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अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस पर निबंध Essay on International Day of Non-Violence (2 OCTOBER)

अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस पर निबंध Essay on International Day of Non-Violence (2 OCTOBER)
विषय सूची
  1. 1  अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस पर निबंध Essay on International Day of Non-Violence (2 OCTOBER)
  2. 2  दो अक्टूबर का महत्व
  3. 3  संयुक्त राष्ट्र महासभा का निर्णय
  4. 4  अहिंसा का सामान्य अर्थ
  5. 5  गांधी और सत्याग्रह
  6. 6  दांडी मार्च से सीख
  7. 7  शांतिपूर्ण असहमति
  8. 8  विद्यालय में अहिंसा
  9. 9  परिवार में संवाद
  10. 10  अहिंसा और नागरिक अधिकार
  11. 11  शब्दों से हिंसा का प्रश्न
  12. 12  डिजिटल संसार में जिम्मेदारी
  13. 13  अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और मानवीय सुरक्षा
  14. 14  समानता और भेदभाव
  15. 15  संवाद का अभ्यास
  16. 16  संघर्ष के बाद न्याय
  17. 17  गांधी के विचारों की आलोचनात्मक पढ़ाई
  18. 18  स्कूल में रचनात्मक आयोजन
  19. 19  अहिंसा दिवस का संदेश
  20. 20  अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  21. 21  संबंधित लेख
  22. 22  संदर्भ

अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस पर निबंध Essay on International Day of Non-Violence (2 OCTOBER)

अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस महात्मा गांधी के जन्म दिवस 2 अक्टूबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है। भारत में इसे गांधी जयंती के रूप में मनाते है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 जून 2007 को 2 अक्टूबर का दिन “अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की थी। जनवरी 2004 में इरान के नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन इबादी ने “अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस” मनाने का सुझाव दिया था।

यह सुझाव भारतीय कांग्रेस पार्टी को पसंद आया। 2007 में नई दिल्ली में कांग्रेस पार्टी मुखिया सोनिया गांधी और देस्मोंड टूटू ने संयुक्त राष्ट्र को “अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस” मनाने का सुझाव दिया।

15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 2 अक्टूबर को “अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस” मनाने के लिए वोटिंग हुई और इस प्रस्ताव को पारित किया गया। फिर संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशो को इसे मनाने के लिए कहा गया। शिक्षा और जागरूकता के द्वारा अहिंसा का संदेश देने के लिए कहा गया।

संयुक्त राष्ट्र के 193 देशो में से 140 देश “अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस” को मनाते है। अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, जैसे देशो के साथ साथ अफ्रीका और अमेरिकी देश भी इस दिवस को मनाते है।

अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस पर निबंध Essay on International Day of Non-Violence (2 OCTOBER)

महात्मा गांधी: अहिंसा के पुजारी MAHATMA GANDHI: WORSHIPER OF NON VIOLENCE

महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। वो हिंसा का सदैव विरोध करते थे। सत्य और अहिंसा को सबसे बड़ा हथियार मानते थे। उनकी ख्याति न सिर्फ भारत में है, बल्कि पूरे विश्व में है। देश को आजाद करवाने के लिए उन्होंने कभी हिंसा का सहारा नही लिया। अपने साथियों को सदैव अहिंसा का रास्ता अपनाकर देश को आजाद करवाने की बात कही।

बापू ने 1917 में” चम्पारण और खेड़ा सत्याग्रह”, 1929 में “सविनय अवज्ञा आंदोलन”, 1930 में “दांडी मार्च”, 1919- 1924 में “खिलाफत आन्दोलन”, 1942 में “भारत छोड़ो आन्दोलन” जैसे अनेक आंदोलन चलाये पर कभी भी हिंसा का सहारा नही लिया। जब किसी क्रांतिकारी ने हिंसा अपनाकर देश को आजाद कराने की बात कही तो महात्मा गांधी ने उससे दूरी बना ली।

वो भगवद्गीता, शांति और अहिंसा का संदेश देने वाली हिंदू मान्यताओं, जैन धर्म, लियो टोलस्टाय की शांतिवादी शिक्षाओं से बहुत प्रभावित थे। वो शाकाहारी थे और ब्रह्मचर्य  में विश्वास रखते थे। महात्मा गांधी बहुत आध्यात्मिक और ईश्वर को मानने वाले थे। वो अपनी शुद्धि के लिए सप्ताह में एक दिन मौन व्रत रखते थे। वो अपनी वाणी पर संयम रखते थे।

दक्षिण अफ्रीका की यात्रा के बाद उन्होंने पश्चिमी शैली के कपड़े पहनना छोड़ दिया था। उन्होंने खादी पहनने की सलाह दी। गांधी ने खुद कपास कातकर खादी कपड़ा बनाना शुरू किया। अपने अनुयायिओं से सूत कातकर खादी बनाने को कहा।

“अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस” का उद्देश्य और महत्व PURPOSE AND IMPORTANCE OF INTERNATIONAL NON VIOLENCE DAY

इसका उद्देश्य सम्पूर्ण विश्व में शांति स्थापित करना और अहिंसा का मार्ग अपनाना। आज दुनिया में हिंसा की घटनाये हर दिन बढ़ रही है। जहाँ देखो युद्ध, गृहयुद्ध, दंगे, लूटमार, आगजनी, आतंकवाद की घटनाये हो रही है।

हर देश में अलग अलग तरह की समस्याएं है। तालिबान, अलकायदा, आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठन आप पूरे विश्व पर कब्जा करना कहते है। अमरीकी देशों में नस्लवाद के चलते विदेशियों की हत्या हो रही है।

इसराइल और फिलिस्तीन में अक्सर युद्ध होता है। उसी तरह अमेरिका, चीन और रूस के बीच अक्सर तनाव और युद्ध के हालात बन जाते है। उत्तर कोरिया बार-बार परमाणु मिसाइलो का परीक्षण करता रहता है। अमेरिका और उत्तर कोरिया में हमेशा ही तनाव बना रहता है। पाकिस्तान- भारत में अक्सर तनाव और युद्ध की स्तिथि बनी रहती है।

म्याम्यार में रोहिंग्या मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है। 2 लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या कर दी गयी। पूरी दुनिया में बच्चो और महिलाओं के साथ अपराध तेजी से बढ़ रहे है। महिलाओं का बलात्कार, यौन उत्पीड़न हो रहा है। सोमालिया, सियरा लिओन, दक्षिण अफ़्रीकी देश के युवा बेरोजगारी के चलते समुद्री डाकू बन गये है। समुद्र से निकलने वाले जहाजो का अपहरण करके मोटी फिरौती मांगते है।

सीरिया, ईराक, पाकिस्तान देशो में आईएसआईएस आतंकवादी संगठन हजारो बेगुनाह लोगो को मौत के घाट उतार रहा है। आज पूरे विश्व में हिंसा की घटनाये तेजी से बढ़ रही है। ऐसी हालत में सभी देशो को “अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस” मनाना चाहिये और शांति का संदेश देना चाहिये।

मई 2018 में भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि आतंकवाद और हिंसा के अन्य रूपों का सामना कर विश्व में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का ‘अहिंसा’ का सिद्धांत बहुत प्रासंगिक है। राष्ट्रपिता की 150 वीं जयंती मनाने के लिए गठित राष्ट्रीय समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए कोविंद ने कहा, ‘महात्मा गांधी भारत की आत्मा की आवाज थे। महात्मा गांधी हमारा अतीत है, वह हमारा वर्तमान है और हमारा भविष्य भी है।

वर्तमान में दुनिया के 9 देशों के पास 16300 परमाणु बम है। जो पूरी दुनिया को खत्म करने के लिए काफी है। नये देश जैसे ईरान, इसराइल, उत्तर कोरिया भी परमाणु हथियार बना रहे है। ऐसे में आज विश्व बारूद के ढेर पर पहुँच गया है।

इसलिए विश्व के सभी देशो को शांति और अहिंसा का मार्ग दिखाने की आवश्यकता है। “अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस” विश्व के सभी देशो को शांति और अहिंसा का संदेश देता है। हिंसा से कभी शांति नही लायी जा सकती।

निष्कर्ष CONCLUSION

महान सम्राट अशोक हिंसा का सहारा लेकर अपने 99 भाइयों की हत्या करके खुद राजा बन गया था। कलिंग के युद्ध में 1 लाख से अधिक लोगो को मार दिया, पर फिर भी सम्राट अशोक को मानसिक शांति नही मिली। अंत में अशोक जैसे चक्रवर्ती राजा ने हिंसा का त्याग कर दिया और बौद्ध धर्म को अपना लिया।

उसने विश्व के अनेक देशो में शांति, प्रेम और अहिंसा का संदेश देने वाले बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्रो- पुत्रियों को भेजा। दीर्घकालिक शांति सिर्फ अहिंसा के द्वारा प्राप्त की जा सकती है। हम सभी को “अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस” पूरे जोश और उल्लास से मनाना चाहिये।

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दो अक्टूबर का महत्व

संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस हर वर्ष दो अक्टूबर को मनाया जाता है। यह महात्मा गांधी के जन्मदिन से जुड़ा है। भारत में इसी तारीख को गांधी जयंती भी मनाई जाती है, लेकिन दोनों अवसरों का ऐतिहासिक तथा संस्थागत संदर्भ अलग है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा का निर्णय

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 जून 2007 को प्रस्ताव 61/271 स्वीकार करके अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया। प्रस्ताव में शिक्षा तथा जन-जागरूकता के माध्यम से अहिंसा का संदेश फैलाने पर जोर दिया गया। तारीख और प्रस्ताव की पहचान आधिकारिक अभिलेख से जाँची जा सकती है।

अहिंसा का सामान्य अर्थ

अहिंसा केवल शारीरिक चोट से बचना नहीं, बल्कि विवाद में शांतिपूर्ण उपाय अपनाने के नैतिक विचार से भी जुड़ी है। इसका अर्थ अन्याय को चुपचाप स्वीकार करना नहीं है। असहमति और विरोध हिंसा के बिना भी व्यक्त किए जा सकते हैं।

गांधी और सत्याग्रह

महात्मा गांधी ने सत्याग्रह में सत्य, आत्मानुशासन और अहिंसक नागरिक कार्रवाई पर जोर दिया। औपनिवेशिक शासन में यह विरोध का महत्वपूर्ण माध्यम बना। सभी आंदोलनों का ऐतिहासिक परिणाम अलग था; सत्याग्रह को जादुई या हर परिस्थिति में तुरंत सफल उपाय न मानें।

दांडी मार्च से सीख

1930 का दांडी मार्च अहिंसक राजनीतिक कार्रवाई का प्रसिद्ध उदाहरण है। नमक कानून के विरोध ने रोजमर्रा की जरूरत को व्यापक राजनीतिक प्रश्न से जोड़ा। दांडी मार्च पर लेख पढ़ें।

शांतिपूर्ण असहमति

सार्वजनिक नीति से असहमति रखना लोकतांत्रिक संवाद का हिस्सा है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कानून, दूसरे नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं का ध्यान रखना जरूरी है। किसी के विरोध को स्वतः हिंसक कह देना निष्पक्ष आकलन नहीं है।

विद्यालय में अहिंसा

शिक्षक छात्रों को मतभेद होने पर सुनना, स्पष्ट बातचीत और सुरक्षित शिकायत प्रक्रिया समझा सकते हैं। हिंसा के मामले में पीड़ित बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। केवल दोनों को मिलाकर माफी कहलवाना हमेशा पर्याप्त समाधान नहीं है।

परिवार में संवाद

परिवार के सदस्य अलग निर्णयों पर मतभेद रख सकते हैं। सम्मानपूर्ण शब्द, निजी सीमाएँ और वास्तविक समस्याओं पर बातचीत मदद कर सकती है। अहिंसा के नाम पर किसी व्यक्ति को घरेलू हिंसा सहते रहने की सलाह नहीं देनी चाहिए।

अहिंसा और नागरिक अधिकार

शांति का विचार तभी उपयोगी है जब प्रभावित लोगों के अधिकार और सुरक्षा भी गंभीरता से लिए जाएँ। किसी समस्या को दबा देना स्थायी शांति के बराबर नहीं होता। निष्पक्ष संस्थाओं और कानूनी सहायता की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

शब्दों से हिंसा का प्रश्न

अपमान, धमकी या लगातार उत्पीड़न मानसिक परेशानी पैदा कर सकते हैं। असहमति व्यक्त करते समय दूसरे व्यक्ति की जाति, धर्म, लिंग या व्यक्तिगत गरिमा पर हमला करना जरूरी नहीं। वास्तविक पीड़ा को नजरअंदाज किए बिना सम्मानपूर्ण भाषा अपनाना उपयोगी है।

डिजिटल संसार में जिम्मेदारी

ऑनलाइन घृणित अफवाहें और हिंसा की धमकी लोगों की सुरक्षा प्रभावित कर सकती हैं। किसी विवादास्पद पोस्ट को साझा करने से पहले उसके स्रोत और वास्तविक संदर्भ की जाँच करें। धमकी मिलने पर सुरक्षित रिपोर्टिंग महत्वपूर्ण है।

अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और मानवीय सुरक्षा

देशों के बीच विवाद में कूटनीति, कानून तथा मानवीय सहायता महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जटिल अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का समाधान केवल एक नारे से नहीं होता। नागरिकों, बच्चों और घायल लोगों की सुरक्षा को सार्वजनिक चर्चा में स्थान मिलना चाहिए।

समानता और भेदभाव

शांतिपूर्ण समाज में अलग धर्म, भाषा और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के नागरिकों की गरिमा का सम्मान जरूरी है। किसी समूह के खिलाफ भेदभाव को केवल पुरानी परंपरा बताकर उचित नहीं ठहराया जा सकता।

संवाद का अभ्यास

कठिन परिस्थिति में बातचीत से पहले तथ्य स्पष्ट करना और दूसरे का पक्ष सुनना मददगार हो सकता है। लेकिन यदि तत्काल हिंसा का खतरा हो तो सुरक्षा और अधिकृत सहायता प्राथमिक हैं। संवाद हर जोखिमपूर्ण घटना का अकेला उत्तर नहीं है।

संघर्ष के बाद न्याय

गंभीर नुकसान के बाद केवल क्षमा का संदेश पर्याप्त नहीं होता। प्रभावित व्यक्ति के अधिकार, प्रमाण और उपयुक्त जवाबदेही जरूरी हो सकती है। मेल-मिलाप तथा न्याय एक-दूसरे के विरोधी हों, ऐसा आवश्यक नहीं।

गांधी के विचारों की आलोचनात्मक पढ़ाई

गांधी की ऐतिहासिक भूमिका का अध्ययन उनकी उपलब्धियों तथा विभिन्न विचारकों की आलोचनाओं सहित करना चाहिए। किसी महापुरुष के हर कथन को बिना संदर्भ आज की परिस्थिति पर लागू करना उचित नहीं।

स्कूल में रचनात्मक आयोजन

दो अक्टूबर पर वाद-विवाद, इतिहास की समयरेखा और स्थानीय विवाद समाधान संबंधी गतिविधियाँ की जा सकती हैं। विद्यार्थियों को संवेदनशील विषय पर अपनी बात रखने की सुरक्षित स्वतंत्रता देना महत्वपूर्ण है।

अहिंसा दिवस का संदेश

यह दिवस हिंसा और सार्वजनिक विवादों पर विचार करने तथा शांतिपूर्ण तरीकों को समझने का अवसर है। इसका मतलब वास्तविक अन्याय या पीड़ित की शिकायत अनदेखी करना नहीं है। अधिकार, संवाद और सुरक्षा साथ महत्वपूर्ण हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस कब है?

हर वर्ष दो अक्टूबर।

संयुक्त राष्ट्र ने इसे कब घोषित किया?

15 जून 2007 को प्रस्ताव 61/271 के माध्यम से।

यह गांधी से कैसे जुड़ा है?

दो अक्टूबर गांधी का जन्मदिन है।

क्या अहिंसा का मतलब अन्याय सहना है?

नहीं, शांतिपूर्ण विरोध और सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हैं।

स्कूल इसे कैसे मना सकते हैं?

इतिहास, संवाद और शांतिपूर्ण मतभेद पर गतिविधियों से।

संबंधित लेख

विषय 1 तथा विषय 2 तथा विषय 3।

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र: अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस तथा महात्मा गांधी का जीवन।

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