शब-ए-मेराज त्यौहार पर निबंध Essay on Shab E-Meraj Festival in Hindi

इस लेख में हम इस्लामिक त्यौहार शब-ए-मेराज पर निबंध (Essay on Shab-e-Meraj in hindi) को पढ़ेंगे। जिसमें शब-ए-मेराज क्या है? और उसका मजहबी महत्व साथ ही उसे कैसे मनाते हैं तथा उससे जुड़ी एक कथा को शामिल किया गया है।

शब-ए-मेराज त्यौहार पर निबंध Essay on Shab E-Meraj Festival in Hindi

शब-ए-मेराज इस्लाम धर्म का एक मुख्य त्यौहार है जो पैगंबर मोहम्मद साहब से जुड़ा हुआ है।

शब-ए-मेराज क्या है? What is Shab-e-Meraj in Hindi?

शब-ए-मेराज मुस्लिम धर्म के लोगों द्वारा मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार है। यह इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद साहब के जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग है। जिसे इस्लाम धर्म के मानने वाले लोग किसी चमत्कार से कम नहीं मानते हैं।

शब-ए-मेराज या शबे मेराज एक अरबी शब्द है। जिसका मतलब होता है, रात के वक्त किया जाने वाला सफर। शबे मेराज के साथ अल इसरा का भी विशेष महत्व है। 

क्योंकि यह दोनों शब्द मिलकर एक विशेष घटना का निर्माण करते हैं। मिराज का अर्थ होता है ऊपर की तरफ उठना और अल इसरा का मतलब एक विशेष रात का सफर है।

मोहम्मद पैगंबर का यह सफर तब शुरू हुआ जब उनके जीवन के दो जरूरी लोग या यूं कहें तो उनके अनुयाई दुनिया को अलविदा कह चुके थे। उनमें से एक थी उनकी पत्नी खदीजा दूसरे उनके चाचा अबू तालिब।

शबे मेराज को मोहम्मद साहब के जीवन के बेहतरीन दौर में से एक माना जाता है। हालांकि यह उनके जीवन का एक कठिन भाग है, जिसमें उन्होंने कई बार बहुत सी समस्याओं का सामना किया। 

जब उनके अपने समाज के लोगों ने उनको बहिष्कृत कर अपने समुदाय से बाहर निकाल दिया था, तब उन्होंने अपने जीवन को रेगिस्तान जैसे कठिन जगहों पर बचाए रखा।

उस वक्त अगर किसी को समुदाय से निष्कासित कर दिया जाता था, तो वह उसकी मृत्यु के समान होता था। ऐसे वातावरण में रहने के बावजूद भी मोहम्मद पैगंबर साहब का ईश्वर पर से विश्वास कभी कम नहीं हुआ।

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माना जाता है शबे मेराज वह रात है जब अल्लाह की तरफ से एक खास सवारी भेजी गई थी। हालांकि यह एक गधी थी जिसका नाम बुर्राक था। पैगंबर साहब को चमत्कारी सवारी पर बैठा कर मक्का से यरूशलम लाया गया था।

शब-ए-मेराज का महत्व Importance of shab-e-meraj in hindi

हर धर्म तथा मजहब के लोगों के लिए उनके उत्सवों का विशेष महत्व होता है। इसलिए शबे मेराज उत्सव का इस्लाम धर्म के मानने वालों के लिए बेहद ही खास है।

क्योंकि इसी त्योहार के दिन मोहम्मद साहब ने सात आसमानों की यात्रा कर कुछ महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात भी की थी। ऐसा कहा जाता है कि उसी रात मोहम्मद साहब ने अल्लाह से भी भेंट की थी।

इस घटना को इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार दो भागों में बांट दिया गया है, जिससे इसरा और मेराज के नाम से जाना जाता है।

शबे मेराज रजब महीने के 27 तारीख को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन मोहम्मद साहब मक्का से यरुशलम आया था। इसका महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि उस वक्त इतनी दूरी तय करने के लिए लगभग 40 से 50 दिन लगते थे लेकिन मोहम्मद साहब ने इतनी लंबी यात्रा कुछ ही घंटों में तय कर ली थी। 

उस वक्त के लोगों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था और आज तक इस्लाम धर्म के मानने वाले लोग इसे सबसे बेहतरीन घटनाओं में से एक मानते हैं।

कहते हैं कि शब ए मेराज के दिन ही अल्लाह ने हजरत जिब्रील को मोहम्मद पैगंबर साहब को लेने के लिए भेजा था। इस रात मोहम्मद साहब ने स्वर्ग लोक में कई अद्भुत महान आत्माओं से मुलाकात की। जब वह स्वर्ग में पहुंचे तो स्वयं अल्लाह ने उन्हें दर्शन दिया और मानवता की रक्षा का पैगाम धरती पर पहुंचाने को कहा।

अल्लाह ने धरती वालों के लिए पांच बार नमाज और जरूरी ज्ञान का आवंटन किया। इस्लाम धर्म के अनुयाई मानते हैं कि कुरान शरीफ अल्लाह के उन्हीं आदेशों का संग्रह है। इन्हीं चमत्कारी और अद्भुत घटनाओं के आधार पर इस्लामिक त्यौहार शबे मेराज का महत्व बेहद ही बढ़ जाता है।

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शब-ए-मेराज कैसे मनाते हैं? How to celebrate shab-e-meraj in hindi?

शबे मेराज उत्सव को पूरी दुनिया के मुस्लिम काफी धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन लोग अपना ज्यादातर समय अल्लाह की इबादत और अन्य प्रार्थनाओं में बिताते हैं।

इस त्यौहार के दिन मुस्लिम समुदाय के मानने वाले उपवास भी रखते हैं साथ ही शाम के वक्त मोहम्मद पैगंबर साहब को याद करते हुए मस्जिदों में उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस त्यौहार से पहले मस्जिदों को आकर्षक तरीके से सजाया जाता है।

शबे मेराज के कुछ दिन पहले से ही इस्लाम धर्म के मानने वाले अपने घरों तथा दुकानों में साफ-सफाई शुरू कर देते हैं। उत्सव की शुरुआत में लोग नहा धोकर मिलन कार्यक्रम में जाते हैं।

इस दिन मस्जिदों में काफी संख्या में मुस्लिम जमा होते हैं और प्रार्थना करते हैं इसके साथ ही कई जगहों पर जुलूस और मेलों का भी आयोजन किया जाता है। वैसे तो ज्यादातर लोग रजब के पूरे महीने में ही रोजा रखते हैं लेकिन इस महीने की 26 और 27 तारीख को रोजा रखने से चमत्कारिक फल प्राप्त होते हैं।

समय के साथ और त्योहारों में कुछ न कुछ परिवर्तन जरूर आते हैं। ठीक ऐसे शबे मेराज में भी पहले के मुकाबले कई परिवर्तन आ चुके हैं। 

इनमें से कई परिवर्तन अच्छे हैं, लेकिन ज्यादातर वर्तमान समय के अनुरूप नहीं है। पहले जहां लोग अपने मन के मैल को बाहर निकालने के लिए इस त्यौहार का आयोजन करते थे तो वहीं आज के समय में सिर्फ साज-सज्जा और भीड़ इकट्ठी करने के लिए यह त्यौहार मनाया जाने लगा है।

पहले के समय में रोजा का कड़ाई से पालन किया जाता था लेकिन आज के समय में लोग पालन करना तो दूर रोजा रखने से भी कतराने लगे हैं। इसलिए इसके मनाए जाने के तरीकों में काफी परिवर्तन देखने को मिलता है।

शब-ए-मेराज की कहानी Story of shab-e-meraj in hindi

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार एक बार पैगंबर मोहम्मद साहब अपने घर में आराम फरमा रहे थे तभी उनके पास एक व्यक्ति आया और उन्हें नींद से उठा कर ले जाने लगा। जब मोहम्मद साहब की नींद खुली तो हमें देखा कि वह और कोई नहीं बल्कि खुदा के फरिश्ते हजरत जिब्रील थे।

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हज़रत जिब्रिल मोहम्मद साहब को काबा के विशेष जगह ले गए जहां पर उन्होंने उनका सीना चीर कर उनका दिल निकाल दिया तथा उसे एक सोने के पात्र में धोया तब उन्होंने देखा कि मोहम्मद पैगंबर साहब का दिल ईमान और नेकी से भरा हुआ था। 

यह देखने के बाद उन्होंने मोहम्मद साहब का दिल उनके सीने में फिर से लगा दिया। इसके बाद अल्लाह के आदेश को सुनाया और जन्नत चलने की पेशकश की।

जन्नत जाने के लिए एक जानवर को खोजा जो सफेद रंग का एक गधा था ऐसी मान्यता है कि जब जानवर को पैगंबर के सामने लाया गया तो वह उत्तेजित होने लगा, लेकिन जैसे ही उसे पता चला कि खुद अल्लाह ने मोहम्मद साहब को बुलाया है तो उसके पसीने छूट गए और वह शांत हो गया।

इस घटना के बाद मोहम्मद साहब उस पर सवार होकर बैतूल मैं पहुंचे जहां पर उन्होंने रुक कर मस्जिद में नमाज पढ़ी। नमाज के बाद हजरत जिब्रील मोहम्मद साहब का हाथ पकड़कर जन्नत ले गए और इसी दौरान उन्हें दिव्य अनुभूतियां हुए।

सात आसमानों की यात्रा करते समय पहले आसमान पर हजरत आदम जिन्हें इंसानों की उत्पत्ति का कारण माना जाता है, दूसरे हजरत ईसा से, तीसरे आसमान पर यूसुफ से, चौथे आसमान पर हजरत इदरीस से, पांचवे आसमान पर हजरत हारून और छठे आसमान पर हजरत मूसा से उनकी मुलाकात हुई।

सातवें आसमान पर मोहम्मद पैगंबर साहब ने अल्लाह के दर्शन किए और उनके संदेश को धरती वासियों तक पहुंचाने और नमाज का महत्व समझाने का प्रण लिया।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने इस्लामिक त्यौहार शबे मेराज पर हिंदी में निबंध (Essay on Shab-e-Meraj in hindi) पढ़ा। आशा है कि यह लेख आपको सरल तथा आकर्षक लगा होगा। अगर यह लेख आपको पसंद आया हो तो उसे शेयर जरूर करें।

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