एक बेहतर टू डू लिस्ट कैसे बनाएं? How to Make an Effective To Do List in Hindi?

आईये जानते हैं एक बेहतर टू डू लिस्ट कैसे बनाएं? How to Make an Effective To Do List in Hindi? जीवन में कार्य सारणी का महत्व और बनाने का सही तरीका आप इस आर्टिकल के माध्यम से जान सकते हैं।

एक बेहतर टू डू लिस्ट कैसे बनाएं? How to Make an Effective To Do List in Hindi?

टू डू लिस्ट क्या होती है? What Is to do list? 

दोस्तों आज के समय में हर व्यक्ति के पास समय बहुत कम है और पहले के मुकाबले कार्य बहुत ज्यादा बढ़ गए हो। 

निश्चित तौर पर जनसंख्या के तेजी से बढ़ने के बाद और साक्षरता दर के तेजी से फैलने के कारण, लगभग कार्य में प्रतिभागियों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ गई है। चाहे वह जॉब इंटरव्यू हो या आम जीवन का कोई भी पहलु।

हर जगह आप यह पाएंगे कि वह व्यक्ति जो अपने कार्यों को तेजी से निबटा सकता है, वह व्यक्ति जो अपने समय का सदुपयोग कर सकता है, वह अन्य व्यक्तियों से लगभग हर क्षेत्र में आगे रहता है। 

ऐसे ही समय का सकुशल उपयोग करने के लिए कार्य सारणी अथवा टू डू लिस्ट का निर्माण किया जाता है। ऐसी कार्य सारणी बनाने के प्रायः बहुत से फायदे होते हैं, वे फायदे निम्नलिखित हैं। 

कार्य सारणी अथवा टू डू लिस्ट बनाने के फायदे Benefits Of Making To do list 

टू डू लिस्ट बनाने के फायदे –

  • कार्य सारणी बनाने के बाद आपके सभी कार्य सुनियोजित ढंग से पूर्ण हो सकते हैं। 
  • कार्य सारणी बनाने के पश्चात आप अपने समय का अपने अनुसार प्रयोग कर सकते हैं। 
  • कार्य सारणी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपने कार्यों को प्राथमिकता के अनुसार आयोजित कर सकते हैं, जो कि बहुत ज्यादा फायदेमंद है। 
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कार्य सारणी कैसे बनाएं? How to make to do list? 

कार्य सारणी बनाने के लिए निम्न स्टेप्स को फॉलो करें :- 

  • कार्य सारणी बनाने के लिए एक माध्यम का चुनाव कर लें। वह माध्यम फोन, डायरी, लैपटॉप या आपकी सुविधा अनुसार कुछ भी हो सकता है। अगर आप डायरी या नोट्स डायरी पर कार्य सारणी बनाते हैं तो यह आपके लिए सहायक होगा। चुना गया मध्यांतर ऐसा होना चाहिए जिसपर आपकी नजर पड़ती रहे।
  • कार्य सारणी बनाने के लिए पहले अपने समय का आकलन कर लें। समय का आकलन करने का अर्थ है कि यह देख लें कि आप किस कार्य को कितना समय दे सकते हैं। या यह जांच लें कि कितना समय आपके पास उपलब्ध है। 
  • समय का आकलन करने के पश्चात् अपने समय को अपने कार्यों के मध्य बांट दीजिए, जैसे यदि आप सुबह पढ़ते हैं तो सुबह X बजे से Y बजे तक पढ़ने का समय, इत्यादि। 
  • कार्य प्रणाली बनाते समय यह निश्चित तौर पर याद रखें कि इसे समय समय पर अपडेट करना काफी ज्यादा जरूरी है, और यदि आप इसे समय समय पर अपडेट नहीं करते तो यह व्यर्थ हो जाएगी। 
  • अपडेट करने को इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि मान लीजिए मैं किसी कक्षा का विद्यार्थी हूँ। परसों मेरा गणित का टेस्ट है इसलिए मैं अपनी कल की समय सारणी में गणित को प्राथमिकता देते हुए कल का अधिकतम समय गणित को दे देता हूँ, लेकिन कुछ दिन मेरा भौतिक विज्ञान का टेस्ट है तो समय सारणी अपडेट किए बिना मैं गणित ही पढ़ता रह जाऊंगा। 
  • समय सारणी को बनाते समय अपने कार्यों की प्राथमिकता का ध्यान अवश्य रखें। जैसे मान लीजिए कि आप एक दर्जी हैं। आपको अपने दो ग्राहकों के कपड़े सिलने हैं। ग्राहक A के कपड़े आप बुधवार को देंगे और ग्राहक B के शनिवार को। तो आप किस ग्राहक के कपड़े पहले सिलने शुरू करेंगे। निश्चित तौर पर ग्राहक A आपकी प्राथमिकता रहेगा। उसी प्रकार अपने कार्यों को प्राथमिकता से सुनियोजित करें ताकि वे समय-समय पर पूरे होते जाएं, एवं समय सारणी सार्थक साबित हो।
  • अपनी समय सारणी बनाते समय चीजों को आसान रखें। यानी कि जितना कार्य आप एक दिन में कर सकें केवल उतना ही कार्य अपनी सारणी में रखें अन्यथा यह आपको मानसिक तौर पर काफी ज्यादा निराश करेगा। 
  • समय सारणी बनाने के उपरांत यदि आपकी समय सारणी कार्य नहीं कर रही अथवा आपके कार्य समय सारणी के अनुसार नहीं हो पा रहे, तो तनाव लेने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है। गौरतलब है कि समय सारणी एक आदत है, जिसके अनुसार ढलने में आपको समय लगेगा। 

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