सिख धर्म पर निबंध Essay on Sikhism in Hindi – Sikh Dharm

सिख धर्म पर निबंध Essay on Sikhism in Hindi – Sikh Dharm

“इक ओंकार सतनाम करता पुरख
निर्मोह निर्वैर अकाल मूरत
अजूनी सभम।“

अर्थात ईश्वर एक है, उसका नाम ही सच है, वह सबको बनाने वाला है, निर्भय है, किसी का दुश्मन नहीं है व निराकार है। जन्म – मरण से दूर है।

सिख धर्म पर निबंध Essay on Sikhism in Hindi – Sikh Dharm

सिख धर्म एक एकेश्वरवादी धर्म है, जिसकी उत्पत्ति 15 वीं शताब्दी के अंत में भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग में पंजाब क्षेत्र में हुई थी। इस धर्म को सिखमत और सिखी भी कहा जाता है। यह प्रमुख विश्व धर्मों में से एक है, और दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा संगठित धर्म है। इस धर्म के लोग लगभग हर जगह मौजूद हैं।

सिख धर्म का इतिहास

सिख धर्म का इतिहास गुरु नानक देव जी के साथ शुरू हुआ था। इन्हे सिख धर्म का प्रवर्तक कहा जाता है। वह भारतीय उपमहाद्वीप (आधुनिक पंजाब, पाकिस्तान) के उत्तरी भाग में पंजाब क्षेत्र में पंद्रहवीं शताब्दी के पहले गुरु थे।

गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा 13 अप्रैल 1699 को धार्मिक प्रथाओं को औपचारिक रूप दिया गया था। यह धर्म खालसा का आदेश देता है, जो लगभग 300 वर्षों का इतिहास है। गुरु नानक देव जी ने अपने समय के भारतीय समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, अंधविश्वासों, जर्जर रूढ़ियों और पाखण्डों को दूर किया था।

इन्होने सिख धर्म की स्थापना सेवा, परिश्रम, प्रेम, परोपकार और भाई – चारे की भावना से की थी। गुरुनानक देव जी ने सभी धर्मों की अच्छाइयों को समाहित किया। उनका कहना था कि भगवान एक ही हैं और उन्होंने ही सृष्टि की रचना की है। सभी धर्मों के लोग ईश्वर की ही संतान हैं। उन्होंने बताया कि मनुष्य को हमेशा अच्छे कार्य करना चाहिए जिससे परमात्मा के सामने लज्जित न होना पढ़े।

आदिग्रन्थ के पृष्ठ संख्या 617 में गुरु अर्जुन देव जी ने कहा है कि –

सगल वनस्पति महि बैसन्तरु सगल दूध महि घीआ।
ऊँच-नीच महि जोति समाणी, घटि-घटि माथउ जीआ॥

अर्थात ईश्वर हर जगह व्याप्त है, जैसे वनस्पतियों में आग समयी हुई है, दूध में घी है उसी तरह ईश्वर सब जगह विद्यमान है। सिखों के दस प्रमुख गुरु हैं, जिन्होंने इस धर्म को और भी ज्यादा मजबूत बनाया। जिनका विवरण नीचे दिया जा रहा है।

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गुरुनानक देव जी (1469-1539)

गुरु नानक सिख धर्म के प्रवर्तक थे. 1469 ई. में लाहौर के निकट तलवंडी अथवा आधुनिक ननकाना साहिब में खत्री परिवार में उनका जन्म हुआ था। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन हिन्दू और इस्लाम धर्म के समस्त मानव समाज के कल्याण में लगाया। गुरुनानक जी ने कठोर तपस्या की और लोगों को उपदेश दिए। जिससे हिन्दू न केवल मुस्लिम भी इनके अनुयायी हो गए। नानक देव जी की मृत्यु 1539 में हुई थी।

गुरु अंगद (1539-1552)

गुरु अंगद सिखों के दूसरे गुरु कहलाये। गुरु नानक देव जी ने ही इन्हे द्वितीय गुरु बनाया था। ये अंगद को इतना पसंद करते थे कि अपने दोनों पुत्रों को छोड़कर उन्होंने अंगद को ही अपना उत्तराधिकारी चुना था।

गुरु अमरदास (1552-1574)

गुरू अमर दास जी सिख धर्म के प्रचारक थे। गुरु अंगद जी ने स्वयं इन्हे तृतीय गुरु के रूप में चुना था।

गुरु रामदास (1574-1581)

ये अत्यंत साधु स्वभाव के व्यक्ति थे। इन्होने ही अमृतसर में एक जलाशय का भू-भाग दान दिया था , वहीँ पर आगे चलकर विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर का निर्माण हुआ। इन्होने विवाह सम्बंधित रूढ़िवादी प्रणाली को दूर किया और सरल बनाया।

गुरु अर्जुन (1581-1606)

गुरु अर्जुन जी का सिख धर्म में महत्त्वपूर्ण स्थान है। गुरु अर्जुन ने  सिखों के “आदि ग्रन्थ” नामक धर्म ग्रन्थ का संकलन किया था, जिसमें उन्होंने पूर्व गुरुओं, हिन्दू और मुस्लिमों की वाणी को संकलित किया था। जहांगीर के आदेशानुसार इनको मार दिया गया था जबकि जहांगीर के बेटे शाहज़ादा खुसरो को गुरु अर्जुन देव जी ने ही शरण दी थी।

गुरु हरगोविन्द (1606-1645)

गुरु अर्जुन के ही पुत्र गुरु हरगोविंद थे जिन्होंने सिखों का सैनिक संगठन किया था। जिससे लोग काफी प्रभावित हुए थे।

गुरु हरराय (1645-1661)

ये सिखों के सांतवे गुरू कहलाये। ये अपने शांत स्वभाव के कारण ही प्रसिद्ध हुए थे व लोगों को प्रभावित किया था। इन्होने योद्धाओं के दल को पुनर्गठित किया।

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गुरु  हरकिशन (1661-1664)

इन्होने खालसा पंथ को और भी शक्तिशाली बनाया।  

गुरु तेग बहादुर (1664-1675)

ये नौंवे गुरु थे जिन्हे औरंगजेब का सामना करना पड़ा था। औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को बंदी बनाकर उनके सामने प्रस्ताव रखा था कि या तो इस्लाम धर्म स्वीकार करो या मरने के लिए तैयार हो जाओ। अंततः तेग बहादुर झुके नहीं और उनका सिर काट दिया गया।  

गुरु गोविन्द सिंह (1675-1708)

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ये सिखों के दंसवे गुरु थे। इन्होने शांतिप्रिय ढंग से सिख पंथ के सैनिक को मजबूत बनाया जिससे वे मुसलामानों का सामना कर सके। इन्होने ही अपने पंथ का नाम खालसा रखा और एकता का सन्देश दिया।

इन्होने सिख समुदाय को केश, कच्छ, कड़ा, कृपाण और कंघा इन पांच वस्तुओं को धारण करना आवश्यक कर दिया। इन्होने पाहुल प्रथा का आरम्भ किया, जिसका उद्देश्य जातिवाद को दूर करना था। इसमें सभी एक ही कटोरे में प्रसाद ग्रहण करते थे।

धार्मिक ग्रन्थ

सिखों का धार्मिक प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘आदि गृन्थ’ है। जिसे आदि गुरु ग्रन्थ या गुरु ग्रन्थ साहिब भी कहा जाता है। जिसे 36 भक्तों के द्वारा रचा गया था। यह ग्रन्थ गुरु अर्जुन देव जी द्वारा संग्रहित किया गया था। इसके अलावा ‘दसम गृन्थ’ है जो सतगुरु गोबिंद सिंह जी की पवित्र वाणी को प्रदर्शित करता है।

चार पदार्थ

सिख धर्म के अनुसार मनुष्य को अपने जीवन काल में इन चार पदार्थ को प्राप्त करना अनिवार्य है –

  1. ज्ञान पदार्थ या प्रेम पदार्थ
  2. मुक्त पदार्थ
  3. नाम पदार्थ
  4. जन्म पदार्थ

सिखों के प्रमुख त्योहार

सिखों का प्रमुख त्योहार ‘गुरु नानक गुरुपर्व’ है।  जिसे गुरु नानक का प्रकाश उत्सव या गुरु नानक जयंती के रूप में भी मनाते हैं। इस दिन गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। यह कार्तिक पूर्णिमा को आता है। इसके अलावा लोहड़ी और वैशाखी त्योहार भी बड़े ही धूम – धाम के साथ मनाया जाता है।

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इस धर्मं की स्थापना में न जाने कितने सिखों को शारीरिक यातनाएँ दी गयीं फिर भी इन अत्याचारों से खासला पंथ की सैनिक शक्ति को दबा नहीं पाए। सिख धर्म के अनुयायियों ने अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार अपने धर्म की रक्षा की। वास्तव में यह धर्म हमे एकता का सन्देश देता है और अन्य धर्मों के लोगों की भी मदद करने के लिए हर संभव तैयार रहता है।

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