विश्व मलेरिया दिवस पर निबंध Essay on World Malaria Day in Hindi

विश्व मलेरिया दिवस पर निबंध Essay on World Malaria Day in Hindi

विश्व मलेरिया दिवस हर साल 25 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2008 में हुई थी। 25 अप्रैल 2008 को पहला “विश्व मलेरिया दिवस” मनाया गया था। यूनिसेफ द्वारा इस दिन को मनाने का प्रमुख उद्देश्य लोगों के बीच मलेरिया जैसे खतरनाक बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाना है।

हर साल मलेरिया से लाखों लोग मरते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) का कहना है कि मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम चलाकर बहुत सी जानो को बचाया जा सकता है। 2012 में विश्व भर में मलेरिया के कारण 627000 मौतें हुई थी। इसमें से अधिकतर अफ्रीकी, एशियाई और लैटिन देश थे।

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विश्व मलेरिया दिवस पर निबंध Essay on World Malaria Day in Hindi

क्या है मलेरिया?

यह रोग मुख्यतः संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। जब संक्रमित मच्छर इंसान को काटता है तो खून में अपनी लार के साथ प्रोटोजुअन प्लाज्‍मोडियम (मलेरिया परजीवीयों) को भी पहुंचा देता है। 10 से 12 दिनों के बाद उस व्यक्ति में मलेरिया रोग के लक्षण दिखाई देते हैं। इस रूप में कपकपी के साथ बुखार आता है और ठंड लगती है। सिर दर्द उल्टी भी आती है।

मलेरिया के प्रमुख लक्षण

इस रोग में सर्दी लगकर कपकपी वाला बुखार आ जाता है। शरीर में कमजोरी और थकावट महसूस होती है, आंखों की पुतलियों का रंग पीला पड़ जाता है, पसीना निकलने लगता है, सिर में तेज दर्द, उल्टी, जी मचलना, शरीर में खून की कमी होना, हाथ पैरों के जोड़ों में दर्द होना मलेरिया के प्रमुख लक्षण हैं।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्वभर में हर साल 60 हजार से अधिक मौतें मलेरिया के कारण होती हैं। इनमें मरने वालों में बच्चे बड़ी मात्रा में होते हैं। अफ्रीका महाद्वीप के देशों में मलेरिया से मरने वालों की संख्या सबसे अधिक है।

संसाधनों की कमी के कारण बहुत से लोगों को इसका इलाज नहीं मिल पाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 2017 में मलेरिया के कुल मामलों में 80% भारत से थे।

भारत में 2016 के मुकाबले 2017 में मलेरिया के मामले कम हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2016 में मलेरिया के 216 मिलियन मामले पाए गए। 445000 लोगों की मौत मलेरिया की वजह से हुई। 2016 में मलेरिया से लड़ने के लिए 2.7 बिलियन डॉलर का धन एकत्र किया गया है।

भारत में मलेरिया की स्थिति

भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय “राष्ट्रीय मच्छर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) के अंतर्गत हर साल 1500000 मलेरिया के मरीजों की संख्या दर्ज करता है इसमें 50% मलेरिया प्लाज्मोडियम फैंसी परम मच्छर के काटने से होता है

मलेरिया से कैसे बचें

1-    जिन क्षेत्रों में मादा एनाफिलीज मच्छर का प्रकोप है वहां पर लोगों को मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा मच्छर मारने वाली दवा, धूपबत्ती, ऑल आउट, मच्छर मारने वाली अगरबत्ती जैसी चीजों का प्रयोग करना चाहिए,

2-    घर के आस-पास पानी नहीं भरने देना चाहिए क्योंकि इसमें ही मच्छर पनपते हैं।

3-    घर की खिड़कियों पर जाली लगा कर रखना चाहिए।

4-    कूलर का पानी बदलते रहना चाहिए।

5-    मलेरिया से ग्रसित होने पर फौरन इलाज कराना चाहिए।

6-    संभव हो तो सिर से पांव तक हल्के कपड़े पहनना चाहिए जिससे मच्छर न काट सकें।

7-    घर के आस-पास ऐसे गड्ढे जहां पर पानी भरता है और मच्छर पैदा होते हैं उन्हें फौरन बंद कर देना चाहिए।

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8-    घर के आस-पास झाड़ियों को काट देना चाहिए क्योंकि इसमें ही मच्छर छुपे होते हैं।

9-    घर में टूटे-फूटे बर्तन, घड़े, टायर नहीं रखना चाहिए। बरसात के दिनों में इसे पानी भर जाता है और मच्छर पैदा होते हैं।

10-    नीम के तेल को पानी में मिलाकर स्प्रे करने से भी मच्छर मरते हैं।

11- घर के आसपास की नालियों की बराबर सफाई करनी चाहिए। यदि मच्छर पैदा होने की आशंका हो तो मिट्टी का तेल का स्प्रे करना चाहिए। इससे मच्छर मर जाते हैं।

12-   कुएं के पानी में 250 से 400 ग्राम क्लोरीन की गोलियां मिलानी चाहिए।  

विश्व मलेरिया दिवस 2019  World Malaria Day 2019  

2019 में विश्व मलेरिया दिवस गुरुवार, 25 अप्रैल 2019 को मनाया गया।

विश्व मलेरिया दिवस 2019 की थीम  World Malaria Day 2019 theme

2019 में इसकी थीम ‘जीरो मलेरिया स्टार्ट्स विद मी’ (Zero Malaria Starts with Me’) है। इसका अर्थ है मलेरिया को शून्य स्तर तक ले जाने की शुरूआत स्वयं से करनी है। सभी लोगों को मलेरिया से लड़ने के लिए जागरूकता फैलानी है।

राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम

भारत सरकार ने राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम (National Malaria Control Programme (NMCP))1953 में शुरू किया था, जिसमें डीडीटी का छिड़काव किया जाता था।

इस कार्यक्रम की वजह से 5 सालों में ही मलेरिया की घटनाओं में बहुत कमी आ गई थी। इससे उत्साहित होकर भारत सरकार ने राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम 1958 में शुरू किया। इस योजना से भी मलेरिया के मामलों में बहुत कमी आ गई।

1967 में मलेरिया के मच्छरों ने कीटनाशकों और मलेरिया रोधी दवाओं के प्रति प्रतिकार क्षमता उत्पन्न कर ली जिससे एक बार फिर से देश में मलेरिया ने सिर उठा लिया। 1997 में भारत सरकार ने मलेरिया के उन्मूलन के स्थान पर उसके नियंत्रण पर ध्यान दिया और सभी जगह कीटनाशकों का छिड़काव करवाया।

सरकार ने 2003 में मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम को राष्ट्रीय ज्ञात कारण बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम से जोड़ दिया और मच्छर रोधी दवाओं का छिड़काव, वातावरण प्रबंधन जैविक नियंत्रण (जैसे मच्छरों के लार्वा को खाने वाली मछली को प्रोत्साहित करना) और निजी सुरक्षा उपाय (जैसे मच्छरदानियों का इस्तेमाल) जैसे कार्यक्रम चलाये। 2005 में भारत सरकार ने “राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन” योजना शुरू की। इसमें मलेरिया भी शामिल था।  

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मलेरिया को समाप्त करने के लिए विश्व बैंक द्वारा मदद

देश से मलेरिया को समाप्त करने के लिए विश्व बैंक पिछले 10 सालों से भारत की मदद कर रहा है। विश्व बैंक ने भारत के चुनिंदा राज्यों में मलेरिया नियंत्रण परियोजना शुरू की है। इसके अंतर्गत पानी भरे स्थानों पर मच्छर रोधी दवाओं का छिड़काव, मच्छर लारवा भक्षक मछलियों को पालना जैसे कार्यक्रम चलाए गए हैं। विश्व बैंक मच्छरदानी के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित करता है।

मलेरिया के रोग में निम्न सावधानी बरतनी चाहिए

1-    मलेरिया का रोग हो जाने पर दवाये नियमित तौर पर खाने चाहिए। बीच में दवा बंद नहीं करनी चाहिए।

2-    मलेरिया की दवाएं खाली पेट नहीं खाना चाहिए। इसे भोजन के बाद ही खाना चाहिए।

3-    मलेरिया रोग हो जाने पर खून की जांच करवानी चाहिए।

4-    मलेरिया के रोग में तेज बुखार आता है। रोगी का मस्तिष्क स्थिर नहीं होता है और वह अनाप-शनाप बोलने लगता है। ऐसे में किसी प्रकार का झाड़ फूंक नहीं करवाना चाहिए, बल्कि रोगी को डॉक्टर के पास लेकर जाना चाहिए।

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