पराक्रम दिवस पर निबंध Parakram Divas Essay in Hindi

इस लेख में हिन्दी में नेताजी जयंती या पराक्रम दिवस पर निबंध (Parakram Divas Essay in Hindi) को बेहतरीन ढंग से लिखा गया है। इस लेख में पराक्रम दिवस क्या है, पराक्रम दिवस कब है, क्यों मनाया जाता है, पराक्रम दिवस कैसे मनाया जाता है, महत्व तथा पराक्रम दिवस के लिए कुछ नारे को लिखा गया है।

पराक्रम दिवस पर निबंध Parakram Divas Essay in Hindi

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती को ही पराक्रम दिवस कहा जाता है। आईये जानते हैं इस दिन का नाम पराक्रम दिवस क्यों पड़ा?

पराक्रम दिवस क्या है? What is Parakram Divas in Hindi

हिंदुस्तान ने सदियों तक गुलामी का दौर देखा है। एक या दो बार नहीं बल्कि सैकड़ों बार आताताइयों ने हिंदुस्तान जैसे विशाल और समृद्ध देश को लूटा है। लेकिन इतने अत्याचारों के बाद भी वर्तमान समय में भारत विकास के एक नए पथ पर निरंतर आगे बढ़ता जा रहा है। 

दुनिया में शायद ही ऐसा कोई देश होगा जो बारंबार क्षति पहुंचने के पश्चात भी उठ खड़ा हुआ हो। भारतीय मिट्टी उन महापुरुषों के बलिदान और संघर्ष से रंगी हुई है, जिन्होंने अपने जीवन में कभी घुटने टेकना सीखा ही नहीं।

भारत माता के वीर सपूतों ने मिलकर हिंदुस्तान को आजादी दिलाई उनमें से एक थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिनके बलिदान और संघर्षों से पूरी दुनिया अवगत है। पराक्रम की प्रति मूर्ति तथा प्रेरणा सुभाष चंद्र बोस देश के युवाओं के लिए बेहद उच्च व्यक्तित्व के मार्गदर्शक, कूटनीतिज्ञ और प्रभावशाली वक्ता के रूप में जाने जाते हैं।

नेताजी का जन्म उड़ीसा के कटक शहर में 23 जनवरी 1897 को हुआ था। हर वर्ष पूरे भारत में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की याद में उनकी जयंती मनाई जाती है। 

केंद्र सरकार द्वारा नेताजी की के 125 वे वर्षगांठ पर उनकी जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का एलान किया गया। हर वर्ष यानी नेताजी की जयंती के दिन पराक्रम दिवस मनाया जाता है।

केंद्र में रही भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाए जाने की शुरुआत की गई। नेताजी की जयंती अथवा पराक्रम दिवस किस प्रकार मनाया जाना चाहिए।

इसके लिए भारतीय गृह मंत्री अमित शाह तथा संस्कृति मंत्रालय की देखरेख में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया। पराक्रम दिवस के दिन भारत माता के वीर सपूत नेताजी को सभी देशवासी मिलकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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नेताजी के बलिदानों को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह फैसला लेने में काफी समय लिया लेकिन एक कहावत है कि जब नींद खुले तभी सवेरा। वास्तव में आजाद भारत की नींव रखने की आशावादी विचारधारा सुभाष चंद्र बोस की देन है। 

इतिहास में भारत को सुभाष चंद्र बोस जैसे प्रभावकारी व्यक्तित्व के नेता नहीं मिले और ना ही कभी शायद भविष्य में उनकी बराबरी करने वाला कोई पैदा होगा। 

पराक्रम दिवस कब है? When is Parakram Divas in India?

प्रत्येक वर्ष 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती (Netaji Jayanti) के उपलक्ष में पराक्रम दिवस (Parakram Diwas) मनाया जाता है। पराक्रम दिवस को मनाए जाने की शुरुआत नेताजी के 125 जयंती से हुई थी। आने वाले नए वर्ष 2022 में नेताजी की 126 वी जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाएगी।

पराक्रम दिवस क्यों मनाया जाता है? Why is Parakram Divas celebrated in Hindi?

देश को अपने उन शूरवीरों के संघर्ष को कभी भी नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने अपने प्राणों की चिंता किए बिना अपने मातृभूमि की रक्षा की हो। सुभाष चंद्र बोस जिन्होंने भारत के आजाद सरकार की नींव रखी उनके सम्मान में उनकी जयंती को पराक्रम दिवस का नाम दिया गया। 

नेताजी के जीवन के सभी कार्य और लक्ष्य आज भी युवाओं के रगों में एक प्रेरणा बनकर दौड़ रहे हैं। फौलादी इरादों वाले ऐसे महान व्यक्तित्व के लिए कुछ भी असंभव नहीं।

जब भारत अंग्रेजों के जुल्म को सह रहा था, तब कई हिंदुस्तानी या तो अंग्रेजो के तलवे चाटते या फिर विदेशों में अपने परिवार के साथ शांति से रह रहे थे। एक ओर जहां हिंदुस्तान रक्तरंजित हो रहा था वही अपने देश और विदेशों में रह रहे कुछ भारतीय अपनी आंख मूंदे बैठे थे। 

सुभाष चंद्र बोस वे शख्सियत थे, जिन्होंने विदेशों में जाकर भारतीयों की चेतना को झकझोरा था। नेताजी ने भारतीयों को देश के लिए जीने का जज्बा सिखाया और देश के लिए मरने का मकसद दिया।

दुनिया में जब भारत को सपेरे और गरीबों का देश कहा जाता था और महिलाओं के सामान्य अधिकारों पर चर्चा किया जाता था, तब नेता जी ने रानी झांसी रेजीमेंट का गठन करके महिलाओं को अपने साथ संघर्ष में जोड़ा।

हर जाति, मजहब और क्षेत्र के लोगों को जगा कर अपने साथ शामिल किया और उसे आजाद हिंद फौज नाम दिया। जब तथाकथित अन्य नेताओं और अहिंसा वादीयो ने सुभाष चंद्र बोस जी जैसे शख्सियत की कदर नहीं की और उनके विचारों से सहमति नहीं जताई तो वे अकेले ही पथ पर चल दिए।

हर भारतीय के लिए यह गर्व की बात है कि उन्हें नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारी प्राप्त हुए हैं, जिन्होंने भारत को एक नई दिशा प्रदान की। लोग कहीं अपने सुख शांति में इतने न लिप्त हो जाए कि वे अपने देश के बारे में सोचना ही छोड़ दें इसलिए पराक्रम दिवस जैसे उत्सवों को मनाने की खास जरूरत है। 

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पराक्रम दिवस का महत्व Importance of Parakram Divas in Hindi

सन 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंडमान निकोबार के एक द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखा तथा देशवासियों को सुभाष चंद्र बोस के अतुलनीय संघर्ष को सदा के लिए याद दिलाने के लिए उनके कुछ गोपनिय फाइलों को सार्वजनिक कर दिया। देशवासियों के भावनाओं को समझते हुए भारतीय सरकार ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाए जाने का आह्वान किया। 

यदि गुलामी के अंधेरे कालखंड में मशाल दिखाकर देश को आजाद करवाने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस ना होते तो शायद हमें आजादी पाने में दशकों लग जाते। अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई में नेताजी कई बार जेल गए जहां उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी जाती थी। 

अगर नेता जी के व्यक्तिगत जीवन की ओर नजर डाला जाए तो उन्होंने अब के समय में इंडियन सिविल सर्विसेज की परीक्षा में अपना नाम दर्ज करा कर बहुत बड़ी उपलब्धि प्राप्त की थी। 

यदि वे चाहते तो अपना जीवन सुख सुविधाओं में बिताकर सुरक्षित रह सकते थे, लेकिन एक सच्चा देशभक्त अपने देश को विपत्ति में देखकर अपना स्वार्थ कभी नहीं सोचता। परिणाम स्वरूप उन्होंने अंग्रेजों की दी हुई उपलब्धियों को त्याग दिया और स्वतंत्रता की आग में कूद पड़े।

सुभाष चंद्र बोस, स्वामी विवेकानंद जी को अपना आध्यात्मिक तथा चितरंजन दास को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। अंग्रेजो के खिलाफ कई क्रांतिकारी आंदोलनों में नेताजी की अहम भूमिका रही है। 

गुजरात के हरीपुरा में सन 1938 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। हालांकि अन्य कांग्रेसी नेताओं तथा स्वयं गांधी जी से सुभाष चंद्र बोस के विचार मेल नहीं खाते थे।

वैचारिक मतभेद के कारण नेता जी को कांग्रेस का समर्थन नहीं प्राप्त हुआ और वे यह समझते थे, कि अंग्रेजो के खिलाफ अहिंसा को हथियार बना कर कभी भी आजादी नहीं प्राप्त की जा सकती। 

इसीलिए गरम दल का नेता होने के कारण वे खुद ही काबुल के रास्ते जर्मनी गए और दूसरे देशों का सहयोग प्राप्त करने के लिए संघर्ष किया।

जब कभी भी सुभाष चंद्र बोस का नाम आता है तब हमारे हृदय में देशभक्ति की लौ जल उठती है। देशवासियों खासकर युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित करने के लिए पराक्रम दिवस बहुत महत्वपूर्ण है। 

सुभाष चंद्र बोस जैसे कुटिल और प्रभावशाली व्यक्तित्व के जरिए सभी को एक अहम संदेश मिलता है। आज के समय में हम भारतवासी जिस खुली स्वतंत्र हवा में सांस ले रहे हैं, यह दिन किसी के पूरे जीवन काल के संघर्ष का परीणाम है।

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पराक्रम दिवस कैसे मनाया जाता है? How is Parakram Divas Celebrated in Hindi

पराक्रम दिवस हर भारतीय के लिए बेहद खास उत्सव होता है। पूरे देश में पराक्रम दिवस सीधे लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। 

पूरे हिंदुस्तान में इस दिन बड़े ही अनोखे ढंग से नेताजी की जयंती को मनाया जाता है। भारतीय प्रधानमंत्री स्वयं सुभाष चंद्र बोस के प्रतिमा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और समस्त देशवासियों को पराक्रम दिवस के अवसर पर एक संदेश देते हैं।

सभी सरकारी स्थलों पर नेताजी की प्रतिमा और पुष्प अर्पण करके उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। यदि स्कूल और कॉलेजों जैसे शैक्षणिक संस्थानों की बात की जाए तो वहां पराक्रम दिवस के अवसर पर विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें विद्यार्थी गण बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। संगीत, कविताएं, चित्रकला, भाषण इत्यादि पराक्रम दिवस के दिन आयोजित किए जाते हैं

इस दिन भारत के टीवी चैनलों पर नेताजी के संघर्षों और बलिदानों की चर्चा की जाती है और कई फिल्में भी दिखाई जाती हैं। हर जगह देश भक्ति का रंग दिखाई पड़ता है। 

पराक्रम दिवस केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मनाया जाता है। विदेशों में रहने वाले भारतीय इस दिन खुद को गौरविंत महसूस करते हैं और अपने नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित करके अपनी भावनाएं प्रकट करते हैं।

नेताजी सुभाष चंद्र की जयंती पर देश की सेनाएं शक्ति प्रदर्शन भी करती हैं। पराक्रम दिवस के दिन चारों ओर नेताजी सुभाष चंद्र के नाम के नारे लगाए जाते हैं। 

पराक्रम दिवस के लिए नारे Slogans for Parakram Divas in Hindi (Netaji Jayanti)

  • दाग गुलामी का धोया है जान लुटा कर,
    दीप जलाये है कितने दीप बुझा कर,
    मिली है जब ये आज़ादी तो फिर से इस आज़ादी को,
    रखना होगा हर दुश्मन से आज बचाकर।
  • हर कोई लिख नही पाता है पराक्रम की कहानी,
    वही लिखते है जो देश पर कुर्बान कर देअपनी जवानी।
  • आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे,
    शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे,
    बची हो जो एक बूंद भी लहू की,
    तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे।
  • आओ झुक कर सलाम करे उनको,
    जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है,
    खुशनसीब होता है वो खून,
    जो देश के काम आता है।
  • नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने त्याग दी,
    जीवन की हर अभिलाषा,
    अंतिम सांस तक देश की सेवा की,
    और पराक्रम की दी परिभाषा।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने पराक्रम दिवस पर निबंध (Parakram Divas Essay in Hindi) पढ़ा। आशा है यह लेख आपको पसंद आया होगा। अगर यह आपको अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरुर करें।

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