फ्रांसीसी क्रांति इतिहास नोट्स France Revolution History in Hindi

इस लेख में आप फ्रांसीसी क्रांति का इतिहास नोट्स France Revolution History in Hindi पढ़ सकते हैं। यह मुख्य रूप से 9th class के course में आता है। इसमें आप इसके कारण, प्रभाव और परिणाम के विषय में पूरी जानकारी ले सकते है।

इतिहास के पन्नों में हमें विश्व में हुई कई ऐसी क्रांतियों का पता चलता है, जिन क्रांतियों ने इतिहास में अपना एक विशेष स्थान बना लिया है।

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आज हम विश्व में हुई एक ऐसी ही क्रांति के बारें में बात करने वाले है, जिसका अपना एक अलग ही महत्व है। हम बात करने वाले है फ्रांसीसी क्रांति () के बारें में तो दोस्तों शुरू करते है –

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फ्रांसीसी क्रांति इतिहास नोट्स France Revolution History in Hindi

1789 ई0 की फ्रान्स की क्रान्ति आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण घटना है। यह क्रांति निरंकुश राजतंत्र, सामंती शोषण वर्ग, विशेष अधिकार प्राप्त वर्ग तथा प्रजा की भलाई के प्रति शासकों की उदासीनता के विरूद्ध प्रारम्भ हुई थी।

देश में विभिन्न कारणों से राजा और तत्कालीन राजव्यवस्था के प्रति फ्रांस के नागरिकों में विद्रोह की भावना प्रज्वलित हो रही थी। यह विद्रोह धीरे-धीरे तीव्र रूप ले रहा था। 1789 में राजा लुई 16वाँ (Louis XVI) को General State नाम की सभा बुलानी पड़ी। इस सभा को कई वर्षों से नही बुलाया गया था।

इस सभा में जनता की माँगों को लेकर जोरदार बहस हुई, क्योंकि लोगों में व्यवस्था को बदलने की बैचैनी थी। इसका यह परिणाम हुआ कि इस सभा के आयोजन के कुछ ही दिनों पश्च्यात सामान्य नागरिकों का एक जुलूस बास्तिल नामक जेल पहुँच गया और उसके दरवाजे तोड़ डाले एवं सभी कैदी बाहर निकल गए।

कुछ दिनों के बाद महिलाओं का एक दल राजा के वर्साय स्थित दरबार को घेरने निकल गया। जिसके फलस्वरूप राजा को पेरिस भाग जाना पड़ा।

क्रांति का दमन करने के उद्देश से जनरल स्टेट ने कई कदम उठाये, जैसे मानव के अधिकारों की घोषणा, मेट्रिक प्रणाली का आरम्भ, चर्च के प्रभाव को समाप्त करना, सामंतवाद की समाप्ति की घोषणा, दास प्रथा का अंत करना आदि।

कुछ लोग क्रांति की गति को धीमी करना चाहते थे। इन लोगों में आपसी झगड़े भी होने लगे पर इनका नेतृत्व कट्टर क्रांतिकारियों द्वारा किया जा रहा था। इनके एक नेता Maximilian Robespierre ने हज़ारों लोगो को मौत के घाट उतार दिया। यह सिलसिला करीब एक वर्ष चला जिसे आतंक का राज (Reign of terror) कहा जाता है।

Louis 16th और उसकी रानी की हत्या भी कर दी गयी। इनकी हत्या से यूरोप के अन्य राजाओं में क्रोध की ज्वाला प्रज्वलित हो गयी और वे लोग संयुक्त सेना बना कर क्रांतिकारियों के विरुद्ध लड़ने लगे।

क्रांतिकारियों द्वारा भी एक सेना का गठन किया गया जिसमें सामान्य वर्ग के लोग भी शामिल थे। इसी बीच इस सेना का एक सेनापति जिसका नाम नेपोलियन बोनापार्ट था, अपनी विजयों के कारण बहुत लोकप्रिय हुआ।

अब तक लोग क्रांति से ऊब चुके थे इसका लाभ नेपोलियन ने उठाया और सत्ता पर कब्ज़ा करके शासन चलाने लगा। यह शासन क्रांतिकारी सिद्धांतों पर आधारित था, नेपोलियन ने सम्राट की उपाधि धारण कर ली और इस प्रकार फ्रांस में राजतंत्र दुबारा लौट आया।

फ्रांसीसी क्रांति के कारण French Revolution Causes in Hindi

क्रांति होने के कई ऐसे कारण थे जो निम्न है –

राजनैतिक कारण Political Causes

देश में कोई भी क्रांति होने का एक मुख्य कारण राजनैतिक होता है। जिस कारण वहां की आम जनता विद्रोह करने लगती है और परिणामस्वरूप स्थिति और गंभीर हो जाती है ऐसा ही फ्रांस की क्रांति में हुआ जिसके राजनैतिक कारण निम्नलिखित हैं –

1. राजा का विलासी होना और धन का अपव्यय

राष्ट्र की सम्पूर्ण आय पर राजा का नियंत्रण होता था और इस आय का उपयोग राज्य के विकास में न होकर राजा-रानी और दरबारियों के भोग-विलास तथा आमोद-प्रमोद पर व्यय होता था।

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राजा रानी द्वारा बहुमूल्य विलासी वस्तुओं को खरीदने में अपार धन खर्च किया जाता था। राजपरिवार द्वारा विलासिता पर अपार धन खर्च करना और किसानों, श्रमिकों को भरपेट भोजन न मिलना इन दोनों कारणों ने क्रांति का रूप ले लिया।

फ्रान्स के राजा लुई सोलहवा और रानी अत्यधिक आरामपसन्द थे। वे अपनी विलासिता पर अत्यधिक व्यय करते थे।

2. निरंकुश राजतंत्र का होना

साम्राज्य में व्याप्त निरंकुशता का खत्मा करने के लिए एक जुट होकर राजा के विरुद्ध आम जनता ने विद्रोह करना आरंभ कर दिया जो बाद में फ्रांसीसी क्रांति का सूत्रपात करने में एक अहम् रहा।

राजा ही एक साम्राज्य का अधिकारी होता था, साम्राज्य के सभी कार्य उसकी आज्ञा के अनुसार ही होते थे। राजा निरंकुशता के साथ कार्य करता था।

खुद को ईश्वर का प्रतिनिधि बताना, अपनी आलोचना होने पर बिना कारण जेल में डाल देना, जनता पर अन्याय करना और अत्याचार करना निरंकुश राजा के कार्यो में शामिल था। राजाओं और सामन्तों की स्वेच्छाचारिता के कारण मुद्रित पत्रों के द्वारा वाल्तेयर और मिराव्यू जैसे महान व्यक्तियों को भी बन्दीगृह भेजा गया।  

3. अव्यवस्थित प्रशासन व्यवस्था

निरंकुश शासन के साथ-साथ राज्य में प्रशासन व्यवस्था पूर्णरूप से अव्यवस्थित थी। सरकारी पदों पर नियुक्तियां योग्यता के आधार पर न होकर राजा की कृपा दृष्टि से होती थी। अलग अलग प्रान्तों में अलग-अलग कानूनी व्यवस्था थी, जहाँ न्याय की उम्मीद करना व्यर्थ था।

4. स्वतंत्रता का न होना

निरंकुश शासन होने के कारण राज्य की सारी शक्तियां राजा के हाथों में थी। राज्य की सभी चीजों जैसे  भाषण, लेखन और प्रकाशन पर कड़ा प्रतिबंध लगा हुआ था, लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता भी नहीं थी। उचित न्याय के अभाव के कारण लोगों का रोष धीरे-धीरे क्रांति का रूप ले रहा था।

सामजिक कारण Social Causes

क्रांति के उग्र रूप धारण करने में कई सामाजिक कारण भी शामिल थे। जिसने क्रांति को भड़काने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाज में प्रचलित असमानता ने असन्तोष को जन्म दिया और जनसाधारण को प्रेरित किया कि वे वर्तमान सामाजिक ढांचे के विरुद्ध आवाज उठायें। क्रांति होने के सामाजिक कारण निम्न है –

1. कुलीन वर्ग द्वारा उत्पीडन

राज्य के समस्त महत्वपूर्ण पदों पर उनका एकाधिकार था। वे जनसाधारण से अनेक प्रकार के कर वसूल करते थे। कुलीन वर्ग आम जनता पर बड़ा ही उत्पीडन करता था।

यह वर्ग सुविधायुक्त एवं सम्पन्न था, साथ ही इन्हें अनेक विशेषाधिकार प्राप्त और यह राजकीय कर से मुक्त थे। राज्य, धर्म और सेना के उच्च पदों पर इन्ही वर्ग की नियुक्ति की जाती थी।

यही वर्ग किसानों से कर वसूल करते थे और उन्हें प्रताडनाएँ देते थे। कुलीनों के विशेषाधिकार और उत्पीड़न ने साधारण लोगों को क्रांतिकारी बनाया था।

2. मध्यम वर्ग

मध्यम वर्ग अब परिवर्तन चाहता था, क्योंकि शासन के प्रति सबसे अधिक असंतोष मध्यम वर्ग में था और अब यह वर्ग समाज में व्याप्त सामजिक असमानता को समाप्त करना चाहते थे। इसलिए क्रांति का संचालन और नेतृत्व इसी वर्ग द्वारा किया गया।

3. कृषक वर्ग

फ्रान्सीसी समाज में सबसे बुरी स्थिति जनसाधारण वर्ग की थी, जिसे तृतीय एस्टेट कहा जाता था। इस वर्ग में कृषक, मजदूर आदि आते थे। इस वर्ग की संख्या बहुत अधिक थी।

फिर भी इनके जीवन में इतना शोषण व उत्पीड़न जुड़ा हुआ था कि उन्हें पग-पग पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

किसानों पर कई प्रकार के करों को लाद दिया जाता था। जिस कारण उन्हें कर का बोझ उठाना पड़ता था। अब कृषक वर्ग अपनी दशा सुधारना चाहते थे और यह दशा परिवर्तन क्रांति द्वारा ही आ सकता था।

4. मजदूर वर्ग

इस समय मजदूर और कारीगरों की दशा अत्यंत दयनीय स्थिति में थी। पूर्व में हुई औद्योगिक क्रान्ति के चलते पहले ही घरेलू उद्योग-धंधों का विनाश हो चुका था और मजदूर वर्ग बेरोजगार हो गए थे।

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देहात के मजदूर रोजगार की तलाश में पेरिस भाग रहे थे न तो उनके पास दो वक्त की रोटी थी और न ही तन ढकने के लिए वस्त्र।

5. पादरी वर्ग का विलासी होना

कैथोलिक चर्च द्वारा पूर्ण रूप से सांसारिक जीवन जीने और अपना कार्य न करने के कारण आम जनता का रोष क्रांति का रूप ले बैठा, क्योंकि फ्रांस में रोमन कैथोलिक चर्च की प्रधानता व्याप्त थी।

इसका अपना एक अलग संगठन था और यह एक स्वतंत्र संस्था के रूप में काम कर रहा था। चर्च के पास अपना न्यायालय था और धन प्राप्ति का स्रोत था। चर्च देश की भूमि का पाँचवा भाग कवर किये हुए था। इसकी वार्षिक आमदनी करीब करीब तीस करोड़ रुपये थी।

चर्च द्वारा आम जनता पर कर लगाये जाते थे, जबकि चर्च स्वयं करमुक्त था। आम जनता से वसूल किये गये कर का उपयोग बड़े-बड़े पादरी द्वारा भोग-विलास में किया जाता था। इन लोगों को धर्म के कार्यों से कोई सरोकार नहीं था।

आर्थिक कारण Commercial Purpose

आर्थिक ढांचा भी क्रान्ति के विस्फोट के लिए बहुत सीमा तक उत्तरदायी था। लुई 16वें को युद्धों से विशेष लगाव था और अपने शासनकाल में उसने अनेक युद्धों में भाग लिया था।

युद्दो में हुए खर्चे और राजमहल की विलासिता के कारण फ्रांस की आर्थिक स्थिति बहुत ही जर्जर हो चुकी थी। आय से अधिक व्यय हो रहा था जिस कारण खर्च पूरा करने के उद्देश्य से सरकार को कर्ज लेना पड़ रहा था और इस कर्ज ने शासन की आर्थिक स्थिति और भी चिंताजनक कर दी थी।

अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए लुई 16वें ने पहले प्रसिद्ध ‘पुरुषों की सभा’ तथा फिर एस्टेट जनरल को आमन्त्रित किया, ताकि वह करारोपण का निश्चय कर सके।

दरिद्र किसान अपनी आय का 80 प्रतिशत भाग कर के रूप में पहले से ही अदा कर रहे थे। ऐसी स्थिति में और कर बढ़ाने के लिए एस्टेट जनरल को आमंत्रित करने से फ्रान्स में क्रान्ति की ज्वाला भभक उठी।

बौद्धिक जागरण Intellectual Awakening in France Revolution

फ्रान्स की राजक्रान्ति का मार्ग प्रशस्त करने में लेखकों की भूमिका अहम रही। जिस समय फ्रान्स की राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक दशा के पतनो की ओर उन्मुख थी।

उस समय सब प्रकार के लेखकों ने अपने लेखों एवं भाषणों के द्वारा मृतप्राय जनसाधारण में एक नवजीवन फॅूकने कर कार्य किया।

उन्होंने अपने लेखों , भाषणों में समाज में व्याप्त कई कुरीतियों पर विचारकों और दार्शनिकों द्वारा गहरा प्रहार किया गया। जिसने व्यवस्था के प्रति असंतोष, घृणा और विद्रोह की भावना को और बढाया वाल्टेयर, रूसो आदि लेखकों द्वारा लोगों को मानसिक रूप से क्रान्ति के लिए तैयार किया गया।

सैनिकों में असंतोष की स्थिति Discontent Among Soldiers

एक सेना ही एक राज्य की सफलता और असफलता में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। फ्रांस की सेना में भी शासन-व्यवस्था से असंतुष्टि का भाव था, जिससे शासन का पतन अवश्यम्भावी हो गया।

सैनिको में उत्पन्न रोष का कारण समय पर वेतन न मिलना, खाने-पीने तथा रहने की उचित व्यवस्था न होना एवं युद्ध के समय पुराने अस्त्र-शस्त्रों का दिया जाना शामिल था।

फ्रांसीसी क्रांति के प्रभाव (देश और समाज पर) French Revolution Effects on World & Society

फ्रांस की क्रांति के प्रभावों को निम्न बिन्दुओं में जाना जा सकता है –

  • विश्व के इतिहास में फ्रांसीसी क्रांति को मील का पत्थर कहा गया है। इस क्रान्ति के प्रभाव के कारण अन्य यूरोपीय देश भी स्वतन्त्रता प्राप्ति की चाहत एवं राजशाही से मुक्ति के लिए संघर्ष करने लगे।
  • फ्रांसीसी क्रांति से फ्रांस में पूर्ण रूप से राजतंत्र का अंत हो गया और एक गणराज्य की स्थापना हो सकी।
  • क्रांति ने यूरोप में पहली बार एक लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना की।
  • इस क्रांति का प्रभाव यूरोप तक ही सीमित न रहा। इसने समस्त विश्व को प्रभावित किया। इस क्रांति ने ही यूरोपीय राष्ट्रों सहित एशियाई देशों में राजशाही और निरंकुशता के खिलाफ वातावरण तैयार किया।
  • एक संस्था के रूप में सामंतवाद का अंत हो गया और और चर्च और पादरी को राज्य नियंत्रण में लाया गया था।
  • इसने प्राचीन मान्यताओं और राजनीतिक प्रणालियों के अंत और औद्योगिक क्रांति के नए युग की एक स्वीकृति को भी इंगित किया।
  • फ्रांसीसी क्रांति प्रेरक शब्दों स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व, इन तीन शब्दों ने विश्व की राजनीतिक व्यवस्था के स्वरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया।
  • मानवधिकारों की घोषणा ने व्यक्ति की महत्ता को प्रतिपादित किया।
  • क्रांति ने शासन के दैवी सिद्धान्त का अंत कर लोकप्रिय सम्प्रभुता के सिद्धान्त को मान्यता दी।
  • इसने राष्ट्रवाद के विचार को लोकप्रिय बनाया। इसने कल्याणकारी राज्य का अंतिम विकास भी किया।
  • फ्रांसीसी क्रांति ने धर्म को राज्य से अलग कर धर्मनिरपेक्ष स्वरूप प्रदान किया। अब धर्म व्यक्तिगत विश्वास की वस्तु बन गई। जिसनें राज्य को किसी तरह हस्तक्षेप नहीं करना था।
  • फ्रांस की क्रांति ने सामंती व्यवस्था पर चोट कर सामंती विशेषाधिकारों का अंत किया।
  • फ्रांसीसी क्रांति की सफलता ने पूरे विश्व में और विशेष रूप से यूरोप में लोगों को प्रेरित किया। राष्ट्रवाद की भावना और स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचारों से प्रेरित होकर, लोग निरंकुश निरंकुश राज्य के खिलाफ विद्रोह में उठे और लोकतंत्र को सरकार के नए रूप में स्थापित करने का प्रयास किया।
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इस प्रकार हम कह सकते है कि फ्रांस की क्रांति के प्रभाव अत्यन्त व्यापक सिद्ध हुए। यूरोप के विभिन्न देशो के साथ-साथ अमेरिका व भारत भी इसके प्रभाव से अछूते नहीं रहे। रैम्जे म्योर के अनुसार यह एक विश्वक्रान्ति थी जिसने प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित किया था।

फ्रांसीसी क्रांति के परिणाम Result of The French Revolution in Hindi

फ्रांसीसी क्रांति के परिणाम आम जनता के पक्ष में थे, आम जनता इससे खुश थी इसके परिणाम निम्न थे-

  • क्रांति के परिणाम स्वरुप निरंकुश शासन का अंत हो गया और इसके स्थान पर प्रजातंत्रात्मक शासन-प्रणाली की नींव डाली गई।
  • सामजिक, धार्मिक एवं आर्थिक जीवन में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए।
  • किसानों को सामंती कर से मुक्ति मिल गयी।
  • यूरोप के अनेक देशों में निरंकुश राजतंत्र को समाप्त कर प्रजातंत्र की स्थापना की गयी।
  • फ्रांस की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए  कर-प्रणाली में सुधार लाया गया, कार्यपालिका, न्यायपालिका और व्यवस्थापिका को एक-दूसरे से पृथक् कर दिया गया।
  • लोगों को भाषण-लेखन तथा विचार-अभीव्यक्ति का अधिकार प्रदान किया गया।
  • राजा को संसद के परामर्श से काम करना पड़ता था।
  • क्रांति ने लोगों को विश्वास दिलाया कि राजा एक अनुबंध के अंतर्गत प्रजा के प्रति उत्तरदायी है, यदि राजा अनुबंध को भंग करता है तो प्रजा का अधिकार है कि वह राजा को पदच्युत कर दे।
  • क्रान्ति के परिणामस्वरूप समान रूप से सभी वर्गों पर कर लगाये जाने की परम्परा को मान्यता प्रदान की गयी।
  • लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता मिली, उन्हें किसी भी धर्म के पालन और प्रचार का अधिकार मिला। पादरियों को संविधान के प्रति वफादारी की शपथ लेनी पड़ती थी।
  • क्रांति के पूर्व फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों के शासक निरंकुश थे, उन पर किसी प्रकार का वैधानिक अंकुश नहीं था, क्रांति के फलस्वरूप सामंती प्रथा का अंत हो गया कुलीनों के विशेष अधिकारों को समाप्त कर दिया गया।
  • सार्वजनिक शिक्षा की व्यवस्था की गई।

इस प्रकार हम कह सकते है कि फ्रान्स की क्रान्ति के प्रभाव अत्यन्त व्यापक सिद्ध हुए। यूरोप के विभिन्न देशो के साथ-साथ अमेरिका व भारत भी इसके प्रभाव से अछूते नहीं रहे।

रैम्जे म्योर के अनुसार यह एक विश्वक्रान्ति थी जिसने प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित किया था। आशा करते हैं फ्रांसीसी क्रांति इतिहास पर यह नोट्स France Revolution History in Hindi आपको इस टॉपिक के विषय में पूरी जानकारी मिली होगी।

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