तेल की बढ़ती कीमतों पर निबंध Essay on Rising Oil Prices in Hindi

इस लेख में आप तेल की बढ़ती कीमतों पर निबंध हिंदी में (Essay on Rising Oil Prices in Hindi) पढ़ेंगे। जिसमें तेल की बढ़ती कीमतें तथा उसके कारण व प्रभाव और अंत में तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के उपाय बेहतरीन रूप से दिए गए हैं।  

तेल की बढ़ती कीमतें आज सभी के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुकी है। इतनी ऊंची कीमतों के कारण सामान्य वर्ग तथा निम्न वर्ग के लोग तेल खरीदने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

तेल की बढ़ती कीमतों पर निबंध Essay on Rising Oil Prices in Hindi

दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होने के कारण भारत में तेल की खपत बेहद ही ज्यादा है। लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों के कारण आम जनजीवन बेहद ही प्रभावित हो रहा है।

चाहे आयात-निर्यात हो या यात्राएं सभी में तेल की जरूरत मुख्य रूप से होती है। हालांकि अब लंबी दूरी तय करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग किया जाने लगा है लेकिन ज्यादातर रोड ट्रांसपोर्टेशन के माध्यम से ही होता है इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों के कारण हर चीज की कीमतों पर असर पड़ता है।

दुनियां के ऑयल मैनेजमेंट कंपनियों के द्वारा लगातार तेल के दामों में बदलाव होता रहता है जिसके कारण पूरी दुनिया के बाजारों में इनकी कीमतों का असर देखने को मिलता है।

तेल आयात करने वाले देशों में चीन और अमेरिका के बाद भारत सबसे बड़ा देश है। भारत अपने तेल का एक बड़ा हिस्सा इराक और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है। इतनी बड़ी आबादी होने के कारण हमें बहुत ज्यादा तेल रिजर्व में रखने की जरूरत पड़ती है।

तेल की बढ़ती कीमत के कारण Reasons for Rising Oil Prices in Hindi

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार अगर कच्चे तेल के दामों में $10 प्रति बैरल की वृद्धि होती है तो भारत सरकार को लगभग 12.5 बिलीयन डॉलर का घाटा होता है, इसलिए हम कह सकते हैं कि तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।

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महामारी के बाद कुछ खाड़ी देशों ने दुनिया के तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने द्वारा निर्यात किए जाने वाले तेल की कीमतों को आर्टिफिशियल तरीके से बढ़ाना शुरू कर दिया।

जिसके कारण डिमांड तो बढ़ गई लेकिन सप्लाई बेहद ही सीमित हो गई और नतीजा यह निकला कि दुनिया के कई देशों में तेल की कीमतें आसमान छूने लगी।

सामान्यतः कच्चे तेल के निर्यातक देशों के संगठन को OPEC के नाम से जाना जाता है, जिसमें 13 देशों का संगठन शामिल है। भारत अपनी कच्चे तेल के जरूरतों का 80% हिस्सा आयात करता है।

बढ़ती कीमतों के कारण जनवरी 2021 से कच्चे तेल की कीमत 54.8 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। जिसका सीधा असर भारत में रह रहे आम लोगों पर पड़ रहा है।

केंद्र सरकार तेल को खरीद कर उसमें अपने अन्य खर्च को जोड़ देती है। उसके बाद वह राज्यों को इसे सप्लाई करती हैं।

राज्य सरकार केंद्र के द्वारा दिए गए बेस प्राइस पर 25 से 30 फ़ीसदी अतिरिक्त कर लगाकर तेल के विक्रेताओं को मुहैया करवाती है। जिसके बाद तेल के विक्रेता उस पर अपनी कीमत लगाकर आम लोगों तक पहुंचाते हैं।

इसलिए कहा जा सकता है कि तेल की कीमतों को घटाने का जिम्मा जितना केंद्र सरकार का है उतना ही राज्य सरकारों का भी है। क्योंकि कई राज्य अपने टैक्स को लगभग आधा कर चुके हैं तो वहीं पर कई राज्य नाम मात्र टैक्स में कटौती करके केंद्र सरकार पर सारा दोष मढ़ते रहते हैं।

नागरिकों के जेब पर इसका नकारात्मक असर ना पड़े इसलिए सरकार को बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए जरूरी प्रयास करने की आवश्यकता है। क्योंकि भारत की जीडीपी में एक बड़ा योगदान मध्यम वर्गीय तथा निम्न वर्गीय लोगों का है।

अगर इन्हें रोजमर्रा की चीजों के लिए अधिक कीमत अदा करनी पड़ेगी तो यह किसी भी खरीदारी से बचने की कोशिश करेंगे जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

तेल की बढ़ती कीमतों का प्रभाव Effect of Rising Oil Prices in Hindi

कहा जा सकता है कि तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक प्रभाव वहां के रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ता है। क्योंकि उच्च वर्ग के लोगों के पास बहुत ही अधिक धन होता है।

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हालांकि उपरोक्त कथन पूर्णतया सत्य नहीं है क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था में सभी नागरिकों का समान योगदान होता है। इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों का भारत की अर्थव्यवस्था तथा लोगों के आम जीवन में बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है।

भारत की खूबसूरती इस बात से जानी जा सकती है की उदाहरण के तौर पर गुजरात मूंगफली उत्पादक में प्रथम स्थान पर आता है। तो वही गेहूं तथा चावल के लिए पंजाब प्रसिद्ध है। इसलिए हर एक राज्य अपनी जरूरतों के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर करते हैं। 

जिस कारण ज्यादातर चीजों को रोड के माध्यम से आयात किया जाता है जैसे फल, सब्जियां, दवाइयां इत्यादि। रोड के माध्यम से इन्हें मालवाहक वाहनों में लाया जाता है जिसमें तेल का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है जो इनकी कीमतों को पर असर डालता है।

बढ़ती तेल के दूसरे सबसे बड़े प्रभाव में यात्राएं शामिल होती है क्योंकि विदेश यात्रा व अंतर्राज्यीय यात्रा करने में विमानों का भी प्रयोग होता है जो तेल से ही चलते हैं। इसलिए मूल्य वृद्धि के कारण अप्रत्यक्ष रूप से परिवहन खर्च भी बढ़ जाता है जिसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ता है।

तेल हमारे गाड़ी के इंजन तक पहुंचने से पहले अन्य चरणों से होकर गुजरता है जैसे कि रिफाइनरी, ट्रांसपोर्टेशन, संग्रहण तथा आवंटन।

रिफाइनरी के लिए कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार से लाकर कच्चे तेल से जरूरी पेट्रोलियम पदार्थ को अलग किया जाता है, जिसमें श्रम समय तथा धन की आवश्यकता होती है। इसलिए रिफाइनरी स्टेशन अपने खर्च को तेल की कीमतों के साथ जोड़ देते हैं

रिफाइनरी पंप से होने के बाद इन्हें तेल की कंपनियों तक पहुंचाया जाता है जो इन्हें संग्रहित करती हैं तथा तेल आवंटन करने वाले पेट्रोल पंप तक पहुंचाती है जिसमें यह अपने मुनाफे को जोड़ लेती हैं।

पेट्रोल पंप या अन्य स्टेशन तेल के आवंटक अपने रखरखाव तथा श्रम के बदले कुछ अतिरिक्त कीमत जोड़कर तेल को उपभोक्ताओं को मुहैया करवाते हैं। इतने अधिक प्रोसेस के बाद तेल की कीमतें बेहद बढ़ जाती हैं जिसका सीधा असर लोगों पर पड़ता है।

तेल की कीमतों को कम करने के उपाय Ideas for Reducing Petrol & Diesel Prices in Hindi

पेट्रोल-डीजल की बेलगाम बढ़ती कीमतें आम जनजीवन को परेशान करके रख देती है जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। क्योंकि तेल के बढ़ते दाम भारतीय बाजारों में महंगाई के कारण बन जाते हैं।

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फल स्वरुप लोग खर्च करने में कतराते हैं, इसलिए तेल की कीमतों को कम करना बेहद जरूरी है जिसके लिए उपाय निम्नलिखित हैं।

तेल की कीमतों को कम करने का सबसे बेहतरीन उपाय यह है कि तेल पर निर्भरता कम कर दी जाए। आज बाजार में बैटरी से चलने वाले वाहनों का प्रचलन बढ़ रहा है इसलिए सरकार को बैटरी से चलने वाले वाहनों को वरीयता देनी चाहिए।

जापान जैसे देशों में हाइड्रोजन तथा सौर ऊर्जा के माध्यम से ऐसी तकनीक निर्मित की जा रही है, जिसके माध्यम से पेट्रोल पर निर्भरता स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। भारत सरकार भी ऐसी मुहिम को आगे बढ़ा सकती है।

भारत सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी से बाहर रखा है। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर निर्भर करती है।

अगर तेल को जीएसटी के अंदर लाया गया तो उस पर लगाए जाने वाले टैक्स को निश्चित करना होगा। लेकिन फिर भी सरकार को एक ढांचा तैयार करना चाहिए जिसके तहत तेल की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।

उत्तर प्रदेश में कई ऐसे छात्र हैं जिन्होंने पेट्रोलियम के अलावा अन्य तरल पदार्थों से वाहनों को चलाने में सफलता पाई है। भारत सरकार को भी पेट्रोल पर निर्भरता कम करने के लिए ऐसे स्टार्टअप्स को मदद देना चाहिए जो भविष्य में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सके।

तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने का सबसे बेहतरीन उपाय यह है ऐसे किसी स्त्रोतों की खोज की जाए जिनमें सीधी ओपीईसी देशों पर निर्भरता कम हो जाए। उदाहरण के तौर पर कृत्रिम मूल्य वृद्धि के बाद भारत सरकार ने नाइजीरिया से तेल खरीद कर खाड़ी देशों के मुंह पर जोरदार तमाचा मारा था।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने तेल की बढ़ती कीमतों पर निबंध हिंदी में (Essay on Rising Oil Prices in Hindi) पढ़ा। आशा है या लेख आपको सरल तथा आकर्षक लगा होगा। अगर यह लेख आपको पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें।

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