गुरुद्वारा बंगला साहिब का इतिहास व कहानी Gurudwara Bangla Sahib History Story in Hindi

गुरुद्वारा बंगला साहिब का इतिहास व कहानी Gurudwara Bangla Sahib History Story in Hindi

गुरुद्वारा बंगला साहिब सिक्खों का एक प्रमुख गुरुद्वारा है। जो देखने मे काफी आकर्षक लगता है। यह अपने स्वर्ण मंडित गुम्बद शिखर के कारण अचानक काफी दूर से ही पहचान में आ जाता है।  यहां आठ से दस हजार लोग रोजाना दर्शन एवं प्रार्थना करने आते हैं। प्रकाश पर्व के समय दर्शनार्थियों की यह संख्या तीन गुना तक बढ़ जाती है।

यहाँ पर सिर्फ सिक्ख धर्म के लोग ही नहीं अपितु अन्य सभी धर्मो के लोग भी आते हैं। गुरुद्वारा के अंदर प्रवेश करते ही एक अलग प्रकार की शांति एवं आनंद की अनुभूति होती है। आप इस गुरुद्वारे के जितना अंदर प्रवेश करते जाएंगे आपको उतनी ही शांति और खुशी की अनुभूति होगी। गुरु ग्रंथ साहिब जी को सिक्ख धर्म में सर्वोच्च माना जाता है।

गुरुद्वारा बंगला साहिब भारत के नई दिल्ली के कनॉट प्लेस, गोल डाकखाना, बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित है। ये जगह दिल्ली के लोकप्रिय जगहों में से एक है। यहाँ पर गुरुद्वारे के साथ-साथ एक रसोई घर, बड़ा तालाब, एक स्कूल तथा आर्ट गैलरी है।

जैसे सभी दूसरे गुरुद्वारे में लंगर भवन होता है। उसी तरह इसमें भी लंगर भवन उपस्थित है। जिसमें किसी भी धर्म के लोग लंगर भवन में जाकर लंगर अर्थात भोजन कर सकते हैं।

गुरुद्वारा बंगला साहिब का इतिहास व कहानी Gurudwara Bangla Sahib History Story in Hindi

कहानी और इतिहास Story and History

गुरुद्वारा बंगला साहिब से जुड़ी कहानी बाबा राम राय की है। ये सिक्ख गुरु हरकिशन जी के बड़े भाई थे। इन्होंने दिल्ली और पंजाब के सिक्खों को प्रभावित करने की बहुत कोशिश की थी लेकिन उनकी कोशिश नाकाम रही।

गुरुगादी को सुरक्षित रखने के लिए वे औरंगजेब के दरबार तक चले गए थे। जब औरंगजेब ने गुरु जी को बुलाने का फैसला लिया तो गुरु जी को लाने की जिम्मेदारी राजपूत जयसिंह ने  ली थी।

गुरुद्वारा बंगला साहिब मूलतः एक बंगला है, जो भारत के जयपुर के शासक राजपूत ‘जयसिंह’ का था। सिक्खों के 8वें गुरु, “गुरु हर किशन” जब राजपूत शासक जयसिंह के आवास में मेहमान नवाजी ले रहे थे। उस समय वहाँ पर चेचक और हैजा नामक बिमारियों का प्रकोप बहुत तेजी से था।

गुरु हर किशन जी ने वहाँ के मरीजों को इन बीमारियों से छुटकारा दिलाने के लिए उस आवास से जल एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई थी। अब यह जल शुद्ध, आरोग्य एवं बीमारियों को दूर करने वाला स्वास्थ्य वर्धक जल माना जाता है। इस जल को विश्व के लगभग सभी सिक्खों द्वारा ले जाया जाता है। यह जल बहुत ही पवित्र माना जाता है।

जल्द ही हर किशन जी को भी बिमारियों ने घेर लिया और जिसके कारण अचानक से उनकी मृत्यु 30 मार्च सन् 1664 में हो गई। इस घटना के बाद जयसिंह ने पानी का एक तालाब बनवाया था। यह पानी का सरोवर और गुरुद्वारा अभी भी मौजूद है। प्रत्येक वर्ष यहाँ गुरु हरकिशन जी की जयंती पर विशेष मंडली का आयोजन होता है।

इस गुरुद्वारे में प्रवेश करने वाले शरणार्थियों एवं श्रद्धालुओं को अपने बालों को कपड़े से ढ़क कर और जूता न पहनकर आने के लिए कहा जाता है। इस गुरुद्वारे में रास्ता दिखाने के लिए और इस गुरुद्वारे को घुमाने के लिए गाइड भी होते हैं जो कि पूरी तरह से निःशुल्क होता है।

गुरुद्वारे के बाहर सर पर रखने के लिए स्कार्फ रखा हुआ होता है। इसमें काम करने वाले स्वयंसेवक इस गुरुद्वारे की देखरेख करते हैं और इसको स्वच्छ रखते हैं।

वास्तुकला Architecture

इसका निर्माण सिक्ख जनरल बघेल सिंह ने सन् 1783 में एक छोटे मंदिर के रूप में किया था। इन्होंने उसी समय दिल्ली में बने 9 सिक्ख मंदिरों की देखरेख के लिए मुग़ल साम्राज्य के काल में आलम शाह द्वितीय की खिलाफत भी की थी।

इस गुरुद्वारे के परिसर में बाबा बघेल सिंह म्यूजियम, घर, हायर सेकेंडरी स्कूल, 3-डी थियेटर, फॉरेन टूरिज्म लाउंज, एक लाइब्रेरी और अस्पताल भी है। वर्तमान में 2 लंगर भी उपस्थित है इसमें अब एयर कंडीशनर भी लगाये गए है।

साथ में यात्री निवास और मल्टी लेवल पार्किंग भी बनाये गए हैं।  इसमें टॉयलेट की भी उचित व्यवस्था की गई है। गुरुद्वारे के अंदर सामान ज्यादातर मुफ़्त होते हैं या फिर बहुत ही कम दाम पर मिलते हैं।

जयसिंह ने जो तालाब बनवाया था उसका जल कई बिमारियों के इलाज के लिए कारगर माना जाता है जो कि 225×235 फ़ीट का बना है। इसकी खास बात यह है कि यह तालाब भक्तों के चन्दों से बना है।  गुरुद्वारा की देखरेख “दिल्ली सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी” के द्वारा की जाती है और इसमें इनका हमेशा यही प्रयास होता है कि इसको लोगों के लिए बहुत ही सुविधाजनक, सुंदर एवं आकर्षक बनाया जा सके।

वर्तमान में गुरुद्वारे को “इको फ्रेंडली” बनाने के बारे में बात की जा रही है। यहाँ पर महीने की लगभग 25-30 लाख औसतन बिजली का बिल आता है जो गर्मी में बढ़कर 30 लाख तक हो जाता है जिसको घटाने के लिए यहां की कमेटी यहां पर “सोलर प्लांट” लगाने का सोच रही है और पहले से लगी लाइट्स को बदलकर एलइडी लाइट लगाने की बात की जा रही है।

लंगर हाल जो मिटाये सबकी भूख Langar Hall

गुरुद्वारा में बने दो लंगर रातों-दिन चलता रहता है। जिसमें रोजाना हजारों लोग लंगर(भोजन) करके अपनी भूख मिटाते है। दिल्ली में हो रहे जंतर-मंतर पर अनशन या प्रदर्शन पर यहाँ से भारी मात्रा में लंगर पहुँचाया जाता है।

इसके अलावा दूसरे राज्यों एवं देशों से आए हुए लोगों के लिए खाने के साथ-साथ रहने की भी व्यवस्था की जाती है, जोकि निःशुल्क होता है। यहाँ मुफ्त में सभी की भूख मिटाई जाती है।

देश का बहुत अच्छा डिजिटल म्युज़ियम Digital Museum

डीएसजीपीसी के अनुसार सन् 1783 में देशवासियों को आजादी का एहसास दिलाने के लिए बाबा बघेल सिंह की याद में म्यूजियम बनाया गया था। यह म्यूजियम मॉडर्न तकनीकी के साथ बनाया गया है जहाँ पर सिक्ख के इतिहास और संस्कृति के बारे में जानकारी मिलती है।

यहाँ पर म्यूजियम के साथ 3-डी थिएटर भी बनाए गए हैं जिसमें रोजाना शाम को धार्मिक मूवी चलाई जाती है। म्यूजियम और थिएटर का कोई चार्ज नहीं लिया जाता है।

अस्पताल Hospital

गुरुद्वारा के आसपास काफी बड़े-बड़े अस्पताल उपस्थित हैं। यहाँ पर भी अनेक प्रकार की बीमारियों का इलाज होता हैं। गुरुद्वारे के आसपास स्थित अस्पताल बहुत ही ज्यादा महँगे है, तथा लोगों को घंटों इलाज कराने के लिए इंतजार भी करना पड़ता है।

गुरुद्वारा में अस्पताल तो पहले से ही था लेकिन इसमे विभिन्न प्रकार की आधुनिक मशीनों की कमी है। इस समस्या को दूर करने तथा वर्तमान में अब इसमें बड़ी-बड़ी मशीनों को लाने की बात की जा रही है। जिससे लोगों का इलाज बहुत ही कम कीमत पर तथा आसानी से हो सके।

Featured Image – https://www.flickr.com/photos/piviso/26414950060

2 thoughts on “गुरुद्वारा बंगला साहिब का इतिहास व कहानी Gurudwara Bangla Sahib History Story in Hindi”

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.