मन के हारे हार है, मन के जीते जीत Man Ke Haare Haar – Man ke Jeete Jeet

Essay on ‘Man Ke Haare Haar, Man ke Jeete Jeet’
निबंध – मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

लम्बी टाँगे हो जाने से, सफर नहीं कटता है
जो मन से लंगड़ा हो जाये, उसे कौन चला सकता है

मनुष्य जीवन में विभिन्न तरह की परिस्थितियां आ सकती हैं। जिनका मनुष्य को सामना करना ही पड़ता है। परिस्थितियां कई तरह की हो सकती हैं – अच्छी या बुरी, हार या जीत आदि। मनुष्य जीवन भर अपने उद्देश्यों की पूर्ति हेतु लगा रहता है। लेकिन वे उद्देश्य पूरे न हो पाएं तो वह निराश हो जाता है और वह अपने आप को असफल मान लेता है।

मनुष्य की सोच का सीधा सम्बन्ध उसके मस्तिष्क से होता है। अगर वह नकारात्मक सोच रखता है तो परिणाम भी नकारात्मक होते हैं और स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी के विपरीत यदि मनुष्य ये सोचे कि वह सारे कार्यों को साकार कर सकता है, सकारात्मक सोच रखता है तो कई सारी समस्याएं हल हो सकती हैं।

मनुष्य के जीवन में कई सारी ऐसी अवस्थाएं आती हैं जिसमें वह हताश हो जाता है। ऐसी स्थिति में वह बिना किसी प्रयास के ही हार मान लेता है। किसी भी समस्या का हल हार मान लेने से तो नहीं निकलता। इसीलिए हमें हमेशा अपने कार्यों को सुचारु रूप से करते रहना चाहिए चाहे असफलता ही क्यों न मिले।

अगर आप इस सोच के साथ जीते हो कि सफलता अवश्य मिलेगी तो आपको सफलता जरूर मिलेगी, लेकिन आप पहले से ही अगर हार मान लोगे तो आप अपना बेस्ट देने में भी असक्षम हो जाओगे।

राष्ट्र कवि स्व. श्री मैथली शरण गुप्त जी ने भी कहा है कि “नर हो न निराश करो मन को”

अर्थात यह जीवन अमूल्य है, जीवन में अगर कोई विपत्ति या परेशानी आ भी जाए तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। इस तरह हार मान लेने से आप अगर निराश होते हो तो यह मानव जीवन व्यर्थ चला जाता है। अपने मानव मूल्यों को आपको समझना चाहिए। अगर आप हार मान कर बैठ जायेंगे तो आप कार्यो को सही ढंग से नहीं कर पाएंगे।

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अगर आपको यह मानव शरीर मिला है तो आपको अवश्य ही कुछ अच्छे कार्य करना चाहिए ऐसे ही व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। जीवन में बड़ी सी बड़ी असफताए ही क्यों न आये लेकिन आपको हार नहीं मानना चाहिए। आपके कार्य दूसरों को प्रेरित करने के लिए हैं नाकि आप से लोगों को यह निराश होने की प्रेरणा मिले। इसीलिए लोगों के लिए आप प्रेरणा बने। जिससे एक अच्छे समाज का निर्माण हो सके।

सोचना एक स्टेट ऑफ़ माइंड है। कुछ ऐसी घटनाओं को यहाँ बताया जा रहा है जिससे आप समझ सकते हैं कि ये सिर्फ आपकी मनोवृत्ति है।

आप सोचिये कि आप गहरी नींद में हैं और एक सांप आपके पास से होकर निकल गया है। तब आपको डर नहीं लगेगा क्योंकि आप सो रहे थे और सांप ने भी कुछ नहीं किया। लेकिन दूसरी तरफ जब आप जाग रहे हो और आपके काफी दूरी पर कोई सांप आ जाये तो आपकी डर के कारण हालत खराब हो जाएगी। जबकि सांप तो दूर है और उसने कुछ नहीं किया तब भी आप सोच कर परेशान हो गए।

अब दूसरा उदहारण – एक बार की बात है किसी बस में बहुत से यात्री सफर कर रहे थे। बस ठसा – ठस यात्रियों से भरी हुई थी। उसमें एक ब्राह्मण भी था जो खड़े होकर सफर कर रहा था। चूँकि बस बहुत भरी हुई थी तो उन्ही से सट कर खड़े हुए सह यात्री को किसी ने उसके नाम से आवाज़ लगाई।

ब्राह्मण ने वह नाम सुना और छी-छी करने लगा। क्योंकि उसके नाम से ब्राह्मण को लगा कि वह कोई नीची जाति का व्यक्ति है और वह उससे स्पर्श हो गया और वह अपवित्र हो गया। जबकि दोनों मानव शरीर ही हैं। जबकि कुछ देर पहले ब्राह्मण को उस व्यक्ति से कोई परेशानी नहीं थी। यह तो केवल लोगों की सोच का फर्क है। इसीलिए जैसा आप सोच लेते हो वैसा असर आप पर पड़ता है।

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अगर जीवन में कभी आप हार जाये तो निराश होने की आवश्यकता नहीं। क्योंकि हार और जीत लगी ही रहती है। सफलता के साथ –  साथ आपको असफलता का अनुभव होना भी जरुरी है। क्योंकि तभी आप एक पूर्ण व्यक्ति बन सकते हैं। और वैसे भी सफल – असफल जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं है।  सिर्फ एक मन का सोचना है। इसीलिए सदा अपने अंदर सकारात्मक सोच को बनाये रखिये।

कहानी

एक बार की बात है दो राज्यों के बीच युद्ध छिड़ गया। जो छोटा राज्य था वह बहुत डरा हुआ था। क्योंकि उन्हें लग रहा था कि वे हार जायेंगे क्योंकि उनके पास कम सैनिक थे। जबकि दूसरे राज्य के पास बहुत सारे सैनिक थे। इसी कारण से छोटे राज्य के सेनापतियों ने युद्ध में जाने से मना कर दिया। उनका कहना था कि जब हार निश्चित ही है तो क्यों युद्ध लड़ने के लिए जाएँ और उन्होंने पहले से ही हार मान ली। ऐसी स्थिति को देखकर राजा सोच में पड़ गया। लेकिन वह हार मानने वालों में से नहीं था। तब राजा एक गांव में गया और एक फ़कीर से प्रार्थना की कि क्या आप मेरे युद्ध में मेरे सेनापति बनकर जा सकते हैं। तभी वहां खड़े सेनापति को आश्चर्य हुआ कि राजा एक ऐसे फ़कीर से युद्ध लड़ने को कह रहा है जिसने कभी युद्ध लड़ा ही नहीं न उसे युद्ध का कोई ज्ञान है। लेकिन फ़कीर ने राजा की बात मान ली। लेकिन सैनिकों को युद्ध में उस फ़कीर के साथ जाने में डर लग रहा था। लेकिन फ़कीर में युद्ध के प्रति जोश भरा था  और सैनिकों को उसके साथ जाना ही पड़ा। युद्ध में जाते हुए बीच में ही एक मंदिर में फ़कीर ने सबको रोका और कहा कि युद्ध में जाने से पहले भगवान की भी मर्ज़ी जान ले। उसने अपनी जेब में से एक सिक्का निकला और बोला मैं ये सिक्का उछालूँगा अगर ये सीधा आया तो जीत अपनी अगर उल्टा आया तो जीत दुश्मनों की होगी। उसने सिक्का उछाला और वह सीधा आया। तब फ़कीर ने सबसे कहा कि अब आप सभी निश्चिन्त हो जाओ। जीत हमारी ही होगी। हार के बारे में भूल जाओ। क्योंकि सिक्का सीधा गिरा है और ईश्वर हमारे साथ है। फिर क्या था सभी ने मान लिया कि अब तो जीत पक्की है और युद्ध के लिए निकल पड़े और सभी को परास्त कर दिया। युद्ध जीत कर जब वे सभी लौट रहे थे तब वही मंदिर बीच में आया और सभी वहां रुक कर ईश्वर को धन्यवाद करने लगे कि आपकी कृपा से हम युद्ध जीत गए। तब फ़कीर बोला कि चलते – चलते जरा एक बार इस सिक्के को भी देख लो। फ़कीर ने सिक्का सबको दिखाया तब सबने देखा कि वह सिक्का तो दोनों तरफ से सीधा ही है। तब फ़कीर बोला कि तुम्हे सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी सोच ने जिताया है क्योंकि तुम जीत की आशा से भर गए थे। हार को भूल गए थे। तो अब आप सभी को समझ में आ गया होगा कि हम जैसा सोचेंगे वैसा हमारे साथ होने लगेगा। हमने जीत के बारे में सोचा तो हमे जीत हासिल हुई। इसीलिए कहा जाता है कि ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत’

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जीवन में सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम कितना सकारात्मक सोचते हैं। इसीलिए कभी हताश मत होइए, हमेशा सकारात्मक सोच रखिये जिससे आप सदा सफलता प्राप्त करेंगे। इसीलिए कहा जाता है – “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।”

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