ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? इसके प्रकार, कैसे काम करता है? Operating system and its types in Hindi

आज इस लेख में हम आपको बताएँगे – ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? इसके प्रकार, कैसे काम करता है? Operating system and its types in Hindi (OS)

कंप्यूटर, लैपटॉप या किसी भी तरह का मोबाइल फोन दो तरह के पार्ट्स को मिलाकर चलाया जाता है। इसमें पहला पार्ट हार्डवेयर और दूसरा पार्ट सॉफ्टवेयर होता है। ये दोनों ही तरह के पार्ट कंप्यूटर के लिए उतने ही जरूरी होते हैं जितने कि इंसानी शरीर के लिए दिमाग और हृदय। 

हार्डवेयर का पार्ट हार्ड होता है और नज़र आता है, सॉफ्टवेयर वाला पार्ट नज़र नहीं आता या आसान भाषा में कहूँ तो हार्ड वेयर में ही समाहित रहता है। हालांकि ये दोनों पार्ट्स भी कई सारे टुकड़ों में बंटे होते हैं। इन्हीं टुकड़ों में से सॉफ्टवेयर का एक पार्ट होता है ऑपरेटिंग सिस्टम। यह कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर से जुड़ा होता है और उसी के लिए काम करता है।

आईये जानते हैं कि –

  1. ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? (What is operating system?)
  2. ऑपरेटिंग सिस्टम किस तरह से कार्य करता है? (How operating system works?)
  3. ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार क्या हैं? (Types of operating system)
  4. ऑपरेटिंग सिस्टम के फायदे क्या हैं? (Benefits of operating system)
  5. ऑपरेटिंग सिस्टम के नुकसान क्या हैं? (Disadvantages of operating system) 

Contents

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? What is operating system?

ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर वाले हिस्से का एक पार्ट होता है। आसान भाषा में यह कहा जा सकता है कि पूरा पूरा का सॉफ्टवेयर इसी सिस्टम पर बेस्ड होता है। ऑपरेटिंग सिस्टम की मौजूदगी सॉफ्टवेयर के लिए इतनी ज्यादा जरूरी होती है कि कई लोग ऑपरेटिंग सिस्टम को ही सॉफ्टवेयर समझते हैं। 

ऑपरेटिंग सिस्टम किस तरह से कार्य करता है? How operating system works?

कंप्यूटर लैपटॉप या मोबाइल फोन में हमारे द्वारा दी जाने वाली कोई भी कमांड सबसे पहले ऑपरेटिंग सिस्टम के पास पहुंचती है और फिर वह कंप्यूटर के हार्डवेयर को वह कार्य करने के लिए कमांड देता है। ऑपरेटिंग सिस्टम किस तरह कार्य करता है यह जानने के लिए एक कमांड को समझिए। 

  • मान लीजिए कि मुझे कोई पेज प्रिंट करना है।
  • मैं सबसे पहले अपने कीबोर्ड की मदद से कंप्यूटर में से एक फाइल को सेलेक्ट कर लूंगा, जिसे कि मुझे प्रिंट करना है।
  • उसके बाद यह कमांड ऑपरेटिंग सिस्टम तक पहुंचेंगी। 
  • ऑपरेटिंग सिस्टम इस कमांड को अप्रूव करेगा। 
  • अप्रूवल के बाद प्रिंटर के पास प्रिंट करने का ऑर्डर जाएगा और उसके बाद वह उस काग़ज को प्रिंट कर देगा। 
इसे भी पढ़ें -  मोबाइल फ़ोन पर निबंध Essay on Mobile Phone in Hindi

इस उदाहरण में यह समझा जा सकता है कि ऑपरेटिंग सिस्टम किस तरह कार्य करता है और ऑपरेटिंग सिस्टम का कंप्यूटर के लिए महत्व क्या है। 

ऑपरेटिंग सिस्टम की परिभाषा

“ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर वाले हिस्से का एक ऐसा टुकड़ा होता है जो कि सॉफ्टवेयर, और हार्डवेयर के मध्य संपर्क स्थापित करता है और उन्हे काम करने के लिए कमांड देता है” 

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार Types of operating system

ऑपरेटिंग सिस्टम को उनके कार्य करने की क्षमता और कमांड दे सकने की योग्यता के आधार पर कई भागों में बांटा गया है। ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार निम्नलिखित हैं :- 

  • बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Operating system) 
  • टाईम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (time Sharing operating system) 
  • डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम (Distributed Operating system) 
  • नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Network operating system) 
  • रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Real time operating system) 

1. बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Operating system)

इस तरह का ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर के सीपीयू से सीधा संपर्क नहीं करता, ऐसा करने के लिए उसके पास अलग अलग प्रकार के बैच होते हैं। जैसे यदि प्रिंटर से कार्य है तो प्रिंटर के लिए अलग बैच, स्कैनर से कार्य है तो स्कैनर के लिए अलग बैच। यह कार्य को टुकड़ों में बांट कर करता है, इन टुकड़ों को बैच कहा जा सकता है इसलिए इसका नाम बैच ऑपरेटिंग सिस्टम है। 

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम के फायदे (Advantage of batch operating system) 

  • बैच ऑपरेटिंग सिस्टम में किसी भी कार्य को पूरा होने में लगने वाला समय कुछ भी हो सकता है। 
  • कई सारे यूजर्स बैच सिस्टम को अपने हिसाब से चला सकते हैं। 
  • बैच सिस्टम समय के मामले में काफी ज़्यादा तेज़ है। 
  • बैच सिस्टम में बड़े कार्य को मैनेज करना काफी आसान है। 

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम के नुकसान (Disadvantage of batch operating system) 

  • बैच सिस्टम के साथ कार्य करने के लिए अत्यधिक कुशलता की आवश्यकता होती है। 
  • बैच सिस्टम को डीबग करना काफी ज़्यादा मुश्किल है। 
  • कई बार यह काफी ज़्यादा महँगा साबित होता है। 
  • बैच सिस्टम में कमांड लाइन से पूरी होती हैं यानी मल्टी टास्किंग का कोई विकल्प नहीं है। 

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम का उदाहरण :- पेयरोल सिस्टम, बैंक स्टेटमेंट. 

2. टाईम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (time Sharing operating system)

टाईम शेयरिंग सिस्टम एक प्रकार का मल्टी टास्क सिस्टम है। यह हर टास्क को मौका देता है कि वह खुद को जारी रखे। आसान भाषा में इसे मोबाइल फोन के उदाहरण से समझा जा सकता है। जैसे मोबाइल फोन में आप गाने चलाने से लेकर गेम खेलने तक सभी काम एक साथ कर सकते हैं। टाईम शेयरिंग सिस्टम इसी प्रकार कार्य करता है। जिस समय में कोई भी टास्क पूरा होता है उस समय को क्वांटम कहा जाता है। 

इसे भी पढ़ें -  व्हाट्सएप्प कंप्यूटर पर कैसे चलायें How to Use WhatsApp on PC Laptop Hindi?

टाईम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के फायदे (Benefits Of time Sharing operating system) 

  • हर टास्क को बराबर समय दिया जाता है। 
  • सॉफ्टवेयर के डुप्लिकेट होने के चांस लगभग खत्म हो जाते हैं।
  • सीपीयू का कार्य भार काफी ज़्यादा कम हो जाता है। 

टाईम शेयरिंग सिस्टम के नुकसान (Disadvantage of time Sharing operating system) 

  • इसमें रेलियब्लिटी की प्रॉब्लम हद से ज़्यादा होती है।
  • सिक्युरिटी का खास ख्याल रखना पड़ता है। डाटा लॉस और चोरी दोनों का खतरा बना रहता है। 
  • डाटा में कम्युनिकेशन की काफी प्रॉब्लम होती है। 

टाईम शेयरिंग सिस्टम के उदाहरण :- ्यूनिक्स, मल्टीक्स। 

3. डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम (Distributed Operating system)

इस तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम को आसान भाषा में रिमोट सिस्टम भी कहा जाता है। यह नेटवर्क जैसा ही कार्य करता है लेकिन यह तारों के माध्यम से कार्य करता है। इस तरह के सिस्टम में कई सारे कंप्यूटर एक साथ जुड़े होते हैं जो कि एक साथ कार्य करते हैं। इन सभी कंप्यूटर्स को एक साथ एक्सेस किया जा सकता है। 

डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम के फायदे (Advantages of Distributed operating system) 

  • जुड़े हुए किसी भी हिस्से के फेल होने के कारण अन्य किसी भी सिस्टम पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ये सभी सिस्टम इंडिपेंडेट हैं और केवल मुख्य सिस्टम से जुड़े हुए हैं। 
  • इन सिस्टम के बीच होने वाली इलेक्ट्रॉनिक मेल से डाटा एक्स्चेंज की स्पीड बढ़ जाती है। 
  • मुख्य सिस्टम पर बहुत ज़्यादा लोड नहीं होता। 
  • कार्य काफी तेज़ी से पूरा किया जा सकता है। 
  • नेटवर्क को असीमित सिस्टम से जोड़ा जा सकता है। 

डिस्ट्रीब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम के नुकसान (Disadvantage of Distributed Operating System) 

  • मुख्य नेटवर्क के फेल हो जाने के बाद यह कार्य करना बिल्कुल बंद कर देगा। 
  • इस सिस्टम का प्रयोग करने लायक कुशलता अब तक नहीं डेवलप की जा सकी है। 
  • इस तरह के सिस्टम काफी ज़्यादा महंगे होते हैं और इन्हे आसानी से उपयोग भी नहीं किया जा सकता है। 

डिस्ट्रीब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण :- लोकस।

4. नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Network operating system)

इस तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम डिस्ट्रीब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह ही लगभग कार्य करते हैं। लेकिन इनके बीच यह अंतर होता है कि वहां पर एक मुख्य सिस्टम होता था लेकिन यहां पर हर सिस्टम अपनी तरह से कार्य कर सकता है। ये सभी सिस्टम एक दूसरे से नेटवर्क के माध्यम से जुड़े रहते हैं और एक दूसरे के साथ प्रिंटर, स्कैनर जैसे डिवाइस भी शेयर करते हैं। 

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम के फायदे (Benifits Of network operating system) 

  • इस सिस्टम के सर्वर काफी ज़्यादा तेज़ी से कार्य करते हैं। 
  • इस तरह की प्रणाली में सुरक्षा बनी रहती है। 
  • कम हार्डवेयर डिवाइस होने के बावजूद बेःतरी ढंग से कार्य किया जा सकता है। 
  • एक रेंज तक बिना तारों के ही सर्वर से कार्य किया जा सकता है। 
इसे भी पढ़ें -  विश्व रेडियो दिवस पर निबंध Essay on World Radio Day in Hindi

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम के नुकसान (Disadvantage of network operating systems) 

  • इसके सर्वर काफी ज़्यादा महंगे होते हैं। 
  • यूजर को कई कार्यों के लिए अन्य सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता है। 
  • इनकी मेंटेनेंस में काफी रुपया खर्च होता है। 

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण :- माइक्रोसॉफ्ट विंडो सर्वर 2003, माइक्रोसॉफ्ट विंडो सर्वर 2008, यूनीक्स, लिनक्स, मैक, ओएस एक्स, नॉवल नेटवेयर बीएसडी। 

5. रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Real time operating system)

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम, एक तरह का तेज़ ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह किसी भी कार्य को प्रोसेस करने के लिए काफी कम वक़्त लेता है। रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम में टाईम इंटरवल को रिस्पॉन्स टाईम कहा जाता है। 

रियल टाइम सिस्टम का प्रयोग ऐसी जगहों पर किया जाता है जहां पर समय की बहुत ज्यादा किल्लत होती है। उदाहरण के तौर पर मिसाइल सिस्टम, एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और रोबॉट को देखा जा सकता है। 

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार (Types of Real time operating system) 

  1. हार्ड रियल टाइम सिस्टम :- इस तरह के सिस्टम का प्रयोग तब किया जाता है जब समय की किल्लत बहुत ज़्यादा होती है और कार्य को जल्दी से जल्दी पूरा करना होता है। 
  2. सॉफ्ट रियल टाइम सिस्टम :- इस तरह के सिस्टम का प्रयोग तब किया जाता है जब समय की किल्लत तो होती है लेकिन इतनी ज़्यादा नहीं। 

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के फायदे (Advantages of real time operating system) 

  • किसी भी डिवाइस का जितना चाहें उतना प्रयोग किया जा सकता है। 
  • इस तरह के सिस्टम में टास्क को शिफ्ट किए जाने में लगने वाला समय काफी ज़्यादा कम होता है। इसमें केवल 10 माइक्रो सेकंड लगते हैं। 
  • यह मौजूदा समय में चल रही एप्लिकेशन को बहुत ज़्यादा तवज्जो देता है। 
  • इस तरह के सिस्टम साइज़ में काफी कम होते हैं इसलिए इन्हे छोटे सर्वर पर भी यूज किया जा सकता है। 
  • इस तरह के सर्वर एरर फ्री होते हैं। 
  • इस तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम में मेमोरी एलोकेशन काफी जबर्दस्त होता है, यानी कि अन्य सिस्टम के मुकाबले मेमोरी ज़्यादा होती है। 

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के नुकसान (Disadvantage of real time operating system) 

  • एक समय पर काफी कम टास्क एक साथ कार्य करते हैं। 
  • इस तरह के सिस्टम काफी ज़्यादा महंगे होते हैं। 
  • इस तरह के सिस्टम की एल्गोरीथम काफी ज़्यादा मुश्किल होती है। इस तरह की एल्गोरीथम समझने के लिए काफी ज़्यादा कुशलता की आवश्यकता होती है। 
  • इसमें खास तरह के डिवाइस ड्राइवर की आवश्यकता होती है। 
  • इस तरह के सिस्टम में टास्क स्विच करना काफी ज़्यादा मुश्किल होता है। 

रियल टाइम शेयरिंग सिस्टम के उदाहरण :- साइंटिफिक एक्स्पेरिमेंट, मेडिकल इमैजिंग सिस्टम, इंडस्ट्रियल कंट्रोल सिस्टम, वेपन सिस्टम, रोबॉट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम। 

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.