फ़िरोज शाह तुगलक़ का इतिहास Firuz Shah Tughlaq History in Hindi

अगर आप तुगलक़ काल की जानकारी रखते होंगे तो आप फ़िरोज शाह तुगलक़ का इतिहास (Firoz shah tughlaq history in the hindi) भी थोड़ा बहुत जानते होंगे क्योंकि फ़िरोज़ शाह को इतिहासकार सबसे ज्यादा धर्मांध तथा बेवकूफ़ शासकों में से एक कहते हैं।

फ़िरोज शाह तुगलक़ का इतिहास व जीवनी Firuz Shah Tughlaq History in Hindi

इस लेख में आप फ़िरोज़ शाह तुगलक़ का जीवन परिचय हिंदी में पढ़ेंगे, अपनी क्रूरता और असहिष्णुता के लिए मशहूर तुग़लक के बारे में परीक्षाओं में 2 अंकों से लेकर 6 अंकों तक पूछा जाता है।

जन्म और शुरुवाती जीवन Birth and Early life

तुगलक़ वंश का तीसरा शासक फ़िरोज़ शाह का जन्म सन 1309 में दिल्ली में हुआ था, पिता का नाम “रजब” जो उस वक़्त के शासक मोहम्मद बिन तुगलक़ का चचेरा भाई था और माता “जैजेला” थी, जो राजपूत सरदार रजामल की बेटी थी।

फ़िरोज़ का बाल्यकाल बेहद ही सामान्य रहा, उसे पढ़ने लिखने में कोई रूचि नहीं थी तथा अपने पिता के साथ हथियार खाने में घूमने में बहुत ही आनंद आता था। 

इतिहास कारों का मानना है की फ़िरोज शाह बचपन में चिड़चिड़े स्वभाव का था और छोटे-छोटे जानवरों को तड़पाना और मारना उसके रोज़ के कामों में मुख्य था और कई बार उसे जानवरों ने नुकसान पहुँचाया, जिससे उसके माथे पर एक निशान बन गया था जो आजीवन रहा।

फ़िरोज़ शाह तुगलक़ का शासन काल Reign of Firuz Shah Tughlaq

मोहम्मद बिन तुगलक़ के अचानक मृत्यु के बाद दिल्ली की सियासत में गरमा गयी और सभी को अपने सुरक्षा तथा अस्तित्व का डर सताने लगा क्योंकि मोहम्मद बिन तुगलक़ का कोई भी बेटा नहीं था और शरीयत के अनुसार फ़िरोज़ को उस गद्दी का कोई हक़ नहीं था लेकिन तभी सल्तनत के सरदारों द्वारा फ़िरोज शाह तुगलक़ के नाम का उद्बोधन हुआ और 23 मार्च 1351 के दिन फ़िरोज़ को गद्दी मिल गयी और 42 साल की उम्र में फ़िरोज शाह तुगलक़ दिल्ली का तीसरा राजदार बना।

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दिल्ली की ज़मीन ने न जाने कितने सिरफिरों को गद्दी पर बैठते और मिट्टी में मिलते देखा है और फ़िरोज़ शाह भी उनमें से एक है। तुगलक़ के शासनकाल में कुछ ऊँची मीनारों के अलावा कुछ भी बेहतर नहीं हुआ बल्कि हिंदुओं का संहार और धर्म परिवर्तन, बलात्कार तथा दास प्रथा जैसी कुरीतियों का विस्तार ही हुआ।

फ़िरोज़ शाह ने हिंदुस्तान के कई जगहों पर हमले किये तथा मंदिरों को नष्ट कर दिया और इस्लाम को न मानने वाले लोगों पर अत्याचार तथा दुष्टता भरे कृत्यों को अंजाम दिया साथ ही खासकर ब्राम्हणों पर पहली बार जज़िया कर लगाया। 

इतिहास कारों का कहना है फ़िरोज शाह बेहद ही चरित्रहीन तथा रंगीन किस्म का इंसान था जिसे लोगों को ज़बरदस्ती दास (ग़ुलाम) बनाने में आनंद आता था। इसके शासन काल में इसके दास-दासियों की संख्या लगभग दो लाख के आसपास थी और उसने अपने गुलामों के लिए  “दीवान-ए-बंदगान” नामक एक ख़ास विभाग बनवाया था।   

फ़िरोज़ शाह तुगलक़ द्वारा स्थापित नगर City founded by Firoz Shah Tughlaq

जब फ़िरोज शाह तुगलक़ दिल्ली का सुल्तान बना तब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी सल्तनत को सुरक्षा देना तथा राज्य को आचार भ्रष्टता से ऊपर उठाना क्योंकि मोहम्मद बिन तुगलक़ के शासन में गरीबी तथा किसानों में असंतोष चरम पर था।

फ़िरोज शाह ने अपने जीवन काल में तीन सौ से ज्यादा नगरों का निर्माण करवाया जिसमें वर्तमान उत्तरप्रदेश के जौनपुर, फ़िरोज़ाबाद हरियाणा का हिसार तथा पंजाब का फ़िरोज़पुर मुख्य है। उत्तर प्रदेश का मशहूर शहर फ़तेहाबाद फ़िरोज़ शाह ने अपने बेटे फतेहखान के नाम पर रखा।

फ़िरोज़ शाह को ऊँची-ऊँची मीनारें तामिल करवाने का बहुत शौक था, लेकिन उसके अधिकतर मीनारों को पहले से स्थित मंदिर या महलों के पत्थरों से बनाया गया था इसने मौर्यकालीन स्तंभों तथा अभिलेखों को अलग-अलग जगहों से उखाड़कर अपने महलों में लगवाया था।

मोहम्मद बिन से मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग भी नाराज़ हो रहा था क्योंकि वह “उलेमा” वर्ग को धन मुहैया नहीं करवा पा रहा था। फ़िरोज़ शाह की नीतियाँ भी वैसी ही था, वह भी बेहद अक्षम था तथा शुरुवात में जितने भी प्रयास किये वह सब निष्फल रहे।

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फ़िरोज शाह ने 1360 में उड़ीसा के प्रसिद्ध मंदिर जगन्नाथ पूरी पर हमला कर उसे ध्वस्त कर दिया तथा वहाँ की अनोखी मूर्तियां, शिलाएँ तथा आभूषण लूट कर अपने साथ ले गया तथा वहाँ के मशहूर ग्रंथागार से 1300 किताबें भी अपने साथ ले गया और उसका अरबी-फ़ारसी में भाष्य करने के बाद उन्हें नष्ट कर दिया।

फ़िरोज शाह तुगलक़ की मज़हबी नीति Feroz Shah Tughlaq’s religious policy

इतिहास कारों के द्वारा फ़िरोज़ शाह को कट्टर इस्लामिक और अन्य धर्मों का घोर विरोधी प्रवृत्ति का इंसान कहा जाता है, क्योंकि फ़िरोज़ शाह अपने मंत्रिमंडल में मुसलमानों को ही नियुक्त करता था, हिन्दू तथा अन्य संप्रदाय के लोगों से चिढ़ और ईर्ष्या रखता था साथ ही उन्हें धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर कर देता था।

फ़िरोज़ के शासनकाल में मंदिरों को तोड़कर वहाँ मस्जिद बनाना तथा हिन्दू धर्म की प्रशंसा करने वालों को ज़िन्दा जलाना, हिन्दू स्त्रियों को जबरन दास बनाना तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना ही मुख्य था। 

कुछ इतिहास कारों का मानना है की फ़िरोज़ शाह के समय में थोड़ा बहुत विकास भी हुआ लेकिन उसके राजनीतिक अयोग्यता से उसका धनागार कभी भी भर नहीं सका।

फ़िरोज़ शाह ने मुसलमान औरतों को घर से बाहर न निकलने का तथा मज़ार पर न जा सकने का कानून बनाया तथा मस्जिद-मदरसे बनवाकर उलेमा वर्ग को खुश रखने के लिए उन्हें लूटा हुआ धन देकर उनकी चाटुकारिता की।

फ़िरोज़ शाह के कुछ नाम मात्र अच्छे काम भी हैं जैसे विधवा मुसलमान औरतों की सहायता करना, नदियों पर बाँध बनाकर नगर में ले आना इत्यादि। 

फ़िरोज़ शाह की मृत्यु तथा उत्तराधिकारी Feroz Shah’s death and successor

फ़िरोज़ की सैन्य नीति बेहद ही कमज़ोर रही जिसके कारण उसे बंगाल में कई बार शिकस्त मिली और कई बार तो उसके अयोग्यता और लापरवाही के कारण हजारों सैनिकों को अपने जान से हाथ धोना पड़ा। अपने शासनकाल में उसके हाथ ज्यादातर असफलताएँ ही लगी।

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फ़िरोज़ शाह तुगलक़ के उत्तराधिकारी के रूप में उसका पोता तुगलक़ शाह नियुक्त हुआ लेकिन 19 फ़रवरी 1369 को कुछ लोगों ने तुगलक़ शाह की हत्या कर दी और उसके चचेरे भाई अबूबकर को सुल्तान घोषित कर दिया।

फ़िरोज़ शाह तुगलक़ अपने अंतिम दिनों में अनेक रोगों से ग्रसित हो चुका था, उसके ही काल में उसके सभी बेटों की हत्या कर दी गयी थी और 1388 ई.स में फ़िरोज़ शाह तुगलक़ की मृत्यु हुई तथा उसे दिल्ली के हौजखास परिसर में दफनाया गया।

इस घटना के बाद फ़िरोज़ शाह तुगलक़ का बेटा नसीरुद्दीन मोहम्मद शांत नहीं बैठ सका और कुछ लोगों के साथ खुद को सुल्तान घोषित कर लिया और अबुबकर पर हमला कर उसे बंदी बना लिया लेकिन नसीरुद्दीन इन लड़ाइयों के कारण बीमार पड़ गया तथा 1394 में उसकी भी मृत्यु हो गयी। नसीरुद्दीन के मरने के बाद उसका सबसे छोटा बेटा महमूद, तुगलक़ वंश का आखिरी सुल्तान बना तथा इन मुसलमान विदेशी आक्रांताओं को बड़ी मात्रा में हिंदुओं के विद्रोह का सामना करना पड़ा।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने फ़िरोज शाह तुगलक़ की जीवनी (Firuz Shah Tughlaq History in Hindi) को पढ़ा और जाना की इतिहास में धर्मांध और दुष्ट शासकों की कमी नहीं है, अगर यह लेख आपको जानकारी से भरपूर लगा हो तो इसे शेयर ज़रुर करें।  

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