मधुमक्खी पालन उद्योग के फायदे Honey Farming Business in Hindi

मधुमक्खी पालन उद्योग के फायदे Honey Farming Business in Hindi

शहद का इस्तेमाल बहुत से कामों में होता है। यह खाने में इस्तेमाल होता है। इससे विभिन्न पकवान बनाए जाते हैं और दवा के रूप में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। बाजार में मधु या शहद की अच्छी मांग है। आजकल बहुत से लोग शहद पालन के व्यवसाय में लगे हुए हैं। इस व्यवसाय से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

आज के लेख में हम आपको मधुमक्खी उद्योग के बारे में सभी जानकारी देंगे। इस उद्योग से आप शहद और मोम प्राप्त कर सकते हैं।

मधुमक्खी पालन उद्योग के फायदे Honey Farming Business in Hindi

मधुमक्खी पालन उद्योग के लिए आवश्यक उपकरण

आपको बाजार से मधुमक्खी पालन बॉक्स (पेटियाँ) लाना होगा। 4 से 5  हजार स्क्वायर फीट की जमीन पर आपको 200 से 300 पेटियों की जरूरत पड़ती है। इन पेटियों के अंदर ही मधुमक्खियां रहती हैं और अपना छत्ता बनाकर शहद का निर्माण करती है।

शहद निकालने के लिए मुंह पर ढकने के लिए जाली वाले सुरक्षात्मक कपड़े, चाकू, ड्रम, रिमूविंग मशीन, दस्तानें  की आवश्यकता होती है। ड्रम्स में शहद एकत्र किया जाता है।  

बक्सों पेटियों में शहद कैसे बनता है

एक बक्से में लगभग 7000 मधुमक्खियां रहती हैं। इसमें एक रानी मधुमक्खी और ड्रोन (नर मधुमक्खी) और वर्कर मधुमक्खी रहती हैं। बक्सों को खेतों और बगीचों में रखा जाता है जहां पर मधुमक्खियों को फूल मिल सके।

मधुमक्खियां फूलों का रस पीकर बक्सों के छत्ते में भरती हैं। 3 किलोमीटर तक का भ्रमण करती हैं। रानी मधुमक्खी 1 दिन में 1500 से 2000 तक अंडे देती है। वर्कर मधुमक्खियां अपने पंखों को हिलाकर कर रस का पानी सुखा देती हैं और शहद तैयार हो जाता है।

इसे भी पढ़ें -  भेड़ पालन की जानकारी व फायदे Advantages of Sheep Farming in Hindi

छत्तों से शहद निकालने के लिए उन्हें काट लिया जाता है। निचोड़कर शहद निकाल लिया जाता है। छत्तों को आग पर रखकर भी शहद प्राप्त किया जाता है। निकले हुए शहद को साफ कपड़े से छान लेते हैं। मशीनों से भी शहद छत्तों से निकाला जाता है। इसे पैक कर बाजार भेज दिया जाता है।

मधुमक्खी के प्रकार

इस उद्योग के लिए चार प्रकार की मधुमक्खियों का प्रयोग किया जाता है- एपिस मेलीफेरा, एपिस इंडिका, एपिस डोरसाला और एपिस फ्लोरिया। सबसे अधिक शहद ऐपिस मेलीफेरा मधुमक्खियां बनाती हैं।

वह स्वभाव से शांत होती हैं और इन्हें आसानी से बक्सों में पाला जा सकता है। इस प्रजाति की रानी मधुमक्खी की अंडे देने की क्षमता भी बहुत अधिक होती है।  

मधुमक्खी पालन के लिए आवश्यक वातावरण

मधुमक्खी पालन का काम शुरू करने के लिए उस जगह फूलों की अच्छी मात्रा होनी चाहिए। सूरजमुखी, गाजर, मिर्च, सोयाबीन, नींबू, कीनू, आंवला, पपीता, अमरूद, आम, संतरा, मौसमी, अंगूर, यूकेलिप्टस और गुलमोहर जैसे फूल होना चाहिये।

उपयुक्त समय

मधुमक्खी पालन के लिए जनवरी से मार्च तक का समय सबसे अच्छा होता है। नवंबर से फरवरी तक का समय भी अच्छा माना जाता है।

लागत

एक बक्से (पेटी) में 10 फ्रेम होते हैं। एक फ्रेम से 200 ग्राम शहद प्राप्त होता है। 15 दिन बाद ही मधुमक्खियां सभी फ्रेम को फिर से शाहद से भर देती हैं। इस तरह एक बक्से से हर महिना कुल 2 किलो शहद प्राप्त होता है।

बाजार में शुद्ध शहद 300 रूपये किलो से अधिक में बिकता है। 2 किलो बेचकर 600 रूपये प्राप्त होते हैं। इस तरह एक बक्से से महीने में 1200 रूपये  प्राप्त किए जा सकते हैं। यदि आपके पास 20 बक्से हैं तो 24000  रूपये हर महीना कमा सकते हैं।

शहद की मार्केटिंग

यदि आपका शहद शुद्ध है और आपने उसमें कोई मिलावट नहीं की है तो यह कंपनियों में बिक जाएगा। शहद बनाने वाली कंपनी में जाकर बेच सकते हैं जिससे आपको बहुत अच्छे दाम मिलेंगे। आप अपने शहर, आसपास की दुकानों पर भी शहद बेच सकते हैं।

इसे भी पढ़ें -  चिकन हैचरी का बिजनेस कैसे शुरू करे How to Start Chicken Hatchery Business in Hindi

इसके अलावा आप खुद भी दुकान खोलकर शुद्ध शहद बेच सकते हैं। शुद्ध शहद की मांग बहुत अधिक होती है। यह तुरंत ही बिक जाता है।

मधुमक्खी पालन के लिए आवश्यक बातें

  • यह उद्योग अपनाते समय वही मधुमक्खी पालनी चाहिए जो फायदेमंद होती हैं और अधिक शहद बनाती हैं। छिपकलियों, लोमड़ी, भालू मधुमक्खियों को खा जाते हैं। इसलिए इसका विशेष ध्यान रखें।
  • मधुमक्खी पालन के लिए बक्सों (पेटियां) आप किसी कारीगर से भी बनवा सकते हैं। इस तरह आपको सस्ती पड़ेगी।
  • बक्सों को बारिश के पानी से बचाना चाहिए। बारिश का पानी मधुमक्खी पालन उद्योग के लिए नुकसानदायक है। यह मधुमक्खियों और उनके छत्तों को नष्ट कर सकता है। उसी स्थान पर मधुमक्खी पालन करना चाहिए जहां पर बारिश का पानी जमा ना होता हो।
  • मधुमक्खी पालन के लिए जहां पर मधुमक्खियां पाली जाएं उसके चारों ओर जो भी फसल लगी हो उस पर कीटनाशक का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। किसान अक्सर फसलों पर कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं जिस पौधों के फूलों पर मधुमक्खियां बैठती हैं। फूलों का पराग और मकरंद चूसने से उनकी मौत हो जाती है।

मधुमक्खी पालन उद्योग के फायदे

हमारे देश में बहुत से युवा बेरोजगार हैं। वे सभी लोग जिनके पास करने को कोई काम नहीं है वे इस उद्योग को अपनाकर लाभान्वित हो सकते हैं और पैसा कमा सकते हैं।

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.