लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका Role of the Opposition in Democracy Hindi

लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका Role of the Opposition in Democracy Hindi

हमारा देश पूरे विश्व में सबसे ज्यादा प्रतिष्ठित लोकतांत्रिक देश है। यह बात सर्व विदित है कि लोकतंत्र में विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस बात को समझने से पहले यह जानना जरुरी है कि लोकतंत्र क्या है।

लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका Role of the Opposition in Democracy Hindi

लोकतंत्र क्या है? What is Democracy?

पढ़ें: लोकतंत्र पर निबंध

लोकतंत्र से तात्पर्य –

लोकतंत्र सरकार की एक प्रणाली है जहाँ नागरिक मतदान करके शक्ति का प्रयोग करते हैं। प्रत्यक्ष लोकतंत्र में, नागरिक एक संपूर्ण निकाय के रूप में होता है और प्रत्येक मुद्दे पर सीधे मतदान करता है। लोकतंत्र में नागरिक आपस में प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

लोकतंत्र सरकार का एक रूप है जहां नागरिकों को उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से शासित किया जाता है। हम कह सकते हैं कि एक लोकतंत्र लोगों द्वारा परिभाषित एक सरकार है क्योंकि हमने उन्हें चुना है क्योंकि वे नागरिकों की जरूरतों का ख्याल रखते हैं या उनकी देखभाल करते हैं।

लोकतंत्र के प्रकार Types of Democracy

लोकतंत्र दो प्रकार का है –

1. प्रत्यक्ष- इसके तहत राज्य का मुखिया सीधे लोगों द्वारा चुना जाता है। इंग्लैंड की तरह।

2. अप्रत्यक्ष- भारत इस श्रेणी में आता है जहां हम प्रतिनिधि चुनते हैं जो संसद में निर्णय लेता है। जैसे प्रधानमन्त्री।

देश में लोकतंत्र की भूमिका Role of democracy in the country

देश में लोकतंत्र का होना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि –

  • यह नागरिकों के बीच समानता को बढ़ावा देता है।
  • यह व्यक्तियों की गरिमा को बढ़ाता है।
  • यह नागरिकों को किसी भी धर्म का पालन करने की अनुमति देता है जो उनके लिए सबसे अधिक सार्थक है।
  • इसमें नागरिकों को उनकी पसंद के प्रतिनिधि को वोट देने का अधिकार देता है।
  • यह बोलने की स्वतंत्रता की अनुमति देता है। यहाँ सभी को अपनी राय बताने और अपने विचारों को साझा करने का मौका मिलता है।
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इसलिए, लोकतंत्र नागरिकों को समृद्धि प्रदान करता है और राष्ट्र के विकास में योगदान करने के महान अवसर प्रदान करता है।

अब्राहम लिंकन ने भी लोकतंत्र के बारे अपने विचार प्रस्तुत किये हैं –

‘‘जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन ही लोकतन्त्र या प्रजातन्त्र है।”

अगर हमारा लोकतंत्र सशक्त होगा तो मजबूत विपक्ष के होने से देश भी मजबूत होगा है। अभी हाल ही के मई 2019 के लोकसभा के चुनाव के परिणाम से हम जान सकते हैं।

भारत में आजकल विपक्षी दल जो एकमात्र भूमिका निभा रहे हैं, वह है सत्ता में सरकार के हर एक कदम का विरोध करना। वे संसद के कार्य में अवरुद्ध करके खुद को स्मार्ट मानते हैं और फिर सरकार को उनकी विफलता के लिए दोषी मानते हैं। लेकिन आजकल भारत के विपक्षी दल राष्ट्र निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभा रहे हैं।

लोकतंत्र में विपक्ष के मुख्य कार्य और भूमिका

सारे कार्यों पर निगरानी रखना –

भारत के इस लोकतंत्र में जनता मालिक होती है जिसकी अहम भूमिका होती है। अपनी जरूरतों को पूरा करवाने के लिए जनता अपने प्रतिनिधियों को 5 साल के लिए चुनती है जो जन प्रतिनिधि कहलाते हैं। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को दो ग्रुपों में बांटा गया है –

1. सत्ताधारी समूह – एक बड़ा ग्रुप होता है जिनमें आधे से ज्यादा लोग फेवर में होते हैं; जिसे सत्ताधारी समूह या दल कहते हैं। ये समूह बहुमत में होने के कारण सरकार बनाता है। इसमें कभी – कभी अलग – अलग समूह के लोग मिलकर बहुमत का आंकड़ा पूरा करते हैं।

इस समूह का बनने वाला नेता केंद्र में प्रधानमंत्री और राज्य में मुख्यमंत्री होता है। इसके अलावा अन्य सरकारी विभागों को चलाने के लिए अलग – अलग मंत्री होते हैं। ये अपने विभाग के जवाबदेही होते हैं और निष्ठापूर्वक सञ्चालन करते हैं।

2. विरोधी समूह – बाकी बचे हुए लोग विरोधी दल में होते हैं। जिसे विरोधी दल कहते हैं। इसमें सारी पार्टियां विपक्षी दल की होती हैं। ये सरकार द्वारा किये गए सारे कार्यों पर निगरानी रखती हैं, आलोचना करती हैं व विरोध करती हैं।

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जनहित में सर्वोपरि –

कई बार सरकार ऐसा कार्य करती है जो जनता के हित के लिए नहीं होता है। ऐसे में विपक्ष चुप हो जाता है और यह सरकार का मौन समर्थन कहलाता है। ऐसी स्थिति में विपक्षी दल सरकार का विरोध करती है।

आम जनता की सारी सुख सुविधाओं तथा जरूरतों का ध्यान रखना तथा अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर देश की गरिमा को कायम रखना सरकार की जवाबदेही है। जबकि दूसरी तरफ विपक्ष का काम सरकार के कार्यों का विरोध करना है।

अगर सरकार लोगों के हित के अनुरूप कार्य न करे और उनके अनुरूप फैसला न ले तो विपक्षी को हक़ है कि वे सरकार से बात पर बहस करने की मांग कर सकते हैं। विपक्ष,  सरकार के विरुद्ध धरना देकर या प्रदर्शन करके आंदोलन कर सकती है। ऐसा करने पर सरकार को जनता के विरुद्ध लिए गए फैसले को वापस लेने में विवश होना पड़ सकता है।

इसके दूसरी तरफ सरकार को कभी – कभी मजबूरी में जनता के विरुद्ध निर्णय लेना पड़ता है। सरकार की कई मजबूरियां हो सकती हैं। लेकिन विपक्ष की कोई मजबूरी नहीं होती। क्योंकि इन्हे कोई अपनी सत्ता का हाथ से जाने का कोई डर नहीं रहता।

कभी – कभी सरकार भी स्वार्थवश कार्य करती है जिसका विरोध विपक्षी दल करता है। विपक्ष का कार्य हर समय विरोध करना ही नहीं है। जब सरकार जनता के हित के अनुरूप कार्य करती है तो विपक्ष को विरोध करने की बजाय सहायता करनी चाहिए। ऐसा करने से वह एक आदर्श विपक्ष बन सकता है।

विपक्ष क्या होता है ?

वैसे अपने देश की जनता अब काफी जागरूक हो चुकी है और वह सरकार और विपक्ष दोनों का मूल्यांकन अच्छे से कर सकती है। एक अच्छे विपक्ष की भूमिका यह होती है कि वह सकारात्मक तरीके से सरकार की आलोचना करे।

एक स्वस्थ विपक्ष को जनता के हित से जुड़े मुद्दों पर सरकार की आलोचना या बहस करनी चाहिए। इसके लिए विपक्ष की भाषा सभ्य, संसदीय होनी चाहिए और संसदीय कार्यों के बारे में पता होना चाहिए। विपक्ष को मर्यादा में रहना चाहिए और सदन की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।

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जनता को सबसे पहले डॉ राम मनोहर लोहिया जी ने ही बताया था। इस बात का प्रमाण हमें इस घटना से मिलता है – “1950 से लेकर 1964 तक संसद निश्चित तौर पर हमारे लोकतांत्रिक प्रणाली का सबसे जीवंत मंच था। चलो डॉ राममनोहर लोहिया और पं॰ जवाहर लाल नेहरू के बीच होने वाली एक संवाद को याद करते हैं।

1963 ई॰ में डॉ राममनोहर लोहिया ने संसद में एक पर्चा बांटा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बतौर प्रधानमंत्री पं॰ जवाहर लाल नेहरू पर प्रतिदिन 25 हजार रूपयों का खर्च आता है, जबकि देश की आम जनता को प्रतिदिन 3 आने की कमाई पर निर्वाह करना पड़ता है। डॉ राममनोहर लोहिया के इस आरोप पर जब पं॰ नेहरू ने स्पष्टीकरण दिया तो डॉ लोहिया ने उनके हर तर्क का पुरजोर खंडन किया।

पं॰ नेहरू का कहना था कि योजना आयोग की रिपोर्ट के अनुसार हिन्दुस्तान के प्रति नागरिक पर प्रतिदिन औसतन 15 आने खर्च होते हैं। पं॰ नेहरू को भी अंततः मानना पड़ा था कि आम आदमी के साथ अन्याय हो रहा है। अर्थात् एक व्यक्ति ने तत्कालीन सरकार का विरोध करके विपक्ष के मजबूत स्वरूप का चित्रण कर दिया।”

लोकतंत्र को अच्छा इसीलिए माना गया है क्योंकि इसमें सत्ता के अलावा विपक्ष भी होता है। जो सरकार द्वारा हो रही त्रुटियों को बताता है और आलोचना करता है। अंततः यह कहा जा सकता है कि विपक्ष की भूमिका लोकतंत्र में अगर सकारात्मक रूप से हो तो यह श्रेष्ठ है।

Help Source –

Google Books
Wikipedia

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