साहित्य का अध्ययन क्यों? निबंध Essay on Why we need to study literature in Hindi

आईये जानते हैं आज भी साहित्य का अध्ययन (Sahitya ka Adhyayan Kyon) क्यों ज़रूरी है?Essay on Why we need to study literature in Hindi.

अन्धकार है वहां जहाँ साहित्य नहीं है।

मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।। – देवी प्रसाद ‘पूर्ण’

साहित्य का अध्ययन क्यों? निबंध Essay on Why we need to study literature in Hindi (Sahitya ka Adhyayan Kyon)

साहित्य ही समाज को सुदृढ़ बना सकता है। ऐसा कहा गया है कि साहित्य समाज का दर्पण है। साहित्य एक कला के रूप में माने जाने वाले लेखन को संदर्भित करता है। एक अर्थशाष्त्री आपको आंकड़े देगा कि हमारी अर्थव्यवस्था बिगड़ रही है या सुधर रही है।

लेकिन जो संवेदना जाग्रत करने का कार्य करता है वह साहित्य के जरिये ही होता है। प्राचीन और आधुनिक काल की कहानियों, महाकाव्यों, पवित्र ग्रंथों की जानकारी हम साहित्य के द्वारा ही जान पाते हैं और ऐतिहासिक बातों को जीवित रख पाते हैं।

साहित्य के जरिये हम अपनी कलाओं को लेखनी के माध्यम से उकेरते हैं। कुछ ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जो केवल कला के लिए जीते हैं व कला के लिए मरते हैं और अपने विचारों को साहित्य की कई शैलियों जैसे कविता, उपन्यास, कहानी, निबंध के रूप में सजीव कर जाते हैं।

हर क्षेत्र का अपना एक साहित्य हो सकता है। जैसे हिंदी साहित्य, संस्कृत साहित्य, तेलुगु साहित्य, अंग्रेजी साहित्य, अफ्रीकन साहित्य आदि। लगभग हर साहित्य अपने – अपने क्षेत्र की भावनाओं को अपनी रचनाओं के रूप में प्रस्तुत करता है जो सहित्य को बढ़ाने में मदद करता है।

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इस प्रकार साहित्य का अध्ययन जरुरी है। साहित्य के जरिये हम उस ज्ञान को समेट सकते हैं जो किताबों में बंद हो जाता है। उनका अध्ययन करके हम उसे पुनः पल्ल्वित कर सकते हैं।

डॉ. राजेश्वर गुरु ने साहित्य के बारे में कहा है-

“साहित्य, समाज –  विकास के उद्देश्य से जीवन की आलोचना करते हुए यथार्थ और आदर्श से समन्वित चित्रण द्वारा, धर्म और नीति के लक्ष्यों को भय या प्रलोभन और तर्क या उपदेश के बजाय, सौंदर्य प्रेम और मानसिक अवस्थाओं द्वारा व्यक्त करता है”

साहित्य जीवन की नींव है। यह हर तरह के क्षेत्र से जुड़े हुए ज्ञान को एक जगह पर शब्दों में समेट देता है और ये शब्द हमेशा – हमेशा के लिए साहित्य के रूप में जीवित रहते हैं। साहित्य लोगों को दूसरों के लेंस के माध्यम से देखने में सक्षम बनाता है, और कभी-कभी निर्जीव वस्तुओं को भी; इसलिए, यह दुनिया में एक दिखने वाला ग्लास बन जाता है, जैसा कि अन्य लोग इसे देखते हैं। यह एक यात्रा है जो पृष्ठों में अंकित है, और पाठक की कल्पना द्वारा संचालित है।

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साहित्य वही है जिसमें उच्च चिंतन हो, सौंदर्य का सार हो, स्वाधीनता का भाव हो, सृजन की आत्मा हो, जीवन की सच्चाई हो, हर एक क्षेत्र साहित्य के बिना अधूरा है। वह कोई भी घटना हो सकती है जो लेखनी के माध्यम से साहित्य की किसी न किसी शैली में समाहित है।

हमारे धर्मों, ऐतिहासिक कहानियों, तकनीकियों और विज्ञान सभी को साहित्य में संकलित करके जीवित रखा गया है। अर्थात हम इन साहित्य पर रिसर्च करें तो हमे हर तरह के क्षेत्रों का ज्ञान  हो सकता है।

साहित्य, दुनिया को नए सिरे से देखने की क्षमता के साथ, यह पाठक को अपने स्वयं के जीवन को प्रतिबिंबित करने के लिए प्रेरित करता है। साहित्य एक ऐसी सामग्री है जो पाठक के लिए भरोसेमंद है, उन्हें नैतिकता सिखाती है और उन्हें अच्छे निर्णय लेने का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

साहित्य न केवल जीवन के प्रति चिंतनशील सिद्ध होता है, बल्कि इसका उपयोग पाठक को अच्छे निर्णय का पालन करने और अभ्यास करने के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में सिद्ध होता है। वर्तमान समय में, साहित्य ने अनगिनत पुस्तकालयों और कई लोगों के मन में मानवता और उनके आसपास की दुनिया की समझ और जिज्ञासा के प्रवेश द्वार के रूप में विस्तार किया है।

साहित्य का बहुत महत्व है और समाज में इसका अध्ययन होना जरुरी है क्योंकि यह मानवीय रिश्तों को जोड़ने की क्षमता प्रदान करता है, और हमें बताता है कि क्या सही है और क्या गलत है। क्योंकि शब्द हमेशा जीवित रहते हैं या यह कह लीजिये कि साहित्य हमारे इतिहास का प्रतिबिंब है।

साहित्य हमेशा जिस युग में लिखा होता है उसी समय के वातावरण को चित्रित करता है। साहित्य के अध्ययन से हम उस युग की विशेषताओं के बारे में जान सकते हैं। जब हम साहित्य का अध्ययन करते हैं तो हम हर तरीके की शैली को समझ पाते हैं।

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हिंदी साहित्य में निराला जी, दिनकर जी, जयशंकर प्रसाद, मुंशी प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, संस्कृत साहित्य में कालिदास, भवभूति, बाणभट्ट, अंग्रेजी साहित्य में शेक्सपियर, विलियम वर्ड्सवर्थ, जॉन कीट्स आदि की कृतियों को पढ़कर उस युग के बारे में जान सकते हैं। किसी भी क्षेत्र का साहित्य उस समय की सभ्यता को दर्शाता है।

हम साहित्य के माध्यम से इसके उदय से लेकर अभी तक के समय में समाज में हुए बदलाव, साहित्कारों के विचार जान सकते हैं। महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ने भी कहा है कि “यदि हमें जीवित रहना है और सभ्यता की दौड़ में अन्य जातियों की बराबरी करना है तो हमें श्रमपूर्वक बड़े उत्साह से सत्साहित्य का उत्पादन और प्राचीन साहित्य की रक्षा करनी चाहिए।”

साहित्य, संस्कृति और विश्वास को फैलाता है, और साहित्य को प्रतिबिंबित करने और समुदायों को चित्रित करने के लिए आवश्यक घटक को दर्शाता है। साहित्य की भाषा समाज में जीने की संस्कृति की व्याख्या करने में मदद करती है। साहित्य एक व्यक्ति को समय से पहले कदम रखने और पृथ्वी पर जीवन के बारे में जानने की अनुमति देता है। साहित्य दुनिया को बेहतर ढंग से समझने की अनुमति देता है। साहित्य की महत्ता को बताते हुए कहा गया है कि  :-

साहित्य एक व्यक्ति को समय से पहले कदम रखने और पृथ्वी पर जीवन के बारे में जानने की अनुमति देता है। साहित्य दुनिया को बेहतर ढंग से समझने की अनुमति देता है। साहित्य की महत्ता को बताते हुए कहा गया है कि  :-

साहित्य संगीत कला विहीन: , साक्षात पशु पुच्छ विषाण विहीन: ||

तृणम न खाद्न्नपि जीवमान: , तद भाग देयम परम पशुनाम ||

इस श्लोक से अभिप्राय है – जो मनुष्य साहित्य, संगीत अथवा  कला से विहीन है , वो साक्षात बिना पूँछ और सींग वाले जानवर के समान है। इस तरह का जीव न तो घास खाता है पर अन्न खाकर जीवित रहता है।

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ऐसे मनुष्य को पशुओं की श्रेणी में रखना ही उचित होता है। अर्थात साहित्य का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है। जो हमे समय – समय पर विभिन्न तरह के ज्ञान से पोषित करता रहता है।

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