जल है तो कल है पर निबंध हिन्दी में (1000 Words)

आज के इस लेख में आप जल है तो कल है पर निबंध (Jal Hai To Kal Hai Essay in Hindi) हिंदी में पढ़ेंगे। यह निबंध स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए 1000 शब्दों में लिखा गया है जिससे विभिन्न प्रतियोगिताओं और परीक्षाओं के लिए तैयारी की जा सकती है।

इस निबंध में जल के महत्व के साथ था जल संरक्षण के तरीकों के बारे में भी संक्षिप्त में जानकारी दिया गया है।

जल है तो कल है पर निबंध हिन्दी में Jal Hai To Kal Hai Essay in Hindi (1000 Words)

जल है तो कल है !

‘जल है तो कल है’ यह स्लोगन हमने कई बार किताबो में, अपने बड़ो से और टीवी पर कई बार सुना है, लेकिन इसे चरिथार्थ होते हुए तब देखा है जब कई बार हम देखते है कि सूखे के कारण कई लोग मर गये और पानी के बिना बैचेन है।

हमने कई बार सुना है पानी बचाओ ! पानी बचाओ ! लेकिन न जाने कितनी बार ब्रश करते समय, कार धोते समय, हाथ धोते समय नल को व्यर्थ ही खुला छोड़ दिया, जिसके कारण आज यह समस्या अपना विकराल रूप लेकर हमारे सामने जल की किल्लत के रूप में आई है।

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दोस्तों आज हम बात करने वाले जल की महत्ता के बारें में जल का हमारे जीवन में क्या महत्व है ? साथ ही जल है तो कल है। और इसके बिना जीवन की कल्पना करना कितना मुश्किल है। तो दोस्तों शुरू करते है!

जल का महत्व Importance of Water

जैसा कि हम सभी जानते है कि जल ही जीवन है ! जल है तो कल है। हमारे जीवन में इसका विशेष महत्व है। इसके बाबजूद हम कई बार बहुत सारा पानी बर्बाद करते है। धरती का 3 चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है। इस का लगभग 97 प्रतिशत पानी सागर और महासागरो में पाया जाता है।

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जो खारा होने के कारण पीने योग्य नही है केवल 3 प्रतिशत ही पीने योग्य है। जिसमे से 2 प्रतिशत पानी वर्फ और ग्लेशियर के रूप में है। मात्र 1 प्रतिशत पानी तरल रूप में पीने योग्य है। इस प्रकार जल के बिना कल की कल्पना नही की जा सकती।

पृथ्वी पर करीब 32 करोड़ 60 लाख ख़रब गैलन पानी है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार रूप से बढ़ रहा है। जिसके कारण तापमान में बृद्धि से जल सूख रहा है।

यह समस्या प्रतिवर्ष बढती जा रही है और हम यह सोचकर पानी का संरक्षण नही करते कि बारिश के मौसम में दोवारा पृथ्वी को पानी प्राप्त हो जायेगा। लेकिन ऐसा नही है। लोग जल के महत्व को नही समझ रहे है।

जिन जगहों पर लोग पानी की कमी से जूझ रहे है वहां के लोग तो इसके महत्व को समझ रहे है लेकिन जिन जगहों पर इसकी कोई कमी नही है वहां लोग अनावश्यक कामो जैसे फर्श धोना, नालियों में बहाना, कपडे धोने में अत्यधिक पानी का उपयोग करना, गाड़ी धोना आदि जैसे कार्य करके इसे व्यर्थ करते है।

कहते हैं ना पानी की असली कीमत तो वही आदमी बता सकता है जो रेगिस्तान की तपती धूप से निकल कर आया हो। गवर्नमेंट की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में करीब 75 प्रतिशत लोग पानी की समस्या से जूझ रहे है और आगामी वर्षो में यह समस्या और विकराल रूप धारण कर लेगी।

22 मार्च को मनाया जाने वाला “विश्व जल दिवस” जिसका मुख्य उद्देश्य पानी का संरक्षण करना है यह महज एक दिवस के रूप में नही मनाया जाना चाहिए बल्कि इसका उद्देश्य होना चाहिए कि यह अपने लक्ष्य यानि की ज्यादा से ज्यादा जल संरक्षण कर सकें।

यदि पानी का अँधा धुंध प्रयोग इसी तरह चलता रहा और हम ने जल सरंक्षण का कोई समाधान नहीं ढूँढा तो वो दिन दूर नहीं जब हम पानी की एक बूंद बूंद के लिए तरसेंगे। इसीलिए यदि हालात इसी प्रकार चलते रहे तो तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए ही होगा पानी के अभाव से अकाल मृत्यु, जानवरों की सामूहिक मौतें और संस्कृति के लोप हो जाने की स्थिति पैदा हो जाएगी।

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जल का दुरुपयोग न करें क्योंकि जल ही जीवन है! Don’t Waste Water

आज हम दिन प्रतिदिन जल का दुरूपयोग कर रहे है। अनावश्यक उपयोग के साथ साथ लोग इसे प्रदूषित भी कर रहे है जैसे नदी में अपने कपडे धोना, घर का कचरा नदी में बहाना, फैक्ट्री की गंदगी पानी में बहाना, शुद्ध पानी में मल मूत्र त्यागना आदि।

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सरकारी आंकड़ो के अनुसार प्रदूषित जल में आर्सेनिक, लोहांस आदि विषेले तत्वों की अधिकता के कारण लोगो में स्वस्थ्य सम्बन्धी समस्या देखने को मिलती है। WHO की रिपोर्ट यह भी उजागर करती है कि लगभग 85 प्रतिशत बीमारियों का कारण असुरक्षित एवं अशुद्ध जल है।

विश्व में करीब 110 करोड़ लोग अशुद्ध जल पीने को मजबूर है और इसी अशुद्ध जल से अपना गुजारा कर रहे है।

पहले के समय में पानी भरपूर मात्र में उपलब्ध था किसी भी प्रकार का प्रदूषित जल नही था और यदि होता भी था तो नदिया स्वयं ही जल को साफ़ कर लेती थी लेकिन आज प्रदूषण बढ़ गया है नदिया अत्यदिक गंदगी के कारण स्वयं ही पानी को साफ़ नही कर पा रही है।

जिसके कारण लगातार समस्या और अधिक बढ़ रही है। ज्यादातर देखा जाता है जल प्रदूषण एक आम समस्या है जिस कारण ज्यादातर जल प्रदूषित होकर व्यर्थ चला जाता है इसीलिए जल की समस्या को दूर करने के लिए हमें आज से ही पानी की एक एक बूंद को बचाना होगा।

हममें से अधिकतर यह समझते है कि हमें क्या करना है ? हमारे पास तो भरपूर मात्रा में पानी है जब मन चाहा टैंकर माँगा लेंगे जब मनचाहा बोरिंग करा लेंगे । मैं कितना भी पानी निकाल लूं इससे किसी को क्या मतलब जितना मर्जी पानी निकालूं क्योंकि बोर मेरी जमीन पर है। ज्यादातर लोगों की सोच ही ऐसी है हमें ऐसी सोच को बदलना होगा।

बारिश के जल को संचित कर उसे बचाना आज हमारी प्रथम जरूरत बन गयी है। बारिश के पानी को बचाने के लिए छोटे छोटे तालाब, कुएं आदि का जगह जगह निर्माण किया जाना चाहिए। अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाने चाहिए जिससे ज्यादा वर्षा हो सके। प्रदूषित हुए जल का शुद्धिकरण किया जाना चाहिए जिससे उसे द्वारा प्रयोग में लाया जा सके।

देश के कई इलाको में लोग पानी की समस्या से इस कदर जूझ रहे है कि वो पानी लाने के लिए कइयो किलोमीटर पैदल चल कर पानी लाते है।

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जल का संरक्षण Water Conservation

यदि आप चाहते है कि हमारी आने वाली पीडी को पानी की किल्लत न हो तो आज से ही इसका संरक्षण करना होगा। हमें वो सभी तरीके अपनाने होंगे जिन्हें अपनाकर जल का बचाव किया जा सकता है। कुछ जल संरक्षण के तरीके निम्न है –

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वर्षा जल का संचयन Rain Water Harvesting

दोस्तों वर्षा जल का संरक्षण करके भी जल को बचाया जा सकता है। अधिकतर देखने में आता है कि वर्षा का जल व्यर्थ ही नदी नालो में बेकार ही बहता है। इसके लिए वर्षा का जल एक जगह इकत्र किया जाना चाहिए और इस जल का उपयोग कृषि आदि कार्यो में करना चाहिए।

भूमिगत जल Underground Water

भूमि के अन्दर स्टोरेज बनाकर इसका संग्रहण किया जा सकता है। वर्षा एवं घर के व्यर्थ जल को भूमि के अन्दर स्टोर करके और उसका भिन्न कार्यो में उपयोग करना जल संरक्षण को बढ़ावा देता है।

घरेलु उपयोग में जल का संरक्षण Save Water in Daily Household Use

घरेलु उपयोग में जल की कमी करके इसका संरक्षण किया जा सकता है जो निम्न है –

  1. घर के नलो में होने वाले रिसाब को ठीक कराए।
  2. उपयोग न होने पर नल को बंद कर दें।
  3. हर बार शौचालय को फ्लश करने के लिये कम पानी वाले फ्लश (।ow f।ush toi।et) का प्रयोग करें।
  4. सब्जियाँ, बर्तन आदि को बहते हुए नलों के नीचे धोने के बजाए कटोरों में भरे पानी से धोने चाहिए।
  5. घर में नहाते समय शाबर की जगह बाल्टी एवं टब का इस्तेमाल करें।
  6. घरों की नालियों के पानी को गढ्ढे बना कर एकत्र किया जाए और पेड़-पौधों की सिंचाई के काम में लिया जाए ।
  7. घरो में समुद्र के खारे जल का उपयोग घरेलू कार्यों के लिए किया जाना चाहिए।
  8. नदी नालों में घर की गंदगी न डाली जाये।
  9. जंगलों का कटाव रोका जाये और वृक्षारोपण किया जाना जरूरी है।

निष्कर्ष Conclusion

दोस्तों हमें प्रकृति द्वारा प्राप्त अमूल्य उपहार को बर्बादी से बचाना है और यह प्रण लेना है कि इसे बर्बाद न किया जाये और इसका जितना हो सके सीमित उपयोग करते हुए इसका संरक्षण किया जाये। हम सब इसे बचाकर ही गर्व से कह सकेंगे “जल है तो कल है“ ” जल ही जीवन है” क्योकि हमने खुद इसे बचाने के प्रयास किये होंगे।

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