भगवान श्री कृष्ण की कहानियां Amazing Lord Krishna Stories in Hindi

भगवान श्री कृष्ण की कहानियां Amazing Lord Krishna Stories in Hindi for Kids

पौराणिक काल से ही भगवान श्री कृष्ण की कहानियां या कृष्ण लीला बच्चों और बड़ों को बहुत पसंद आती है। भगवान श्री कृष्ण जी कई कहानियां हैं जो हम सभी के लिए ज्ञान का भंडार हैं।

कृष्ण की कहानियों से बच्चे खुश होते हैं और उनकी मजेदार कहानियों से बच्चे बहुत खुश होते हैं और सकारात्मक चीजें सीखते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म की कथा से लेकर वृंदावन में उनके शरारतों की कहानियां बहुत ही अद्भुत है।

हम भगवान कृष्ण को कई रूप में देखते हैं जैसे बाल कृष्ण, माखन चोर कृष्ण, राधा कृष्ण और कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का सार समझाते हुए भगवान श्री कृष्णा। आज इस लेख में हमने सरल भाषा में भगवान श्री कृष्ण की कुछ कहानियों को प्रस्तुत किया है जिसे बच्चे पढ़ कर समझ सके और आनंद के साथ-साथ ज्ञान भी प्राप्त कर सकें।

यह सभी कहानियां भगवान श्री कृष्ण के जीवन पर आधारित सत्य कहानियां हैं। हो सकता है इनमें से कुछ कहानियां आपने अपने माता-पिता या दादा-दादी से बचपन में सुना हो।

भगवान श्री कृष्ण की कहानियां Amazing Lord Krishna Stories in Hindi

1.श्री कृष्ण और सांप कालिया की कहानी

यमुना नदी  से जुड़ा हुआ एक मीठे पानी का सुंदर झील था। कहीं से एक बहुत ही जहरीला सांप वहां आकर रहने लगा जिसका नाम था कालिया। कालिया का जहर यमुना नदी के पानी में बहुत तेजी से घुल रहा था।

एक बार एक गाय चराने वाले व्यक्ति ने जब उस झील का पानी पिया तो उसकी मृत्यु हो गई। जब भगवान श्रीकृष्ण को इस बात का पता चला तो उन्होंने अपनी शक्ति से उस व्यक्ति को जीवित कर दिया।

उसके बाद श्री कृष्ण उस झील के पानी में कूद गए। कृष्ण पानी के बहुत अंदर गए और उस सांप को जोर-जोर से पुकारने लगे। जब बहुत देर तक कृष्ण पानी से नहीं निकले तो गांव के लोग इकट्ठा होकर नदी किनारे उनका इंतजार करने लगे। बहुत सारे लोग डरने भी लगे। कुछ देर बाद पानी के अंदर से कालिया सांप कृष्ण के सामने आया और आते ही उसने कृष्ण पर आक्रमण कर दिया।

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कुछ ही देर में कृष्ण ने कालिया को जकड़ लिया और उसके सर पर चढ़ गए। कालिया हजार सिर वाला सांप था। कृष्ण उसके सर पर तेजी से नाचने लगे और तेजी से नाचने के कारण कालिया सर्प के मुंह से खून निकलने लगा। यह देखकर कालिया की पत्नी पानी से ऊपर आई और उसने कालिया के जीवन की भीख मांगी।

कृष्ण ने उन्हें  यमुना नदी किस झील को छोड़ने के लिए कहा और रामानका द्वीप चले जाने को कहा। साथ ही कृष्ण ने कालिया को आश्वासन दिया कि अब उन पर गरुड़ कभी भी आक्रमण नहीं करेगा क्योंकि कालिया के सिर पर कृष्ण के पैरों के निशान पढ़ चुके हैं।

यह सुनकर कालिया बहुत ही खुश हुआ और वह यमुना नदी के उस सुंदर झील को छोड़कर अपनी पत्नी के साथ चले गया। इस प्रकार कृष्ण में कालिया सांप से गांव की रक्षा की।

2. श्री कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की कहानी

एक बार की बात है देवराज इंद्र ब्रज के लोगों से बहुत क्रोधित हुए क्योंकि लोग भगवान कृष्ण की बातों को सुनकर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर रहे थे और इंद्र देव की पूजा नहीं कर रहे थे। क्रोधित होकर इंद्र ने उन्हें दंडित करने के लिए घनघोर वर्षा करने के लिए बादलों को भेजा जिसके कारण पूरे वृंदावन में बाढ़ की संभावना उत्पन्न हो जाए।

आदेश देते हैं वृंदावन के ऊपर काले मेघों ने अत्यधिक वर्षा करना शुरू कर दिया। अत्यधिक वर्षा और बाढ़ के कारण ज्यादातर लोगों के घर पानी में बह गए।

वृंदावन के लोग डर गए और सभी भगवान कृष्ण की शरण में पहुंचे। भगवान कृष्ण को इस परिस्थिति के बारे में सब कुछ ज्ञात हो चुका था। उसी समय कृष्ण ने पूरे गोवर्धन पर्वत को अपने बाएं हाथ की छोटी उंगली पर एक छतरी की भांति उठा दिया।

वृंदावन के सभी लोग और गाय एक-एक करके गोवर्धन पर्वत के नीचे आने लगे और इस प्रकार कृष्ण ने वृंदावन के लोगों की जान बचाई। कृष्ण के इस आलोकित चमत्कार को देखकर सभी वृंदावन के लोग आश्चर्यचकित रह गए। भगवान कृष्ण की शक्ति को देख कर बादल वापस लौट गए और व्रज वासी ख़ुशी से रहने लगे।

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3. Lord Krishna and Arishthasura

एक बार वृंदावन में एक बड़ा बैल घुस गया और उसने अचानक से गांव के लोगों पर आक्रमण करना शुरू कर दिया। उस बैल ने कई लोगों के घर को तोड़ दिया जिसके कारण कई लोगों को चोट भी लगी।

जब कृष्ण को इस बात का पता चला तो वह तुरंत उस बैल के पास पहुंचे। श्रीकृष्ण ने देखते ही पता लगा लिया कि वह बैल एक असुर है। उस असुर का नाम था अरिष्ठासुर। कृष्ण को देखते ही वह कृष्ण की ओर तेजी से आक्रमण करने के लिए दौड़ा।

भगवान कृष्ण ने अपनी शक्ति से उसे परास्त कर दिया। परास्त करते ही वह बैल भगवान कृष्ण के समक्ष नतमस्तक होकर बैठ गया। उसके बाद उसने कृष्ण को बताया कि वह भगवान बृहस्पति का शिष्य है और अपने गुरु के साथ दुर्व्यवहार करने के कारण उसे असुर बैल बनने का श्राप मिला था। इस प्रकार कृष्ण में ब्रज के लोगों को अरिष्ठासुर से बचाया।

4. माखन चोर भगवान कृष्ण कहानी

आप लोग तो जानते ही होंगे कि भगवान कृष्ण को माखन खाना बहुत पसंद था। कृष्ण के माखन चोरी करने के कारण उनकी मां के साथ-साथ वृंदावन के सभी लोग कृष्ण के माखन चोरी के कारण तंग आ जाते थे।  भगवान कृष्ण की माता यशोदा माखन की मटकी को छत के ऊपरी भाग में लटका कर रखती थी जिससे की कृष्ण वहां तक ना पहुंच पाए और माखन को चोरी करके ना खा पाए।

एक बार कुछ जरूरी काम से यशोदा मां घर छोड़कर गई। उस समय कृष्ण अपने सभी मित्रों को वहां लेकर आए। उनकी मदद से वह माखन की मटकी तक पहुंचे और माखन के मटकी को तोड़कर सारा माखन खा गए। उसी समय वहां यशोदा मां पहुंच गए। कृष्ण के सभी साथि भाग गए परंतु कृष्ण वहीं रह गए। उसके बाद कृष्ण को यशोदा मां से अच्छी डांट पड़ी।

5. भगवान कृष्ण और फल वाली महिला कहानी

एक बार एक महिला फल बेच रही थी। जब वह श्री कृष्ण के घर के सामने से गुजर रही थी तब श्रीकृष्ण को कुछ फल खाने का मन किया। जब कृष्ण ने उस फल बेचने वाली महिला से कुछ फल मांगे तो उसने कृष्ण से उन फल के बदले कुछ मांगा।

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फल के बदले अनाज देने के लिए कृष्ण घर के अंदर दौड़ते हुए गए और मुट्ठी भर अनाज लेकर वापस फल वाली के पास आये। परंतु आते आते उनके हाथ से सारा अनाज गिर जाता था।

कृष्ण बार-बार  घर के अंदर जाते और कुछ अनाज अपने हाथ में लेकर आने की कोशिश करते हैं परंतु सारा अनाज नीचे गिर जाता। यह देखकर वह फल वाली बहुत प्रसन्न हुई और उसने कृष्ण को सारे फल दे दिए।

कृष्ण अंदर-अंदर उस फल वाली से बहुत प्रसन्न हुए। जब वह फल वाली अपना खाली टोकरा लेकर वहां से चली गई और अपने घर पहुंची तो उसने देखा कि उसकी टोकरी सोने और जवाहरात से भरी हुई है।

6.कृष्ण को गोविंद क्यों कहते हैं कहानी

एक दिन भगवान कृष्ण के पास एक कामधेनु नामक गाय स्वर्ग से पहुंची। उस गाय ने कृष्ण को बताया कि वह देव लोक से उनका अभिषेक करने आई है क्योंकि कृष्ण पृथ्वी पर गायों की रक्षा कर रहे हैं।

उस गाय ने कृष्ण को पवित्र जल से नहलाया और उनका दिल से शुक्रिया अदा किया। उसी समय भगवान इंद्र अपने हाथी ऐरावत पर विराजमान होकर वहां प्रस्तुत हुए और उन्होंने श्रीकृष्ण को आशीर्वाद दिया और कहा कि आपके इन पुण्य कार्यों के लिए पूरे विश्व के लोग आपको गोविंद के नाम से जानेंग।

7. कृष्ण और पूतना असुर की कहानी

कृष्ण के मामा कंस का वध भगवान कृष्ण के हाथों ही लिखा था। यह जानने के बाद बार-बार कंस अलग-अलग असुरों को कृष्ण का वध करने के लिए भेजा करता था। एक बार कंस ने एक पूतना नाम की रक्षाशनी को भेजा। पूतना वृंदावन पहुंची और उसने एक सुंदर महिला का भेस बदल कर कृष्ण को हर घर में ढूंढना शुरू किया।

उस समय कृष्ण बहुत छोटे थे। जब वह कृष्ण के घर पहुंची तो उसने कृष्ण को पहचान लिया और अपना विषैला दूध पिलाने के लिए गोदी में उठाया। जब वह कृष्ण को अपना जहरीला दूध पिलाने लगी तो उसको लगा कि कृष्ण दूध पीते ही मर जाएंगे परंतु कृष्ण तब तक दूध पीते रहे जब तक उस राक्षस महिला की मृत्यु नहीं हो गयी। उसकी मृत्यु होते ही वह अपने असली क्रूर रूप में आ गई।

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