शिव और माँ अन्नपूर्णा की कहानी Lord Shiva and Maa Annapurna Story in Hindi

शिव और माँ अन्नपूर्णा की कहानी Lord Shiva and Maa Annapurna Story in Hindi

दोस्तों जैसा ही हम सभी जानते है, हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भोजन को पवित्र माना जाता है, और इसके सेवन से पहले प्रार्थना की जाती है। जो व्यक्ति भोजन के महत्व को समझता है, वह जीवन में प्रगति करता है। अन्नदानम (भोजन का दान) का हिंदू धर्म में बहुत ही महत्व है।

माता अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना जाता है, अन्नपूर्णा शब्द संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ है भोजन और पोषण का दाता। अन्ना (अन्न) का अर्थ है “भोजन” और (पूर्ण) का अर्थ है भरा हुआ या परिपूर्ण”, इसीलिए अन्नपूर्णा का अर्थ भोजन से भरा हुआ होता है।

हिंदू धर्म में भोजन की पूजा और प्रसाद की बहुत प्रशंसा की जाती है और इसलिए, देवी अन्नपूर्णा को एक लोकप्रिय देवी माना जाता है। वह शिव की पत्नी पार्वती का ही अवतार / रूप कहीं जाती है। इनको भी 108 नामों से जाना जाता है।

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अन्नपूर्णा देवी को अन्य नामो जैसे विशालाक्षी, विश्वशक्ति, विश्वमाता,  भुवनेश्वरी, अन्नदा आदि नामों से भी जाना जाता है।

भारत में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, और अन्नपूर्णा देवी मंदिर, देवी को समर्पित हैं। अक्षय तृतीया का दिन देवी अन्नपूर्णा के जन्म दिवस के रूप में माना जाता है, इसलिए सोने के आभूषण खरीदने के लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। 

ऐसा माना जाता है, कि देवी अन्नपूर्णा पहाड़ों के राजा हिमवत की बेटियों में से एक हैं, इसलिए हिमालय में माउंट अन्नपूर्णा का नाम देवी अन्नपूर्णा के नाम पर रखा गया है। पश्चिमी देशों में खाद्य पदार्थों के साथ उनका नाम जुड़ा होने के कारण उन्हें “भोजन के हिंदू ईश्वर” के नाम से जाना जाता है।

कथा 1 : अन्नपूर्णा की कहानी

भगवान शंकर और मां पार्वती अक्सर कैलाश पर्वत पर पासा खेलते थे। एक दिन, भगवान शंकर और माता पार्वती के बीच प्रकृति के महत्व और पुरुष की श्रेष्ठता को लेकर बहस हो गयी। क्योंकि भगवान शंकर पुरुष की श्रेष्ठता पर जोर दे रहे थे। भगवान शंकर ने मां पार्वती से कहा कि संसार एक भ्रम है।

प्रकृति एक भ्रम है। सभी कुछ एक मृगतृष्णा है, यहाँ पल आता है और चला जाता है, यहां तक कि भोजन भी सिर्फ माया है। माँ पार्वती जो भोजन सहित सभी भौतिक चीजों की जननी है, उन्होंने यह बात सुनकर अपना आपा खो दिया। तभी मां पार्वती बोली “अगर मैं सिर्फ एक भ्रम हूं, तो देखते है आप और बाकी दुनिया मेरे बिना कैसे रहते है,” ऐसा कहकर वो दुनिया से ग़ायब हो गई।

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उनके लापता होने से ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया। समय स्थिर हो गया, ऋतुएँ परिवर्तन रुक सा गया, धरती बंजर हो गई और भयानक सूखा पड़ने लगा। आकाश, पाताल और धरती तीनों लोकों में मिलने वाला भोजन उपलब्ध नहीं था। देवता, दानव और मनुष्य भूख से तड़पते रहे थे।

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दुनिया भोजन से वंचित हो गई और वहां अकाल पड़ गया। जब भगवान शंकर के अनुयायी भोजन के लिए उनसे भीख माँगने लगे, तो भगवान शंकर ने अनुयायियों के लिए घर-घर जाकर भोजन की भीख माँगी। लेकिन किसी के पास कुछ भी देने के लिए नहीं था।

भगवान विष्णु ने भगवान शंकर से कहा मैंने सुना है काशी में एक महिला ने लोगों के लिए भोजन दान करना शुरू किया है। भोजन की भीख माँगने के लिए भगवान शंकर काशी गए, लेकिन जब उन्हें पता चला की रसोई को चलाने वाला कोई और नही बल्कि उनकी पत्नी पार्वती ही थी।

वह बैंगनी और भूरे रंग के वस्त्र पहने और आभूषणों से सजी हुई थी, और वह एक सिंहासन पर बैठी हुई थी, और एक एक करके भूखे देवताओं और पृथ्वी के भूखे निवासियों को भोजन परोस रही थी। उन्होंने अपने पुत्रों कार्तिकेय और गणेश को भी भोजन कराया।

मां पार्वती का यह सुंदर रूप कोई और नहीं बल्कि देवी अन्नपूर्णा देवी थीं, जो पूर्ण और संपूर्ण हैं। अन्नपूर्णा ने शिव को भिक्षा के रूप में  भोजन कराया, और देवी ने प्रसन्न होकर कहा कि “मैं अन्नपूर्णा के रूप में काशी में निवास करुँगी।”

कथा 2 : माँ अन्नपूर्ण की कहानी

एक और किंवदंती है, जो कहती है कि एक बार त्रिमूर्ति के बीच में बहस हो गयी की उनमें से कौन महान है। क्योंकि सभी अपनी-अपनी उपलब्धियाँ बता रहे थे, जब महादेवी ने उनकी बहस सुनी तो उन्होंने उनको सबक सिखाने की सोची और अदृश्य हो गयी जिसके फलस्वरूप अकाल पड गया।

जिसके कारण सभी भूख के कारण कमज़ोर पड़ने लगे, तब सभी ने भोजन के लिए त्रिमूर्ति से बिनती की तब भगवान विष्णु ने भगवान शंकर से कहा “अपने सही कहा था, देवी के अदृश्य होने के साथ ही ब्रह्माण्ड कमज़ोर होने लगा, मैंने काशी में एक देवी के बारे में सुना है, जिसने लोगो के खाने के लिए भोजन बाँटना शुरू किया है।

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तभी भगवान शंकर समझ गये की वो देवी कोई और नही बल्कि माँ जगदम्बा है, और भगवान शंकर भिक्षुक का वेश धारण कर काशी पहुंचे, और देवताओं के लिए भोजन मांगते हुए अपना कटोरा प्रस्तुत किया और कहा, “अब मुझे एहसास हुआ है कि भौतिक संसार, आत्मा की तरह, एक भ्रम के रूप में खारिज नहीं किया जा सकता है।”

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पार्वती मुस्कुराई और भगवान शंकर को अपने हाथों से खिलाया। तब से पार्वती को अन्नपूर्णा देवी – भोजन की देवी के रूप में पूजा जाता है। देवी खुश हुयी क्योंकि अब देवता सबक सीख चुके थे और खुश होकर देवी ने कहा मैं अन्नपूर्ण के रूप में काशी में रहूँगी।

धार्मिक ग्रंथों में अन्नपूर्णा की प्रतिमा का वर्णन एक युवा देवी के रूप में किया गया है, जिसमें तीन आँखें, चार हाथ चेहरे पर लाल रंग है। निचले बाएँ हाथ में स्वादिष्ट दलिया से भरा एक बर्तन पकड़े हुए दिखाया गया है, और विभिन्न प्रकार के गहने से सुसज्जित दर्शाया गया है। वह एक सिंहासन पर बैठी है, जिसके ऊपर चंद्रमा जडित है। कुछ चित्र में शिव को एक भिक्षुक के रूप में भीख मांगते हुए दिखाया गया है।

माँ अन्नपूर्णा के साक्ष्य

  1. तीसरी और चौथी शताब्दी के दौरान लिखी गई देवी भागवत में अन्नपूर्णा को कांचीपुरम की देवी और विशालाक्षी को वाराणसी की देवी के रूप दर्शाया गया है।
  2. 7 वीं शताब्दी के दौरान लिखे गए स्कंद पुराण में कहा गया है, कि ऋषि व्यास एक श्राप के कारण वाराणसी आए थे, और अन्नपूर्णा ने उन्हें एक गृहिणी के रूप में भोजन कराया था।
  3. वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर की कथा इस कहानी से जुड़ी है कि शिव ने उनके सम्मान में मंदिर का निर्माण किया था।

मान्यता

आज भी मराठी शादियों में, दुल्हन को देवी अन्नपूर्णा और बाल कृष्ण की एक धातु की मूर्ति साथ में दी जाती है। जिसकी वह चावल के दाने से पूजा करती है, इस विधि को गौरी हरप के नाम से जाना जाता है। दुल्हन इस मूर्ति को अपने पति के घर ले जाती है, और घर के मंदिर में रख कर आजीवन पूजा करती है।

भारत के प्रसिद्ध अन्नपूर्णा मंदिर

  1. अन्नपूर्णा को समर्पित सबसे प्रसिद्ध मंदिर अन्नपूर्णा देवी मंदिर वाराणसी, यूपी में है। अन्नपूर्णा काशी (वाराणसी) शहर की देवी हैं, जहाँ उन्हें वाराणसी की रानी के रूप में माना जाता है। मंदिर में प्रसाद के रूप में भोजन वितरित किया जाता है। नवरात्रि में भी बड़े पैमाने पर भोजन का वितरण किया जाता है।
  2. प्रसिद्ध मंदिर कर्नाटक के पश्चिमी घाट चीकामागालुरू में होरानडू में स्थित अन्नपूर्णेश्वरी मंदिर है, जहां भक्तों को भोजन कराने के बाद दोपहर और शाम की प्रार्थना होती है।
  3. केरल के पुदुकोड शहर में, पुदुकोड अन्नपूर्णुनेश्वरी मंदिर है, जहां नवरात्रि का भव्य उत्सव वार्षिक रूप से भव्य भोज के साथ आयोजित किया जाता है, जिसमें दुनिया भर के हजारों भक्तों की भीड़ होती है।
  4. अन्नपूर्णा देवी के मंदिर का निर्माण वातृप के पास, सदगुरि के रास्ते में किया गया है। मंदिर आठ-तरफ से पिरामिड के आकार में है।
  5. तमिलनाडु में रामनाथपुरम जिले के तिरुवदनई टाउन के पास अचंगुड़ी में अन्नकेश्वरी नाम के अन्नपूर्णी मंदिर का निर्माण चल रहा है और आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के पथिकोंडा में एक और मंदिर निर्माणाधीन है।
  6. हैदराबाद में, उसके मंदिर जाफ़रगुडा में पाए जाते हैं। उसके मंदिर जालंधर और पंजाब के भटिंडा में हैं।
  7. अन्नपूर्णा देवी मंदिर गुजरात में भी पाए जाते हैं। गुजरात के ऊंझा में उन्हें उमिया माता के रूप में पूजा जाता है। गुजरात और राजस्थान के कुछ लोग आशापुरा माता को अन्नपूर्णा माता का अवतार भी मानते हैं। राजस्थान में, उसके मंदिर झालावाड़ जिले के मिश्रोली गाँव, पाली जिले के कागदरा गाँव, चित्तौड़ किले में अन्नपूर्णा माता का एक मंदिर है। इसे महाराणा हमीर सिंह ने बनवाया था। किले में अन्नपूर्णा माता मंदिर के पास अन्य मंदिर हैं जो बाण माता, चारभुजा और लक्ष्मी-नारायण को समर्पित हैं।
  8. केरल के चेरुकुन्नम में श्री अन्नपूर्णुनेश्वरी मंदिर है। उस मंदिर में पूजा करने वाले हर भक्त को भोजन कराया जाता है। परंपरा यह है कि रात में, हर एक को खिलाने के बाद, भोजन का एक पैकेट एक पेड़ की शाखा से बांधा जाता है, यह विचार किया जाता है कि रात में चोर को भी भोजन के बिना नहीं जाना चाहिए।
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दोस्तों जैसा हमने जाना कि माँ अन्नपूर्णा को ही अन्न की देवी कहा जाता है। जब-2 पृथ्वी पर अन्न की कमी हुई है तब मां पार्वती ने अन्नपूर्णा देवी के रूप में अवतरित होकर समस्त मानव जाति की रक्षा की थी। माता अन्नपूर्णा अन्न की देवी हैं।

हमें कभी भी अन्न का निरादर नहीं करना चाहिए। कभी भी अन्न को व्यर्थ नहीं करना चाहिए। हमे माँ की कृपा पाने के लिए मां पार्वती एवं भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। माता अन्नपूर्णा की पूजा से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती है। परिवार में सभी का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।

Featured Image Source – http://hindugod99.blogspot.com/

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