शिवलिंग का महत्व व इतिहास History & Importance of Shivalinga in Hindi

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शिवलिंग का महत्व व इतिहास History & Importance of Shivalinga in Hindi

हिंदू धर्म में शिवलिंग का बहुत महत्व है। यह भगवान शंकर का प्रतीक है। शिवलिंग को भगवान शंकर का निराकार रूप माना जाता है। हर हिंदू सुबह उठकर मंदिर में जब भी पूजा करने जाता है शिवलिंग का अभिषेक जरूर करता है। इसे लिंगा, लिंगम् या शिवलिंगम् भी कहते हैं।

हर शिव मंदिर में इसकी स्थापना की जाती है। शैव संप्रदाय के अनुसार शिवलिंग के दो हिस्से होते हैं – ऊपर के हिस्से को परशिव और नीचे के हिस्से को पराशक्ति कहते हैं। शिवलिंग के रूप में भगवान शिव निराकार, शाश्वत और असीम रूप में वास करते है।

शिवलिंग का महत्व व इतिहास History & Importance of Shivalinga in Hindi

समान्यताः शिवलिंग का निर्माण पत्थर, धातु, चिकनी मिट्टी से किया जाता है। यह अंडाकार या खंभे जैसा दिखता है। इसे मंदिर के केंद्र भाग (गर्भ ग्रह) में गोलाकार पीठ पर स्थापित करते हैं। हिंदू धर्म में शिवलिंग को भगवान शिव की अनंत ऊर्जा का स्रोत समझा जाता है।

शिवलिंग की उत्पत्ति और इतिहास में प्रमाण

शिवलिंग के प्रमाण इतिहास में भी मिलते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में कालीबंगा स्थान पर मिट्टी के शिवलिंग पाए गए हैं। इतिहासकारों के अनुसार  3500 ईसा पूर्व से 2300 ईसा पूर्व  लोग शिवलिंग की पूजा करते थे। अथर्ववेद, शिवपुराण, लिंग पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में शिवलिंग का उल्लेख मिलता है।

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इसे साक्षात ब्रह्म कहा गया है। इसे आदि और अनादि कहां गया है। सभी कारणों का कारण बताया गया है। शिवलिंग की पूजा करके भगवान शंकर का आशीर्वाद पाया जा सकता है। सभी हिंदू इसकी पूजा बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, पानी, दूध और मिष्ठान से करते हैं।

शिवलिंग का उल्लेख श्री शिव महापुराण खंड में मिलता है। इसके अनुसार विष्णु ने निर्गुण-निराकार-अजन्मा ब्रह्म(शिव) से पूछा कि आप कैसे प्रसन्न होंगे। शिव बोले की शिवलिंग की पूजा कर मुझे प्रसन्न किया जा सकता है। जो मनुष्य शिवलिंग की पूजा करेगा उसके समस्त दुख नष्ट होंगे।

शिवलिंग की पूजा कैसे शुरू हुई

पौराणिक कथा अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने विष पिया था और संसार की रक्षा की थी। विष पीने के कारण उनका कंठ नीला हो गया जिस वजह से वे नीलकंठ कहलाए। परंतु विष का नकारात्मक प्रभाव उनके शरीर पर पड़ने लगा। भगवान शिव के शरीर का तापमान बढ़ने लगा।

उन्हें शांत करने के लिए सभी देवताओं ने शिवलिंग बनाकर उस पर जल चढ़ाना प्रारंभ किया। वह प्रथा आज भी चलती आ रही है। सभी लोग मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

भारत के प्रमुख शिवलिंग

हिंदू धार्मिक कथाओ के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव प्रकट हुए थे।

1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

यह शिवलिंग गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। इसे पृथ्वी का प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार जब दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को श्राप दिया था तब इसी स्थान पर आकर चंद्रमा ने शिवलिंग की पूजा की थी और श्राप से मुक्ति पाई थी। यह भी कहा जाता है कि स्वयं चंद्र देव ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी। विदेशी आक्रमणकारियों ने इसे 17 बार नष्ट किया था।

2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

यह शिवलिंग आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर स्थित है। इसका महत्व बहुत अधिक है। ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से सभी भक्तों के पाप नष्ट हो जाते हैं और मुक्ति मिल जाती है।

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3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहाँ सुबह के समय आयोजित होनी वाली भस्मारती पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। सभी उज्जैन वासियों का मानना है कि शिव के रूप में महाकालेश्वर भगवान ही उनकी रक्षा करते हैं।

4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

यह ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग पहाड़ों पर स्थित है। नर्मदा नदी इसके चारों ओर ॐ का चिन्ह बनाती है जो कि बहुत आकर्षक दिखता है। इसी ॐ के आकार के कारण इसका नाम ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग पड़ा है। ॐ शब्द की उत्पत्ति ब्रह्मा के मुख से हुई थी।

5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

इसकी गणना भी भगवान शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंग में की जाती है। यह ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यह समुद्र तल से 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग का वर्णन स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है। यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार पांडवों ने महाभारत के युद्ध में अपने ही रिश्तेदारों का वध किया था इसलिए उन्हें पाप लगा था। पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी और भगवान शंकर की पूजा करके उनको मुक्ति प्राप्त हुई थी।

6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। इसे  मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सूर्योदय के समय भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की पूजा करता है उसके सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

यह उत्तर प्रदेश के काशी (बनारस) में स्थित है। धार्मिक कथाओं के अनुसार सभी देवताओं को काशी बहुत पसंद था। प्रलय आने पर भी यह स्थान बना रहेगा। प्रलय आने पर भगवान शिव अपने त्रिशूल से इसी फिर से बना देंगे। ऐसा माना जाता है।

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8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में गोदावरी नदी पर बसे नासिक जिले में स्थित है। भगवान शिव का अन्य नाम त्रयंबकेश्वर था। गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के निवेदन पर भगवान शिव यहां ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुये।

9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

यह ज्योतिर्लिंग झारखंड राज्य के देवघर में स्थित है। इससे बाबा बैजनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है। इसे कामना लिंग भी कहते हैं। इस  ज्योतिर्लिंग से बड़ी रोचक कहानी जुड़ी हुई है। रावण ने भगवान शंकर से वरदान मांगा कि अब वह कैलाश छोड़ दें और उसके साथ लंका में चलकर रहे। भगवान शंकर ने उसे यह ज्योतिर्लिंग दिया और कहा कि ठीक है परंतु यदि तुमने मार्ग में कहीं यह ज्योतिर्लिंग रख दिया तो मैं वही पर रह जाऊंगा।

10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के द्वारका जिले में स्थित है। शिवशंकर को नागों का देवता भी कहा जाता है। भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है। यह ज्योतिर्लिंग द्वारका से 17 मील की दूरी पर स्थित है। जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा से इस ज्योतिर्लिंग की पूजा करता है उसकी सभी कामनाएं पूर्ण होती हैं।

11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामनाथ पुर में स्थित है। यह चारों धाम में से एक है। इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी जब वह रावण से युद्ध करने जा रहे थे। दक्षिण भारत में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। यह 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है

12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (पूरा इतिहास पढ़ें)

इसे अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास दौलताबाद में स्थित है। सुकर्मा और उसकी पत्नी घुस्मा के मृत पुत्र को इसी स्थान पर भगवान शिव ने जीवनदान दिया था। घुस्मा के निवेदन पर भगवान शिव सदा के लिए यहां पर वास करते हैं।

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