फतेहपुर सिकरी का इतिहास History of Fatehpur Sikri in Hindi

फतेहपुर सिकरी का इतिहास History of Fatehpur Sikri in Hindi

भारत प्राचीन मंदिरों, भवनों, किलों तथा महलों से समृद्ध देश है। इसीलिये यह विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद है। अपने सुंदर एवं आकर्षक इमारतों तथा कला कृतियों के लिए प्रसिद्ध फतेहपुर सिकरी भारत देश के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा जिले में स्थित एक प्रमुख नगर है। यह भारत का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जहाँ देश एवं विदेशों से पर्यटक मुगल क़ालीन इमारतों की भव्यता को देखने आते है।

फतेहपुर सिकरी का इतिहास History of Fatehpur Sikri in Hindi

फतेहपुर सिकरी का  इतिहास

मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर ने सिकरी नामक स्थान पर राणा सांगा को हराकर इस स्थान पर अपना अधिकार कर लिया था। फतेहपुर सिकरी नगर मुगल काल से ही अपना एक विशिष्ट स्थान रखता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि अकबर का कोई उत्तराधिकारी नहीं था इसलिए अकबर अपनी बेग़म जोधा बाई के साथ संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर अजमेर में स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह जा रहे थे।

अजमेर जाते समय रास्ते में सिकरी नामक स्थान पर अकबर की मुलाकात सूफ़ी सन्त शेख सलीम चिश्ती से हुई। शेख सलीम चिश्ती ने अकबर से अपने रुकने की व्यवस्था के लिए कहा और अकबर की मनोकामना पूरी होने की दुआ की। तो अकबर ने  सिकरी में ही उनके रुकने की व्यवस्था कर दी। कुछ समय बाद अकबर को जोधा बाई के गर्भ से एक पुत्र की प्राप्ति हुई।

जिससे खुश होकर अकबर ने एक नए नगर फतेहपुर सिकरी की स्थापना के लिए योजना बनायी। इस योजना को तैयार करने में अकबर को लगभग 15 वर्षों का समय लगा। जिसके बाद 1559 ई0 में एक नए नगर फतेहपुर सिकरी की स्थापना मुगल शासक अकबर के द्वारा की गई। अपने अनुसार इस नगर की स्थापना करवाने के कारण ही फतेहपुर सिकरी को अकबर के सपनों का नगर कहा जाता है।

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मुगल शासक अकबर के शासन काल मे मुगल साम्राज्य की राजधानी आगरा थी। फतेहपुर सिकरी की स्थापना के बाद अकबर ने अपनी राजधानी यहाँ स्थांतरित कर दी थी। इसी वर्ष मुगल शासक अकबर द्वारा गुजरात पर विजय प्राप्त की गई थी। इसी कारण अकबर ने अपनी नई राजधानी का नाम फतेहपुर सिकरी रखा था।

इसके बाद सन् 1571 ई0 से लेकर 1585 ई0 तक लगभग 14 वर्षो तक यह मुगल साम्राज्य की राजधानी रही थी। इसी समय अकबर ने यहाँ बहुत से निर्माण कार्य कराएँ तथा अनेक किले, महलों तथा इमारतों का निर्माण कराया।

परन्तु पानी की समस्या के कारण मुगल शासक अकबर को अपनी राजधानी को दोबारा आगरा स्थानन्तरित करना पड़ा था। अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान फतेहपुर सिकरी में अनेको भवनों, महलों, तथा राजसभा का निर्माण करवाया था। जिसके अवशेष आज भी मौजूद है।

फतेहपुर सीकरी की प्रमुख इमारतें

बुलंद दरवाज़ा

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बुलंद दरवाज़ा

अकबर ने अपने गुजरात विजय की याद में विश्व के सबसे बड़े प्रवेश द्वार का निर्माण कराया था जिसे हम बुलंद दरवाज़ा के नाम से जानते है। बुलंद दरवाज़ा फतेहपुर सिकरी की सबसे बड़ी इमारत है। इस इमारत की ऊँचाई लगभग 280 फुट है। इस इमारत के दरवाज़े पर अरबी अक्षरों में कुरान की आयतों को उकेरा गया है।

इसी के अंदर ज़ामा मस्जिद भी स्थित है। ज़ामा मस्जिद और दरग़ाह के पास घने पेड़ों की छाया में संगमरमर के पत्थरों से निर्मित एक छोटा सा तालाब भी है। इस मस्जिद के अंदर एक ऐसा पत्थर लगा है जिसे थपथपाने से नगाड़े से निकलने वाली ध्वनि के समान आवाज़ सुनाई देती है।

शेख सलीम चिश्ती की दरगाह

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शेख सलीम चिश्ती की दरगाह

यह मशहूर दरग़ाह बुलंद दरवाज़ा के अंदर ही स्थित है। इस दरग़ाह पर जाने के लिए बुलंद दरवाज़े की 52 सीढ़ियों को पार करना पड़ता है। इस दरग़ाह का निर्माण कार्य 1581 ई0 में पूरा हुआ था। शेख सलीम चिश्ती की दरग़ाह को सफेद संगमरमर के पत्थरों से बनाया गया है। इसके मुख्य द्वार पर गुजराती शैली से निर्मित चार खम्भे है।

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काले एवं पीले रंग के मोजैक संगमरमर पत्थरों से निर्मित अष्टकोमी कुर्सी वाले अर्द्ध गोलाकार गुम्बद वाले कक्ष में शेख सलीम चिश्ती की समाधि स्थित है। इनकी समाधि पर आबनूस से बना एक छत्र भी है। इस समाधि को बेशकीमती सीप सींग तथा चंदन के अद्भुत शिल्प द्वारा सजाया गया है।

दीवान-ए-खास

यह इमारत मुगल बादशाह अकबर का शाही कक्ष था। इसका निर्माण फ़ारसी वास्तु कला के अनुसार बहुत ही बड़े-बड़े और उस पर बेहद खूबसूरत नक्कासी किये हुए पत्थरों से किया गया है। इस इमारत को इस तरह से बनाया गया है कि बाहर से देखने पर यह केवल एक मंज़िली इमारत दिखाई देती है लेकिन वास्तव में अंदर से यह दो मंज़िली इमारत है।

दीवान-ए-आम

यह एक ऐसी इमारत थी जहाँ शासक अपनी जनता से मिलता था और उनकी फरियाद सुनता था। इस इमारत का निर्माण पहले लकड़ी से किया गया था लेकिन बाद में शाहजहाँ ने इसका निर्माण संगमरमर के पत्थरों से कराया। इन पत्थरों पर फूलों की बहुत ही खूबसूरत नक्कासी की गई है।

पंच महल

यह एक पाँच मंज़िली इमारत है जो 176 खम्भों पर बनी हुई है। इसके खंभो पर बना प्रत्येक मंजिल का कमरा अपने नीचे वाली मंजिल पर बने कमरे से आकार में छोटे है। इस इमारत की सबसे खास बात यह है कि इसके हर खम्भे को अलग अलग तरह की कलाकृतियों से सुसज्जित किया गया है।

इस इमारत के निर्माण में अकबर ने अपनी हिन्दू बेग़म की भावनाओं का विशेष ख्याल रखा था। इस महल में कहीं कहीं पर मन्दिर के घंटों तथा भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं के भी चित्रों को उकेरा गया है।

राज महल

इस महल की सजावट तुर्की के दो शिल्पियों द्वारा की गई थी। इन दोनों शिल्पियों ने समुद्र की लहरों की कलाकृति से इस महल को सुसज्जित किया था। इस महल की दीवारों पर पशु पक्षियों की बहुत ही सुंदर तथा कलात्मक चित्रो को उकेरा गया है।

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इसी इमारत में मुगल शासक अकबर का शयन कक्ष तथा विश्राम गृह था। यहाँ पर अनूप ताल नाम का एक तालाब भी है। ऐसा कहा जाता है कि इसी तालाब के पास बैठकर तानसेन संगीत के दीपक राग अलापा करते थे।

हिरन मीनार

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हिरन मीनार, फतेहपुर सिकरी

यहाँ पर एक हिरण मीनार भी है जिसे हिरण की सिंघो की तरह के पत्थरों से सजाया गया है। ऐसा कहा जाता है कि हनन नामक हाथी को दफनाया गया है। हनन हाथी को खूनी हाथी भी कहा जाता था क्योंकि इस हाथी के पैर के नीचे मृत्यु दंड पाए हुए अपराधियों को कुचल कर दंडित किया जाता था।

इसके अलावा पंचमहल के पास में ही बीरबल का महल भी है। जिसे सन् 1582 ई0 में बनवाया गया था। इस महल के पीछे की तरफ अकबर ने अपने निजी घोड़ों तथा ऊँटो को रखने के लिए एक अस्तबल भी बनवाया था।

इस अस्तबल में छेद किये हुए पत्थर लगे है जिसमे घोड़ों तथा ऊँटो को बाँधा जाता था। फतेहपुर सिकरी हिन्दू एवं पारसी स्थापत्य कला को संजोए हुए लाल पत्थरों से निर्मित इमारतों का शहर है। बड़ी बड़ी इमारतें ही इस शहर की शोभा में चार चाँद लगाती है।

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