बाबर का जीवन परिचय व इतिहास History and Biography of Babur in Hindi

बाबर का जीवन परिचय व इतिहास History and Biography of Babur in Hindi

(Babar) बाबर का पूरा नाम “ज़हिर उद-दिन मुहम्मद बाबर” था। उसने भारत के तत्कालीन सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की थी। बाबर अपनी क्रूरता के लिए भी जाना जाता था। उसने हजारों लोगों की हत्या करवा दी थी।

बाबर के पिता की मौत के बाद उसने सिर्फ 11 साल में ही शासन करना शुरू कर दिया था। कम उम्र में ही उसने बहुत से युद्ध लड़े थे, जिस कारण उसने युद्ध कौशल में महारत हासिल कर ली थी।

बाबर का जीवन परिचय व इतिहास History and Biography of Babur in Hindi

बाबर का जन्म

बाबर का जन्म 23 फरवरी 1483 को फरगना घाटी, उज़्बेकिस्तान में हुआ था। उसके पिता का नाम उमर शेख मिर्जा था जो फरगना घाटी के शासक थे। बाबर की माता का नाम कुतलुग निगार खानम था।

बाबर अपने पिता की तरफ से तैमूर का वंशज था और अपनी मां की तरफ से चंगेज खान का वंशज था। युद्ध कौशल और कुशल प्रशासन उसके खून में था। बाबर की मातृभाषा चगताई भाषा थी लेकिन वहां पर फारसी भाषा अधिक बोली जाती थी। बाबर फारसी भाषा में प्रवीण था। उसने बाबरनामा ग्रंथ चगताई भाषा में लिखा है।

शारीरिक क्षमता

कहा जाता है कि बाबर शरीर से बहुत शक्तिशाली था। वह व्यायाम करना पसंद करता था। व्यायाम करने के लिए वह दोनों कंधों पर दो लोगों को लादकर दौड़ लगाता था। अपने रास्ते में आने वाली नदियों को तैर कर पार करता था। बाबर ने गंगा नदी को दो बार तैर कर पार किया था।

इसे भी पढ़ें -  रज़िया सुल्तान का इतिहास Razia Sultan History in Hindi

बाबर का वैवाहिक जीवन

कहा जाता है कि बाबर की कुल 11 पत्नियां थी जिससे उसको कुल 20 बच्चे हुए थे। आयशा सुल्तान बेगम, जैनाब सुल्तान बेगम, मौसम सुल्तान बेगम, महम बेगम, गुलरूख बेगम, दिलदार बेगम, मुबारका युरुफजई और गुलनार अघाचा उसकी बेगम थी। बाबर ने अपने बड़े बेटे हुमायूं को अपना उत्तराधिकारी बनाया था।

बाबर की प्रजा

फारसी में मंगोल जाति को मुगल कहकर पुकारा जाता था। बाबर की प्रजा में मुख्यतः फारसी और तुर्क लोग शामिल थे। उसकी सेना में फारसी। तुर्क, मध्य एशियाई कबीले के अलावा पश्तो और बर्लाव जाति के लोग शामिल थे।

बाबर का भारत आगमन

मुगल सम्राट बाबर मध्य एशिया पर राज करना चाहता था। उसकी नजर भारत पर पड़ी। उन दिनों भारत की राजनीतिक दशा खराब थी। यहां के राजा एक दूसरे से लड़ने में व्यस्त थे। यह स्तिथि बाबर को फायदेमंद लगी।

उस समय दिल्ली का शासक इब्राहिम लोदी था जो बहुत सी लड़ाइयां हार रहा था। उसके हाथ से शासन धीरे-धीरे निकलता जा रहा था। उत्तरी भारत में क्षेत्रों पर अफगान और राजपूत राज कर रहे थे।

इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खान इब्राहिम लोधी के काम से संतुस्ट नहीं थे। वे खुद दिल्ली के सल्तनत पर कब्जा करना चाहते थे। उनको बाबर के बारे में जानकारी थी। तब आलम खान और दौलत खान ने बाबर को भारत आने का न्योता भेजा। बाबर को यह फायदे की बात लगी और अपना साम्राज्य बढ़ाने के लिए वह दिल्ली आ गया।

बाबर का भारत पर पहला आक्रमण

बाबर ने भारत पर पहला आक्रमण 1519 ई० में बाजौर पर किया था और भेरा के किले को जीता था। बाबरनामा में इस घटना का उल्लेख मिलता है। इस युद्ध में बाबर ने पहली बार बारूद और तोपखाने का इस्तेमाल भी किया था।

पानीपत का प्रथम युद्ध  

पढ़ें: पानीपत का युद्ध इतिहास

पानीपत की पहली लड़ाई अप्रैल 1526 ई० में बाबर और भारत के सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच हुई थी। यह युद्ध करने से पहले बाबर ने 4 बार पूरी जांच पड़ताल की थी जिससे उसे इस युद्ध में कामयाबी मिले।

इसे भी पढ़ें -  आदि शंकराचार्य जीवनी Sri Adi Shankaracharya Biography in Hindi

मेवाड़ के राजा राणा संग्राम सिंह भी चाहते थे कि बाबर इब्राहिम लोदी से युद्ध करें क्योंकि इब्राहिम लोदी उनका शत्रु था। राणा सांगा ने भी बाबर को भारत आकर इब्राहिम लोदी से युद्ध करने का निमंत्रण दिया था। बाबर को इस युद्ध में जीत मिली थी। खुद को हारता देख कर इब्राहिम लोदी ने स्वयं मौत को गले लगा लिया था।  

बाबर का भारत में रह जाना

हिन्दुस्तानी राजाओ को लगता था कि बाबर “पानीपत का पहला युद्ध” जीतकर वापस चला जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ। भारत बाबर भारत में ही रह गया।

खनवा की लड़ाई

मेवाड़ के राजा राणा संग्राम सिंह को लगता था कि बाबर “पानीपत का प्रथम युद्ध” जीतकर वापस चला जाएगा, पर बाबर ने भारत में रहने का मन बना लिया और राणा संग्राम सिंह को युद्ध के लिए चुनौती दे दी। इसके परिणाम स्वरूप खंडवा की लड़ाई हुई।

यह लड़ाई 17 मार्च 1527 ई० को खनवा स्थान पर लड़ा गया। इस युद्ध में राजपूत वीरता से लड़े, पर बाबर के पास बारूद और तोपखाने थे जिसका सामना राजपूत नहीं कर पाए और इस युद्ध में वे हार गये। मेवाड़ के राजा राणा संग्राम सिंह ने खुद को हारता देखकर आत्महत्या कर ली।

घागरा की लड़ाई

बाबर मेवाड़ के राजा राणा संग्राम सिंह को हरा चुका था, पर इसके बावजूद उसके लिए कई चुनौतियां मौजूद थी। बिहार और बंगाल में अफगानी शासक राज कर रहे थे, जो बाबर को भारत से बाहर भगाना चाहते थे।

मई 1529 को बाबर और अफगान शासको में युद्ध हुआ। यह युद्ध घागरा स्थान पर लड़ा गया। बाबर को इस युद्ध में जीत मिली। इस युद्ध के बाद बाबर और उसकी सेना ने भारत के राज्यों को लूटना शुरू किया।

बाबर की क्रूरता

भारत में जीतने के बाद बाबर का साम्राज्य स्थापित हो गया। बाबर की सेना भारत में जमकर लूटपाट करने लगी। उसकी क्रूरता के बहुत से उदाहरण देते हैं। बाबर अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर नरसंहार भी करता था। लोगों की हत्या करने में उसे किसी प्रकार का संकोच या ग्लानि नहीं होती थी।

इसे भी पढ़ें -  संभाजी महाराज पर निबंध Essay on Sambhaji Maharaj in Hindi

इसके प्रमाण इतिहास में मिलते हैं। बाबर बहुत अधिक धार्मिक प्रवृत्ति वाला नहीं था, इसलिए उसने यहां के हिंदुओं का जबरन इस्लाम में धर्म परिवर्तन करने की कोशिश नही की। वह स्वभाव से अइयाश किस्म का शासक था। उसने आगरा (उत्तर प्रदेश) में एक सुंदर सा बगीचा बनवाया था।

भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना

भारत में बाबर के आगमन के बाद ही मुगल साम्राज्य की स्थापना हो गई थी।  बाबर ने पंजाब, दिल्ली और बिहार राज्यों को जीता था। मरने से पहले उसने बाबरनामा नामक किताब लिखी थी जिसमें उसने सभी बातों का उल्लेख किया है।

बाबर की मृत्यु

बाबर की मृत्यु 26 दिसम्बर 1530 ई० को आगरा में हुई थी। उस समय आगरा मुगल साम्राज्य में हिस्सा था। मरने से पहले बाबर ने हुमायूं को अपना उत्तराधिकारी बनाया था।    

बाबरनामा

बाबर ने “बाबरनामा” पुस्तक लिखी थी। जब बाबर ने भारत पर आक्रमण किया था तब उसने उस समय भारत में विजय नगर, दिल्ली खानदेश, मेवाड़, कश्मीर, सिंध, गुजरात, मालवा, बंगाल और बहमनी रियासतें स्वतंत्र थी। बाबर ने उस समय के 5 मुस्लिम शासकों और दो हिंदू राजाओं के बारे में उल्लेख किया है।

मुस्लिम शासकों में बहमनी, गुजरात, मालवा और दिल्ली के शासक थे और हिंदू राजाओं में विजयनगर और मेवाड़ के राजा थे। बाबर ने विजय नगर के तत्कालीन शासक कृष्णदेव राय को सबसे अधिक बुद्धिमान और शक्तिशाली राजा बताया है।

बाबरी मस्जिद

ऐसा माना जाता है कि बाबर ने अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में राम मंदिर को ध्वस्त करके वहां पर बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। 6 दिसंबर 1992 को राम जन्मभूमि आंदोलन शुरू हुआ और कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था।  

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.