सामान्य प्रसव के उपाय Pregnancy Tips Normal Delivery in 9th Month Hindi
क्या आप सामान्य प्रसव के तरीके और सावधानियों के बारे में जानना चाहते हैं?
क्या आप नार्मल डिलीवरी के बारे में सोच कर चिंतित हैं?
अगर हाँ ! तो आपकी चिंता को दूर करने के लिए आज हमने इस पोस्ट में सामान्य प्रसव (Normal Delivery) के बारे में Tips दिए हैं। आशा करते हैं आपको यह टिप्स गर्भावस्था में नार्मल डिलीवरी के लिए बहुत मदद करेगा।
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सामान्य प्रसव के उपाय Pregnancy Tips Normal Delivery in 9th Month Hindi
सामान्य प्रसव क्या होता है? What Is A Normal Delivery?
माँ बनना एक बहुत ही ख़ुशी से भरा हुआ अनुभव होता है परन्तु गर्भावस्था के 9 महीनों के कष्ट को माँ ही जानती है। इतना अधिक कष्ट के बाद भी माँ अपने बच्चे की आस में ख़ुशी-ख़ुशी कष्ट को सह लेती है।
हर माँ यह चाहती है कि उसका होने वाला बच्चा सामान्य प्रसव से हो परन्तु हर किसी माँ का सामान्य प्रसव नहीं हो पाता है कुछ अन्य कारणों से जिसके कारण उन्हें C-Section के लिए जाना पड़ता है।
सामान्य प्रसव (नार्मल डिलीवरी) एक प्राकृतिक प्रक्रिया होता है जिसके माध्यम से हर एक गर्भवती महिला 9 महीने अपने बच्चे को गर्भाशय में रखने के बाद अपने आप जन्म देती हैं। लगभग 80-85% महिलाओं को सामान्य प्रसव की संभावना होती है।
जिस प्रसव में माँ या बच्चे को जान का खतरा होता है उसमें महिलाओं का c-section (cesarean) के माध्यम से प्रसव होता है। इसमें एक बड़ा surgery किया जाता है और गर्भाशय को काट कर शिशु को बाहर निकाला जाता है।
पुरे विश्व भर में अब c-section (cesarean) surgery बढ़ते चले जा रहा है ताकि माँ और बच्चा दोनों सुरक्षित रहें। WHO के अनुसार भारत में c-section सिजेरियन अब प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में 15-30% तक बढ़ चूका है।
वैसे तो सामान्य प्रसव के लिए कोई निर्धारित तरीका नहीं है परन्तु कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका ध्यान रखने से Normal delivery कि संभावना बहुत होती है ज्यादा होती है। चाहें वह महिला प्रथम बार माँ बन रही हो (First Time Mother) या दूसरी बार दोनों बार Normal Delivery की संभावना वैसी ही होती है। c-section सिजेरियन तभी किया जाता है जब कोई (obstetric emergency) प्रसूति आपातकाल हो।
प्राकृतिक और सामान्य प्रसव ही सही क्यों होता है? Why Natural And Normal Delivery is Good?
- सामान्य प्रसव में लम्बे समय तक दर्द नहीं होता है जबकि सिजेरियन में लगभग 6-7 महीने तक आराम करना पड़ता है।
- सामान्य प्रसव एक प्राकृतिक तरीका है जो भगवान ने हर महिला को पहले से भगवान् ने आशीर्वाद के रूप में दिया है।
- सामान्य प्रसव में एक महिला अपने गर्भावस्था को और भी करीब से के एहसास करते हैं।
- सामान्य प्रसव के बाद एक महीने में माँ स्वस्थ तरीके से घर का छोटा मोटा कार्य कर सकती है।
- सामान्य प्रसव में किसी भी प्रकार का सर्जरी नहीं होता है जबकि सिजेरियन में बहुत बड़ा सर्जरी लगता है।
प्राकृतिक और सामान्य प्रसव के लिए 8 बेहतरीन टिप्स Best 10 Tips for Natural & Normal Delivery in Hindi
अगर आप सामान्य प्रसव चाहते हैं तो नीचे दिए हुए टिप्स आपको बहुत मदद कर सकते हैं। इससे आपको अपने labor के समय दर्द कम होगा और सामान्य प्रसव आसानी से हो सकेगा –
1. एक चिकित्सक से परामर्श करें Consult a Physician
एक अच्छे Obstetrician / Gynecologist से संपर्क करें और बिच-बिच में check up करवाएं। ऐसे डॉक्टर से संपर्क करें जो normal delivery को ज्यादा प्राथमिकता देते हो ना की c-section सिजेरियन। अगर आपको लगता है की वह आपकी मदद सही तरीके से नहीं कर रहे हैं तो दूसरा कोई डॉक्टर चुनने के लिए देर ना करें। (source)
एक अच्छा डॉक्टर हमेशा आपकी हर बात को सुनता है, आपकी परेशानियों का हल निकालता है और साथ ही नियम अनुसार आपके सभी टेस्ट और रिपोर्ट्स को ध्यान से देखता है।
2. बच्चे के जन्म और प्रसव के विषय में पूरी जानकारी रखें Get Prenatal and Pre-Delivery information
गर्भावस्था के दौरान ज्यादा से ज्यादा प्रसव और शिशु के जन्म से जुडी जानकारियाँ प्राप्त करें। जानें प्रसव के दर्द और उससे सहने कि ताकत के बारे में। इससे आपको हिम्मत मिलेगी और ज्ञान भी।
यह सब जरूरी इसलिए है इसलिए इन्टरनेट पर रिसर्च करें, अच्छी किताबें पढ़ें, और गर्भावस्था के बारे में पूरी जानकारी रखें। इससे एक सुरक्षित और आसान प्रसव के लिए आपको मदद मिलेगी।
3. नियमित रूप से व्यायाम करें Do Regular Exercises
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गर्भावस्था के समय ज्यादातर महिलाएं आराम बहुत करती है। आराम करना बुरा तो नहीं है परन्तु ज्यादा आराम करना भी सही नहीं है। गर्भावस्था के दौरान छोटे मोटे व्यायाम करना और घर का छोटा मोटा काम करना शरीर के लिए लाभदायक होता है।
छोटे मोटे व्यायाम से पेट के नीचले हिस्से के मांशपेशियों को मजबूती मिलती है। साथ ही जांघ की मांसपेशियों को ताकत मिलता है जिससे प्रसव पीड़ा (labor pain) कम होता है।
आप चाहें तो कुछ Prenatal Exercises/Yoga भी कर सकते हैं। इससे मन को शांति और चिंता मुक्त होता है।
हमेशा याद रखें किसी भी प्रकार का व्यायाम करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें और सही प्रकार से करें।
4. तनाव से बचें Stay Away from Stress
तनाव और चिंता से पूरी तरीके से दूर रहें। शांति और सुविचारों से जुड़े रहें। जितना हो सके अच्छी किताबें पढ़ें और अच्छे माता-पिता बनने और बच्चे कि देखभाल से जुड़े टॉपिक्स को चुनें।
ऐसी जगह और बातों से दूर रहे जिनसे आपका चिंता या तनाव बढ़ता हो।
5. सही खाना खाएं Eat Proper Food
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अच्छा और सही भोजन करना बहुत आवश्यक है। अच्छा और पौष्टिक आहार मात्र आपके स्वास्थ्य के लिएनहीं बल्कि पेट में पल रहे बच्चे के सही विकास के लिए भी जरूरी है। पौष्टिक आहार से शरीर तंदरुस्त रहता है और प्रसव के समय और उसके बाद भी मदद करता है।
गर्भावस्था में शरीर को पानी की आवश्यकता बहुत होती है इसलिए जितना ज्यादा हो सके उतना पानी पियें और हरी सब्जियां खाएं। ज्यादा चर्बी युक्त भोजन खाने से मोटापा बढ़ सकता है जो सामान्य प्रसव में बाधा डाल सकता है।
6. सही श्वास तकनीक का अभ्यास करें Practice Proper Breathing Techniques
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गर्भावस्था में श्वास से जुड़े व्यायाम भी बहुत लाभदायक होता हैं।प्रसव के समय साँस कप समय-समय पर रोकना पड़ता है इसलिए यह व्यायाम करना बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। बच्चे को विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन कि आवश्यकता होती है।
इसलिए ध्यान (meditation) और सही श्वास तकनीक का अभ्यास और लम्बी साँस भरने के व्यायाम करना बहुत ही अच्छा होता है। यह व्यायाम सामान्य प्रसव के संभावना को और भी बढ़ा देते हैं।
7. अच्छी सकारात्मक विषय की किताबें पढ़ें Read Positive thoughts Books
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माना जाता है जन्म होने से पहले भी बच्चे को माँ से बहुत कुछ genetically मिलता है। अच्छी सकारात्मक विषयों से जुड़े किताबें और ज्ञानवर्धक कहानियाँ पढने से बच्चों के दिमाग का विकास भी अच्छे से होता है।
अच्छी कहानियाँ पढ़ें साथ ही बच्चे कि देखभाल से जुड़े किताबों को पढ़ें। उनसे आपके गर्भावस्था के समय और बाद में भी बहुत मदद मिलेगी और मन भी खुश रहेगा।
कभी भी डरावनी कहानियाँ, या नकारात्मक विचारों की किताबें बिलकुल ना पढ़ें इससे बच्चे के दिमाग को बुरा असर पड़ता है।
8. Sleep More अच्छी नींद सोयें
अच्छी नींद और आराम करने से बच्चे का विकास अच्छे से होता है। रात के समय ज्यादा देर तक टीवी ना देखें और समय पर सोयें। प्रेगनेंसी रात के समय 7-8 घंटा कम से कम सोना बहुत आवश्यक होता है।
चाय, कॉफ़ी और शराब का सेवन बिलकुल ना करें। जितना ज्यादा हो सके उबाला हुआ पानी पियें। जितना ज्यादा पानी पियेंगे उतना पैरों और हांथों का सुजन कम होगा।
आशा करते हैं आपको इन टिप्स से कुछ मदद मिलेगी। पर इनमें से कोई भी चीज को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करना ना भूलें।