारियों के नापाक और कायर बादशाह औरंगजेब ने 24 नवंबर के दिन गुरु तेग बहादुर जी को कायरता पूर्वक मौत की सजा सुनाई थी। यह दिन केवल सिख समुदाय ही नहीं बल्कि पूरे भारतीयों के लिए बेहद खास दिन है, जब उनके पूर्वजों ने देश को सुरक्षित करने के लिए स्वयं को कुर्बान कर दिया था।

इन प्रख्यात शहीद दिवस के अलावा कुछ अन्य शहीद दिवस भी मनाए जाते हैं, जिसमें 17 नवंबर लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि का भी समावेश होता है। उड़ीसा में 17 नवंबर के दिन पंजाब के शेर लाला लाजपत राय जी को अंग्रेजों द्वारा आजादी की लड़ाई में लाठी से पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी गई थी। 

लाला लाजपत राय की हत्या का बदला अमर शहीद बटुकेश्वर दत्त ने लिया था, जिसके पश्चात पुलिस द्वारा भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा सुना दी गई थी।

भारत में शहीद दिवस का महत्व Significance of Martyr’s Day in India in Hindi

शहीद दिवस उन अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन होता है, जिन्होंने देश के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण त्याग दिए हैं। क्रांतिकारियों के बहादुरी की जितनी मिसाल दी जाए, उतनी कम होगी। 

प्रतिवर्ष शहीद दिवस के अवसर पर करोड़ों भारतीय अपने महान क्रांतिकारियों अथवा सुरक्षाबलों को श्रद्धांजलि अर्पित करके उनका आभार व्यक्त करते हैं और राष्ट्रप्रेम की भावना लेकर वापस लौटते हैं।

समस्याएं कभी खत्म नहीं होती, वे पुनः विभिन्न स्वरूपों में वापस लौट सकती हैं, इसके लिए हमें अमर शहीदों के विचारों को जिंदा रखने की आवश्यकता है जिन्होंने बिना किसी डर के बेखौफ होकर दुश्मनों को उखाड़ फेंका था।

आज हम स्वतंत्र रूप से अपना मनचाहा कार्य कर सकते हैं, जो सिर्फ हमारे अमर शहीदों के कारण ही संभव हो पाया है।

आज भारत दुनिया में बहुत तीव्रता से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। देश के सौहार्द और सफलता को नजर लगाने वाले कुछ नापाक शक्तियां सदैव ही देश की तरफ घात लगाए बैठे रहती हैं। 

लेकिन दुश्मनों की सारी कोशिशें हमारे जवानों के सामने नाकामयाब हो जाते हैं। जिस तापमान में रहने के लिए आम मनुष्य कल्पना भी नहीं कर सकता, उसके दोगुने तापमान में हमारे नौजवान सेना बल प्रतिदिन देश के शरद पर पहरा देते हैं। 

किसी ना किसी कारणवश कई बार कुछ खुशहाल घरों के दीपक बुझ जाते हैं, लेकिन इन्हें देश कभी भी भुला नहीं सकता। इसीलिए हर वर्ष हमारे देश के लिए शहीद होने वाले प्रत्येक लोगों को शहीद दिवस के दिन भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।

शहीद दिवस के दिन पूरे भारत में देशप्रेम का कुछ अलग ही नजारा देखने को मिलता है। यह दिन अन्य दिनों से बिल्कुल अलग देश प्रेम का दिन होता है। शहीद दिवस के दिन लोग पूरे देश में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन महान नौजवानों को इस दिन याद किया जाता है, जिन्होंने अपने रक्त से हिंदुस्तान की मिट्टी को सींचा है।

आने वाले भविष्य में हमारी युवा पीढ़ियों के अंदर भी देश के लिए शहीद होने वाले अमर शहीदों के भांति ही प्रेरणा और देशप्रेम का संचार होता रहे, इसके लिए हर साल विभिन्न तारीखों को शहीद दिवस मनाया जाता है। 

खुद के प्राण निछावर कर के दूसरों के प्राणों की रक्षा करने वाले इन शहीदों के विषय में जितनी प्रसंशा की जाए वह कम होगी। अमर शहीदों के लिए भारतीयों के हृदय में बेहद सम्मान और प्रेम की भावना है, जिसे चाह कर भी पूर्ण रूप से व्यक्त नहीं किया जा सकता। शहीद दिवस प्रत्येक भारतीय के लिए बहुत खास दिन होता है।

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भारत में शहीद दिवस कैसे मनाया जाता है? How is Martyr’s Day celebrated in India in Hindi

क्रांतिकारियों और शहीदों के प्रति भारत में जो भावना देखी जाती है वह और कहीं नहीं है। भारत का इतिहास बेहद पुराना रहा है। 

जब हमारी संस्कृति फल फूल रही थी, तब विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा हिंदुस्तान पर कब्जा करके सब कुछ नष्ट करके सारा धन लूट लिया गया था। इसके आगे के काल की बात करें मुगलों के बाद अंग्रेजों ने सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत को बर्बाद कर दिया था।

इतिहास गवाह है, कि समय-समय पर आक्रमणकारियों ने भारत पर अपनी बुरी नजर डाली है, लेकिन इसके बदले में गुरु तेग बहादुर जी, शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई इत्यादि न जाने कितने ही वीर योद्धाओं ने सामने आकर अपने मातृभूमि की रक्षा की करके शहीद कहलाए। इन शहीदों को याद करते हुए देशभर में शहीदों की वीर गाथा गाई जाती है और पूरे भाव से श्रद्धांजलि दी जाती है।

शहीद दिवस के दिन पंजाब के शेर भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और कई महान क्रांतिकारियों को उनके जन्म स्थल पर प्रतिमा के सामने फूल माला अर्पित करके उनके देश प्रेम को सराहा जाता है और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।

शहीद दिवस के दिन दिल्ली के राजघाट पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति इत्यादि लगभग बहुत से नेता- मंत्री गण 30 जनवरी के दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए वहां जाते हैं। 

इसके अलावा आम नागरिकों द्वारा भी फूल मालाओ से राजघाट पर बापू की प्रतिमा को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। श्रद्धांजलि देने के पश्चात 2 मिनट का मौन रखा जाता है, जब सभी लोग गांधी जी के बलिदान को याद करते हैं।

इस दिन स्कूल और कॉलेजों जैसे शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों द्वारा देश प्रेम के नारे लगाए जाते हैं और शहीदों के ऊपर राष्ट्रप्रेम के भाषण दिए जाते हैं। 

शहीद दिवस के दिन शहीदों पर निबंध, कविताएं, शायरियां इत्यादि की स्पर्धाएं भी आयोजित की जाती हैं। बच्चों द्वारा इस दिन नाट्य स्पर्धा में शहीदों की तरह वेशभूषा धारण करके उनके जीवनकाल से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं को बेहद मजेदार तरीके से पेश किया जाता है।

देश के लिए कुर्बानी देने वाले सभी शहीदों के जीवनी के ऊपर बनाई गई तमाम फिल्मों को इस दिन टेलीविजन पर दिखाया जाता है। सोशल मीडिया द्वारा शहीद दिवस की शुभकामनाएं इस दिन लोगों द्वारा एक दूसरों को भेजी जाती है और शहीदों को नमन किया जाता है।

शहीद दिवस पर 10 लाइन 10 line on martyr’s day in Hindi

  • शहीद दिवस के दिन 30 जनवरी को दिल्ली के राजघाट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
  • भारत के लिए कई जवानों ने अपने प्राण न्यौछावर किए हैं, जिसके कारण यहां अलग-अलग तारीखों पर कई बार शहीद दिवस मनाया जाता है।
  • 23 मार्च के दिन भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को याद करते हुए, इसे शहीद दिवस के रूप में घोषित किया गया है।
  • शहीद दिवस के दिन भारतवासी देश के लिए कुर्बान होने वाले सभी लोगों को नमन करते हैं।
  • इस दिन शैक्षणिक संस्थानों में कई स्पर्धा आयोजित की जाती हैं, जिसमें छात्रों द्वारा राष्ट्रप्रेम के कार्यक्रम में भाग लिया जाता है।
  • शहीद दिवस के अवसर पर तीनों सेनाओं के प्रमुख, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य मंत्रियों द्वारा शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती।
  • इस दिन शहीदों के सम्मान में तीनों सेनाएं शक्ति प्रदर्शन करती हैं।
  • सड़कों पर इस दिन नौजवानों द्वारा परेड निकाली जाती है, जिसमें राष्ट्रप्रेम के नारे लगाते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
  • शहीद दिवस को सर्वोदय दिवस भी कहा जाता है।
  • हर वर्ष भारत में उन लोगों के परित्याग को देखते हुए शहीद दिवस मनाया जाता है, जिन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना देश हित का मार्ग चुना।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने हिन्दी में शहीद दिवस पर निबंध (भारत) (Martyr’s Day (India) essay in Hindi) पढ़ा। आशा है यह लेख आपको जानकारी से भरपूर लगा होगा। अगर यह लेख आपको अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें।

2 thoughts on “शहीद दिवस पर निबंध Essay on Martyrs Day India in Hindi”

  1. It’s really amazing I’ve checked all the essay on Google but this is super helpful as there are only main points written about Martyrs day,♥️✌️ Helped me in time when I was in a trouble..THANKS

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